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17 Jun 2010
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कहीं इलाज ही आपको बीमार ना कर दे?

सावधानी प्रत्येक उपचार की माँ है परन्तु आज के आदमी की सबसे बड़ी तकलीफ - वो इतना व्यस्त है कि सावधान या होश में रहने में उसे बड़ी तकलीफ होती है। वो चाहता है कि सारे समाधान पके-पकाये उसकी जद में आ जायें। लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आप स्वस्थ, सकुशल जिन्दा रहें
 
Rajey Sha
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Ajnabi

मेरी काया में जो आत्मा सी हैउसके लौट आने की संभावना सी हैवो बदल ले मार्ग या सम्बंध बदल लेवही रहेगी, जो प्रेम की भावना सी हैमैं पानी की तरह पटकता रहूंगा सरउस पत्थर में विचित्र चाहना सी हैमैं क्यों उस मौन को नकार मान लूंउस मौन में मेरी सराहना सी हैछानूंगा,
 
Rajey Sha
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Jun 15 2010 04:26 PM
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तुम कहती हो - ना डरा डरा सोचूं जो भी सोचूं हरा भरा सोचूं

तुम कहती हो नाना डरा-डरा सोचूंजो भी सोचूं हरा-हरा सोचूंतुम्हीं बताओ कैसे?तुम बस एक ही बार मिली थीमुझे साफ-साफ दिखा थाकि अब कोई मंजिल बाकी नहींपर तुम चलीं गयींअब सब बाकी है तुम्हारे सिवाडर, घृणा, झूठ, बेबसी, अफसोसऔर रोतले गीत, सिसकती गजलेंऔर अब फिरक्या
 
Rajey Sha
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अब कोई नहीं लौटेगा वहां

कहीं मिलते कभी, कुछ कही, कुछ सुनी होतीकभी दीवानों की कोई याद ही बुनी होतीयूं तो सबने ही चले जाना है इस दुनियां से किसी अजनबी साकिसी के ख्यालों की कोई राह ही चुनी होतीतुम तो बेगाने रहे, बेगाना ही हमको जानाना कभी शिकवा किया, ना कभी मारा तानाख्वामखा ख्यालों
 
Rajey Sha
Jun 07 2010 06:29 PM
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ऐसा भी हुआ

नहीं ऐसा भी नहीं, कि हम खाली हाथ लौटेउसके दर से लौटे हम, नई हसरत लिये हुएराजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
Jun 04 2010 07:33 PM
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ये ख्याल कब तक

इस सफर से,मेरी मर्जी ना पूछ।हवाओं से मजबूर तिनकों की,क्या कोई मर्जी होती है?जो भी अपना है,बस उतना ही अपना है,जितनी की मेरी गलतफहमी।पता नहीं वक्त क्या होता है,मंजिल क्या होती है।ये ख्याल कब तक पलता है,ये जिस्म कहां ढलता है।राजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
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ख्वाबों का हकीकत हो जाना अपशकुन है।

मुझे किसी ने चाँद कहकर पुकारा था।अब बरसों हो गये है...बरसों से... हर रोज सवाल रहता है,मैं आज को कैसे जिऊं?मुझे नहीं पता,इतना दिनों तक कौन जिन्दा रहा है, मुझ में, मेरे सिवा।मेरी पुरानी होती आंखों मेंख्वाब वही बरसों पुराने और तरो ताजा हैंबिना हकीकत में
 
Rajey Sha
May 31 2010 05:53 PM
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आवाज दूं समन्दर को

अर्थों के किनारों तकनहीं पहुंचती बहुत सी लहरें।आंखों की गलियों केबादल, बारिश से ये रिश्ते थेउन बूंदों के नाम नहीं थेइन्हें आंसू कहा,जो कभी झरते थे,कभी रिस्ते थे।क्या कहते हैं उस अन्तर को?सीने में फैली बाढ़बहुत सी दीवारें तोड़ती हैमोड़ती है मेरा
 
Rajey Sha
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मौत से निपटने के कई रास्ते हैं।

