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ज्योतिष की सार्थकता

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14 Jun 2010
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विवाह पूर्व जन्मकुंडली मिलान...(चन्द आवश्यक बातें)

भावी दम्पति का वैवाहिक जीवन वैचारेक्य, सुख समृ्द्धि एवं वंशवृ्द्धि से परिपूर्ण हो. इसके लिए हिन्दु वैवाहिक परम्परा एवं मान्यता के अनुसार वर-कन्या की जन्मकुंडली का सम्यक मिलान किया जाता है. जिसके आधार पर यह निर्धारित तथा सुनिश्चित किया जाता है कि
 
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मिथकों के अभ्यंतर में छिपा सत्य-- "सोम"---(2)

वैदिक वांड्मय की ये एक सबसे बडी विशेषता रही है कि यहाँ सत्य को बहुधा संकेतों के माध्यम से प्रकट किया गया है.यहाँ मिथक कथाओं को आधार बनाकर सत्य को व्यक्त करने की एक विस्तृ्त तथा अविच्छिन परम्परा रही है.इन मिथकों के अभ्यन्तर में भारतीय ज्ञान विज्ञान के
 
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कहाँ है वो वैदिक ग्रन्थों में वर्णित "सोम" ???

वैज्ञानिक निरन्तर इस खोज में रहे हैं कि वो सोमरस की जडी बूटी कहाँ मिले, जिसकी वेदों नें बडी भारी प्रशंसा की है.वेद तो उसकी स्तुति से भरे पडे हैं.उसको देवता तक कहा गया है---सोम देवता.वहीं दूसरी ओर इसे कामवर्षक, रोगहर्ता, आनन्द प्रदायक एक मादक पेय भी बताया
 
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ग्रह किसी घटना के कारण नहीं अपितु किए गए कर्मों के सूचक मात्र हैं.......

ज्योतिष का नाम आते ही प्राणी का मन अपने भविष्य के रहस्यों की जानकारी प्राप्त कर लेने को आतुर हो उठता है, वह ज्योतिषी के पास यह आशा लेकर जाता है कि उसे वह जो कुछ भी बतलाएगा वह अक्षरश: उसी रूप में घटित होगा. लेकिन यह सब कुछ उस ज्योतिषी पर निर्भर करता है,
 
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मीनस्थ बृ्हस्पति(गुरू) का आपकी राशि पर पडने वाला शुभाशुभ प्रभाव

पूर्व आलेख में आपने वैदिक ज्योतिष और बृ्हस्पति ग्रह के विषय में पढा और जाना कि दिनाँक 2 मई को गुरू यानि बृ्हस्पति ग्रह का मीन राशि में आगमन हो चुका है. नवम्बर 2010 तक इनका इस राशि में ही संचार रहेगा किन्तु 23 जुलाई 2010 से गति परिवर्तन अर्थात मार्गी
 
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वैदिक ज्योतिष और बृ्हस्पति ग्रह

गुरू यानि बृ्हस्पति ग्रह जो कि हमारे इस सौरमंडल के सभी ग्रहों में सबसे बडा ग्रह है। यही कारण है कि श्रेष्ठ व विद्वान इस अर्थ में हमेशा "गुरू" शब्द का प्रयोग किया जाता है। "गुरू" जो कि दो शब्दों के मेल से बना है----"गु" और "रू"। "गु" का अर्थ है अंधेरा या
 
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भावना---जिस के बल पर इन्सान अनन्त ज्ञान और अतुल शक्ति से टक्कर ले रहा है!!!!!

भावना क्या है ? इस प्रश्न का उत्तर भला कौन दे सकता है? भावना सब कुछ है और शायद कुछ भी नहीं। यह समस्त ब्राहमंड अपने असंख्य सूर्यों, चन्द्रमांओं और पृ्थ्वियों सहित किसी रचनाकार की भावना ही तो है, जो मूर्तरूप हो गई है। इन्सान की भावना भी उस रचनाकार की भावना
 
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मासिक राशिफल----मई 2010

मेष राशि:- आपके लिए माह का प्रारम्भ सभी दृ्ष्टियों से शुभ रहेगा। कोई नई योजना सफलीभूत हो सकती है,आपके द्वारा निर्णय लेने में की गई जरा सी भी देरी आपको बाद में हाथ मलने पर विवश कर सकती है। पारिवारिक जीवन अत्यंत सुख एवं शान्तीपूर्वक व्यतीत होगा। किसी
 
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पृ्थ्वी लोक पर साठ हजार वर्ष का जीवन ?

