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09 Feb 2010
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दानिश की कुछ गज़लें

एकसफ़र को और कुछ दुश्वार करते,अभी मंजिल को तुम इन्कार करते.ये क्या कि उम्र भर चारागरी की,किसी को इश्क़ मे बीमार करते.तो एक दिन तुमसे खुशबू आने लगती,अगर फूलों का कारोबार करते.तमन्ना है ये दिल मे तेरी खातिर,किसी दिन हम भी दरया पार करते।तो फिर ऐसा हुआ कि रो
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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उर्दू अकादमी अवार्ड

 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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इस सदी का यह दौर

इस सदी का यह अजीब-सा दौर है दोस्तो कि सुबह-सुबह जब कोई चिड़िया भी गाती है तो पता नहीं क्यों लगता है जैसे किसी ने मेरे घर का कॉल बेल बजाया है... मुंह-अंधेरे बारिश की आवाज़ से चौंक जाता हूं कि फिर किसी ने बाथरूम का शावर खुला तो नहीं छोड़ दिया... बहुत नेह
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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आलोक श्रीवास्तव को दुष्यंत कुमार पुरस्कार

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी ने इस बार अपना प्रतिष्ठित 'दुष्यंत कुमार पुरस्कार' युवा ग़ज़लकार आलोक श्रीवास्तव को देने की घोषणा की है. आलोक को यह पुरस्कार उनके बहुचर्चित ग़ज़ल संग्रह 'आमीन' के लिए दिया जाएगा. साल 2007 में राजकमल प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाश
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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प्रेम का अनगढ़ शिल्प एवं अन्य कविताएं

यह मेरा सौभाग्य है कि मेरी कविता-पुस्तक बीत चुके शहर में पढ़ने के बाद कुँवर जी ने मुझे अपनी प्रतिक्रिया भेजी और संग्रह की कुछ कविताओं को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए मेरी रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया है। उनके शब्द मेरे लिए अत्यंत मूल्यवान हैं। कुँ
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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हाल-फिलहाल : 9

प्रभाकर श्रोत्रिय हाल-फिलहाल स्तंभ के अंतर्गत आप साहित्य की दुनिया में नये प्रकाशनों से रू-ब-रू हैं। हमारे इस स्तंभ में अबतक आप अशोक वाजपेयी, उदयप्रकाश, लीलाधर जगूड़ी, पुष्पिता, गीताश्री, कुंवर नारायण, कृष्ण बलदेव वैद एवं आलोक श्रीवास्तव की पुस्तकों प
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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हाल-फिलहाल : 8

आलोक श्रीवास्तव हाल -फिलहाल स्तंभ के अंतर्गत आप साहित्य की दुनिया में नये प्रकाशनों से रू-ब-रू हैं। हमारे इस स्तंभ में अबतक आप अशोक वाजपेयी, उदयप्रकाश, लीलाधर जगूड़ी, पुष्पिता , गीताश्री, कुंवर नारायण तथा कृष्ण बलदेव वैद की पुस्तकों पर ओम निश्चल की टि
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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निर्मल वर्मा को याद करते हुए

निर्मल स्मरण योगेंद्र कृष्णा तुम्हारे अंतस से नि:सृत तुम्हारी दुनिया लौट जाती है हर बार तुम्हारे ही भीतर हमें पता है तुमने ही नहीं तुम्हारे किरदारों ने भी तुम्हें रचा है और अपने किरदारों की ही दुनिया में अंतत: रचने-बसने के लिए चुन लिया तुमने किराए का
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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साहित्य अकादमी का अभूतपूर्व आयोजन

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मशतवार्षिकी के अवसर पर 1 अक्तूबर, 2008 को साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा पटना के तारामंडल सभागार में हिंदी काव्य-गोष्ठी आयोजित की गई। पूर्वाह्न 10 बजे से शाम 6 बजे तक कुल चार सत्रों में चली इस गोष्ठी में हिंदी के
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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एक अभिनेत्री के संस्मरण

