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31 Dec 2009
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ना भूलने वाली बात-2

पत्रकारिया के पेशे में आने से पहले जिन्दगी के तमाम रंग हमने देखे है. लेकिन कभी उसे शब्दों में उसे नहीं बाँधा । कुछ अपने अनुभवों को शब्दों में ढाल कर प्रसिद्धि पा लेते है. लेकिन मेरा ऐसा मकसद नहीं है. मैंने अपने एक पोस्ट में ना भूलने वाली बात में छोटा
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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बयानों की बानगी

संजय कुमार नेता-अिनेता. अिनेता-नेता. दोनों ही इनदिनों एक-दूसरे के पूरक हो गये हैं. वह नेता ही क्या, जो अिनेताओं की तरह खड़े मंच पर शब्दों के जाल न फेकें, विलेन को पछाड़ने के लिए हुंकार न रे. वह अिनेता ही क्या, जो कलाकारी के दावं पेंच न सीखें. झूठ
 
sanjay
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इस देश पर हम सबका हक ह

ैसंजय कुमार जो हो रहा है, वह ठीक नहÈ हैण् आज आतंकवाद जैसे कई समस्याओं से हम जूझ रहे हैंण् विघटनकारी शक्तियां सक्रिय हैण् ऐसे में राज्य स्तरीय राजनीति के कारण ऐसा लगने लगा है कि हम एक देश नहÈ, अपितु कई देशों में रह रहे हैंण् ारतीय संविधान में स्पष्ट
 
sanjay
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पत्रकारिता और मै

वर्ष २००१ के आखिरी महीने की बात है मुजफ्फरपुर से दिल्ली आया था शिक्षा के नए आयाम की तलाश में । पता नहीं था आखिरी दौर में पत्रकारिता को ही मंजिल बनाऊंगा । गाँव और शहर के बिच पला मेट्रो शहर की चकाचौंध से दूर इस अनजाने शहर में आ तो आ गया लेकिन क्या करना
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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हवाईकिलाबंदी है तीसरा मोर्चा

संजय कुमार वर्तमान में जिस तरह का राजनीतिक समीकरण उरकर सामने आया है, उससे यह कहना कि वाम समर्थित और अचानक मुख्य केंद्र में आयी मायावती की अगुवाइवाली नवगठित तीसरा मोर्चा किसी कामयाब मंजिल को तय कर पायेगी, संदेहास्पद हैण् दरअसल, इस नये तीसरे मोर्चे का
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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घट रही है समझौता करने की प्रवृित्त

संजय कुमार byline परिवार में बढ़ रहे बिखराव को लेकर सर्वाेच्च न्यायालय की टिप्पणी उल्लेखनीय हैण् यह समाज में बढ़ रहे नैतिक मूल्यों में हृास को इंगित करता हैण् दरअसल, सर्वाेच्च न्यायालय ने 1955 में बने Çहदू विवाह अधिनियम के संदZ में यह कहा है कि तलाक औ
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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क्या है विश्वासमत प्रस्ताव

लोकसा मेेंं जब कोई सरकार अथाZत प्रधानमंत्री यह सिद्ध करने के लिए प्रस्ताव करती है कि उसके पास सदन में आवश्यक बहुमत है और इसके लिए वह मतदान के लिए तैयार है, तो इसे सामान्यतौर पर विश्वासमत प्रस्ताव नाम से जाना जाता हैण् इसमें वोटिंग के लिए केवल लोकसा
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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13 दिनों से चल रही ड्रामेबाजी का हुआ अंत

संसद में विश्वासमत हासिल करने के बाद सरकार बचाने के लिए चली आ रही 13 दिनों की ड्रामेबाजी का अंत हो गयाण ् संजय कुमार byline नयी दिल्ली : दो दिनों की बहस के बाद यूपीए सरकार लोकसा में विश्वास मत हासिल करने में सफल रहीण् लोकसा में लोकतंत्र को लज्जित क
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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खेती, किसान और खाद्य संकट

संजय कुमार byline जीडीपी में —षि की हिस्सेदारी मात्र 18 फीसदी ारतीय अर्थव्यवस्था पिछले पांच सालों से 8ण्5 फीसदी औसत की गति से तेजी से विकसित हो रही हैण् लेकिन यह विकास दर निर्माण उद्योग और बढ़ते सेवा क्षेत्र तक ही सीमित हैण् दूसरी ओर पिछले पांच सालों
 
sanjay
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ारत की खुफिया ढांचा

संजय कुमार b yline राष्टीय सुरक्षा परिषद यानी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ारतीय सुरक्षा परिषद के गठन की बात वर्ष 1980 के विश्वनाथ प्रताप Çसह सरकार के समय से ही चल रही थीण् वर्ष 1998 में पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री केसी पंत की अध्यक्षतावाली टास्क फोर्स
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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मेरा दर्द न जाने कोय

संजय कुमार जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने, लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पायी हैं बांग्लादेश में रह रहे बिहारी मुसलिम समुदाय पर यह बात अक्षरश: उच्चरित होती हैं भारत -पाकिस्तान के बीच जब बंटवारा हो रहा था, तो भारत के उर्दू भाषी सभी बिहारी मुसल
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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महंगाई का हिसाब-किताब

अलग-अलग स्तरों पर चीजों के दाम अलग-अलग होते हैं। सब्जियों के दाम होलसेलर के लिए अलग होते हैं। होलसेलर से खरीदने वाले रिटेलर के लिए दाम अलग होते हैं और रिटेलर से आप जिस कीमत पर सब्जी खरीदते हैं उसमें रिटेलर का मुनाफा भी जुड़ा रहता है। चढ़ती-उतरती कीमत
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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महंगाई