केवल पदार्थ ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण संसार के प्रति हमारी मान्यताएं सापेक्षता के सिद्धान्त पर अवलम्बित हैं। दिशा का नाम लेते ही झट से पूर्व,पश्चिम,उतर,दक्षिण दिशाओं का बोध होने लगता है। धरातल को आधार मानकर ही दिशा की कल्पना की जाती है और धरातल की कल्पना भी
 
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क्या वैचारिक शुद्धता का हमारी विद्या, आयु,,यश एवं बल वृ्द्धि से कुछ सम्बंध है ?

नीतिशास्त्र कहता है कि "माता-पिता,वृ्द्ध एवं गुरूजनों की सेवा से विद्या,आयु,यश एवं बल की वृ्द्धि होती है"। अपने बालपन की उम्र में हमने जब भी इस वाक्य को कहीं पढा या सुना तो हमेशा ही मन में यह शंका हुई कि भला वृ्द्धजनों की सेवा करने से आयु,बल इत्यादि कैसे
 
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आप स्वयं जान सकते हैं कि आपका आज का दिन कैसा व्यतीत होगा...........

अक्सर जीवन में कुछ चीजें ऎसी देखने को मिल ही जाती हैं जो कि प्रथम दृ्ष्टया तो कुछ तर्कसंगत प्रतीत नहीं होती लेकिन यदि उन्हे प्रायोगिक तौर पर परखने का अवसर मिले तो उनमें कहीं न कहीं कुछ ऎसी सच्चाई, कुछ ऎसी सुसंगति दिखाई पड जाती है कि इन्सान स्वयं को
 
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ज्योतिष इन्सान को परिस्थितिजन्य विवशताओं से मुक्त होने का मार्ग सुझाता है!!!!!!

प्रकृ्ति यानि--संतुलन। यह वस्तुत: वह अवस्था है जहाँ व्यवस्था अपने शुद्ध रूप में रहती है। असंतुलन, अव्यवस्था जैसी व्यवस्थायें विकृ्तियाँ मानी जाती हैं। हमारे जीवन में अनुकूल-प्रतिकूल, उत्थान-पतन, हर्ष-विषाद जैसी स्थितियाँ आती ही रहती हैं। ये जीवन के लक्षण
 
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कालसर्प योग--वास्तविक या कपोल कल्पित ?

एक कहावत है कि संसार में उसी वस्तु की नकल होती है जिसकी माँग अधिक होती है। प्राचीन समय में ज्योतिष केवल आवश्यकता थी परन्तु आज के दौर में ये सिर्फ आवश्यकता नहीं रही,बल्कि बिना किसी विशेष मेहनत के एक अच्छी कमाई का साधन बन गया है। पिछले कुछ वर्षों से देखने
 
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कोई भी प्राकृ्तिक रत्न (real gem-stone) स्वयं अपना प्रभाव दिखाने में सक्षम होता है।

क्रियाशीलता प्रकृ्ति के जीवन का गहनतम रहस्य है। जो वस्तु उस संसार में सक्रिय नहीं होती, वो शीघ्र ही नष्ट हो जाती है। इसीलिए ये सम्पूर्ण ब्राह्मंड, नक्षत्र, ग्रह तथा तारे सदैव क्रियाशील रहते हैं। हमारे सौरमंडल के इन ग्रहों, नक्षत्रों की सक्रियता को आप
 
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क्या कोई रत्न(gem stone) आपके जीवन की दिशा बदल सकता है?

इस बात को तो प्रत्येक व्यक्ति भली भान्ती जानता है कि रत्नों का ग्रहों से विशेष सम्बंध होता है। इनमें ग्रहों की शक्तियों को आत्मसात करने की प्रबल शक्ति होती है। जिस प्रकार एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में विद्युतधारा प्रवाहित की जाती है, उसी प्रकार कोई भी
 
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रत्न (gemstones) जीवन की प्रतिकूल परिस्थियों को अनुकूलता में बदल सकता है !!!

हमारे प्राचीन महर्षियों नें अपने दीर्धकालीन अनुभवों के पश्चात यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया है कि प्रत्येक रत्न एक ग्रह विशेष की किरणें ग्रहण करके धारक व्यक्ति के शरीर में पहुँचाने का कार्य करता है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होने यह निश्चय किया कि किस ग्रह
 
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नवसंवत्सर आगमन तथा नवरात्रि के पावन पर्व की आप सबको हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!!!!!!!!!!

