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युवा दखल

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14 Jun 2010
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आज के कवियों का लेखन निरुद्देश्य है- बोधिसत्व (अंतिम क़िस्त)

(पिछली क़िस्तों में बोधिसत्व ने हिन्दी कविता की परंपरा, उसके कुछ जातीय लक्षणों आदि पर विस्तार से बात की। इस अंतिम क़िस्त में वह इसी रोशनी में पिछले बीस साल की कविता को देखते हैं)(पाँच)तो आज के जो भी कवि लिख रहे हैं उनके लेखन का ऐसा कोई बड़ा उद्देश्य नहीं
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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हिन्दी साहित्य में जातियों का दबाव- बोधिसत्व के लेख की तीसरी क़िस्त

इस लेख की पिछली कड़ियों में बोधिसत्व ग़ुलामी के दौर के साहित्य की प्रवृतियों और उनके स्रोतों की तलाश की कोशिश की थी। इस कड़ी में वह जाति की भूमिका पर कुछ सवाल खड़े कर रहे हैं। भारतीय समाज में जाति एक महत्वपूर्ण सच्चाई रही है और इससे कोई इन्कार नहीं करता।
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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गुलाम भारत के साहित्य में अंग्रेज़ सरकार का विरोध नहीं दिखता- बोधिसत्व

बोधिसत्व - abodham@gmail.comबोधिसत्व के लंबे आलेख की पहली क़िस्त पर आयी टिप्पणियों में आमतौर पर अगली के इंतज़ार की बात थी। आज प्रस्तुत है उसकी दूसरी क़िस्त जो गुलाम भारत के मुख्यधारा के लेखन की प्रवृतियों की पड़ताल करती है। ख़ासतौर पर उसके सवर्ण
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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हिंदी लेखक सत्ता से समझौता करके चलने वाला एक सामाजिक है…

बोधिसत्व(अब प्रौढ़ हो रहे हिन्दी के युवा कवियों में बोधिसत्व अपने बेबाक रवैये और अध्ययनशीलता के लिये जाने जाते हैं। अभी परिकथा के युवा कविता अंक में उनका आलेख पढ़कर जब मैने उसे अपने ब्लाग के लिये मांगा तो उन्होंने बताया कि वह उनके एक लंबे आलेख का हिस्सा
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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जाति की जनगणना पर इत्ते पैसे क्यूं खर्च करना भाई!!

हर तरफ़ बहस चल रही है कि जाति की गणना जनगणना में शामिल होनी चाहिये कि नहीं…मेरी समझ में यह नहीं आता कि अगर होनी चाहिये तो इसमें सरकार को इतने पैसे ख़र्च करने की क्या ज़रूरत है? मेरे पास एक आसान फार्मूला है…पिछले चुनाव में जितने विधानसभा या लोकसभा के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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जाति की जनगणना पर इत्ते पैसे क्यूं खर्च करना भाई!!

हर तरफ़ बहस चल रही है कि जाति की गणना जनगणना में शामिल होनी चाहिये कि नहीं…मेरी समझ में यह नहीं आता कि अगर होनी चाहिये तो इसमें सरकार को इतने पैसे ख़र्च करने की क्या ज़रूरत है? मेरे पास एक आसान फार्मूला है…पिछले चुनाव में जितने विधानसभा या लोकसभा के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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मर्सियों के बीच एक छोटी सी टीप

(आज सुबह से जहां गया बंगाल के स्थानीय निकायों के चुनावों का तिया-पांचा हो रहा है। इनमें हुई वाममोर्चे की शिकस्त को यूं पेश किया जा रहा है जैसे कि बस्तील ढह गया।ठीक भी है…इतनी लंबी पारी के बाद पहली बार  इस क़दर बीट हुए हैं कि आऊट होने का ख़तरा साफ़
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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फैज़ अहमद फैज़ की एक नज़्म