एंटन चेखव द सी गल की प्रथम प्रस्तुति एम एम चिताउ अलेग्जैंन्ड्रिन्स्की थिएटर के रंगमंच पर चेखव के द सी गल की प्रस्तुति तक अनेक युवा नाटककार अंतत: नाटक में नए स्वर की आवश्यकता महसूस कर रहे थे, लेकिन इस आवश्यकता की सम्यक समझ थिएटर दर्शकों में अभी विकसित
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Dec 29 2009 11:47 AM
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लमही कथा सम्मान योजना

पढ़ने के लिए इमेज पर क्लिक करें ।
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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शोक-सभा

हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि रामकृष्ण पांडेय के असामयिक निधन पर आज पटना की प्रलेस इकाई ने केदार भवन स्थित अपने कर्यालय में एक शोक-सभा आयोजित की. पिछले सोमवार की रात दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था. वे करीब 61 साल के थे. रामकृष्‍ण पांडेय प
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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नई सदी में संस्कृति

कला पर नई दृष्टि की ज़रूरत शांता सरबजीत सिंह मैं अपनी बात कुछ प्रश्नों के साथ आरंभ करना चाहूंगी. क्या हमारे युवाओं को यह जानने की ज़रूरत है कि भरत नाट्यम क्या है? क्या ध्रुपद के उस्ताद फहीमुद्दीन डागर की कला की जानकारी या किशोरी अमोणकर की ग्वालियर शैली
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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साहित्य समाचार

कुंवर नारायण को ज्ञानपीठ पुरस्कार तीसरा सप्तक के यशस्वी कवि कुंवर नारायण को मंगलवार को भारतीय भाषाओं के साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए 41वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद भवन के बालयोगी सभागार में एक गर
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
Oct 14 2009 07:44 PM
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अपने कार्यालय के कमरे से…

मैं जिस संस्था में काम करता हूं वह बिहार विधानमंडल का उच्च सदन है : बिहार विधान परिषद। और इस संस्था के जिस कमरे में मैं बैठता हूं वह यहां का प्रकाशन विभाग है जहां से यहां के हिंदी प्रकाशनों से जुड़ी तकरीबन तमाम प्रक्रियाओं का निष्पादन होता है। यहां के
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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मुलाक़ात

मेरे जीने के लिए सौ की उमर छोटी है विष्णु प्रभाकर से हुई एक मुलाकात • ओम निश्चल‍ वह मई 2005 का कोई निपट दोपहरी वाला दिन था, जब मुझे वयोवृद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर जी से मिलने जाना था। साल के शुरू में सहारा समय ने उम्र को जीतते देश के ख्यातिप्राप्
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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इस्लाम का विष-वृक्ष

प्रेमचंद (प्रेमचंद ने कहानियों और उपन्यासों के अतिरिक्त अन्य विधाओं में भी भरपूर लेखन किया है। अपने दौर की साहित्यिक पत्रकारिता में उनकी भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं थी। प्रेमचंद ने अपने समय की कई चर्चित पत्र-पत्रिकाओं की चुनौतीपूर्ण कमान बतौर संपादक
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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कविता के मर जाने की ख़बर...

ऐ से विकट एवं अराजक समय में--जबकि जीवन के सारे आयाम, सारे अनुशासन और इसलिए साहित्य भी छद्म आकांक्षाओं, कृत्रिम सरोकारों, जटिलताओं एवं महत्त्वाकांक्षी दांव-पेंच से निरंतर आक्रांत हैं--हमें कुछ ऐसे ठोस और प्रभावी तिनकों की फिर भी जरूरत है जो हमें एक सह
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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प्रबंधन के दौर में साहित्य

निरंजन श्रोत्रिय यह प्रबन्धन का दौर है बन्धु! इक्कीसवीं सदी में उत्तर आधुनिकता की खाल ओढ़े, बाज़ार-संस्कृति की हवा में सांस लेता चकाचक `मेनेजमेंट इरा´! यहाँ मसलों को हल नहीं `मैनेज´ किया जाता है। जो जितना कुशल मैनेजर है वह इस `महान्´ युग में उतना ही स
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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श्मशान में मां