कल 16 मार्च चैत्र प्रतिपदा को नवीन संवत्सर और हमारे विक्रमी वर्ष का आरम्भ हो रहा है। साथ ही नवरात्रि का पावन पर्व भी। सूक्ष्म जगत को अपना कार्यक्षेत्र बनाने वाले हमारे ऋषि मुनियों नें अपने ज्ञान के माध्यम से हम सब के लिए वर्ष के एक एक दिन को उल्लासमय बना
 
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अपनी परम्पराओं का निर्वहण कोई मूर्खता नहीं अपितु बुद्धिमता का सूचक है..................

यहाँ उतरी भारत के सनातन हिन्दू परिवारों में नव संवंत के प्रथम दिन तिलों के तेल द्वारा मालिश करने और मिश्री, काली मिर्च और नीम के ताजे पत्तों के सेवन की एक वैदिक परम्परा अभी तक बनी हुई है।   एक सनातनी परिवार में जन्म लेने के चलते हम भी अपने
 
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मन्त्र शक्ति का रहस्य

वेदों में कहा गया हैं कि ऋषियों मन्त्र दृ्ष्टार: अर्थात ऋषि वही है, जो मन्त्र को जानता है, जिसने उसकी गहराई को अनुभव और उपलब्धियों को हस्तगत किया है। ऋषियों के अनुभूत कोष स्पष्ट करते हैं कि विश्वव्यापी ब्रह्म चेतना के साथ मनुष्य का एक सघन और सुनिश्चित
 
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Mar 04 2010 11:36 PM
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किसी मन्त्र जाप,उपासना अथवा कर्मकांड इत्यादि का हमे सही लाभ क्यों नहीं प्राप्त होता ?

ऎसी स्थिति स्वभावत: किसी के भी मन को असमंजस में डाल देती है कि मन्त्र-तन्त्र, कर्मकांड,भक्ति,पूजा-उपासना इत्यादि की एक जैसी ही प्रक्रिया का अवलम्बन करने पर भी एक व्यक्ति को तो लाभ हो जाता है, जब कि दूसरे किसी अन्य को कोई सफलता नहीं मिलती, ऎसा क्यों?। एक
 
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सच कहा गया है कि "गुरू(भाग्येश) डूबते हुए को उबार लेता हैं"

वेद,पुराण,शास्त्र,उपनिषद इत्यादि सभी गुरू की महिमा का बखान करते नहीं थकते। न सिर्फ आध्यात्म अपितु ज्योतिष में भी यही कहा गया है कि आत्मिक उन्नति के लिए गुरू की सहायता परमावश्यक है। इसके बिना मनुष्य के आत्म कल्याण का द्वार नहीं खुल सकता।सामान्य जीवन क्रम
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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Feb 23 2010 07:38 PM
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फलित ज्योतिष संकेत सूत्र के माध्यम से गजकेसरी योग का विवेचन

पिछली पोस्ट में हम फलित ज्योतिष में पाराशरी राजयोगों पर बात कर रहे थे तो उसी विषय पर आगे बढते हुए सबसे पहले तो हमें ग्रहों के कारकत्व को समझना होगा। कारकत्व दो प्रकार के होते हैं--नैसर्गिक(स्वाभाविक) और तात्कालिक। ज्योतिष ग्रन्थों में जो विभिन्न ग्रहों
 
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फलित ज्योतिष में विभिन्न राजयोगों की वास्तविकता (बद्धमूल धारणाओं के निराकरण का एक प्रयास)

एक व्यक्ति ताज्जीवन ज्योतिषियों को अपनी जन्मपत्री दिखाता रहा और प्रत्येक ज्योतिषी नें उसकी जन्मपत्री देखकर उसके बारे में यही फलकथन किया कि आपकी जन्मकुंडली में तो अलाना फलाना राजयोग है, आप जीवन में बहुत उन्नति करेंगें किन्तु फिर भी यह व्यक्ति आजीवन वनवासी
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
Feb 11 2010 03:00 PM
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वर्ष 2010 के सम्पूर्ण व्रत,पर्व,त्योहारों,संक्रान्ति तथा अमावस्या इत्यादि की सूची

वर्ष 2010 के प्रमुख व्रत,पर्व/त्योहार:- 12फरवरी--श्रीमहाशिवरात्रि व्रत  22फरवरी--होलाष्टक प्रारम्भ 25फरवरी--श्रीगोविन्द द्वादशी  28फरवरी--होलिकादहन 01 मार्च--वसन्तोत्सव 16 मार्च--वसन्त नवरात्रप्रारम्भ 18
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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जन्मकुंडली में विद्यमान विभिन्न राजयोगों की वास्तविकता (भाग 1)

