"पुरज़ोर"

http://purjor.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
21 Apr 2010
कुल प्रविष्टियां
30
पाठक भेजे
413
पसंद
10
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
13.77
पसंद करें
0
नापसंद करें

उनवान- सहाफ़ी से (शीर्षक- पत्रकार से)

देश कोई भी हो, लेकिन दुनिया भर में पत्रकारों के हालात कमोवेश एक ही हैं... टेलीविज़न के बड़े पत्रकार और मेरे बड़े भाई अख़लाक अहमद उस्मानी ने मेल पर पाकिस्तान के बड़े लेखक हबीब जालिब की सच बयान करती ये लाइनें लिख भेजी थीं... उनकी इजाज़त के बगैर ही आप सबके
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

"पुरज़ोर"

 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

रिश्ते...!

बेटे की सलामती के लिएहलषष्ठी का व्रत रखती है माँहर दिन कामयाबी के लिएदुआ करते हैं पितालंबी उम्र के लिएनिर्जला कर रही है पत्नीऔरभाईयों की नज़र में बाकी है इज़्जतसोचता हूँकितना ज़रूरी हैं रिश्तेअपनी अहमियत के लिएवरना तो चीजों की तरहइस्तेमाल होताआदमी.
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
3
नापसंद करें

महिला सशक्तिकरण से चीयर लीडर्स का क्या रिश्ता है शिवराज जी...?

क्रिकेट मैच के दौरान चौके-छक्कों की बरसात के बीच दर्शकों को लुभाने वाली चीयर लीडर्स को मध्यप्रदेश में इंट्री नहीं मिलेगी. पढ़कर चौकिये मत, ये किसी उत्साही संगठन की धमकी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान है. दुनिया के खेल
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

आधी आबादी से छल का सिलसिला क्या थमेगा...?

महिला दिवस पर दुनिया की आधी आबादी की बेहतरी के दावों की गूँज सुनाई देती रही, लेकिन जब भारत की संसद में महिला आरक्षण बिल पेश करने की बारी आई, तो दोनों ही सदनों में बिल के समर्थक और विरोधियों का कुछ और ही रंग देखने को मिला. आखिरकार पिछले एक दशक से भी
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्या यही है ज़िंदगी...?

एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर किसी ने कामकाजी लोगों के लिए... ज़िंदगी का फ़लसफा लिख भेजा था... पढ़कर लगा कि इसी राह में बढ़ चले हैं हम सब... शायद इसे पढ़कर याद आये... ज़िंदगी की भागमभाग में क्या कुछ छूट रहा है हमसे...शहर की इस दौड़ में दौड़ के
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
Feb 16 2010 10:49 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

सपना...

भीड़ सेबचने की चाहत लिएसपने में बस गई है अपनी अलग दुनियाहर रात उतरता है सपनाबिस्तर के सिराहनेऔरगुदगुदाता है सुबह तकसब कुछसुहाना होने के अहसास सेअगली सुबहफिर घुस आती है भीड़अपनी गति सेसब कुछ रौंदते हुएऔर नींद के साथटूट जाता हैमेरा सपना भी...!
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

अंधेरा

दिन भरईंट-गारे के बोझ तलेदबी चिंताएँअचानक मुखर हो उठती हैंअंधेरे में...अंधेरे में ही बचाती है माँअपने हिस्से की रोटीसुबह के नाश्ते के लिए...अंधेरी में ही माँगते हैं लाचार पितामाँ की चूड़ियाँबेटे की फीस के लिए...अंधेरे में हीदुआ माँगती है बहनभाई की नौकरी
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
1
नापसंद करें

प्रेम - 1

जब स्कूल में पढ़ता था, तो हर वक्त शरारत सवार रहती थी... लेकिन कभी-कभी गंभीर भी हो जाया करता था, उस दिन या कई दिनों तक कोई शरारत नहीं... दोस्त पूछा करते थे कि अचानक क्या हो गया... हालाँकि उस वक्त तो मैने किसी से कुछ नहीं कहा... लेकिन आज अचानक मन हुआ कि
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रेम - 2

