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कुछ ईधर की, कुछ उधर की

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16 Jun 2010
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ब्लागरोत्थान की कोचिंग क्लास

पार्क की एक बैन्च पर तीन मित्र बैठे है, मिश्रा, अनोखेलाल और चौबे----तीनों ही हिन्दी के ब्लागर. अब ये आपके सोचने पर है कि आप चाहे तो इसे किसी ब्लागर मीट का नाम दें या मित्रों की आपस की गुफ्तगू. अब इनमें मिश्रा और अनोखेलाल तो थे ब्लाग की दुनिया के पुराने
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
Jun 16 2010 07:46 PM
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हे पंगेच्छु ब्लागर !!!

हे पंगेच्छु ब्लागर! तुम्हारे अंतस का ब्लागर कीटनित्य नए पंगें का सृ्जन करता हैऔर करता है रूप बदल नित्य नईं बकवास.....नैट पर आते ही अपने मन कीमलिनता रूपी गधे पर सवार होप्रस्थित हो जाते हो  तुमकिसी नए पंगें की खोज में....और पंगों के नित्य नवीनप्रयोग
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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इज्जतदार आम आदमी

वह उदास और परेशान सा मेरे पास आया. उसके चेहरे पर घबराहट के चिन्ह स्पष्ट दिखलाई पड रहे थे. मैने पूछा "क्या हुआ! ये इतने घबराए हुए से क्यूं हो ?"बोला" देख नहीं रहे, चारों तरह क्या हो रहा है. हत्याएं, लूट-खसोट, भुठमेड और गुण्डागर्दी का नंगा नाच हो रहा
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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सोच रहा हूँ कि क्या लिखा जाए और क्यूँ लिखा जाए !!!

अब इसे मौसम का असर कहा जाए कि माहौल का; पता नहीं क्यों अब कुछ भी लिखने पढने को मन ही नहीं करता. शायद ब्लागिंग का वो पहले वाला रस अब चला गया है. पहले कभी कुछ लिखते थे तो चाहे उसे पढने वालों को बेशक आनन्द न आए लेकिन हमें लिखने में तो खूब आया करता था. लेकिन
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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आँख के सामने क्यूँ अन्धेरा है

क्यों जम्हाई आ रही है बेतरहइस तरह से आँख क्यों है झप रहीदेख लो चहुँ ओर क्या है हो रहाबात सुन लो, आँख खोलो तो सही..........सच की समझ तुम जो नहीं रखतेतो क्यों न रूचें तुम्हें घुनी बातेंसच को सच कहें कैसेजब सुनी हैं बनी चुनी बातें.......आँख खोलिए तनिक जतन
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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मनोविज्ञान---मन का विज्ञान या आत्मा का ?

मनोविज्ञान अर्थात मन का विज्ञान । शाब्दिक अर्थ यानि अध्ययन की वह शाखा जो कि मन का अध्ययन करती है । जिसे कि अंग्रेजी में साईकोलोजी(psychology) कहा जाता है । इस शब्द की उत्पति यूनानी भाषा के दो शब्दों साईकी ( psyche) तथा लोगस (logos) से मिलकर हुई है
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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बुद्धिमानों का सम्मेलन और बनवारी लाल जी की मन की पीडा

बहुत पुरानी बात है कि एक बार देश की राजधानी दिल्ली में "बुद्धिमानों का सम्मेलन" आयोजित किया गया. जिसमे देश-विदेश के जाने माने बुद्धिमानों को आमन्त्रित किया गया. अब अपने बनवारी लाल जी को पता चला तो उनका मन भी हुआ कि चल के देखा तो जाए कि आखिर बुद्धिमानों
 
पं.डी.के.शर्मा
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लगता है ब्लागजगत अब समझौतावादी हो गया है.........

मुझे लग रहा है कि अब इस ब्लागजगत में मठाधीशी, अनामी-बेनामी ब्लागर, तेरा धर्म-मेरा धर्म जैसी टपोरपंथी, अन्याय, वगैरह से लडने की शक्ति बिल्कुल ही चूक गई है, तभी तो कितने दिन हो गए ऎसी कोई धमाकेदार सी किसी को गरियाती हुई कोई पोस्ट नहीं दिखाई पडी. विश्वास
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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इस सर्वसुलभ माध्यम का उपयोग निज एवं समाज के विकास के लिए किया जाए तो ही बेहतर है!!!!!!

