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Swar Ganga स्वर गंगा

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31 Dec 2009
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राग चारुकेशी : एक तू न मिला सारी दुनिया मिले तो भी क्या है

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कई ऐसे मधुर राग है जिन पर आधारी फिल्मी गाने सुपर हिट हो जाते है , लोगों के मन में रच बस जाते है मगर ज्यादातर श्रोता ये समझ नही पाते कि उस संगीत को रचने वाले संगीत कार को प्रेरणा कहाँ से मिली। शास्त्रीय संगीत कि ये विशे
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग चंद्रकौंस

वादी स्वर - म संवादी स्वर - सा आरोह - सा ग॒ म ध॒ नी सां। अवरोह - सां नी ध॒ म ग॒ म ग॒ सा नी़़ सा। पकड़ - ग॒ म ग॒ नी़़ सा (़ मंद्र सप्तक) Get this widget Track details eSnips Social DNA
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बहुमुखी प्रतिभा के धनी सितारवादक समीप कुलकर्णी

समीप कुलकर्णी भारतीय शास्त्रीय संगीत कर एक उभरता हुआ सितारा है । पेशे से एक सोफ्टवेयर इंजिनियर तथा सितारवादक समीप ने हाल ही में श्रीरंग कलानिकेतन , तलेगांव द्वारा आयोजित पण्डित राम मराठे स्मृति संगीत प्रतियोगिता पुणे में भाग लेकर पुणे स्तर पर तथा राज
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राग मधुवंती

तोडी थाट के राग मधुवंती को सबसे मधुर रागों में से शुमार किया जाता है। राग में विरह की वेदना तथा मिलन की आस दोनों तरह की भावना प्रधान होती है। इस राग को दिन के तृतीय प्रहार में गाया और बजाय जाता है । यह एक औडव सम्पूर्ण ज़ाति कर राग है । राग की सरंचना इ
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग ललित : तू है मेरा प्रेम देवता

ललित एक प्रचलित राग है । इसे रात्रि के चौथे प्रहर अर्थात सुबह ३ बजे से ६ बजे तक का गानेबजाने का समय है। इस राग की सरंचना इस प्रकार है आरोह : 'न - र - ग - म - म - म, - ग - म - ध - न - स्' अवरोह : स्' - न - ध - म - म - ग - र - स् वादी : म संवादी : स्'
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भैरवी -तू गंगा की मौज है में जमना की धरा

राग भैरवी , भरावी थाट का राग है और यह एक अत्यन्त प्राचीन राग है । इस्कोबजाने का समय सुबह जल्दी का है , ब्रहम मुहूर्त का । मगर आजकल इसको सभी संगीत सभाओं के अंत में गाया या बजाया जाता है। अर्थात संगीत सभा का समापन राग भैरवी से ही किया जाता है। अतः अगर
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राग देस

खमाज थाट का राग देस अत्यन्त प्राचीन राग है । दिन क सप्तम प्रहार में गाये और बजाये जाने वाले इस राग में जोश को समावेश होता है। दूरदर्शन पर प्रसारित मिले सुर मेरा तुम्हारा इसी राग पर आधारित था तथा यह इतना प्रसिद्द हुआ था कि बच्चे बच्चे कि जबान परचढ़ गय
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शहीदों को नमन

आज न कुछ कहने कर मन है और न कुछ सुन ने सुनाने का। सिर्फ़ इतना कहेंगे की न जाने क्या हो गया हमारे देश को । कभी कभी ऐसा लगता है की जिस एक हिंदुस्तान में हम रहते है , उसकी एकता और अखंडता ही एक छलावा है और पता नही किसी ने कहा भी था की हिंदुस्तान न एक था
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राग यमन कल्याण : भीमसेन जोशी

कल्याण थाट का एक अत्यन्त ही मधुर राग है राग यमन कल्याण । यह राग दिन के पंचम प्रहर में गाया बजाया जाता है। अर्थात सही समय शाम के पाँच से नो बजे तक का है । इस गाने पे आधारित एक गाना है जिया ले गयो जी मेरो सांवरिया , जो की अनपढ़ फ़िल्म के लिए लता जी ने
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राग मालकौंस

भैरवी थाट के राग मालकौंस को दक्षिण में हिंडोलम कहते है। यहाँ एक औडव जाति का राग होता है। इसमें वादी स्वर म और संवादी स्वर रे होता है । इसको दिन के सातवें प्रहर में गाया बजाय जाता है अर्थात इसका समय 12am से ३ am तक का है। यह एक अत्यन्त प्राचीन राग है
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग पुरिया धनाश्री

