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सुना आपने...

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31 Dec 2009
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तस्वीरों में सैर संडे बुक बाजार की

इस संडे सुबह उठा, तो किताबों से मिलने का मन हुआ। बस कदम चल पड़े दरियागंज की ओर। साथ में कैमरा भी हो लिया। उस मुलाकात में जो कुछ हुआ...पेश है... ऐसी ही कुछ मुलाकातें और हैं...अगर आपको ये पसंद आईं, तो उनसे भी मिलवाऊंगा। (बिना अनुमति तस्वीरों का प्रयोग
 
विवेक
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क्यों रहें हम भारत के साथ!

श्रीनगर…शाम का वक्त...हसीन गुदगुदाती सी ठंड...डल लेक का किनारा...और मोहब्बत? सही सीक्वेंस तो यही बनता है...लेकिन ऐसा था नहीं... श्रीनगर…शाम का वक्त...नवंबर की हसीन गुदगुदाती सी ठंड...डल लेक का किनारा...बंदूकें...और उन्हें थामे हरी वर्दी में घूमते फौज
 
विवेक
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प्लीज, 'जेल' के सीन सेंसर न करो

एक फिल्म आनेवाली है...जेल...सुना है मधुर भंडारकर की इस फिल्म पर सेंसर ने बेरहमी से कैंची चलाई है । 7 सीन काट डाले हैं। इनमें कुछ न्यूड सीन हैं और कुछ जेल की वीभत्स जिंदगी दिखाते हैं...नहीं काटने चाहिए थे जेल वाले सीन...लोगों के सामने सच आना चाहिए। कि
 
विवेक
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मेरी नींद तो लौटाता जा, कम्बख्त!

बज रहे हैं अंधेरा बस समेटने ही वाला है रातभर की कमाई। बांध लेगा अपनी पोटली में घबराहट से टूटे खिड़कियों पर टंगे सपने। परदों से झांककर चुराई मोहब्बत में भीगी चादरें। उनीदें सीनों पर औंधी सोई पड़ी किताबें। रजाई के अंदर जारी मोबाइल फोन्स की खुसर-फुसर। द
 
विवेक
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तुमने राम को अपनाकर सही नहीं किया गांधी

हे गांधी बाबा मैं तुम्हें बहुत मानता हूं। फिर भी, जब मायावती ने तुम्हें नाटकबाज़ कहा, तो मुझे ज्यादा दुख नहीं हुआ। हो सकता है नाटकबाज एक कड़वा शब्द हो, लेकिन यह कड़वाहट इसके अर्थ की गंभीरता को कम नहीं कर सकती। ऐसा नहीं कि तुमने जो कुछ भी किया, वह एक
 
विवेक
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कल 'मुल्लों' को किसी ने देशद्रोही नहीं कहा

चैंपियंस ट्रोफी में कल गजब का दिन था...सब ‘मुल्ले’ पाकिस्तान की जीत के लिए दुआ कर रहे थे...और सब ‘ना-मुल्ले’ उस दुआ में शामिल थे...वही ‘ना-मुल्ले’, जो ‘मुल्लों’ को पाक की जीत के लिए दुआ करने का अपराधी घोषित करते हैं...और सजा भी तय करते हैं...देशद्रोह
 
विवेक
Oct 01 2009 04:45 PM
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काजल की करारी टिप्पणी, क्षमा का समर्थन और मेरा जवाब

मैंने लिखा था – पुलिस अफसरों का महान सुझाव, हमें खराब हथियार दो। इस बहस को काजलजी और क्षमाजी को बहुत सलीके से आगे बढ़ाया है। उन्होंने काफी तर्कपूर्ण टिप्पणियां की हैं। लेकिन मैं उनका जवाब देना चाहूंगा...काजल जी कहते हैं..जब पुलिस को अत्याधुनिक साजो-सामान
 
विवेक
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Sep 25 2009 04:00 PM
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पुलिस अफसरों का महान सुझावः हमें खराब हथियार दो

दिल्ली में देश के सबसे बड़े पुलिस अफसरों का सम्मेलन हुआ। वे लोग देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए फिक्रमंद हैं। इसी की बेहतरी के लिए बातचीत हो रही है। इसी बातचीत में एक सुझाव आया है। देश के सबसे बड़े (और बहादुर?) पुलिस अफसरों की तरफ से आया यह
 