ये ठीक है कि यहाँ ब्लागजगत में आज बहुत से ब्लागर इस प्रकार की शैली को अपना रहे हैं, जो आपस में विद्वेष और कटुता बढा रही है और लोगों को अच्छाई की अपेक्षा बुराई की ओर ले जा रही है। लेकिन इसमें भी मैं दोष पढने वाले व्यक्ति का ही अधिक मानता हूँ। क्यों कि आज
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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सुना है, हिन्दी ब्लागजगत में चुनाव होने वाले हैं!!!!!!

जैसे ही खबर मिली कि हिन्दी चिट्ठाजगत में "सर्वश्रेष्ठ ब्लागर" चुनने के लिए चुनाव प्रक्रिया अपनाई जा रही है तो सुनते ही अपने ब्लागर मित्र श्री बनवारी लाल जी तुरन्त धमक पडे. पूछने लगे कि " पंडित जी! जरा एक मशविरा तो दीजिए""जी कहिए, आज किस बात पर मशविरा
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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रिक्शा चलाने वाले ही धर्म की रक्षा करते हैं!!!

धर्म, अधर्म का जितना ज्ञान हमें गुरूकुल में रहते "आचार्य" की पढाई के दौरान भी नहीं हुआ होगा, उससे कहीं अधिक ज्ञान हम इस ब्लागनगरी में रहते हासिल कर चुके हैं, वो भी सिर्फ चन्द महीनों में। सुबह शाम धर्म आख्ययान, प्रवचन सुनकर हमें तो ऎसा लगने लगा है कि
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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हिन्दी ब्लागिंग और टिप्पणियों का हिसाब-किताब (हास्य कथा)

(दरवाजे पर दस्तक की आवाज)ललित शर्मा:- अरी ओर भगवान! जरा देखना तो सही कौन नासपीटा इतनी सुबह सुबह दरवाजा खटकता रहा है।(इतनी देर में फिर से दरवाजे पर ठक ठक की आवाज सुनाई देने लगी)ललित:- (खीझ कर) तुम मत सुनना! मुझे ही उठना पडेगा। हाँ भाई बोलो तो सही कौन हो।
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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असली हिन्दुस्तान तो यहीं इस ब्लागजगत में बस रहा है.......

कितना अद्भुत है ये हिन्दी ब्लागजगत! जैसे ईश्वर नें सृ्ष्टि रचना के समय भान्ती भान्ती के जीवों को उत्पन किया, सब के सब सूरत, स्वभाव और व्यवहार में एक दूसरे से बिल्कुल अलग। ठीक वैसे ही इस ब्लाग संसार में भी हजारों लोग दिन रात अलग अलग मसलों पर लिखे जा रहे
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
टैग: भाँड
Apr 28 2010 09:03 PM
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यूँ चले जाना किसी का..........

ध्यान में अपने निरन्तरमार्ग पर चलते हुए हीबीती कुछ सुनसान रस्तेकी अन्धेरी रात राहीकट गई कुछ राह तेरेसाथ करते बात राही........
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान में भर्ती हेतु आज माननीय चिट्ठाकारों का साक्षात्कार चालू आहे!!!

चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान उन सभी आवेदनकर्ताओं का दिल से धन्यवाद करता है, जिन्होने इस संस्थान के साथ जुडकर हिन्दी चिट्ठाकारिता को समृ्द्धि प्रदान करने में अपना योगदान देने की इच्छा प्रकट की हैं। जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि रिक्त्त पदों हेतु आवेदन करने
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान में कवि,गजलकार,लेखक,कार्टूनिस्ट के पदों हेतु आवेदनपत्र आमंत्रित

जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि हिन्दी ब्लागर्स को आ रही समस्यायों को देखते हुए पिछले दिनों हमने आप लोगों की सहायतार्थ "चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान" नाम से एक कुटीर उद्योग का शुभारंभ किया था। जिसके पीछे हमारा एकमात्र यही उदेश्य रहा है कि इसके जरिये हिन्दी
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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मेर धर्म महान!!!

