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25 Apr 2010
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कोई शिकायत नहीं.....

तुमसे कोई शिकायत भी तो नहीं...क्यूंकि ....तुम जानते हो ...जन्म जन्मान्तर से सहेजे महुए की मादकता ....किसी बरसाती नदी की बासी पड़ी मछली का स्वाद ...और मेरी देह से उठने वाली हर गंध .....जब तुम्हारी गंध से मिल जाती है....तब शायद बौर आ जाता है..हाँ कुछ अजीब
 
tanu sharma.joshi
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ये लकीरें.....!!

कभी कभी कागज़ पर अनायास ही कुछ लकीरें खिंचती चली जाती हैं ...टेड़ी मेड़ी...अनगिनत महीन लकीरें.....इस जहन के नक्शे पर गढ़ती सी महसूस होती हैं......जाने क्या कहती......क्या छिपातीं .....जाने क्या उकेरतीं....भारहीन बनाती ...कभी बोझिल करतीं.....ये ऐसी...कुछ
 
tanu sharma.joshi
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सपने.....

कभी पलट कर नहीं देखती....उमस भरी बेचेनी है..जिंदगी बेखटक सरपट दौड़ी चली जा रही है..मेरी सांसें कभी कभी थमती हैं..इन्हें चैन नहीं...मेरे सपनो की तरह पल पल बढती नहींइन आँखों में कई ख्वाब जाग रहे हैंजाने कबसेअब तो होश भी नहीं...सपने...सपने.....और बस
 
tanu sharma.joshi
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Apr 04 2010 12:14 AM
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मालूम नहीं....

मेरे घर के सामने खड़ा.. नीम... रोज़ जल जाता है, हां....नीम का ये पेड़ कट-कट कर,गिर जाता है... कई मर्तबा .... पत्ते जब रफ्ता रफ्ता गिरते हैं.. ये जिया भी उसी के साथ... कहीं गुम जाता है.... टेढ़ी मेढ़ी सी ये सड़कें नज़र आती हैं आजकल.. हल्के पीले..भूरे...सूखे
 
tanu sharma.joshi
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सिर्फ एक बार....!!

इस बार फिर.....चोट लगी है.......ह्रदय पर...आघात ..वेदना...तड़प...आंसू....गम... ये सारी बातें बेमानी सी लगती हैं अब.... सुन्न हो चुका हो....मेरा मन .... जैसे लकवा ......मार जाये ....अपाहिज..किसी को कर जाये... जीवन के झोल में उलझने के बाद... तलाश ज़ोर मारती
 
tanu sharma.joshi
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मेरे रंग....

लड़की बड़ी ही बेकल...पूरे चांद की रात...फागुन का महीना और उसका साथ...(कोई नहीं जानता जब वो खुश होती है तो उसके भीतर एक आबिदा गुनगुना रही होती है ) नहर किनारे चलते चलते वो रास्ता यूं पार किया मानो...सुर्ख फूलों का कालीन और हरे खेतों की बिछी चादर.... फिर
 
tanu sharma.joshi
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पता नहीं क्या....पर सबकुछ मेरा....

चितचोर जैसा नाम...देखी....बूझी सी कुछ अच्छे सिनेमा की सनद जैसा....बिसारी सी बातें याद कराता...जाने कैसे जुझारु मन की गांठ खोलता....लाख कोशिश कर लो...बिना जाने बिन पहचाने एक लफ्ज़ बाहर नहीं निकालने का....बातें करना क्यों अच्छा लगता...कोई बुझा नहीं
 
tanu sharma.joshi
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तुम्हारे....मेरे लिए....

नींद मयस्सर नहीं अब मुझे...रात होती है... क्योंकि ये रात की मजबूरी है... वर्ना यूंही जागकर सोना....एक आदत सी बन चुकी है...ज़िंदगी बिताना भी...बस अब एक आदत सी है... जिंदगी के हर दोराहे पर.. कश्मकश पर...फलसफे पर.....गिरती-पड़ती.....दौड़ती-हांफती......कई
 
tanu sharma.joshi
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Feb 20 2010 10:36 AM
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तुम्हारे लिए....

