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बबलू का बचपन

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31 Dec 2009
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मेरी प्यारी रजाई

मेरी रजाई गरम-गरम इसके अंदर सोते हम यह मुझसे भी भारी है लेकिन मुझको प्यारी है ठंडक से लड़ जाती है सर्दी से दूर भगाती है मुझको अपनी गोद में लेकर परी लोक तक जाती है जब गर्मी आ जाती है ये बक्से में छिप जाती है
Dec 29 2009 11:56 AM
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मंगल ब्रश क्यों नहीं करता-२

जारी--- तुम तो बिलकुल बुद्धू हो। मंगल ने बबलू को डांटा मम्मी आसमान में चली जाएगी तो फिर तुमहें प्यार कौन करेगा‍ । मेरी मममी तो मुझे खूब प्यार करती हैं बबलू ने कहा । बेचारे मंगल की मम्मी नहीं है तो उसे कौन प्यार करता होगा । बबलू ने मन में सोचा । उसे म
Dec 29 2009 11:56 AM
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मंगल ब्रश क्यों नहीं करता

बबलू का एक दोस्त था जिसका नाम था मंगल । वह बबलू से दो साल बड़ा था । मंगल अपनी नानी के यहां रहा करता था‌ । एक दिन उसने बबलू और उसके दोस्तो को कुछ पत्तियां दिखाते हुए कहा तुम लोग जानते हो ये किस पौधे की पत्तियां हैं । सबने पत्तियों को ध्यान से देखा लेक
Dec 29 2009 11:56 AM
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बंदर रोए हूऽऽऽ हूऽऽ हूऽ

एक बंदरिया बैठी थी कंप्यूटर के सामने काम थे उसके बहुत पड़े लगी थी वो दिल थामने सामने की डाल पर बैठे थे बंदर दो बंदरिया को देखकर हंसते थे वे हो हो कर बंदरिया को गुस्सा आया जाकर थप्पड़ उन्हें लगाया बंदरों के बन गए मुंह बंदर रोए हूऽऽऽ हूऽऽ हूऽ
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मम्मी ने दिया बबलू को धोखा

बबलू स्कूल तो जाते नहीं था इसलिए दिनभर घर में शरारतें करता । वह कभी गुस्सा हो कर मारपीट पर उतर आता तो कभी बिना बात के ही रो-रोकर आसमान सिर पर उठा लेता। दूध पीना बबलू को एक दम अच्छा नहीं लगता था पर सबसे बुरा लगता था नहाना । पर क्या करें मम्मी कभी मानत
Dec 29 2009 11:56 AM
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बबलू की कहानी

टौंस नदी के बांध के पास बसा है यह छोटा सा मुहल्ला‍ इस मुहल्ले का कोई भी नाम हो सकता है‌ चलिए हम इसे राहुल नगर नाम दे देते हैं‌ कभी यहां अंगरेजों की छोटी सी बस्ती थी‌ यहां आज भी कुछ ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं‌ ईसाइयों के मुहल्ले से थोडा हटकर एक पुरान
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चांद और बिल्लू

चांद उतर आया धरती पर लगा पूछने बिल्लू से छत के कोने में बैठे हो क्यों चुपचाप निठल्लू से बिल्लू बोला चींचीं चिड़िया आती नहीं क्यों मेरे घर मंडराती क्यों नहीं है तितली कागज के फूलों पर अमरुदों के बाग कहां हैं मुझको दिखते नहीं हैं क्यूं कोई मुझको नहीं ब
Dec 29 2009 11:56 AM
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लिली तो है शैतान की दादी

लिली-मिली हैं जुड़वा बहनें इनकी जोड़ी के क्या कहने मिली बहुत है सीधी-सादी लिली तो है शैतान की दादी लिली खूब शरारत करती होमवर्क से भागी-फिरती टिफिन खोलकर क्लास में खाती छिपकर सबके चित्र बनाती जब टीचर गुस्से में आती लिली बातें खूब बनाती लिली नहीं मैं म
Dec 29 2009 11:56 AM
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चंपक वन में टैलेंट हंट

चंपक वन के हर घर में एक चर्चा थी जोरों पर जंगल में आने वाला है बालीवुड का एक डाइरेक्टर हम-सब की किस्मत का ताला जल्दी ही खुलने वाला है अपुन भी बन सकते हैं हीरो टैलेंट हंट होने वाला है बंदर उबटन लगा रहा था भालू ने थ्रेडिंग करवाई गधे ने अपने सुर को साधा
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हाथी दादा

