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नया साल २०१० मुबारक
काश कि ऐसा हो....पृथ्वी कोओढ़ाएं फिरहरी ओढ़नी,शुद्ध हवा मेंले पाएं हमखुलकर साँस,गाँव, शहरऔर कारखाने केमैलों सेहो मुक्त नदीपूरी हो जाएमन की आस।पशु हमारेमन में नहींजंगल में पनपे,सत्य, स्वदेशीस्वाभिमान सेभारत माँ कामाथा दमके।दूर गुलामी केहो जाएंसंस्कार
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Dec 31 2009 02:20 PM


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