चींटी का धर्मपंक्तिबद्ध हो चलना.........हाथी का धर्मसमूह में चिवरना..........वानर का धर्मडाली डाली उछलना..........मानव का धर्मसर्वधर्म सद्भाव और विश्व बन्धुत्व........अरे! नहीं नहीं, रूकिये जराये सब तो पिछले जमाने की बातें हैंआज मानव का धर्मस्वधर्म में
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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बडे बडे फन्ने खाँ ब्लागर यहाँ एक कौडी में तीन के भाव बिक रहे हैं-- (आह्वान)

प्रभो! आओ, आओ.....हम इस समय तुम्हे बडे दीन होकर पुकार रहे हैं। तुम तो दीनों की बहुत सुनते थे। सुनते क्या थे, तुम तो दीनों के लिए थे ही। क्या हमारी न सुनोगे! देखो जरा इस ब्लागजगत को एक नजर देखो तो सही। पारस्परिक ईर्ष्या द्वेष नें यहाँ का सत्यानाश कर के रख
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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कडवे का शहद भी कडवा................(बस यूँ ही)

बचपन में एक कहानी पढी थी कि फारस देश में एक स्त्री रहा करती थी जो कि शहद बेचने का व्यवसाय किया करती थी । उस स्त्री में एक खूबी यह थी कि उसका बातचीत करने का ढंग बहुत ही आकर्षक था । जिस कारण से उसकी दुकान पर सारा दिन ग्राहकों की भीड लगी रहती थी  ।
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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इन्साफ की दिशा में अन्याय हो रहा है.............

इन्साफ की दिशा में अन्याय हो रहा हैआरम्भ किस विद्या का अध्याय हो रहा है।।सोना बता रहे हैं शब्दों को सब हमारेमिट्टी मगर हमारा अभिप्राय हो रहा है।।आदेश बन रहा है अपशब्द भी किसी काऔ राय रख के कोई बे-राय हो रहा है ।।शोषण अवैध घोषित है, जिस जगह वहीं परशोषित
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण..अब पुरूषों का रूख इनके मार्ग में बाधा पहुँचाने का नहीं वरन् उदारतापूर्ण सहयोग देने का ही होगा

महिला जागरण! महिला सशक्तिकरण----जिसके लिए चिरकाल से छिटपुट प्रयत्न होते रहे हैं। न्यायशीलता सदा से यह प्रतिपादन करती रही है कि "नर और नारी एक समान" का तथ्य ही सनातन है। जीवन एक गाडी है तो उस गाडी के दोनों पहियों को एक समान महत्व मिलना ही चाहिए। स्त्री
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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पता नहीं मन की ये दुविधा कब पीछा छोडेगी

मालूम नहीं क्यों, कभी कभी तो ऎसा लगने लगता है कि ये ब्लागिंग,फ्लागिंग कुछ नहीं--सब फालतू की टन्टेबाजी है--ऎसा लगता है कि अपनी कोई खुशी, कोई दुख, कोई जानकारी, मन में आया जरा सा कोई विचार अपने तक ही सीमित न रख पाना और उसे झट से एक पोस्ट के जरिये ठेल देना
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
Feb 25 2010 05:35 PM
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चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान-----:-)

जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि हिन्दी ब्लागर्स को आ रही समस्यायों को देखते हुए पिछले दिनों हमने आप लोगों की सहायतार्थ "चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान" नाम से एक कुटीर उद्योग का शुभारंभ किया था। जिसके पीछे हमारा एकमात्र यही उदेश्य रहा है कि इसके जरिये हिन्दी
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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कुछ ऎसे सवाल जिनका जवाब खोजना बहुत जरूरी सा लगने लगा है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

जन्मसंख्या की दृ्ष्टि से दुनिया का सबसे बडा लोकतन्त्र देश-----भारत। जहाँ संसार के हर धर्म को मानने वाला शख्स मिलेगा। जहाँ आधुनिकता की चरम सीमा तक पहुँच चुके धन कुबेरों की कमी नहीं तो दूसरी ओर अनादिकाल से चले आ रहे आदिवासी भी साथ साथ ही पल रहे हैं। सुनने
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
टैग: चीन
Feb 20 2010 05:33 PM
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पाकिस्तान भारत से कहीं अधिक खुशहाल देश है..........