मित्रो, 30 मार्च को मेरी मां का निधन हो गया। दुःख इसलिए भी अधिक है कि मां बहुत लंबे समय तक हमारे साथ रहीं और कभी यह मह्सूस करने का शायद अवसर ही नहीं दिया कि वे हमें छोड़कर चली भी जायेंगी। जबकि वे हम पांच भाइयों, एक बहन और दर्जनों पोता-पोतियों, नाती-ना
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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समावर्तन के बारह अंक

एक ही वर्ष में एक अलग पहचान बनाई समावर्तन ने (देश भर के संस्कृतिकर्मियों एवं पाठकों ने दिया सहयोग) गुना, 21 मार्च : हिन्दी की साहित्यिक-सांस्कृतिक पत्रिकाओं की भीड़ में समावर्तन ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इस मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ हुए केवल ए
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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मुन्ना बैंड वाले उस्ताद

भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन 18, इंस्टीट्यूशनल एरिया लोदी रोड, नई दिल्ली ------------------------- लेखक ------------------------ उत्तर उपनिवेषवादी भारतीय जीवन की कहानियां विजेन्द्र नारायण सिंह उत्तर उपनिवेषवादी भारतीय जीवन के कथाकार हैं शिवदयाल। वह चाहे द
 
योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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अच्छे कवि पुनर्जन्म लेते रहते हैं

ओम निश्चल ( पिछले अंक से जारी .......) ------------------------ होने न होने से परे / अमित कल्ला भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन 18, इंस्टीट्यूशनल एरिया लोदी रोड, नई दिल्ली, मूल्य 120 रुपये ----------------------- चित्त और चैतन्य का रूपायन भौतिकतावादी समय की
 
योगेंद्र कृष्णा
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अच्छे कवि पुनर्जन्म लेते रहते हैं

युवा कविता के कुछ रूपाकार ओम निश्चल एक पक्षी है प्रतीक्षित जो गिरते हुए पत्तों को मन पर झेलते हुए आने वाले मौसम के बारे में पेड़ को बताए जिसकी आवाज सुनकर कोई नई कोंपल अचानक फूट आए वह आएगा अवश्य ऐसा विश्वास है दृढ़ कई बार देखा गया है अच्छे कवि पुनर्जन्म
 
योगेंद्र कृष्णा
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सक्षात्कार

कविता स्वभावत: एक स्वायत्त कला है वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण से अरुंधती सुब्रह्मणियम की बातचीत मूल अंग्रेजी से अनुवाद : योगेंद्र कृष्णा अ. सु. : आपके छ: कविता-संग्रहों के क्रम में आपकी कविता ने कौन-सी दिशाएं तय की हैं? क्या आप एक संग्रह से दूसरे संग्रह
 
योगेंद्र कृष्णा
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हाल-फिलहाल : 10

मंगलेश डबराल इस स्तंभ के अंतर्गत अभी तक आप अशोक वाजपेयी, उदय प्रकाश, लीलाधर जगूड़ी, पुष्पिता, आलोक श्रीवास्तव, कृष्ण बलदेव वैद, गीताश्री, कुँवर नारायण एवं प्रभाकर श्रोत्रिय की हाल में प्रकाशित पुस्तकों पर आलोचक-समीक्षक डॉ. ओम निश्चल की टिप्पणियाँ पढ़ च
 
योगेंद्र कृष्णा
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नया वर्ष

२००९ .............................. आतंक के साये में 2008 के हाशिए पर जगमगाती स्वप्निल इस रात को इस तरह रेस्तराओं क्लबों होटलों के नाम मत करो... इसे ऐसे भी विदा मत करो जैसे कभी यह समय तुम्हारा था ही नहीं... यह थोड़ा थोड़ा हमेशा से तुम्हारे हर समय में म
 
योगेंद्र कृष्णा