जन्मशताब्दी है इस साल फैज़ कीहम देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगेवो दिन कि जिसका वादा हैजो लौह-ए-अजल में लिखा हैजब जुल्म ए सितम के कोह-ए-गरांरुई की तरह उड़ जाएँगेदम महकूमों के पाँव तलेजब धरती धड़ धड़ धड़केगीऔर अहल-ए-हिकम के सर ऊपरजब बिजली कड़ कड़
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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सवाल ज़मीन का

सोचो, करो कुछ भी..जमीन हमारी ही है!!अशोक मालवीयसरकार हो या पूंजीवादी ताकतें, इन्होंने कभी भी आदिवासियों को उनका हक नहीं देना चाह है? लेकिन जब जनाक्रोश एक सैलाब का रूप धारण कर लेता तो इसकी दहशत की वजह से इनके हक को दर्शाने वाले कानून तो बना दिये जाते है।
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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क्या बच्चे बड़ों के उपनिवेश हैं?

इनके भी हक़ूक हैं!बड़ों के उपनिवेश नहीं हैं बच्चे  चन्दन यादवकिसी एक देश पर दूसरे देश के प्रत्यक्ष राजनैतिक शासन को ‘उपनिवेश’ कहा जाता है, अगर  उपनिवेश शब्द को इंसानों के लिये उपयोग किया जा सके तो मैं कहूंगा कि बच्चे अभी तक बडों के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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इन निरुपमाओं का क्या दोष था?

यह हम सब की सहिष्णुता का इंतिहान है!(यह आलेख हमारी एक पाठक ने गोरखपुर से भेजा है। सैद्धांतिक बहसों में उलझे हम लोगों के बीच यह निजी अनुभव बहुत सारे नये आयाम खोलता है)नवजात कन्या वध तथा कन्या भ्रूण हत्याआज के युग में जहाँ भारतीय नारियाँ घर की चहरदिवारी
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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निरुपमा केस - एक प्रेमी की निगाह से

निरुपमा पर जब पिछली पोस्ट लिखी थी तब, ज़ाहिर तौर पर, बेहद व्यथित था…अब भी हूं…पिछली पोस्ट में एक पिता की तरह चीज़ों को देखने की कोशिश की थी…इस बार प्रेमी की तरह देखना चाहता हूं। मेरे एक दोस्त थे…गोरखपुर के…साथी कार्यकर्ता भी…उन्हें भी प्रेम था…लड़की के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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मैं और क्या करुं निरुपमा?

निरुपमा केवल उस लड़की का नाम नहीं रहा अब जो एक पत्रकार थी, जिसके लिये उसका परिवार बेहद प्रिय था, जो प्रेम करती थी…जिसे प्रेम करने की सज़ा मिली…अब यह नाम उन तमाम लड़कियों का है जो इस ग़लतफ़हमी का शिक़ार हो जाती हैं कि प्रेम दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत चीज़ है
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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एक पुराने दोस्त के जन्मदिन पर

(आज सुबह-सुबह आदतन अपने प्रिय ब्लाग कबाड़खाना पर अन्य ब्लागों की नयी पोस्टें देखने गया तो भाई रंगनाथ के ब्लाग पर मार्क्स खींच कर ले गये। आज उनका जन्मदिन है। रंगनाथ ने सुझाया था कि उन सबको जिनकी ज़िन्दगियों पर मार्क्स का असर है, अपने विचार और उन संबधों के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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पुस्तक लोकार्पण और परिचर्चा की रिपोर्ट

पुस्तक लोकार्पण का दृश्य समाजवाद मानव की मुक्ति का महाआख्यान है। पूंजीवाद की आलोचना का आधार सिर्फ़ उसकी आर्थिक प्रणाली नहीं बल्कि उसके सामाजिक-सांस्कृतिक आयाम भी हैं। इसने समाज को अमानवीय बना दिया है। औरतों, दलितों और ग़रीबों की ज़िन्दगी इस व्यवस्था
 
अशोक कुमार पाण्डेय
May 03 2010 06:12 PM
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मज़दूर यानि पुरुष मज़दूर?