अपने स्कूल के दिनों में कभी-कभी रूमानी हो जाता था... कई बार तो दोस्तों के किस्से भी काफी होते थे... उदास कर जाने के लिए... सालों पहले की रूमानियत बाँट रहा हूँ अब....तुम्हारे साथ बितायाहर लम्हाठहर जाता है मेरे पाससौगात की तरह...तन्हाई में घिर जाता हैमेरा
 
Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
पसंद करें
0
नापसंद करें

मीडिया और मंदी - 2

धराशायी होते सदियों पुराने औद्योगिक घराने... सिमटती नौकरियाँ... बढ़ती बेरोज़गारी.... और ऐसा ही बहुत कुछ अख़बार के पन्नों और टेलीविज़न की स्क्रीन से हर दिन झाँकता दिखाई देता है... हर दिन बाज़ार के आँकड़े ये दिखाने के लिए चले आते हैं... कि हमारी-आपकी म
 
नीरज
Dec 29 2009 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नदी

पुल से गुज़रते हुए अक्सर सोचता हूँ नदी के पास भी होती होंगी यादें अपनी यादों में सहेजती होगी हरे मैदानों का संग पनघट की अल्हड़ गाथाएँ कभी सुनाती होगी बैचेन किनारों को पत्थरों के शालिग्राम बनने की कथा जब कभी याद आते होंगे हमारे हाथों दिये ज़ख्म तो करा
 
नीरज
Dec 29 2009 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्या होगा धमाकों के बाद...?

मुंबई में आतंकी साजिश का शिकार हुए लोग तो चले गये... लेकिन उनके नाम पर अगले कुछ दिनों में बहुत कुछ देखने को मिलेगा... सड़क पर मार्च होगा, मोमबत्तियाँ जलाईं जायेंगी, कहीं सभा होगी, फिर एक दिन श्रद्धांजलि के नाम पर कोई म्यूज़िक या वीडियो लांच करने का ऐ
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

गुनहगार ये भी...!

एक बार फिर दहली मुंबई... इस बार दहशतगर्दों का निशाना बनी ताज की वो इमारत... जिसका सेहन एक सदी से भी ज्यादा वक्त से दुनिया के सैलानियों को लुभाता रहा... लेकिन इस बार मौत ने उनकी मेजबानी की... सैकड़ों ज़िंदगियाँ लाशों में बदलीं... और बाकी को बचाने में
 
नीरज
Dec 29 2009 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक दुआ अपने लिए !

ये कहानी है उस रास्ते पर चलने की... जो मंज़िल की तरफ जाने से पहले ही ख़त्म हो गया... इस रास्ते ने सिर्फ मंज़िल की राह ही ख़त्म नहीं की... बल्कि उम्मीदों का काफिला भी रोक दिया... सपनों को कच्ची नींद में तोड़ दिया... और रात के अंधेरे में उस वक्त भटकने
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

दहलीज़

दोपहर के दो से चार बजे के बीच घर की दहलीज पर बैठी हैं दो महिलाएं... थाली में पड़े चावल बीने जा रहे हैं और साथ चल रही हैं बातें सुख-दुःख की... रोज़ की सब्ज़ी से लेकर त्यौहार के व्यंजन तक और घर की बातों से लेकर मंदिर के प्रवचन तक सारे विषय उतर आते हैं
 
नीरज
Dec 29 2009 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

घर... !

खिड़की से सटे पलंग पर मुँह बनाये लेटा है भाई... परदे के पार चूल्हे से जूझ रही है बहन... घुटनों पर तेल मल रही है बीमार माँ... और माथे पर हाथ धरे गहरी सोच में डूबे हैं पिता... सबके पास अपनी परेशानियाँ हैं अपने दुःख हैं... और अपना दुःख सबसे बड़ा होने की
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

संवेदनाएँ... !

मृत देहों के चिथड़े बिलखते हुए नवजात और खून से सनकर पहचान खो चुकी लाशें यही सब दिखता है समाचार की सुर्खियों में मन करता है... चस्पा कर दूँ एक सूचना भी... कि यह सिर्फ विज्ञापन है प्रायोजित संवेदनाओं का...!
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

पहचान !