दुनिया में प्रतिक्षण न जाने कितने प्राणी जन्म लेते हैं और कितने ही काल का ग्रास बन जाते हैं। जब बच्चा जन्म लेता है तो उस बच्चे की माता को भी उसके भविष्य के संबंध में तनिक भी कल्पना नहीं होती। लेकिन दुनिया में जो व्यक्ति कोई बहुत बडा राजनीतिज्ञ बन जाए,
 
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अन्धविश्वास का फतवा देने की अपेक्षा सत्य को सामने लाने का प्रयास किया जाना चाहिए!!!!!!!

अब इसे चाहे समय का प्रभाव कहा जाए या कुछ ओर लेकिन आज यहाँ स्थिति कुछ इस प्रकार की बन चुकी है कि ज्योतिष,मन्त्र,यन्त्र,तन्त्र,हस्तरेखा,वास्तुशास्त्र,तीर्थयात्रा,कर्मकाँड इत्यादि पर किसी के विश्वास को अगर एक मूर्ख व्यक्ति अन्धविश्वास कहने लगे तो उसके साथ
 
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27 जनवरी के पश्चात मौसम में हल्का सा सुधार किन्तु प्रबल शीतलहर से पूर्ण मुक्ति 6 फरवरी के बाद ही.........

संसार में कोई भी व्यक्ति,पदार्थ, जीव इत्यादि आकाशमंडल में भ्रमण कर रहे ग्रहों से अछूता नहीं हैं। सभी कही न कहीं किसी न किसी रूप में इन भ्रमणशील ग्रहों की क्रिया प्रतिक्रिया का परिणाम भी भोग रहे हैं। बल्कि यूँ कहे कि समय के पथ पर निरन्तर गतिमान इन पिंडों
 
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ज्योतिषी का अर्थ सर्वज्ञाता होना नहीं हैं.........किसी भी विषय के जानकार की भान्ती ही ज्योतिषी की भी अपनी एक सीमा होती है।

किसी भी विषय का सामान्य ज्ञान जनसाधारण को न हो पाने की दशा में उस विषय के प्रति समाज में अनेक भ्रान्तियाँ उत्पन हो जाती है। ज्योतिष जो कि अपने आप में एक सम्पूर्ण विज्ञान है, परन्तु इसका विधिवत अध्ययन/अध्यापन न होने के कारण ही आज इसका वैज्ञानिक रूप
 
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मकर संक्रान्ति----अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का प्रतीक पर्व

कल 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व का आगमन हो रहा है,जिसे कि तिल संक्रांति भी कहा जाता है। यही एकमात्र पर्व है जिसे समूचे भारतवर्ष में मनाया जाता है, चाहे इसका नाम प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग हो और इसे मनाने के तरीके भी भिन्न हों। इसके माध्यम से हमें
 
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भारतीय संस्कृ्ति में कलश का महत्व..............

यदि हम किसी धार्मिक कृ्त्य, रीति रिवाज, परम्परा इत्यादि को बिना अर्थ अथवा उसके महत्व  को जाने हुए निभाते चले जाएं तो निश्चय ही यह हमारा अंधविश्वास माना जाएगा। मेरा मानना है कि जब तक धार्मिक प्रतीकों एवं मांगलिक कृ्त्यों तथा उनके विज्ञान को हम समझ न
 
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परिष्कृ्त हुआ अन्त:करण ही चमत्कारों को जन्म देता है..........

पिछले लेख में मैने आप लोगों के सामने एक ऎसे इन्सान का जिक्र किया था जो कि किसी भी व्यक्ति को देख कर उसके भूतकालिक जीवन में घटित किसी घटना के बारे में बता देता है। अक्सर होता क्या है कि हम लोग ऎसी किसी घटना को देख सुनकर इसे कोई दैवीय चमत्कार या फिर उस
 
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अपनी बद्धमूल धारणाओं को छोडकर ही किसी रहस्य से पर्दा उठाया जा सकता है!!!

चाहे देरी से ही सही, सर्वप्रथम तो समस्त इष्ट मित्रों तथा सुधि पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!चलिए अब बात करते हैं मेरी पिछली पोस्ट के बारे में, जिसमें मैने अपने जीवन से जुडे एक विचित्र घटनाक्रम का उल्लेख आप लोगों के सामने किया था। उसमें आपने
 
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आप इसे पूर्वाभास मानेंगें या कुछ ओर ?