मालूम नहीं....कब तक...मैं यूंही लिखती रहूंगी.....इन बेहिसाब शब्दों के साथ...अपने सपने बांटती रहूंगी...अब तुमसे ज्यादा....ये शब्द मुझे समझ पाते हैं....इसीलिए..शायद...मेरी बात...तुम तक..पहुंचाते हैं......कल की ही तरह...मैं आज भी लिखती हूं...तुम्हारे
 
tanu sharma.joshi
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गुज़रे लम्हात....

गुज़रे लम्हात बड़े रंगीनियों से शराबोर लगते हैं...मुझे...मेरे दिल को...मेरी कशिश को शायद थमने देना नहीं चाहते....दूर कहीं खोए..दिल के दरिचो में थमे गुज़रे लम्हात...हां वोही सारे लम्हात...जो सिर्फ पशेमा करते....तुम्हारे इंतज़ार को....तुम्हारी आहट
 
tanu sharma.joshi
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मेरी ज़मीं....

इस बदले से सर्द मौसम में भी कोई सिरहन नहीं पैदा हो रही थी....वहां पहुंचकर उस ठंडे फर्श पर ...सिर्फ एक दरी पर बैठते ही कहीं कोई ठोस आधार सा मिलने जैसा महसूस हुआ.....हां आंखें बहुत कुछ समझना चाह रही थीं....उसकी बड़ी आंखों मे छुपी बातों को भी.....जिन्हें
 
tanu sharma.joshi
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शब्द....

ऐसा लगता है जैसे बहुत से शब्द...कहीं खो जाते हैं.....कभी पकड़ में नहीं आते या फिर उम्र बीतते-बीतते (शायद पता नहीं चल पाता)कहीं साथ पलते बढ़ते हैं...और साथ साथ बढ़ते बढ़ते बाद में अपना अस्तित्व खोज पाते हैं....मेरे शब्द अक्सर खो जाते हैं...शायद उसे सम
 
tanu sharma.joshi
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कुछ भी तो नहीं पता....

ऐसा लगता ही नहीं कि जिंदगी से रंग उड़ गए हैं.....कभी कभी काली-सफेद उदासियों के बीच से सतरंगी हसरतों ने तमाम दबाब के बावजूद अपने हक़ की छाप छोड़ी है..... हां कई दफा..... ज़िद... तौहीन... ज़िल्लत...कसमसाहट....कुछ नहीं बल्कि सब कुछ जुड़ने से पहले ही टूट
 
tanu sharma.joshi
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कुछ अच्छे का इंतज़ार....

कितना मुश्किल होता है... ज़िंदगी बेसबब जीना... हर आहट पे... सिर्फ उम्मीदों का दामन थामना... थामना....लौटना...... ज़िंदगी बेसबब जीना.... मानों कुछ अच्छे का इंतज़ार... उसका इंतज़ारउसके लिए इंतज़ार.... ऐसे जैसे कभी कुछ थमता ही नहीं... इतना लंबा और अनिश्
 
tanu sharma.joshi
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तुम हो...

मेरा सावन भी तुम हो...मेरी प्यास भी तुम हो.... सहरा की बांहो में छुपी...वो आस भी तुम हो... तुम यूंतो बहुत दूर हो मुझसे....पर एहसास ये होता है....मेरे पास भी तुम हो.... हर ज़ख्म के आगोश में है दर्द तुम्हारा..... हर दर्द में तस्क़ीन का एहसास भी तुम हो.
 
tanu sharma.joshi
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शायद....

शायद.......इक मुद्दत से जिसे देखा नहीं....आज भी वो ज़हन से उतरा नहीं.......आज भी वो टूट के आता है याद.......आज भी रात भर नींद आती नहीं......आज भी सच्चा है मेरा इश्क़......आज भी वादा मेरा झूठा नहीं.....आज भी क़ायम हूं,अपने ज़ब्त पर......आज भी टूट कर बिखरा
 
tanu sharma.joshi
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ये दुनिया.....

