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31 Dec 2009
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वन्दे मातरम् पर देश द्रोहियों को चेतावनी देती एक माइक्रो पोस्ट ............................ Micro post on Vande Matram

वन्दे मातरम् कोई विवाद का विषय नहीं है | यह राष्ट्र के प्रति समर्पण की सबसे बड़ा प्रतीक है | यह भारत के प्रत्येक नागरिक की ओर से की जाने वाली सर्वोत्कृष्ट वंदना भी है | यह मजहबी भेदभाव से परे है इसकी मिसाल स्वतंत्रता संघर्ष में मिल चुकी है | अब हमें
 
Varun Kumar Jaiswal
Nov 08 2009 05:47 PM
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26 / 11 मुंबई हमले के एक वर्ष बाद बढ़ता इस्लामी दुष्प्रचार ............Islamic conspiracies after 26 / 11

की दुखद घटना को बीते हुए अभी एक वर्ष पूरा भी नहीं हुआ है लेकिन इसको लेकर इस्लामवादी षड़यंत्र प्रारंभ हो चुके हैं | इस बार इनकी तैयारी ना सिर्फ इस तरह की आतंकी कार्यवाहियों को जायज ठहराने की है बल्कि वैश्विक इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ भारत के पक्ष को मू
 
Varun Kumar Jaiswal
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लव जेहाद से ज्यादा खतरनाक हैं बर्बर खाप पंचायतें ................... khap tradition should be punished

यहाँ बात तुलना की नहीं बल्कि उस पीड़ा की हो रही है , जिसको भारतीय लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति  अनुभव कर सकता है | आज विश्व के कोने - कोने में इस्लामी आतंक और तालिबान का खतरा बताकर आवश्यक जागरूकता को जागृत किया जा रहा है लेकिन
 
Varun Kumar Jaiswal
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हिंदुत्व की राजनीति के मायने और भी हैं ............Dimensions in the politics of Hindutva

तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों की पराजय के बाद एक बार फिर से भाजपा की हार को लेकर हिंदुत्ववादी हलकों में भारत की आम जनता को कोसने की कवायद शुरू हो गयी है | हिन्दू बहुल जनता को कोसने की यह प्रक्रिया हर चुनावी हार के बाद शुरू कर दी जाती है | प्रत
 
Varun Kumar Jaiswal
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धर्मनिरपेक्ष भारत का धर्मसंकट ..........................Quandary Of Secular India

राष्ट्र संकट में घिरा है | धर्म खतरे में है लेकिन सत्ता के अधिनायक धर्मनिरपेक्षता के खतरे में होने का स्वांग रच रहे हैं | भारतीय धर्मनिरपेक्षता सम्पूर्ण विश्व में अद्वितीय है , यह   धर्म को ना सिर्फ सत्ता से बेदखल कर देती है बल्कि धर्म को र
 
Varun Kumar Jaiswal
Oct 19 2009 11:19 AM
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कश्मीर समस्या और भारतीय मुसलमानों का रुख .... kashmir issue & indian muslims

विभाजन के बाद से ही देश जिन समस्याओं से सर्वाधिक पीड़ित है , कश्मीर उनमें सर्वोपरि है | कश्मीर की समस्या का हल स्वतंत्रता के ६२ वर्षों के बाद भी ना होना हमारी रीढ़विहीन राजनीती को ही दर्शाता है | कश्मीर की समस्या पर राजनीती पिछले&
 
Varun Kumar Jaiswal
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बहरों को सुनाने के लिए धमाके की ज़रूरत होती है .... A compulsory blast now requires to brake the silence of the system .

चाहे हम सहमत हों अथवा नहीं लेकिन " The legend of Bhagat Singh " फिल्म का यह कालजयी संवाद अपने आप में समस्त बदलावों के प्रारंभ की व्याख्या कर देता है | आज एक राष्ट्र के रूप में हमारे अस्तित्व पर जो संकट आन पड़ा है उसकी आहट न तो देश के नीति-नियंताओं को
 
Varun Kumar Jaiswal
टैग: political system
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हमारी हिंदी बेचारगी की भाषा नहीं है अतः संघर्ष करते रहिये ......Hindi is not a diplorable language so keep fighting .. .

आज हिंदी दिवस है , बहुत सारे लोगों के लिए ये हिंदी की बेचारगी का रोना-रोने का सर्वश्रेष्ठ दिन है | भाषा हमें संस्कार देती है और मातृभाषा तो एक प्रकार से साक्षात् माता की ही भूमिका का निर्वहन करती रही है | हमारी हिंदी ने हमें हमेशा संघर्ष के ही संस्कारों
 
Varun Kumar Jaiswal
टैग: indian languages
Oct 12 2009 05:07 AM
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इसे कहते हैं सांस्कृतिक सरलता !......................Let us promote cultural flexibility

कहते हैं कि सरलतम ही सर्वजनों की स्वीकृति प्राप्त करने में सक्षम होता है | ऐसी ही बात संस्कृति के संबंद्ध में भी कही जा सकती है |आज शाम को यूँ ही रेडियो पर FM 93 .5  किसी कार्यक्रम में एक आर . जे  को श्री लालू प्रसाद यादव वाले बिहारी स्टाइल में
 
Varun Kumar Jaiswal
टैग: pride
Oct 12 2009 05:02 AM
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बदलती पीढी के साथ कुछ अनुभव नवरात्री पर्व के .........Navratri of new generation .!!!

