अन्नू आनंदनिरूपमा किसी गांव, बस्ती की रहने वाली कम पढ़ी लिखी या अशिक्षित परिवार की बेटी नहीं थी। देश की राजधानी में दिल्ली में रहने वाली, आथर््िाक रूप से संपन्न और बुद्विजीवी कहलाए जाने वाल व्यवसाय पत्रकारिता से संबंधित थी। ऐसे में अगर उसके प्रेम विवाह की
अन्नू आनंद मुलायम सिंह कहते हैं कि अभिजात्य वर्ग की महिलाओं के संसंद में आने से छेड़खानी की घटनाएं बढ़ेंगी। उन का कहना है कि बड़े घर की महिलाओं के संसंद में आने से लोग सीटियां बजाएंगे। महंत नृत्यगोपाल दास का कहना हैं कि महिलाओं को अकेले मंदिर, मठ या देवालय
अन्नू आनंदपिछले कुछ समय से महाराज, बाबाओं और गुरूओं के काले कारनामों का भण्डाफोड़ हो रहा है। एक के बाद एक फर्जी गुरू की असलियत खुल कर सामने आ रही है। पिछले कुछ सालों से अपने को संत, महात्मा बता कर लोगों के साथ छल करने वाले बाबाओं की संख्या बढ़ी है। हकीकत
अन्नू आनंदबेहद जद्दोजहद के बाद राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल तो पारित हो गया। लेकिन लोकसभा में यह बिल मौजूदा स्वरूप में पारित होता दिखाई नहीं देता। अब आरक्षण का प्रतिशत घटाने का दबाव बना कर सहमति बनाने की कोशिश चल रही है। हांलाकि सरकार बार-बार मौजूदा
अन्नू आनंदमीडिया वही दिखाता या छापता है जो लोग देखना या पढ़ना चाहते हैं। यह कथन बार बार दोहराया जा रहा है। लेकिन क्या सह सही है? किसी भी प्रोडेक्ट के लांच से पहले जिस प्रकार मार्किटिंग सर्वे की जाती है इन दिनो शायद मीडिया भी अपने ‘प्रोडेक्ट’ यानी चैनल या
अन्नू आनंद उदारीकरण की शुरूआत के करीब दो दशकों के बाद ग्लोबलाइजेशन के दौर में महिलाओं की स्थिति का आकलन करते हुए ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ की कहावत याद आती है। यानी यूं कहें कि मुक्त बाजार व्यवस्था ने महिलाओं को दिया कम पर लिया अधिक तो गलत नहीं होगा।
अन्नू आनंद जलवायु बदलाव के गहराते संकट से निपटने के लिए कोपेनहेगन में शिखर वार्ता शुरू हो चुकी है। सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन को लेकर विभिन्न देशों की उचित जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। क्या सम्मेलन में किसी तार्किक फैसलों पर सहमत
अन्नू आनंद फिरोजपुर झिरका, हरियााणा हरियाणा में मेवात क्षेत्र के सबसे पिछड़े गांवों में से एक गांव नीमखेड़ा। दो-चार जमींदारों के घरों को छोड़कर गांव में सामुदायिक विकास का कोई प्रमुख ंिचन्ह नजर नहीं आता। मेव जाति के इस गांव में अधिकतर लोग अनपढ़ हैं। गांव
अन्नू आनंद राजस्थान के अजमेर जिले के तिहारी गांव की कमला देवी दिखने में किसी भी देहाती महिला से भिन्न नहीं। सिर पर पल्लू; नाक में बड़ी सी नथ और हाथ पावों में चांदी के चमकते गहने। लेकिन वह साधारण महिलाओं की तरह खाना बनान या सिलाई बुनाई की बातों की बजाए
अन्नू आनंद (उदयपुर, राजस्थान) उदयपुर से कोई 55 किलोमीटर दूर आदिवासी क्षेत्र के गांव डूंगरीकलां की प्रतापी छोटी सी झुग्गी में अपनी एक माह की बेटी के साथ खेल रही थी। प्रतापी की यह चैथी संतान है। पिछले तीन बच्चों को जन्म देने के समय उसे कई प्रकार की तकल
अन्नू आनंद मुज़फ्फरपुर, बिहार तीस वर्षीय चंद्रा देवी चार साल पहले तक कभी घर से बाहर नहीं निकली थी। घर के चूल्हे चौके और अन्य खेती के कामों में खटने के बाद उसे घर के छोटे-मोटे खर्च को पूरा करने के लिए तरसना पड़ता था। उस का पति खेती का काम करता लेकिन उसक
बज्जू राजस्थान नीले रंग का घाघरा, चेाली और सिर को आगे तक ढकती लंबी चैढ़ी ओढ़नी, माथे पर बड़ा सा बोर (टीका), सफेद चूड़ियों से आधी से अधिक भरी दोनों बाजू। राजस्थान के छोटे से गांव बज्जू की 36 वर्शीय धापू बाई ने कभी सोचा भी न था कि निरंतर सूखे से जूझती उसकी