( आज मई दिवस है यानि कि दुनिया भर के कामगारों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का दिन। लेकिन विमर्शों के उत्तर आधुनिक दौर में कुछ ऐसा प्रपंच रचा गया है कि लोगों की एक्सक्लूसिव पहचानों पर तो बहुत ज़ोर है पर सामूहिक पहचाने धुंधली हो गयी हैं। या तो आप दलित
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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आईये साथ चलें…

   मई दिवस पर                           युवा संवाद ,ग्वालियर              
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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हमारा समय और समाजवाद

दुनिया के मज़दूरों एक हो!युवा संवाद तथा स्त्री अधिकार संगठन  ने पिछले साल की ही तरह इस साल भी मई दिवस मनाने का निश्चय किया है। इस साल हमने  ' हमारे समय में समाजवाद' विषय पर एक परिचर्चा आयोजित करने का इरादा किया है जिसमें जाने माने
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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‘सारे हिन्दू धार्मिक ग्रंथों को तोप से उड़ाकर उनका पुर्नलेखन होना चाहिए।

(युवा दख़ल की यह सौवीं पोस्ट सामाजिक न्याय के प्रखर प्रवक्ता डा अम्बेडकर के विचारों पर केन्द्रित  करते हुए हमें अत्यंत संतोष का अनुभव हो रहा है। एक नौसिखुए की तरह शुरुआत करके हमारा संगठन और ब्लाग इस समयावधि में काफ़ी परिपक्व हुए हैं। इस अवसर पर हम
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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श्रद्धांजलि के स्वर में विलाप

कौन चाहता है इन चिरागों को बुझाना?  मुझे भी दुख है उन ग़रीब जवानों की असमय मृत्यु पर…  तब भी होता है जब कहीं दुबकी सी ख़बर  होती है कि आठ नक्सली मारे गये...  तब भी जब दंगे में मारे गयी लाशें अख़बारों में लहू बहाती
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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दुनिया को बचाना है तो इसे बदलना ज़रूरी है…

जिसे आज आमतौर पर भूमण्डलीकरण कहा जाता है वह दरअसल पूंजी का भूमण्डलीकरण है। श्रम आज भी जंज़ीरों में जकड़ा हुआ है। विकास के इस पूरे विमर्श से समानता का तत्व बाहर हो गया है। इसका सही विकल्प केवल बराबरी पर आधारित एक सामाजार्थिक-राजनैतिक व्यवस्था के ज़रिये
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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दुनिया रोज़ बदलती है!

;qok laokn] Xokfy;j;qok laokn dk jkT; lEesyu dy lsXokfy;j 18 ekpZAयुवा संवाद का तीसरा राज्य सम्मेलन 20 मार्च से आयोजित किया जाएगा। रेसकोर्स रोड पर स्थित सैनिक पेट्रोल पंप के निकट उत्तम वाटिका में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में युवा संवाद की विभिन्न
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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युवा संवाद का राज्य सम्मेलन

युवा संवाद का तीसरा राज्य स्तरीय शिविर आगामी २०-२१ मार्च को ग्वालियर में होगा।राज्य सम्मेलन की कार्यसूची 20/03/2010पहला सत्र (10 बजे से)यु्वा संवाद की विभिन्न इकाईयों की रिपोर्ट तथा अब तक के काम की समीक्षादूसरा सत्र ( साढ़े 12 बजे से)भविष्य की योजना और
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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भविष्यफल और वैज्ञानिकता

(युवा दख़ल पत्रिका पिछले दो सालों से ग्वालियर युवा संवाद द्वारा निकाली जा रही है। इस बार इसमें कुल पन्ने हैं १६ और मूल्य ५ रु… कवर पेज़ बनाया भाई रवि कुमार रावतभाटा ने। मंगाने के लिये मुझे मेल करें या फोन... यहाँ इसी अंक से विष्णु नागर जी का एक
 
अशोक कुमार पाण्डेय
Mar 05 2010 09:07 PM
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ब्लागजगत के बारे में कुछ निष्कर्ष