आजकल हमारे यहाँ लुधियाना स्थित पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में 48वीं वार्षिक एल्यूमिनी मीट का आयोजन चल रहा है। जिसमें देश विदेश से आए नामी गिरामी साईंटिस्ट और यूनिवर्सिटी एक्स स्टूडेंट भाग ले रहे हैं। इस एल्यूमनी मीट में कभी पाकिस्तान की फैसलाबाद कृ्षि
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
टैग: मीट
Feb 12 2010 05:06 PM
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जय....................??????????????????

जय छत्तीसगढजय बुंदेलखंडजय महाराष्ट्रजय उत्तरप्रदेश. ... जय मुम्बईजय रायपुरजय लखनऊजय जबलपुर... जय कच्चा बाजारजय टिब्बा रोड जय घासी राम मोहल्लाजय ननकू हलवाई वाली गली...जय ठोलकर मेंशनजय प्रेम सदनजय सरदार
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान............

जैसा कि पिछली पोस्ट में इस विषय पर विचार हो रहा था कि नियमित रूप से ब्लाग लिखना कितना श्रमसाध्य कार्य है। एक ओर यहाँ अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए रोज रोज नये नये विषयों को खोजने, फिर उन पर कुछ अच्छा, बेहतरीन सा लिखने के लिए सामग्री जुटाने की चिन्ता,
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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चिट्ठाकारों के लिए एक नायाब नुस्खा!!!!!!!!!!!!!!!!!!

 कुछ दिनों पहले हमने अपनी एक पोस्ट के जरिए आप लोगों से चिट्ठाकारी करने के उदेश्यों के बारे में जानना चाहा था। जिसमें आप सब लोगों नें अपने अपने उदेश्यों को जाहिर किया तो जानकर हमें तो अपनी निरूदेश्यता पर शर्म से महसूस होने लगी। सोचा कि जब सब लोगों
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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आखिर हम लोग ब्लागिंग किसलिए कर रहे हैं ???

बहुत दिनों से मन मे ये सवाल उमडघुमड रहा है कि आखिर हम लोगों का ब्लागिंग करने का उदेश्य क्या है ?। आखिर क्यूँ हम लोग दिन रात मगजमारी किया करते हैं । बहुत सोचने पर भी मेरी समझ में अभी तक कुछ नहीं आया । वैसे कुछ न कुछ उदेश्य तो होता ही होगा । अगर इसका सचमुच
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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नए साल में हम आपसी मतभेदों को भुलाकर अपनी प्रतिभा को अमूल्य विस्तार दें!!!!!!!!!!!

आज हम वर्तमान के इस माहौल का अवलोकन करें तो पाएंगें कि चाहे घर-परिवार हो, चाहे समाज या फिर ये चिट्ठाजगत, हम लोग अपना कितना बहुमूल्य समय और ऊर्जा व्यर्थ के आपसी विवादों, मतभेदों तथा झगड़ों में यूँ ही व्यर्थ में गवाँते चले जा रहे हैं। आखिर ये झगड़े क्यों? एक
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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बाबा लोगो का ब्लागिंग दर्शन और कलयुगी नीतिज्ञान :)

समीरानन्द आश्रम में तीनों बाबा जी समाधिस्थ अवस्था में बैठे हुए हैं । बिल्कुल अपने ध्यान में निमग्न...कुछ खबर नहीं कि संसार में क्या हो रहा है, और संसार में वे हैं भी या नहीं । ये दोनों काफी देर तक उनके सामने बैठे रहे..इतने में ही, न जाने कब की लगी&nb
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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ब्लागवाणी पर ये क्या आ रहा है------"रिपोर्ट की गई हमला साईट"

लगता है कि आजकल हिन्दी ब्लागिंग की ग्रहदशा कुछ ठीक नहीं चल रही । मुश्किल से ऎसा कोई दिन निकलता होगा, जो कि सही सलामत गुजर जाए वर्ना तो हर रोज कुछ न कुछ लगा ही रहता है । आज ओर एक नया बखेडा खडा हो गया । आप ये न सोचिए कि मैं किसी आपसी विवाद/मतभेद की बात
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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ये ईमेल काम की है या स्पैम ?