कोई रोक सका है क्या....किसी की ख्वाहिशों को.....किसी के सपनों में बसती......अंगड़ाई लेती....चमकीले सपनों की दुनिया को.....नहीं शायद कोई नहीं...तुम भी तो नहीं जानते......समंदर बसता है तुम्हारे अंदर किसी अदावत का,जहां मैं गहराना चाहती हूं.....कोई उमगती
 
tanu sharma.joshi
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उदासियों का सबब.....

उदासियों का सबब जो लिखना...तो ये भी लिखना...कि चांद...तारे...शहाब आंखे...बदल गए हैं....वो ज़िंदा लम्हें जो तेरी राहों में....तेरे आने के मुंतज़िर थे....वो थक के राहों में ढल गए हैं....वो तेरी यादें....ख्याल तेरे....वो रंज तेरे....मिसाल तेरे...वो तेरी
 
tanu sharma.joshi
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Aug 24 2009 09:54 AM
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ऐसा क्यों लगता है मुझे....

कभी कभी मुझे लगता है....जैसे......शायद मेरी ही आंख की भीगी कोर बासी हो गयी....या फिर इन आंसुओं में उतना नमक नहीं रह गया....जो तुम्हारे सिर्फ एक बार मुस्कुराने की मेरी इल्तिज़ा को तुम तक पहुंचा सके......मैं नहीं जानती.....पर ना मालूम क्यों ये लगता
 
tanu sharma.joshi
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Aug 11 2009 12:31 AM
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इश्क.....

जब हम इश्क में पढ़ जाते हैं तो शायद दीवाने हो जाते हैं......कभी पनियाली आंखों से दुनिया को बरसते देखते हैं.....तो कभी खुद के बरसाए मेघों में डूबते-उतराते हैं.....पर दीवानगी के इस आलम में अपनी बुजुर्गियत से कोताही नहीं बरतते........धड़कनों की रवानगी
 
tanu sharma.joshi
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Jul 29 2009 12:34 AM
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एक ख्वाहिश.....

बड़ी मासूम सी ख्वाहिश हो.... ज़िंदगी को हर लम्हा..... पीने की इजाज़त हो..... तेरे आगोश में सिमटूं मैं...... ना फिर सांसों की गुज़ारिश हो.... यही ख्वाब हैं मेरे.... बस इन ख्वाबों की इबादत हो... वो पहलू हो.... वो लम्हें हो...... ना कोई और फिर ख्वाहिश ह
 
tanu sharma.joshi
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तुम्हारा सुर्ख रंग मेरा भी रंग........

नाराज़ हो तुम मुझसे......या इस नीली रौशनी से.....जो बिखरती तुम्हारे भी दरम्यां.....मेरी उदास तन्हाई से.....भोर में....तन्हाई के इस बियाबां आसमां में जब सुर्ख सूरज अपनी रौशनी बिखेरने की कोशिश करता है....थोड़ा सा डरता है......इस नीली रौशनाई से....मुट्ठ
 
tanu sharma.joshi
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कठपुतली का होना....

किसी कठपुतली का होना बहुत अच्छा लगता है....बड़ी आंखों और चमकीले कपड़ों वाली कठपुतली... अक्सर मौका मिलते ही मैं खरीदने की पूरी कोशिश करती हूं.....शायद ये इंसानी फितरत कि...हर वो चीज़ जो आपको अच्छी लगती है आप पा लेना चाहते हैं....छोटी या बड़ी इससे फर्क
 
tanu sharma.joshi
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रोज़ का सफर....

सपने खत्म नहीं होते.....आंखे उन्नीदीं नहीं होती....सोते,जागते...सपनो को लिए गजब संसार बनाए घूमती हैं......वक्त बस गुज़रता सा जाता है......दिन बीतता है.....रात उतरती है....कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं....सबकुछ अजीब एक खामोशी के साथ होता रहता है......सूरज क
 
tanu sharma.joshi
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तुम्‍हारी ज़िदगी की गज़ल का सबसे रंगीन क़ाफ़िया........