अन्नू आनंद (उदयपुर, राजस्थान ) दक्षिण राजस्थान के आदिवासी अचंल उदयपुर में स्थित सेंट्रल पब्लिक सीनियर सैकेण्डरी स्कूल (सीपीएम) की सांतवी कक्षा का अजीब नजारा था। कक्षा में मौजूद सभी 40 छात्र अपने-अपने कंप्यूटर पर भूगोल विशय के अध्याय ‘पृथ्वी और चट्टान
आदिवासी बच्चों के भविष्य की उम्मीद अन्नू आनंद (कठिवारा (झाबुआ) मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले झाबुआ में कठिवाड़ा एक विषेश प्रकार का गांव है। कस्बों की गहमागहमी से दूर, विकास से अछूता यह गांव चारों तरफ से पहाड़ियों और जंगलों से घिरा है। सुबह छ
अन्नू आनंद आजादी के राष्ट्रीय संघर्ष में महिलाओं की भूमिका केवल अहिंसक सत्याग्रह आंदोलन तक सीमित नहीं थी उन्होंने उस दौरान भी हथियारबंद क्रांति और समाजिक परिवर्तन में बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया था। स्वदेशी आंदोलन में डा। सरोजिनी नायडू, श्रीमती उर्मिला देवी
अन्नू आनंद पिछले दिनों महिला बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण पर काबू पाने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसके लिए मीडिया में बड़े-बड़े विज्ञापनों के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए शुरू की गई योजनाओं का प्रचार किया गया। महिला बाल विकास मंत्र
इन दिनों स्त्री विमर्श की बहसों में स्त्री के यौन अधिकार पर चर्चाओं ने बेहद जोर पकड़ लिया है। इन बहसों में अक्सर जब मध्यम वर्ग की महिलाओं के अधिकारों की बात होती हैं तो अधिकतर बहसें भू्रण हत्याओं, महिला हिंसा पर थोड़ा ज्ञान बखारने के बाद स्त्री के यौन
अन्नू आनंद पिछले दिनों राहुल गांधी का दलित प्रेम उमड़ा तो उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई गांवों का दौरा कर दलितों के घरों में जाकर उनकी समस्याओं को सुना और समझा। यही नहीं उन्होंने गरीब और दलितों के घर रात बिताने के बाद अपनी पार्टी के नेताओं को भी यही समा
अन्नू आनंद आखिर कामकाजी महिलाओं को घर और दफ्तर की जद्दोजहद से थोड़ी राहत मिली। बड़े शहरों और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलने के बाद सबसे बड़ी चुनौती ट्रेन या बस में यात्रा करने की होती है। इन भीड़ भरी बसों में किसी
अन्नू आनंद दिल्ली सरकार का दावा है कि दिल्ली में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक हो गई है। सरकार के मुताबिक दिल्ली में लड़कियों के अनुपात का आंकड़ा 1004 यानी 1000 लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 1004 हो गई है। जबकि वर्ष 2007 में यह संख्या 848 थी। महज ए
अन्नू आनंद भारत में हर रोज तीन हजार से अधिक बच्चे मर रहे हैं। जानकर विश्वास नहीं होता। अगर साथ में यह जोड़ दिया जाए कि ये मौतें स्वाइन फ्लू या बर्ड फ्लू के कारण हो रही हैं तो मीडिया में हडकंप मच जाएगा। 24 घंटे के चैनल ब्रेंकिग न्यूज के साथ हर कोने से
पिछले सप्ताह प्रभाष जोशी जी के ‘कागद कारे’ कालम में अपने नाम का जिक्र देखकर आश्चर्य हुआ। पत्रकारिता में जाति धर्म की बहस के संदर्भ में लिखते हुए उन्होंने एक स्थान पर लिखा है कि है कि ‘‘कुछ साल बाद एक अन्नू आनंद ने लिखा कि प्रभाष जोशी देखते नहीं कि इंडियन
अन्नू आनंद आखिर यूपीए सरकार ने दुबारा सत्ता में आने के बाद अपना वादा पूरा करते हुए पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। सरकार के इस फैसले की प्रंशसा की जानी चाहिए क्योंकि इससे लोकतंत्र की प्रक्रिया