आज सुबह हमारे मेलबाक्स मे एक ऎसी ईमेल आई है, जिसके बारे में हम ये तय नहीं कर पा रहे हैं कि ये ईमेल सही है या कि स्पैम । वैसे हमारी छट्ठी इन्द्री तो यही कह रही है कि अवश्य ही ये मेल कचरा बाक्स में डालने लायक है । फिर ख्याल आया कि भई कलयुग है, आज के जम
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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नारी मुक्ति का ये छदम प्रपन्च

आज जिधर देखो उधर ही नारी के कष्टों, उसके पहनावे, शरीर रचना और उसके अधिकारों की कथाएँ बाँची जा रही है, जबकि पुरूष की समस्याओं की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा। जब कि समस्याएं दोनों ओर हैं। जब तक दोनों की समस्याएं अलग अलग रहेंगी ओर नारी अपनी सुविधा,
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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अब तो हम कुछ करके ही रहेंगें.....:)

पिछले दो एक दिनों पहले की बात है कि जब एक रात हम अपनी मित्र मंडली के साथ किसी गूढ वार्तालाप में व्यस्त थे । खैर उस वार्तालाप का तो कोई निष्कर्ष नहीं निकला लेकिन बैठे बैठे हमारे मन में जरूर एक प्रेरणा सी जग उठी---कि चलें अपनी बीती जिन्दगी का कुछ लेखा
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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गले का पट्टा

तकनीकी विकास के मामले में जापानियों का लोहा तो आज पूरा विश्व मान रहा है । इनके द्वारा किए जा रहे नित नये आविष्कार देखने सुनने को मिल ही जाते हैं । कभी कभी तो इनके आविष्कार इतने अजीबोगरीब होते हैं कि देख सुनकर हँसी भी आती है ओर इनकी कल्पनाशीलता, खोजी
 
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भारतवर्ष के बारे में कुछ रोचक तथ्य

भारतवर्ष के बारे में कुछ रोचक तथ्य इतिहास के अनुसार, आज तक भारत ने किसी भी देश पर हमला नहीं किया है। जब अनेक संस्कृतियों 5000 साल पहले ही घुमंतू वनवासी थी, भारतीय सिंधु घाटी (सिंधु घाटी सभ्यता) में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की। शतरंज के खेल का आविष
 
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चाटे-काटे स्वान के, दुहूं भान्ती विपरीत .........

ब्लाग दोहावली:- रहिमन लाख भली करौ, इनका जिद्द न जाए राग सुनत, पय पियतहू, सांप सहजहि घर खाए ।। हर पोस्ट में गारी मिलत हैं, भाई लोग चिल्लाहिं रहिमन करूए लिखन कौ, चहियत यही सजाहिं ।। आप न काहू काम के, डार,पात,फल मूर औरन को रोकत फिरैं, आपहूं वृ्क्ष बबूर
 
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भगवान हजरत मोहम्मद की जय.......पैगम्बर रामचन्द्र की जय!!!!!!

इस लेख को पढने वाले सभी पाठकों विशेष रूप से मुसलमान भाईयों को एक बात मैं पहले ही स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि इसे पढते समय कृ्प्या इस दृ्ष्टिकोण से न सोचें कि यह एक हिन्दू द्वारा लिखा गया है।यह मैं इसलिए कह रहा हूँ कि कहीं आप लोग ये न सोचें कि मैं किसी
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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प्रेम विवाह्

पत्नि:- "हे राम्! तुमसे लव मैरिज करके तो मेरी दुनिया ही उजड गई। लगता है शायद मेरी बुद्धि पर ही पत्थर पड गये थे जो मैने ऎसा कदम उठाया।"पति:-" किसी दुनिया उजड गई? तुम्हारी या मेरी?"पत्नि:- "तुम्हारी क्या खराब हुई! परिवार छूटा मेरा; बन्धन में फँसी मैं;
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"