विवेक
Sep 18 2009 04:04 PM
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डर जाओ, अब वह मरने के लिए तैयार है

-------------------------------------------------------------सुना तुमने,इस बार उसने मुंह चिढ़ाती भूख कोधमकाकर भगा दिया है।हालात के पंछीउसके घर के सामने वाले बरगद पर नहीं हैंआज सुबह से।कल रात से मजबूरियां भी रोती सुनाई नहीं दीं।बताते हैं, कई रोज हुएसूख
 
विवेक
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Sep 11 2009 04:16 PM
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जसवंत की किताब से रोक हटी, लेकिन विरोध जारी रहे

जसवंत सिंह किताब से गुजरात में पाबंदी हटा दी गई है। कोर्ट की दखलअंदाजी से ही यह संभव हुआ। नहीं तो फासीवादियों से तो यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी। फिर भी, बधाई। उन सभी को, जो लोकशाही में भरोसा रखते हैं। आजादी में भरोसा रखते हैं। लेकिन फासीवाद का विरोध
 
विवेक
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बीजेपी लोकशाही पर चले या भौंकशाही पर, बुक पर बैन नहीं चलेगा

बीजेपी जसवंत सिंह को निकाले या गले में डाले, मेरी बला से। उनकी पार्टी में लोकशाही है या भौंकशाही, यह भी वे आपस में ही समझें। पार्टी आरएसएस की तान पर नाचती है या आरएसएस पार्टी को जांचती है, मुझे कोई मतलब नहीं। मैं किताब पर बैन सहन नहीं कर सकता।बीजेपी के
 
विवेक
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सिस्टमः भौंकना कुत्तों का फर्ज रहे

सूनी अंधेरी गली मेंरात को भौंकते कुत्ते क्या आपकी नींद खराब करते हैं?नींद उचट जाने के बावजूदआपको लगता होगासूनी अंधेरी गली में रात को भौंकते कुत्ते प्रतीक हैं उस अनजान साये काजो उन्हें अंधेरे में नजर आ रहा है।तब नींद की जगहआंखों में उमड़ पड़ता होगा
 
विवेक
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एक महान लेखक की बे-मौत...

कोर्ट मार्शल का नाम सुना है आपने? मशहूर नाटक कोर्ट मार्शल? क्या आप जानते हैं कि इस महान और मशहूर नाटक को लिखने वाला करीब तीन साल से लापता है? 2 जून 2006 की सुबह दीपक मॉर्निन्ग वॉक के लिए निकले। फिर नहीं लौटे। आज तक। अभी अंबाला में उनके कुछ दोस्तों से
 
विवेक
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कत्ल से पहले बहनें...बहनों के कत्ल के बाद

गांव से लौटा हूं...हरियाणा के गांव से...उसी हरियाणा के गांव से जहां लड़कियों का कत्ल जारी है...इज़्ज़त की बलिवेदी पर...कत्ल से पहलेबहनें सुबह हैंसुबह की चौखट पर फुदकती चिड़िया हैंचिड़िया के परों पर ओस का कतरा हैंकतरे के भीतर गीली रोशनी हैंरोशनी का फैलता
 
विवेक
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सच का सामनाः कहीं यह गेम शो हमें डरा न दे

क्या कभी आपने पति का कत्ल करने की सोची...क्या आपकी कोई नाजायज़ औलाद है...क्या आपको लगता है कि आपकी बीवी आपसे ज्यादा आपके पैसे से प्यार करती है...ये सवाल हैं स्टार प्लस के गेम शो ‘सच का सामना’ से...निजी हैं...बहुत मुश्किल हैं...डरावने हैं...कौन होगा ज
 
विवेक
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गाय का गोश्त और हड्डियां मेरी चौखट पर फैला दीं

नए घर में तीसरी या चौथी सुबह देखा कि चौखट के पास गाय का गोश्त और कुछ हड्डियां फैलाई गईं थीं। यह सिर्फ शरारत नहीं थी। मोहल्ले के कुछ उत्साही लड़कों द्वारा विरोध और गुस्से का प्रदर्शन था कि मैं मकान छोड़कर भाग जाऊं।” गुलशेर खां शानी यानी एक ‘मुस्लिम हि
 
विवेक
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सोमा की टिप्पणी पढ़ने लायक है

अपनी पिछली पोस्ट हिंदू बच्चे का मुस्लिम नाम...हाय राम में मैंने एक दुआ मांगी थी। आप सभी साथियों ने उस दुआ के लिए हाथ उठाए थे...लेकिन सोमा वैद्य उससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका मानना थोड़ा अलग है। सहमति-असहमति से परे, उनकी टिप्पणी पढ़ने लायक है... ब
 
विवेक
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हिंदू बच्चे का मुस्लिम नाम...हाय राम !