अन्नू आनंद स्त्री में किसी भी परिस्थिति, वातावरण में स्वयं को ढालने की क्षमता गजब की है। अपनी इस कला में वह इस कदर माहिर है कि इसके लिए वह स्वयं को पूरी तरह भुला देती हैं। खासकर विवाह के बाद वह जिस प्रकार अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को भूलकर एक नया अवतार
अन्नू आनंद कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में सबके लिए अनाज का कानून देने का वादा किया है। घोषणा पत्र में सभी लोगों को खासकर समाज के कमजोर तबके को पर्याप्त भोजन देने देने का वादा किया गया है। पार्टी ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले हर परिवार को कानूनन हर
अन्नू आनंद घर और परिवार दो ऐसे शब्द जो किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा और सुकून का अहसास दिलाते हैं। लेकिन जब घर के अपने, भरोसे और प्यार की दीवारों को गिराकर अपनों को ही प्रताड़ित करने लगते हैं तो यही शांति का घरोंदा इतना हिंसक और घिनौना हो जाता है कि उसमे
Annu AnandDEVLI (Tehri Garwal): About 24 km from Mussoorie one of Uttaranchal’s most enchanting hill stations, is the picturesque little town of Dhanaulti. Situated among lush green forests and surrounded by sky kissing mountains, Dhanaulti has a special
अन्नू आनंद हाल ही में एक हिंदी के मीडिया पोर्टल में हमारी एक पत्रकार साथी ने पत्रकारिता के अनुभवों का वर्णन करते हुए लिखा कि पुरूष वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में लड़कियों के लिए पत्रकार होना एक गुनाह है। उनके निजी अनुभवों का सम्मान करने के बावजूद लेख के
अन्नू आनंद लिखने, बोलने, देखने और सुनने की आज़ादी हर व्यक्ति को प्रिय है। अभिव्यक्ति की यही आजादी किसी भी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। इसी बात की दुहाई देकर हम लंबे समय से इस आजादी का जश्न मनाते आए हैं। यह सही है कि सच्चा लोकतंत्र लोगों को केवल जानने क
अन्नू आनंद वर्श 1993 में संविधान में किया गया 73वां और 74 वां संषोधन ग्रामीण महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मोड़ था। क्योंकि इन संषोधनों ने पहली बार स्थानीय स्वषासन में 33 प्रतिषत महिलाओं को चूल्हे से निकाल कर चैपाल में पहुंचाने का काम किया। यह एक क्रांतिक
अन्नू आनंद मीडिया में आम आदमी से जुड़ी ख़बरें सिकुड़ती जा रही हैं क्योंकि ‘खास आदमी’ आज मीडिया में हावी है। यह खास आदमी नेता, अभिनेता और ग्लैमर की दुनिया से लेकर अपराध जगत का कोई भी व्यक्ति हो सकता है। लेकिन जब आम आदमी की बात की जाती है तो उसका अभिप्रा
अन्नू आनंद पिछला दशक मीडिया के के लिए बदलाव का दशक था। इस दौरान प्रिंट और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। खासकर भाषायी पत्रकारिता में ऐसे बदलाव अधिक देखने को मिले। समाचारपत्रों का स्वरूप बदला। पन्नों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। नए सं
तकनीकी दुनिया का चेहरा नोरती बाई अन्नू आनंद पिछले दिनों उसे भारतीय उधोग परिसंघ यानी सीआईआई ने वर्ष 2007 के लिए भारती पुरस्कार के लिए चुना। यह जानकर बेहद खुशी हुई कि आखिर नोरती की महानू उपलब्धि को पहचान मिली। लेकिन इस खुशी के साथ यह मलाल भी था कि उसकी
अन्नू आनंद करोड़ो रुपए की आर्थिक योजना और वह भी अगर देश के सबसे गरीब तबके से जुड़ी हो तो उसका श्रेय कौन नहीं उठाना चाहेगा। खासकर जब इस श्रेय को वोटों में बदला जा सके तो कोई भी राजनैतिक पार्टी ऐसे अवसर को भुनाने से नहीं चूकेगी। यही कारण है कि पिछले दिनो