धर्मकीर्ति जोशी प्रिसिंपल इकनॉमिस्ट क्रिसिल 22 मार्च का सप्ताह बीतते-बीतते महंगाई के स्तर में आए 7 फीसदी के तेज उछाल ने सबको चौंका दिया है। भारत और विश्व में तेल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर महंगाई में बढ़ोतरी तो संभावित थी लेकिन 3 ही हफ्तों में यह 5
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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महंगाई और चुनाव-1

राजनाथ सिंह बीजेपी, राष्ट्रीय अध्यक्ष कांग्रेस के शासन काल में हर मोर्चे पर तबाही ही तबाही दिख रही है। मैं समझता हूं अब तक कांग्रेस का वह गरूर जरूर टूट गया होगा कि सिर्फ उसे ही शासन करना आता है। बल्कि यह साबित हो गया है कि उसे शासन करना कतई नहीं आता।
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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महंगाई और चुनाव

महेश रंगराजन राजनीतिक विश्लेषक सत्तारूढ़ यूपीए सरकार को महंगाई के प्रेत ने परेशान कर डाला है। महंगाई की दर ने 22 मार्च के सप्ताह के बीतते बीतते 7 फीसदी का आंकड़ा पार कर लिया और अब वह 7.41 फीसदी तक पहुंच गई है, जो कि पिछले तीन सालों में महंगाई का सबसे
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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फूड क्राइसिस है, लेकिन डर किस बात का

भारत डोगरा युनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी जनरल बान की मून ने हाल ही में चेतावनी दी कि दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और भूख तथा कुपोषण की समस्या विकट हो रही है। मार्च महीने के अपने संदेश में उन्होंने कहा कि गेहूं, चावल और मक्
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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संसाधनों के पर्याप्त दोहन की जरूरत

शेलोम सिमखोन पिछले दिनों मुझे भारत को देखने का मौका मिला। मैं यहां पहली बार आया था। यह एक सद्भाव यात्रा थी, जो कृषि मंत्री शरद पवार की इस्त्राइल यात्रा के जवाब में आयोजित की गई थी। अपनी इस यात्रा के दौरान मैंने यहां के कुछ राज्यों और वहां हो रही खेती
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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महंगाई के नाम पर

राजेंद्र शर्मा बेलगाम हुई महंगाई से यूपीए सरकार के चेहरे पर चिंता की गहरी लकीरें पड़ गई हैं। बेशक ऐसा न होता तो हैरानी की बात होती। खुद प्रधानमंत्री ने फिक्की की सालाना बैठक के अपने उद्घाटन भाषण में यह स्वीकार किया था कि गरीबी की मार आम आदमी पर ही ज्
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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अमेरिकी मंदी से डरना कैसा?

भरत झुनझुनवाला अमेरिका में मंदी गहराती जा रही है। वहां के बैंकों को लगातार घाटा हो रहा है। मंदी से छुटकारा पाने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में भारी कटौती की है। लेकिन इकॉनमी डूबती ही जा रही है। सवाल यह है कि क्या भारत भी उसकी चपेट में
 
sanjay
Dec 29 2009 11:48 AM
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छोटी उम्र में बड़ी सफलता

सफलता उम्र की मोहताज नहÈ होती. अगर इससे इत्तेफाक नहÈ रखते तो मिलिए ऐसे ही एक शख्सीयत से. इनका नाम है आदिल बंदूकवाला. ानकी उम्र 26 साल है. लेकिन ओहदा सीइओ का है. एक छोटे शहर से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन 26 साल की उम्र में एक नहÈ , बल्कि दो दो कंपनियों क
 
sanjay
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ना भूलनेवाली बात-४

टि्रंग, टि्रंग। मोबाइल की घंटी अचानक बज उठी। कौन हो सकता है। अखबार में छपे इश्तहार को पढ़ते हुए मैंने फोन उठाया। मिस्टर संजय-उधर से आवाज आयी। हां, बोल रहा हूं, आप कौन, मैंने सवाल किया। जी, मैं अरोड़ा बोल रहा हूं, परफेक्ट ट्यूशन ब्यूरो से। हां, हां बोलि
 
sanjay
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ना भूलनेवाली बात-३

पिछले पोस्ट में अपने पढ़ा कि कैसे मै मुज़फ्फरपुर से आकर यहाँ पत्रकारिता में प्रवेश लिया. प्रवेश के साथ ही दिल्ली मै दोहरी जिन्दगी जीने लगा. एक युनिवेर्सिटी का तो दूसरा दूसरा दिल्ली में रहने के लिए के लिए आर्थिक संघर्षो का. दोनों ही जिन्दगी मै साथ साथ
 
sanjay
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`वोट ´ जुटाने की चुनावी तिकड़म...

जैसे जैसे चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं, छोटी-मोटी वििन्न पार्टियां की गंठबंधन तो की बिखर का स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. इन दिनों छोटी पार्टियां बड़ी पार्टियों को मात देने के लिए सी तरह के तिकड़म िड़ा रहे हैं. क्षेत्रीय पार्टियां
 
sanjay
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sanjay
Apr 02 2009 12:02 PM
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ना ूलनेवाली बात

मुजफरपुर से दिल्ली आने के बाद विष्य को लेकर कई उम्मीदें-आशंकाएं थÈ. मेरे लिए वे संघर्ष के दिन थे. यह संयोग ही था कि दिल्ली आते ही, जिसके यहां मैं ठहरा, उसने अगले दिन ही मुझे टîूशन दिलवा दिया. मैंने ी खर्चे निकालने के लिए टîूशन करना जरूरी समझा. टîूश
 
sanjay