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***जुनून***
पा लूँ तुझे ये थी आरजूहर सिम्त में ढूँढा कियेरहे भटकते हम दर-बदरजलाए आँखों के दिए .....तेरी जुस्तजू से "जु" लिया,तेरे नूर से मुझे "नू" मिला .तू नहीं मिला है यही गिला,इस बात का ये मिला सिला--मेरी आँखों में कुछ नमी-सी है,उस नमी से "न" को चुरा लियाएक "जु नू
Jun 17 2010 05:55 PM


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