हाथी दादा बहुत बड़े गन्ना खाते खड़े-खड़े कुछ तो तुम भी काम करो जग में रह कर नाम करो मम्मी-पापा आफ़िस जाते मैं भी जाती हूं स्कूल पढ़ना-लिखना तुम्हें न आया कर दी तुमने कितनी भूल सोच रही क्या जुगत लगाऊं कैसे तुमको जाॅब दिलाऊं
Dec 29 2009 11:56 AM
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चोरी-चोरी गुझिया खाई नैना जी की हुई पिटाई

नैना को है भोजन प्यारा गुझिया से महके घर सारा नैना का मन हुआ बेचैन गुझिया खाकर मिलेगा चैन नैना का जी ललचाए खोजा बहुत थाल ना पाए मम्मी जी ने थाल छिपाया नैना को भी गुस्सा आया अब तो गुझिया खानी है कोई जुगत लगानी है मम्मी थी कमरे में सोई नहीं दिखा किचन म
Dec 29 2009 11:56 AM
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तितली रानी

तितली रानी तितली रानी पंख तुम्हारे प्यारे-प्यारे टैटू तुमने बनवाए या बच्चों ने मारे गुब्बारे या फूलों का रंग चुराकर तुमने खुद को रंग डाला है मैं तुमसे कट्टी कर लूंगी वर्ना सच्ची बात बता दो मम्मी-पापा से कह कर मुझको ऐसे पंख दिला दो संग तुम्हारे मंडराऊ
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थैंक्यू मम्मी

रंग-बिरंगे ऊन के गोले मम्मी लाई भर के झोले रात-रातभर जाग-जाग कर बुन डाला एक सुंदर स्वेटर स्वेटर पर दो फूल बने हैं फूलों पर मंडराती तितली जब मैं इसको पहन निकलती ठंडक को भी लगती गर्मी थैंक्यू मम्मी थैंक्यू मम्मी
Dec 29 2009 11:56 AM
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खुला आसमान चाहिए

मुझको टीवी नहीं देखनाकंपयूटर से नहीं खेलनाबर्गर पिज्जा आइसक्रीमनहीं चाहिए चाऊमीनलूडो कैरम अगड़म-बगड़ममुझको कुछ भी नहीं चाहिएतितली के संग मुझे खेलनाबादल से बातें करनी हैतारों को है गिनना मुझकोइंद्रधनुष के रंग चाहिएजंगल-झाड़ी नदी पहाड़सागर रेगिस्तान
Sep 27 2009 11:29 AM
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चंदा मामा

चंदा मामा क्यों बैठे होबादल के पीछे आंखे मीचेतारों से तुमने कर ली क्या कटटीदूर खडे़ हो गुमसुम अकेलेआंखे बंदकर दस तक गिनूंगाआ जाना तुम छत पर मेरेपापा से कहकर दिलवा दूंगाढेर सारे तुमको खिलौनेमम्मी बना देगी हलवा पूड़ीखा लेंगे हम थोड़ी थोड़ीनींद लगेगी तो सो
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होरिल के लिए लोरी

पलकों की सांकलखटका रही हैनिंदिया रानी आ रही हैनिंदिया के रथ मेंचंदा का घोड़ापूरब से निकलापशिचम को दौड़ातारों की चुनरीलहरा रही हैनिंदिया रानी आ रही हैनिंदिया ने खोलीसपनों की झोलीकितने खिलौनेकितनी ठिठोलीसपनों में परियांमुसका रही हैंनिंदिया रानी आ रही हैशोर
Aug 23 2009 01:58 PM
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हाथी दादा सेहत का राज तो बताओ

हाथी दादा हा्थी दादा कौन सा खाना खाते हो इतनी अच्छी सेहत कैसे चाट-पकौड़ी खाते हो नहीं चूहे बेटे मैंने हरी पत्तियां खाईं पीता हूं गन्ने का रस इसलिए हरदम रहता मस्त हम दोनों है शाकाहारी पर मैं पतला तुम हो भारी क्या है मुझे कोई बीमारी मुझको डाॅक्टर को दि
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मैं भी हीरो बन सकता हूं

बिल्लू बंदर फैशन का मारा सारा जंगल उससे हारा पढ़ना लिखना उसे न भाता सूट पहनकर डिस्को जाता अपनी सूरत देख-देखकर मन ही मन में खूब इतराता मैं भी हीरो बन सकता हूं शाहरुख से मिलता-जुलता हूं कर दूंगा मैं सबकी छुट्टी बस एक चांस दिला दे कोई बिल्लू की मम्मी पर
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जाओ जाओ सर्दी

जाओ जाओ सर्दी जी गर्मी जी को आने दो स्वेटर और रजाई को बक्से में पहुंचाने दो कोहरे की चादर को ओढे ऊंघते रहते सूरज दादा सर्दी हवा लगती है जैसे टीचर ने मारा हो तमाचा झपकी जैसे छोटे दिन हैं रातें कोई लंबी सडक जान पे मेरी बन आई है पर क्या है तुमहें कोई फर