मुझे नहीं पता था कि यह ‘अपराध’ है। मैंने तो बस एक नाम सुझाया था...वे एक मीनिंगफुल नाम चाहते थे...आजकल यही फैशन है ना...नाम का अच्छा सा मीनिंग होना चाहिए...नाम बोलते हुए चाहे जबान टेढ़ी हो जाए...और मीनिंग भी ऐसा निकलेगा कि उसका भी मीनिंग पूछना पड़े...
 
विवेक
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एक चुराई हुई कविता...

यह कविता मैंने चुराई है उस फटे-पुराने बूढ़े से जो मदरडेयरी के पुल पर सड़क किनारे छतरी ताने बैठा रहता है, एक मैले से चादरनुमा कपड़े पर पान-मसाले के पैकिट बिछाए। चिलचिलाती धूप और तेज़ बारिश में उसकी छतरी के छेदों से अक्सर झरती है...कविता। यह कविता मैंन
 
विवेक
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क्या कोई अपने बच्चे का नाम रावण रखेगा?

अजीब सवाल है ना ! रावण, हिटलर, कुंभकर्ण, विभीषण, शकुनि, दुर्योधन, कंस, मेघनाद...मैं कभी इन नामों वाले किसी शख्स से कभी नहीं मिला। पापा की पीढ़ी में, अपनी पीढ़ी में और मेरे बाद आई पीढ़ी में भी मैंने अब तक किसी ऐसे शख्स को नहीं देखा, जिसका नाम रावण हो।
 
विवेक
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आखिरी आदमी का गीतासार

देखा तुमने! हवा कैसे हमें बिना छुए बढ़ गई ! पसीने में भीगे बदन की गंध अब उसे पसंद नहीं। सड़क भी दौड़ पड़ी हमारे नंगे पांवों तले से निकलकर रबर के टायरों और नर्म ब्रैंडेड जूतों की चाह में। हमारे मुफ्त के आराम के डर से पेड़ों ने छिपा ली है छांव, महंगे र
 
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नई भर्तियां चालू आहे...

बहुत से लोगों ने इस बात को अतिसरलीकरण कहकर खारिज कर दिया है। उनकी बात भी गलत नहीं। वाकई चीजें इतनी सरल नहीं होतीं। कुछ तो वजह होगी ही कि सरकार ने आज तक कोई फैसला नहीं किया। फिर भी मैं एक अनुभव आप लोगों से बांटना चाहता हूं, जो निष्कर्ष भले न हो, संकेत
 
विवेक
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'हम'...जो औरतों को नंगा घुमाते हैं

फिर एक औरत को नंगा करके गांव में घुमाया गया। सजा के तौर पर। उसका अपराध ही इतना ‘घिनौना’ था कि इससे कम तो सजा क्या मिलती! लड़की को भागने में मदद की। पता नहीं लड़की को भगाया गया या वह ‘प्यार के चक्कर’ में खुद ही चली गई, लेकिन औरत ने किया है, तो ‘अपराध’
 
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अंडरवेयरवाले क्यों चिल्ला रहे हैं, वोट दो...वोट दो

कल टीवी पर देखा...अब अंडरवेयर बनाने वाले भी वोट डालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सब कर रहे हैं। चाय वाले, फिल्म वाले, प्रॉपर्टी वाले, क्रिकेट वाले...सब...चुनाव आयोग वालों को तो खैर इस बात की तन्ख्वाह मिलती है। बाढ़ आ गई है प्रेरणाओं की और प्रेरणा देन
 
विवेक
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एक कविता पंखों वाली

एक कविता पंखों वाली उड़ मुंडेर आ जाती है खिलती खुलती हिलती डुलती दर्द दर्द सा गाती है गीले सूखे भूखे रूखे माने रूठे सच्चे झूठे जीवन से जो शब्द हैं टूटे उनको चुनकर लाती है एक कविता पंखों वाली उड़ मुंडेर आ जाती है आंख से झरती हाथ पे गिरती गुनती बुनती स
 
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चड्डियों की बहस से अनजान

सुना आपने वैलंटाइंस डे सजधज कर तैयार है। जंग भी अपने चरम पर है। आजादी के दीवानों की और कल्चर के ठेकेदारों की। मुझे यह बहस कभी समझ नहीं आई। जब भी मैंने इस बहस के बारे में सोचा, मुझे छत्तीसगढ़ के उस छोटे से गांव में मिली 'वह' और उसकी बेटी याद आ गई। उसक
 
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बहुत शुक्रिया शनिदेव...