रेलवे ट्रेक के किनारेकुछ मजदूर मशीनों से निकले बड़े बड़े पत्थरों कोछोटे चौकोर अलंगों में तराशते हैंये लोग मूर्तिकार जितने पारंगत नहीं होतेइन लोगों को केवल उन चोटों का पता होता हैजिनसे किसी बड़े पत्थर का एक नियत आकार का हिस्साचैकोर हो जाता है।जबकि मूर्तिकार
 
Rajey Sha
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जालिम तेरी अंगड़ाई का क्या है

दीवारें-पर्दे-धागे, मंच-दर्शक परायेकठपुतलियों की खुदाई का क्या हैकर दिखाने-मर दिखाने में, गुंजाइश हैवरना केंचुओं की लड़ाई का क्या हैमुझमें ही कुछ तूफान उठें हैंजालिम तेरी अंगड़ाई का क्या हैअपनी ही नस चढ़ जाये तो दर्द हैलाख हो पीड़ पराई का क्या हैराधा ही
 
Rajey Sha
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May 15 2010 01:04 PM
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दिल्लगी की मुश्किल

मुझको ये ईनाम मिला है, उस संगदिल की महफिल से‘‘दीवाना इक’’ नाम मिला है, उस संगदिल की महफिल सेडूबा, ये गम लेकर दिल में, कोई किनारा नहीं रहासारा नजारा देखा उसने, चुपचाप खड़े हो साहिल सेजिस पर की कुर्बान जान, भूला वही अनजान जानहँस हँस के बातें करता है, महफिल
 
Rajey Sha
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रोने गाने की आवाजें भी, कानूनों में ढलवाओगे ?

गहरी-गहरी बातें करना, शगल बड़ा बेरूखा हैपिछले पहर के सन्नाटों में, खुद को तन्हा पाओगेजख्मी यादें, मीठी छुरियां और रिश्ते अनजाने सबढली जवानी के सायों में, तुम भी गुम हो जाओगेरात अंधेरी, हाथ ना सूझे, लोग नींद में चलते हैंकिससे-किससे बच के चलोगे, कदम-कदम
 
Rajey Sha
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Ajnabi

  उमाकांत मालवीयझण्डे रह जायँगे, आदमी नहीं,इसलिए हमें सहेज लो, ममी, सही ।जीवित का तिरस्कार, पुजें मक़बरे,रीति यह तुम्हारी है, कौन क्या करे ।ताजमहल, पितृपक्ष, श्राद्ध सिलसिले,रस्म यह अभी नहीं, कभी थमी नहीं ।शायद कल मानव की हों न सूरतेंशायद रह
 
Rajey Sha
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शार्टकट कहीं नहीं ले जाता

सभी शार्टकट पर हैंजिन्दगी का मक्सद समझ ना आये तो मैकाले सम्मत पढ़ाई करोवैज्ञानि‍क, नेता, इंजीनियर, अभिनेता, विक्रेता बनोबेच दोआत्मा तक।ये आत्मा ही तो सबसे बड़ी परेशानी है।एक अजनबी बीवी ले आओअजनबी बच्चे पैदा करो    अजनबी रहो ताउम्र बहुत
 
Rajey Sha
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रूठ गये गर तुम ही मुझसे, कहो फिर मेरी ठौर कहां है

चि‍त्रांकन : राजेशारूठ गये गर तुम ही मुझसे, कहो फिर मेरी ठौर कहां हैगले लगाया तुमने ही तो, मेरे जलन भरे सीने कोतेरे ही तो होंठ हैं प्यासे, मेरे सारे गम पीने कोदर्द भरी धड़कने मैं जी लूं, मुझमें इतना जोर कहां है।रूठ गये गर तुम ही मुझसे, कहो फिर मेरी ठौर
 
Rajey Sha
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फिर से सोचिये।

देश, धर्म, लोक-परलोक कुछ नहीं बस सोच है,इन सोचों में बंटा-बंटा क्या है? फिर से सोचिये।दुख आयेगा, डर लायेगा, दर्द के बादल छायेंगेहर सुख के बाद घटा क्या है? फिर से सोचिये।दुश्मन रोज मिला करता है, रखता खोज-खबर अपनी,दोस्त के दिल में घटा क्या है? फिर से
 