कोई दो साल हुए जब मरा पहला परिचय ब्लागजगत से हुआ था..मुझे यह एक नयी दुनिया लगी थी और बड़े उत्साह से कम्प्यूटर से पूरी तरह अनजान होने के बावज़ूद मैने इस जगत में प्रवेश किया था। ब्लाग बनाया, लिखा और टिप्पणियां भी ख़ूब कीं। सहमतियां बनीं, तमाम दोस्त बने और साथ
 
अशोक कुमार पाण्डेय
Mar 03 2010 07:51 PM
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आपका घर गच्ची वाला है

( देवास के हमारे साथी सौरभ का यह लेख युवा दख़ल के ताज़ा अंक में प्रकाशित है। होली की मस्तियों के बीच उम्मीद करता हूं आप इन्हें भी नहीं भुलेंगे!)पूरे के चावल दे दो देवास की एक बस्ती में करीब 34 लड़कियां हैं जो नियमित रूप से हमारे पास पढ़ने आती हैं। इन
 
अशोक कुमार पाण्डेय
Feb 27 2010 06:01 PM
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इस किताब को ज़रूर पढ़िए

मैने अंग्रेज़ी साहित्य बहुत कम पढ़ा है। गोरखपुर हो, नडियाड या फिर ग्वालियर- अव्वल तो उपलब्धता ही नहीं रही और दूसरे जब और जितना मौका मिला अर्थशास्त्र, इतिहास और दर्शन को पहली वरीयता मिली। शायद इतिहास में रुचि का ही परिणाम रहा कि जब हिलेरी मेण्टल की यह किताब
 
अशोक कुमार पाण्डेय
Feb 20 2010 06:08 PM
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एक पुरानी दोस्त को आखिरी सलाम!

अब कभी नही बैठेंगे हम ऐसे मेरे दोस्तआज आख़िरी सिगरेट एश ट्रे में डालकर बुझा चुका हूं… वादा किया था ख़ुद से कि उस दिन ही यह कविता पोस्ट करुंगा तो कर रहा हूं। कोई उपदेश नहीं। इसे छोड़ना मेरे लिये किसी ऐसे दोस्त को छोड़ना है जिससे कोई उम्मीद नहीं बची है पर
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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Feb 18 2010 09:49 PM
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क्या आपके पास नक्सलवादी साहित्य है?

कोई दो साल पहले महाराष्ट्र में कहीं एक पुस्तक मेले से एक महिला कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वह नक्सलवादी साहित्य बेच रही थीं। जिन किताबों के चलते उन पर यह आरोप लगाया गया था उनमें मार्क्स-एंगल्स-लेनिन की किताबों के साथ भगत सिंह के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
Feb 17 2010 10:01 AM
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यह अफ़वाह है, गलती है या साजिश

कल से अब तक एक ही एस एम् एस मेरे पास कई रास्तों से आया है। इसका अभिधार्थ यह है कि १९३१ में १४ फरवरी को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर चढ़ाया गया था और हम लोग उसे भूल के वेलेन्टाईन डे मना रहे हैं। सबसे पहले कल सुबह यह एस एम एस एक वरिष्ठ कवि
 
अशोक कुमार पाण्डेय
Feb 15 2010 05:42 PM
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सुभाष गाताडे का खुला पत्र विभूति नारायण राय के नाम

श्री विभूति नारायण राय, कुलपति महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के नाम एक पत्रादिल्ली 9 फरवरी २०१० प्रिय विभूतिजी अभिवादन ! उम्मीद है, स्वस्थ होंगे ।लम्बे समय से इस उधेड़बुन में था कि चन्द बातें आप तक किस तरह सम्प्रेषित करूं ? व्यक्तिगत मुलाकात
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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इतना कीचड़ मत उछालो अविनाश

अविनाश को मै नहीं जानता…मोहल्ला पर उनकी कारस्तानियों और एनानिमस नामों से आने वाली टीपों के चलते काफ़ी दिनों से वहां जाना छोड़ रखा था। पुस्तक मेले में संवाद के स्टाल पर अपने मित्र विश्वरंजन ( छत्तीसगढ़ वाले साहब नहीं) और मनोज के साथ गप्पें कर रहा था कि ये
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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किताबों के बीच से कौन कमबख्त आना चाहता था...