आज आप लोगों को अपने जीवन की एक ऎसी विचित्र किन्तु सत्य घटना के बारे में बताना चाहता हूँ, जिसे लिखने के बारे में मैने कईं बार मन बनाया लेकिन हर बार ये सोच कर विचार त्याग किया कि पता नहीं लोग इस पर विश्वास कर पाएंगें या नहीं। खैर बहुत सोच विचार के बाद आज
 
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क्या राईट बन्धुओं से पहले ही भारत में विमान का आविष्कार हो चुका था ?

हिन्दू धर्म से संबंधित विभिन्न धार्मिक कथा कहानियों में इस प्रकार के उल्लेख मिलते हैं कि उस प्राचीन काल में विभिन्न देवी-देवता,यक्ष,गंधर्व,ऋषि-मुनि इत्यादि तरह तरह के विमानों द्वारा यात्रा किया करते थे। जैसे कि रामायण में पुष्पक विमान का वर्णन आता है
 
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ग्रहों का हमारे शरीर पर पडने वाला प्रभाव और रोगों से बचाव

यह तो सर्वविदित है कि मानवी सृ्ष्टि पंचभौतिक है और पंचभूतों (जल,अग्नि,वायु,पृ्थ्वी,आकाश) के गुण तथा प्रभाव से ही यह सर्वदा प्रभावित होती है। इन्ही पंचतत्वों का अन्तर्जाल कहीं पर सूक्ष्म तो कहीं पर स्थूल रूप से प्रकट एवं अप्रकट स्वरूप में विद्यमान रहत
 
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शनि गोचर भ्रमण का विभिन्न राशियों पर प्रभाव (17 दिसंबर 2009 से 13 जनवरी 2010 तक)..

इस समय गोचर भ्रमण में शनि ग्रह मार्गीय गति से चल रहे हैं,जो कि दिनाँक 13 जनवरी 2010 तक मार्गीय अवस्था में ही रहेंगें । कल दिनाँक 17 दिसंबर को शनि ग्रह का हमारे मन के अधिपति चन्द्रमा के हस्त नक्षत्र में प्रवेश हुआ है।  आईये जानते हैं कि इस स्थिति
 
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भारतीय संस्कृ्ति का महान प्रतीक चिन्ह-----स्वस्तिक(a symbol of life and preservation )

हिन्दू धर्म जितना विशाल और गहन है,उसकी मान्यताएं और प्रक्रियाएं भी उतनी ही विशद और विस्तृ्त हैं । आज हम देखते हैं कि जागरूकता की अधिकता के चलते बहुत से व्यक्ति विशेष रूप से पश्चिमी सभ्यता से अति प्रभावित लोग, अपने धर्म से संबंधित मान्यताओं,रीति-रिवाज
 
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भाग्य और पुरूषार्थ का महत्व-------(आधुनिक दृ्ष्टिकोण)

पिछले लेख में हम बात कर रहे थे कि जीवन में पुरूषार्थ और भाग्य दोनों का ही अलग अलग महत्व है । ये ठीक है कि पुरूषार्थ की भूमिका भाग्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है लेकिन सिर्फ इतना कह देने भर से भाग्य का महत्व किसी भी तरह से कम नहीं हो जाता । बहुत से ऎसे
 
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जीवन में पुरूषार्थ और भाग्य.दोनों का ही अपना अपना महत्व है...............

भाग्यं फलति सर्वत्र न विधा न च पौरूषम     शुराग कृ्त विद्याश्च:,वने तिष्ठंति मे सुता: " पांडवों की माता कुन्ती श्रीकृ्ष्ण से कहती है कि मेरा पुत्र महापराक्रमी एवं विद्वान है किन्तु हम लोग फिर भी वनों में भटकते हुए जीवन गुजार रहे हैं,क्
 
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मासिक राशिफल----दिसंबर 2009

यह मासिक भविष्यफल जन्मराशि पर आधारित है । अत: सही फलादेश के लिए नामराशि की अपेक्षा अपनी जन्मराशि के अनुसार ही इसे पढें । यदि किसी को अपनी जन्मराशि की जानकारी नहीं है,तो,टिप्पणी अथवा ईमेल के जरिए अपना जन्मविवरण भेज कर अपनी राशि पता कर सकते हैं । मेष र
 
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