लोग कहते.....क्या करना चाहते हो......ज़िदगी मे कितना आगे जाना चाहते हो.....सबका....हरकिसी का अपना कोई ना कोई सपना ज़रुर होता है...कोई ऐसा नहीं........जिसका कोई सपना नहीं होता.......मेरे अंदर भी कई सपने....जिन्हें मैं साथ-साथ बड़ा होते देखती....उन्हें
 
tanu sharma.joshi
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ज़िंदगी का पहला लम्हा......जब हर लम्हा तुम्हें खुश देखा.......

मन.....बहुत परेशान करता ये मन.....क्या सबके साथ ऐसा ही करता....उनका भी मन....या ये सब सिर्फ मेरे लिए ही......एक बार फिर वहीं वापस जाने जैसा मन...मन को कैसे कोई समझाए..जिसके पीछे वो भागता.......वो उससे सिरा तोड़कर आगे बढ़ गया......ये मैं या फिर सिर्फ
 
tanu sharma.joshi
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शायद.....सिर्फ एक शब्द या फिर कुछ और....

शायद..........पता नही सिर्फ शब्द भर है.....या फिर पूरी की पूरी ज़िंदगी को रवानगी देने की कोशिश करता कोई अजूबा.......शायद....शायद...शब्द ही ऐसा है.....जिसके पीछे लोग शायद अपनी ज़िंदगी गुज़ार सकते हैं.......सिर्फ इस एहसास को लिए कि शायद कल अच्छा हो....
 
tanu sharma.joshi
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इक...SHORT STORY....

हर रोज़ की तरह ही वो घर आया...दरवाज़े से अंदर दाखिल हुआ....पांव से किसी चीज़ के टकराने जैसा एहसास होने पर...नीचे देखा तो एक खत पड़ा था....हैरानी के साथ ...उसने उठाते हुए सोचा कि कौन होगा,इस दुनिया में जो उसे खत लिखेगा...वो भी मोबाइल और इंटरनेट के इस
 
tanu sharma.joshi
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mahua

कुछ अजीब सा लग रहा होगा....तुम्हें भी इस तस्वीर को देखते हुए....मुझे भी लगा था......कुछ ऐसा ही जैसे ही इसे देखा और महसूस हुआ...अरे कहीं ये मेरी तो तस्वीर नहीं.....कि कहीं किसी रोज़ खींची हो.....और खींच कर यूंही कहीं डाल दी......इस ब्रहमांड के किसी को
 
tanu sharma.joshi
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क्या चाहते हो तुम.........

क्या तुम महसूस कर पाते हो….. इस अंतहीन सन्नाटे को......जिसमें घड़ी की टिक-टिक होती है......कंप्यूटर के कीबोर्ड की बुरी आवाज़ होती है.....चारों तरफ बिखरी ज़िंदगियों की खलिश......और मेरी सांसो की आहट होती है....और इसके अलावा कुछ नही होता....इन खामोश पल
 
tanu sharma.joshi
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एक पल.....और तुम.....

एक पल.....खाबिदा होता है......सहमा सा.... ठिठक कर आता है.....बिछी हुई बर्फ पर बहके चिनारों में......बर्फ से फिसलती....सर्पीली सड़कों में.......भालूपोस्ट पर दरकते कदमों में....गोल-गोल घुमावदार सड़कों पर रुकते....अपनी किसी तस्वीर को तुम्हारी कैद में जा
 
tanu sharma.joshi
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एक लड़की.....एक कविता...

मेरी नींदों मे... एक लड़की... कभी जागती है..... कभी सोती है... कभी हंसती है.... और कभी रोती है... हंसती है......तो खुश होता हूं, मैं...रोता हूं......जब वो रोती है.... हंसती है तो..... ऐसा लगता है...... अँधेरों मे ख्वाब.... बोती है.... सुबह उठता हूं..
 
tanu sharma.joshi
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सिनेमा और मैं.....