Rajey Sha
May 01 2010 06:05 PM
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पारदर्शिता

हर आयी हुई सांसबस पल भर ठहर कर सीने मेंफिर कुछ नया लेनेआकाश में जाती है!हमारे मशीनी जिस्म काहमेशा ताजा जिन्दा रहने का यह अनूठा कुदरती तरीका हैफिर पता नहीं क्योंमैंहर शामधुंधली रोशनी मेंगुजश्ता अहसासों के जहरीले जंगलों में क्या ढूंढता हूंमैंने सांसों को
 
Rajey Sha
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क्‍या ऐसा प्‍यार आप नहीं चाहेंगे

-------------x---------------------------------x-------------- Find more videos like this on Krishnamurti Networkराजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
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उदासियों के सागर को, तेरा दामन किनारा था

जिन्दगी फकत तेरी मोहब्बत का सहारा थावर्ना क्या था मैं, क्या ये दिल बेचारा थाजब कभी उम्रों के गम से, आजिज हम आयेउदासियों के सागर को, तेरा दामन किनारा थालोगों से सुना था- माजी में जीना मुर्दानगी हैतेरी यादों से ही रोशन, मेरा किस्मत सितारा थाकयामत बाद मुझसे
 
Rajey Sha
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दिल में बैठा डर कोई था

गमजदा थमी धड़कने, धुंधली उम्मीदें, सोग हैंऔर क्या किसे देखते, अपने ही जैसा हर कोई थारोज रात को लौट के, जाना ही होता है वहांमौत की राहें अजब, वैसे किसी का ना घर कोई थाजब भी बुरा सा कुछ हुआ, वो लफ्ज लब पर आ गयानहीं खुदा सा नहीं कोई, था... दिल में बैठा डर
 
Rajey Sha
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Ajnabi

डायबिटीज, ह्रदय रोग, पक्षाघात, एडसनहीं यही बीमारियां नहीं होतींवो क्या है जो हमें मजबूर करता हैजिन्दगी भरउन खुराफातों के लिएजो कभी तो हम चाहते हैंकभी नहीं चाहते हुए भीसम्पन्न करते हैंजैसे नौकरी, जैसे ब्‍लागि‍न्‍गगहरी नींद हैगहरा आलस हैऔर ‘मैं’ जकड़ा ही
 
Rajey Sha
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असल मुददा

जमाने का अजब ढब हो गया है,मुददे उठाना ही मुददा हो गया हैकि‍से खबर असल मुददा क्‍या है?असल मुददा तो कहीं खो गया हैराजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
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आदमी और होश

आदमी से होश संभलता नहीं हैलाखों योनियो से गुजरा हुआ इंसानदेवत्व से आती आवाजों से और भी परेशान हो जाता हैऔर तब निराशा उन्माद लाती हैएक गहन बेहोशी में जाने की बेताबीत्रिशंकु स्वर्ग न मिल पाने के तथ्य से घबराकरकई बार धरती की ओर कूदता हैवो चाहता है कि वो उस
 
Rajey Sha
Apr 08 2010 12:50 PM
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लोग चुप नहीं बैठते

लोग चुप नहीं बैठतेउन दिनों भीजब नर्क की यातनाएं भोगते हैं।जब मुंह अंधेरे, रोज सुबह शामकिसी काली पैसेंजर ट्रेन में डेढ़ घंटे तकअपने ही जिस्म से बलात्कार करते हैं।और फिर दसियों घंटेकिसी बनिये की दुकान परसामान यहां से वहां रखते हुएगंध छोड़ते हुए
 