पंकज बिष्ट, महेश कटारे, शिल्पायन वाले ललित जी और अपन शिल्पायन के स्टाल पर चार दिन ऐसे बीते कि जैसे चार घण्टे रहे हों।चारों तरफ़ किताबें, किताबों के शौक़ीन, किताबों की ही बातें…प्रोफ़ेसर शमसुल इस्लाम, नीलिमा जी,सत्येन्द्र, शिल्पी, पवन मेराज, लाल बहादुर वर्मा
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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विश्विद्यालय यानि डिग्री डिस्ट्रिब्यूशन सेन्टर

( गोरखपुर विश्विद्यालय से जुड़ी मेरी स्मृतियां सिर्फ़ अर्थशास्त्र विभाग तक महदूद नहीं हैं। मुझे याद है कि कैसे इसके लेक्चर थियेटरों में अपने समय के बेहतरीन विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भाषण और उनसे बहस-मुबाहिसे ने मुझे देश-दुनिया को समझने का नया
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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हैप्पी बर्थडे टू मी!!

( वेरा के बनाये तमाम कम्प्यूटर चित्रों में से एक)आज पूरे पैंतीस साल हो गये!पापा बार-बार फोन हाथ में ले बधाई देने की हिम्मत जुटा रहे होंगे। मां ने शायद एकाध दिन पहले से ही पुराना एलबम निकाल लिया होगा…भाई लोग अपनी व्यस्तता के बीच शायद ही याद कर पायें और जब
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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अब हर कवि का बेटा अमिताभ बच्चन तो नहीं हो सकता?

कल बोधिसत्व भाई की अश्क जी के सन्दर्भ में लिखी पोस्ट पढ़ने के बाद मन बहुत देर तक अशांत रहा।क्या हम सचमुच अपने इतिहास, अपनी परंपरा और अपने पूर्वजों के प्रति कृतघ्ना की हद तक लापरवाह और भुलक्कड़ हैं? क्या हम बस आज में जीते हुए ज़माने की भेड़चाल में शामिल होना
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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सरकार के पास गरीबी हटाने के लिए पैसा नही है!

ग़रीब कौन है? सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक तो वह ग़रीब था जो कैसे भी ज़िन्दा रहने भर का राशन जुगाड़ लेता था। आलोचनायें हुईं तो फिर से विचार किया गया और अब तेंदुलकर समिति कहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों 444रुपये 68 पैसे और शहरी क्षेत्रों में 578 रुपये और ८०
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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पंकज बिष्ट का पत्र वागर्थ के सम्पादक के नाम

(यह शायद कुछ मित्रों को गढ़े मुर्दे उखाड़ना लगे लेकिन जब कोई भ्रष्ट वक़ील जबरन हत्या को आत्म्हत्या साबित करने पर लगा हो तो कोई और चारा भी तो नहीं होता!)अर्द्ध सत्यों की वाग्मिता (वागर्थ सितंबर, 09 का संपादकीय 66 लेखकों द्वारा जारी उस पत्र की भर्त्सना था
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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एक थीं सावित्री बाई फुले

साथियोंअन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के शताब्दी वर्ष एवं देश की प्रथम अध्यापिका सावित्री बाई फुले के जन्म दिवस पर युवा संवाद भोपाल एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन कर रहा है परिचर्चा के मुख्य विषयनारीवादी विचारधारा एवं राजनीतियौनिकता का अधिकार एवं महिला क़ानूनी
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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साहित्यकार की जगह सडक नहीं होती

पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार युवा संवाद की पहल पर रविवार को शहर के तमाम जनसंगठनों ने पुराने हाईकोर्ट से शहर के हृदयस्थल महाराज बाडे पर पोस्ट आफ़िस की सीढियों के सहारे बने स्थायी मंच से आमसभा का आयोजन किया। रैली में शामिल 75 लोगों की संख्या सभा में
 
अशोक कुमार पाण्डेय