कल रात ब्रजेश्वर मदान सर ने एक मैसेज भेजा था....सिनेमा पर.... (वही मदान सर जिन्हें सिनेमा पर लिखने के लिए पहले नेशनल एवॉर्ड से नवाज़ा गया ) उसमें लिखा था.... शेक्सपियर ने दुनिया को रंगमंच की तरह देखा.... जहां हर आदमी अपना पार्ट अदा करके चला जाता है..
 
tanu sharma.joshi
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हमारे राजनेता और हम......

हमारा नेता कैसा हो.....(फलां आदमी) जैसा हो.....ये नारा मैं बचपन से सुनती आ रही हूं....छोटे-मोटे चुनाव...गली-मौहल्ले के. निगम के...लोकसभा के या फिर विधानसभा के, चुनाव कैसे भीं हो....नारे एक ,वादे एक, दिखावे एक और हसरतें भी एक.....लेकिन सिर्फ चेहरे अने
 
tanu sharma.joshi
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मुस्कुराहट......

मुस्कुरा.... तू जहां भी हैं.... सिर्फ मुस्कुरा... क्योंकि तेरी मुस्कुराहट... मेरे बदन में.... तेरी आहट बन उतरती है.... तेरी मुस्कुराहट... धूप की तरह.... मुझपर बिखरती है.... तेरी मुस्कुराहट... हर रोज़, मुझे छूकर गुज़रती है... औऱ किसी रुपहली बारिश की त
 
tanu sharma.joshi
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तुम्हारे संग.....

कितनी अन्जान जगह होती हैं जहां से पांव रखकर गुज़र जाना होता है.....जिनसे कभी कोई मतलब नहीं होता...बस बिन छुए...बिन मतलब पार होना होता है....उन खामोश राहों पर कोई आवाज़ देकर भी नही रोकता....कोई रास्ता बताने वाला भी नही होता....आपकी निगाहें कभी किसी की
 
tanu sharma.joshi
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क्या वो तुम थे....

यूही गुज़रते मैनें झांका उस रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर.....जो मेरी सोच को बाहर की चीज़ों मे तब्दील कर.....एहसास करा रही थी....तुम्हारा..... उन खेतों मे...... किसानों के चेहरों पर...... दूर तक हरे-भरे फैले खेतो की हरियाली में....उन उड़ते परिंदो में...
 
tanu sharma.joshi
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इमरोज़.....एक मुलाक़ात

ये भी एक सपने के पूरा होने जैसा ही था....मैने कब पहली बार अमृता प्रीतम को पढ़ा था...याद भी नहीं...शायद आज से दस या पंद्रह साल पहले और उस वक्त ये सोचा था कि कभी इनसे मुलाक़ात होगी.....? अमृता तो नहीं पर इमरोज़ के रुप में ज़रुर अमृता को जीते हुए देखा..
 
tanu sharmaa...
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तुम्हारी तस्वीरें.....

तुम्हारी तस्वीर.....हर सुबह की शुरुआत एक गर्माहट के साथ कराती....हर रात को एक खुशमिज़ाज अंदाज़ से समेटती ....तुम्हें नहीं पता.....तस्वीरों में तुम मुस्कुराते....मुझे देखते हो....नाराज़ नहीं होते........और हां कभी-कभी.....ना......कभी भी नहीं.......बस
 
tanu sharmaa...
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रंग और तुम....

तुम्हें नही मालूम लेकिन मैं रंग भरना चाहती हूं तुम्हारे अंदर......वो सारे रंग जो तुमने जबरदस्ती अपने अंदर से निकाल कर फेंक दिए कि कही गलती से मुझसे दोबारा मुलाकात ना हो जाए....वो सारे रंग जो मुझे नज़र आते हैं.......मुझे मालूम है तुम्हें भी दिखते हैं.
 
tanu sharmaa...