Rajey Sha
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दृष्टिकोण

 किसी भी स्त्री को सर्वोत्तम पति या जीवनसाथी के रूप में मिलने वाला पुरूष एक पुरातत्ववेत्ता हो सकता है, क्योंकि जैसे जैसे वो स्त्री पुरानी होती जायेगी पुरातत्ववेता की रूचि उसमें बढ़ती जायेगी।- अगाथा क्रिस्टीयाद रखिये सुन्दरता अन्दर से आती है - बोतल के
 
Rajey Sha
Apr 01 2010 07:34 PM
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इच्छाओं की बन्द जेल में

जब भी चला तेरी याद का मौसम, भरी दोपहरी रात हुईमयखाने की गलियां जागीं, दुनियां के गम की बात हुईआंखों से खामोशी बोली, आहटों ने अचरजता घोलीइच्छाओं की बन्द जेल में, कई सलाखें डर के डोलींसपनों के रैन बसेरे छूटे, सूर्य किरनों में भ्रम सब छूटेदेह रसायनों के
 
Rajey Sha
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जे. कृष्णमूर्ति जी का परि‍चय

जे. कृष्णमूर्ति जी के संक्षि‍प्‍त परि‍चय के लि‍ये क्‍ि‍लक करें-http://jkrishnamurthyhindi.blogspot.com/राजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha
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कल, आज और कल - 1

रामकुमार कृषक कवि‍तान छल होता न प्रपंचन स्वार्थ होता न मंचन चादर होती न दाग़न फूस होता न आगन प्राण होते न प्रणन देह होती न व्रणन दुष्ट होते न नेकन अलग होते न एकन शहर होते न गाँवन धूप होती न छाँवअगर हम जानवर होते===================रघुवीर सहाय
 
Rajey Sha
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तेरे जाने के बाद

तेरे जाने के बाद कोई सावन नहीं आयाना उन गलियों में, ना मेरे दिल की बस्ती मेंतेरे जाने के बाद, सागर के किनारे शोर करते रहेकितने मंजर तरते रहे, यादों की कश्ती मेंतेरे जाने के बाद, बारहा ये सवाल आयाबारहा मलाल आया, क्या कम है मेरी हस्ती मेंतेरे जाने के बाद,
 
Rajey Sha
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तुमसे बातचीत

मैंने तो खूब चाहा थाकि आज रात... चांद से बोल-चाल बंद रखूं।पर, तुमने आज भी चेहरा छिपा रखा थाबेजुबान शब्दों की खामोशी में।मेरे जलते हुए सीने मेंसूरज रोज डूबता है।और हर रात मैं -सुबह तक चांद से बातें करता हूं।कि, कभी तो तुम्हारा चेहरा समझ आयेगाऔर उसके कहे
 
Rajey Sha
Mar 03 2010 06:28 PM
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बेखुदी में भी, मुझे तेरा खयाल रहता है

बेखुदी में भी, मुझे तेरा खयाल रहता हैहो ना हो तू, यहां तेरा कमाल रहता हैक्या हुआ आज जमाना बुरा है मुझसे तोकि गुजरा कल ही इसकी मिसाल रहता हैक्या पता, फिर मिले, जाने कहां, किस सूरत मेंतेरी हर याद को, मेरा दिल सम्हाल रहता हैरोज ही रात महकती, चहकती, दमकती
 
Rajey Sha
Feb 24 2010 01:29 PM
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मेरी आरजू...कमीनी। मेरे ख्‍वाब भी....कमीने....।

एक छोटा सा तथ्य आदमी के चरित्र का सारा बखिया उधेड़ देता है। आज तक के मानवीय इतिहास में हमने देखा है कि कोई भी देश अपने सर्वश्रेष्ठ महानगरों में आधुनिकता और कृत्रिम सभ्यता ही नहीं, उस काल्पनिक नर्क को भी यथार्थ में पालता है जो कि कई धर्मों में सविस्तार
 
Rajey Sha
Feb 23 2010 01:19 PM
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मनुष्य का मशीनीकरण

 जब रेडियो, टी.वी., सिनेमा, कम्प्यूटर आदि दृश्य-श्रव्य के मनोरंजन के साधन नहीं थे आदमी के पास मनोरंजन शब्द के क्या अर्थ थे? यह प्रश्न आज के प्रत्येक मनुष्य को सोचना चाहिये। क्योंकि इसी प्रश्न के उत्तर में मनुष्य के सामने आ खड़ी हुई कई समस्याओं का हल
 
Rajey Sha
Feb 20 2010 12:24 PM
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1411 वो खूबसूरत, आकर्षक, चुम्‍बकीय, रोमांचक अहसास का चेहरा खो ना जाये, आओ इसे बचायें...