आज कविता नहीं कहानी सुनाता हूँ तुम्हें... ये कहानी है हम जैसे एक आदमी की जो ईसाई नहीं था क्योंकि तब इस देश में ये धर्म नहीं था वो सिख भी नहीं था क्योंकि तब ये धर्म जन्मा नहीं था और हिंदू या मुसलमान होना उसे पसंद नहीं था मज़हब के आइने से दुनिया देखने
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरा सपना !

भीड़ से बचने की चाहत लिये अपनी अलग दुनिया बस गई है सपने में... हर रात उतरता है सपना बिस्तर के सिराहने और सुबह तक गुदगुदाता है सब-कुछ सुहाना होने के अहसास से अगली सुबह फिर घुस आती है भीड़ अपनी गति से सब-कुछ रौंदते हुए और नींद के साथ टूट जाता है मेरा स
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

बोलो कबीर !

एक अरसे से नहीं सुनी आवाज़ तुम्हारी आख़िर चुप क्यों हो कबीर... मंदिर के घड़ियालों और मुल्ला की अज़ानों के बीच कहाँ खो गई है आवाज़ तुम्हारी चुप क्यों हो कबीर... एक-दूसरे से लड़ बैठे हैं राम और रहीम जख़्मों के बीच सुबक रहा है एकेश्वर चुप क्यों हो कबीर.
 
नीरज
Dec 29 2009 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हम तो हनुमान हैं......!

सतयुग में राम के हर काज को संवारने वाले हनुमान के बारे में तो सभी जानते हैं... लेकिन कलियुग में भी ऐसे कई लोग हैं... जो हनुमान बन जाते हैं... इन हनुमानों के गुण अपने राम के लिए समर्पण में छुपे हैं... फर्क बस इतना है कि त्रेता के हनुमान एक ही राम के ल
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

"पुरज़ोर"

बहुत मासूम होते हैं शब्द जब इन्हें लिखा जाता है ब्लैकबोर्ड पर नोटबुक तक आते-आते... इनके साथ ही उतर आता है शातिरपन अजीब बात है... जब शहर की दीवारों पर लिखे जाते हैं यही शब्द... तो कितने भयानक हो जाते हैं...... !
 
नीरज
Dec 29 2009 11:55 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जाने किसकी नज़्म है ये... पर बेहद ख़ूबसूरत है....

मुझको मेरे ही खेत में धरती उतार दे मैं धान बोऊँ और तू पानी उतार दे पानी बढ़ गया है छतें भी अब हैं ज़मीन छज्जे पर धूप की कोई कश्ती उतार दे तू अपने घर में बिखरी हुई खुशबुएँ पहन अब ये लिबास-ए-खानाबदोशी उतार दे खिड़की पर आऊँ तो भीतर भी आ सकूँ चिड़िया ये
 
नीरज
पसंद करें
0
नापसंद करें

भोजन से पहले मंत्र ज़रूरी....!

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मंत्र पढ़ने के बाद ही मिलेगा खाना... ऐसा इसलिये, क्योंकि राज्य सरकार ने प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में बँटने वाले मिड डे मील से पहले भोजन बच्चों से भोजन मंत्र का पाठ कराने के आदेश दिये हैं... सरकार का आदेश
 
नीरज
पसंद करें
3
नापसंद करें

मीडिया और मंदी...

दुनिया भर में छाई मंदी का असर हर तरह के कारोबार पर पड़ा, तो इसकी डरावनी तस्वीर दुनिया तक पहुँचाने वाला मीडिया भी मंदी की मार से बच नहीं पाया... लेकिन दूसरे धंधों के उलट मीडिया का कारोबार बंद नहीं हुआ... बल्कि बुद्धि चातुर्य का कौतुक दिखाकर लोगों को ब
 
नीरज
पसंद करें
4
नापसंद करें

"पुरज़ोर"

प्रचार की भूख ने प्यार के इज़हार को भी नहीं बख्शा... और भोपाल में कुछ लोगों ने मनवा दिया कुत्तों का वैलेंटाइन डे... गले में आई लव यू का बड़ा सा पोस्टर लटकाये कुत्ते भौंकते रहे... और इस तरह हुआ प्यार का इज़हार... कुत्तों को प्रेम का संदेश समझ में आया
 
नीरज कुमार