आज बात नवरात्री के पर्व की |तेजी से बदलते समाज में त्योहारों का महत्त्व भी बदलता जा रहा है , हर पीढी का अपना नजरिया होता है जो इन पर्व - परम्पराओं को आगे बढ़ाता है | पिछले दस - बारह वर्षों में ही लगता है कि पूरी पीढ़ी की सोच ही बदल गयी है |जरा देखें
 
Varun Kumar Jaiswal
टैग: hindu
Oct 12 2009 04:59 AM
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अंग्रेजों को हमसे क्षमा माँगनी चाहिए ........The British should apologise to us

आज सम्पूर्ण दक्षिण एशिया एक अन्धकारमय भविष्य की नियति से जूझ रहा है , सिर्फ वक़्त ही इस बात का ज़वाब दे सकता है कि एक ही संस्कृति को व्यापक तौर पर साझा करने वाले लोग आखिर कब ब्रिटिश राज के घावों को भुलाकर एक सह - अस्तित्व को स्वीकार कर सकेंगे  ?इस
 
Varun Kumar Jaiswal
टैग: indian languages
Oct 12 2009 04:53 AM
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अपनी बात बोलने की आज़ादी और राष्ट्रहित ..................Freedom of Speech & National Intrest .

कहते हैं कि बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी |आज जब संचार क्रांति के इस युग में किसी भी बात का बतंगड़ बनाने में सौदागरों ( मीडिया के ) को 5 मिनट भी नहीं लगते ऐसे में कोई भी बात रखने से पहले राष्ट्रीय सरोकार  को ध्यान में ना रखने वाले कहीं भी ना सिर्फ
 
Varun Kumar Jaiswal
टैग: security
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कुंठित इस्लाम और नापाक मंसूबे .....Frustrated Islam & its Unholy Willingness for the World ..

हर रोज़ इस्लामी कुंठाओं की एक बानगी देखने को मिल जा रही है | इसी की अगली कड़ी में   इस्लामी देशों द्वारा कश्मीर मामलों के लिए विशेष दूत  की नियक्ति का एक खटराग और भी जुड़ गया है | रह रहकर इस्लामवादी अपना रंग दिखला ही देते हैं आखिर जब तक पूरी
 
Varun Kumar Jaiswal
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महात्मा गाँधी और नोबल पुरस्कार ...एक दिलचस्प समीक्षा ...गाँधी जी और शास्त्री जी को हमारा नमन ...........We Salute Gandhi Jii & Shastri Jii....

आजकल समाज के बुद्धिजीवी और वर्ग में गाँधी जी को नोबल पुरस्कार क्यों नहीं मिला इस बात पर बड़ी जोरदार चर्चाएँ हो रही हैं | सभी कथित बुद्धिजीवी इस मामले पर अपनी - अपनी टेर लगाये हुए हैं , अब चलिए आज हम भी इसी बात पर चर्चा कर लेते हैं शायद दिमाग के कुछ ग
 
Varun Kumar Jaiswal
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भारत में विवाह की सबसे सामान्य शर्त क्या होती है ...???!!

कहते हैं कि विवाह सामाजिक रूप से एक समझौता होता है और व्यक्तिगत रूप से प्रेम के बंधन का सामाजिक स्वरुप | भारत में विवाह एक बहुत ही सम्मानजनक संविदा ( CONTRACT ) के रूप में मान्य है | हर समझौते के लिए कुछ शर्तें आवश्यक होती हैं , फ़िर ये तो न सिर्फ़ दो
 
वरुण जायसवाल
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नहीं जानना चाहते हम ' इंडिया ' को ....!! कुछ फायदा नहीं ...||

मेरी एक सहकर्मी है , साथ ही कंपनी तक हम एक ही कार में रोज़ाना आते जाते हैं | इस तरह कंपनी के अलावा तक़रीबन २ घंटे का हमारा साथ बना रहता है | कल अचानक ही हमारे बीच एक चर्चा उठी जिसने अंततः एक बहस का रूप ले लिया , परन्तु निष्कर्ष तो मुझे चौंकाने के साथ
 
वरुण जायसवाल
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क्या वाकई १ जनवरी विदेशी नववर्ष है ..?? सत्य की परख करें ||

मित्रों आज सुरेश चिपलूनकर जी का एक आलेख जिसका सार ' भारतीय परम्पराएं बनाम विदेशी नववर्ष ' , कहा जा सकता है , को पढ़ कर मन में एक नई पीड़ा ने जन्म ले लिया | नव वर्ष का प्रारम्भ ही विचलित कर गया | सुरेश जी की भारतभक्ति पर तो कोई देशद्रोही ही प्रश्न कर स
 
वरुण जायसवाल
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हमें चाहिए १००० धीरुभाई अम्बानी ..!! जरुरत है गुरु की ...||

१९ नवम्बर , सन् १९७२ भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति , स्व . वाराह गिरी वेंकटगिरी , दक्षिण अमेरिका के एक देश ब्राजील के दौरे पर होते हैं | उस दिन उन्हें ब्राजील के एक शहर सैल्वाडोर ( SALVADOR ) में एक विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह ( AUDITORIUM ) का उदघाटन
 
वरुण जायसवाल