बाघ बचाओ, मि‍साल बनाओ।हमारा राष्ट्रीय वन्य जीव जिन्दगी और मौत के संघर्ष में झूल रहा है। एक मोटे अनुमान अनुसार 19वीं सदी में बाघों की आबादी 40,000 थी जो 20वीं सदी और अब तक घटते-घटते 1411 पर पहुंच गई है। इस हिसाब से बुरे आदमी की हवस और भले इंसानों की
 
Rajey Sha
Feb 17 2010 10:57 AM
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वो झुकी निगाह

उस झुकी निगाह को, इंकार कैसे करते हमयाद रही है जन्म भर, फिर वो झुकी निगाहजब्त कर के चाह को, आह भर कर रह गयेमर गये उस लम्हे में, न कभी उठी निगाहजमाना भर हमदर्द था, दर्द ना वो कभी मिटाजिसने हमको देखा बोला, कैसी लुटी निगाह?सिसकियां जीते रहे, हिचकियों में
 
Rajey Sha
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आदमी कैसे कैसे जीना सीख गया है

पाना-खोना झूठा, छोड़ के जानी दुनियांफिर भी कितने ख्वाब संजोना सीख गया हैआदमी कैसे कैसे जीना सीख गया हैधो धोकर पीता है चरणरज मक्कारों कीजहर भी, और बहुत कुछ पीना सीख गया हैआदमी कैसे कैसे जीना सीख गया हैचौराहों पर मौतों से कोई फर्क नहीं हैआदमी, कितने आतंकों
 
Rajey Sha
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Feb 09 2010 05:57 PM
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द्वैत

देह में ऊपर से नीचे तक द्वैत हैया, संतुलन बैठाने की कोशिश।बुद्धि के दो पक्ष हैं।आंखें दो हैं,कि उल्टा और सीधा सब देखें।दायां और बांयां सब देखें।बोलों की तालियां बजाने के लिएदो अधर।संसार को गतिमान रखतीदो तरफ भुजाएं।दो कंधे।ह्रदय के भी दो वाल्व हैं।दो
 
Rajey Sha
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बुरा लोग मानेंगे

संभल के चल, जो हुई खता, बुरा लोग मानेंगेबुरे को भी, जो बुरा कहा, बुरा लोग मानेंगे‘‘जर्रा-जर्रा यहां खुदाई’’, दुनियां कहती हैतूने खुद को खुदा कहा, बुरा लोग मानेंगे‘‘कायदे से बात कर’’ सभी लोग कहते थेतो कहा नहीं मैंने कायदा, बुरा लोग मानेंगेमिलें कभी तो
 
Rajey Sha
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सब का सब सच्चे जैसा था

खुद ही दिल में आग लगाईखुद नैनों की नींद उड़ाईहम तो सबकुछ भूल गये थेआप उन्हीं ने बात बताईबदनाम हमें क्या करती दुनियाखुद कालिख ले माथे लगाईसब का सब सच्चे जैसा थाजो भी झूठा दिया दिखाईसब मेरी ही चुनी हुई थींपड़ी जो कड़ियॉं मेरी कलाईजमाने भर की जलन थी जो भी आन
 
Rajey Sha
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पाकि‍स्‍तान में महि‍लाओं के बुरे हाल,

ये अलग बात है कि‍ हम भारत में हुए ऐसी दुर्घटनाओं अपराधों की तस्‍वीरें नहीं प्राप्‍त कर सके । This is really horrible. Faces of these women were mutilated by acid, and this is the work of bastards who call themselves men. This is such a strange way of
 
Rajey Sha
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