सुना आपने... आज शनिवार है...सुबह होते ही हजारों बच्चे सड़कों पर निकल पड़े...हाथ में लटकते बर्तन...बर्तन में तेल...और तेल में डूबे लोहे के पतरे...इस लोहे के पतरे को लोग शनिदेव कहते हैं...पूजते हैं...ट्रैफिक लाइट्स और जहां-तहां उग आए शनि मंदिरों के साम
 
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मेरे लिए बच्चा पैदा कर दो, प्लीज

सुना आपने बिल्कुल सच्ची बात है...सुनीता मां बन गई है...सुनीता फिर से मां बन गई है...सुनीता का सुनीता होना अहम नहीं है...कोई भी हो सकती है...लड़कियां भले ही कम हों, मां बनने वाली लड़कियों की हमारे यहां कोई कमी नहीं है...वैसे जिस दर से हमारे यहां बच्चे
 
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प्रेजिडंट पाटिल आप महान कैसे हैं...

सुना आपने....राजपथ पर पहली महिला प्रेजिडंट की सलामी ने इतिहास रच दिया...कितना आसान है इतिहास रचना... दिल्ली के राजपथ पर उस बड़ी सी तोप का मुंह जब एक महिला प्रेज़िडंट की ओर झुका तो वक्त रुका और इतिहास तुरंत ले आया अपनी पोथी एक और नाम दर्ज करने के लिए।
 
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चलती बस में खड़ी लड़कियां

सुना आपने...आज बालिका दिवस है...क्यों है?) दिल्ली की चलती बस में खड़ी लड़कियां बहुत इंटेलिजेंट होती हैं वे अच्छी तरह समझती हैं चेहरों की जबान, आंखों के इशारों को ट्रांसलेट करना उनके बाएं हाथ का खेल है, माल, पटाखा और बम जैसे शब्दों के अर्थ उन्हें अच्छ
 
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अस्पतालः उदासियों की भीड़ और उम्मीदों का मजमा

सुना आपने अस्पताल में था...तीन दिन और दो रात का स्टे...फ्री नहीं था...सीजनल डिस्काउंट भी नहीं था...मेडिक्लेम वालों के पास भी सौ बहाने हैं पैसे न देने के...22-23 इजेक्शंस, 12-15 टेबलेट्स, दो उनींदी रातें और कई हजार देकर किसी तरह पीछा छूटा...डॉक्टर तो
 
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कोई मेरे मोहल्ले को बचा लो, प्लीज...

सुना आपने सत्यम ढह गई...मुझे उसकी फिक्र तो है...लेकिन... इस बार घर गया...तो डर गया...मेरा मोहल्ला बर्बादी के कगार पर है...मेरे छोटे से शहर का बड़ा सा मोहल्ला...सबसे अमीर मोहल्ला...तीन-साढ़े तीन सौ घर...कहते हैं इस मोहल्ले के घर शहर में सबसे अच्छे हैं
 
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साथियों के कटते हाथ देखकर...

सुना आपने स्पेशल ईकॉनॉमिक ज़ोन (सेज़) के नौ नए प्रस्ताव आए हैं। वाह भई वाह...क्या मंदी है...लोगों की नौकरियां जा रही हैं...पर सेज के लिए सब ठीक है....असल में कसूर हमारा ही है.... अब तक तुम चुप रहे और तुमने देखी इतिहास की दोहराई आधुनिक टॉमस रो का श्वे
 
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साल के पहले दिन ब्लॉगर से झगड़ा

सुना आपने साल के पहले ही दिन मेरा झगड़ा हो गया मेरे भीतर बैठा ब्लॉगर अड़कर खड़ा हो गया बोला, क्यों लिखा जाए हर बवाल पर जाओ मैं नहीं लिखता नए साल पर मैं हैरान परेशान उसे मनाने लगा नए साल पर लिखने के फायदे बताने लगा भाई, आज तो अग्रीगेटर्स पर दिखना होगा
 
विवेक