पूर्वी थाट का संपूर्ण जाति का , एक अत्यन्त सुंदर राग है पुरिया स्वर - प संवादी स्वर - रे॒ समय : दिन का चतुर्थ प्रहार अर्थात शाम ३-६ बजे। वैसे किसी भी समय अच्छा लगता है। आरोह - नी़़ रे॒ ग मे ध॒ नी रेँ॒ सां। अवरोह - रेँ॒ नी ध॒ प, मे ग मे रे॒ ग रे॒ पाकर
Dec 29 2009 11:55 AM
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ये जोबन अंजुरी का पानी - राग गुजरी तोडी

तोडी ठाट का राग गुजरी तोडी एक अत्यन्त मधुर राग है । इसको दिन के दूसरे प्रहार में गाया और बजाय जाता है। इसमें वादी स्वर ध और संवादी रे होता है। आरोह स - र - ग - म - ध - न - स' अवरोह स' - न - ध - म - ग - र - स् पकड़ म - ध - न - ध - म - ग - र - ग - र - स
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग सोहोनी - बड़े गुलाम अली खान

राहसोहनी मरवा थाट का औडव शोदाव जाती का राग होता है। इस राग की खूबसूरती इस बात में है की इसपर आधारित रचनाये मिलन और विरह का एक साथ अहसास कराती है । इसमें वादी स्वर ध होता है और संवादी स्वर गा होता है। आरोह स - ग - म - ध - न - स' अवरोह स' - न - ध - म -
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राग बसंत --काहे छेड़े छेड़े मोहे देवदास

राग बसंत की ये खास बात होती है साथियों, कि आपका मूड कितना ही ख़राब हो , अगर अच्छी सी रचना सी सुन ली तो मूड बदल जाएगा। उल्लास , उमंग , अल्हड़ता इसके प्रधान गुन है। । अगर इस राग को रागों का राजकुमार इसे कहूँ तो उचित ही होगा। राग बसंत पर आधारित हिन्दी फ
Dec 29 2009 11:55 AM
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गोविन्द दामोदर माधवेति

कस्तुरी तिलकम तो आपको निश्चित ही अच्छा लगा होगा । उस से बढ़ कर है यह रचना 'गोविन्द दामोदर मध्वेती " । जिन लोगों को भारतीय शास्त्रीय संगीत समझ में नही आता या अटपटा लगता है इस को एक बार सुन लें । जिज्ञासा बढ़ जायेगी। और अंतर्मन और संगीएत मांगने लगेगा। ऐस
Dec 29 2009 11:55 AM
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कस्तुरितिलकम ललाट पटले कोस्तुभम !!

साथियों पंडित जसराज का एक एल्बम है अनुराग जो की सोनी नाद का है । इसकी सभी रचनाएँ एक से बड़कर एक है। अगर आपको अपनी सुबह भक्ति और आनंद से भरपूर बनानी है तो मैं आपको इसकी सलाह दूँगा। एक रचना यहाँ आप सुन सकते है।
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राग भूपाली

राग भोपाली एक कल्याण थाट का तथा औडव जाती का राग होता है। इसमें म और नि स्वर वर्जित होते है। वादी स्वर गा होता है और संवादी ध होता है। इसको रात्रि के प्रथम प्रहर में गाया और बजाया जाता है। इस राग का चलन मुख्यत: मन्द्र और मध्य सप्तक के प्रतह्म हिस्से म
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग वृन्दावनी सारंग

राग वृन्दावनी सारंग भारतीय संगीत का एक शिरोमणि राग है। इसको कर्णाटक और हिन्दुस्तानी शालियों में एक ही नाम से जाना जाता है। वृन्दावनी सरग एक औडव राग होता है अर्थात इसके आरोह और अवरोह में ५ स्वर काम में लिए जाते है । आरोह और अवरोह में गा और ध वर्जित हो
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राग बागेश्री

राग बागेश्री काफ़ी थाट का संपूर्ण जाती का राग है । इसे गाने बजाने का सबसे उचित समय रात्रि का तीसरा प्रहार होता है। वादी स्वर - म (मध्यम ) संवादी स्वर- सा (षडाज) आरोह - सा नि़॒ ध नि़॒ सा, म ग॒ म, ध नि॒ सां । अवरोह - सां नि॒ ध , म, ग॒ म ग॒ रे सा । पकड़
Dec 29 2009 11:55 AM
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राग हिंडोल

राग हिंडोल या राग हिंदोल का जन्म कल्याण थाट से माना गया है। इसमें मध्यम तीव्र तथा निषाद व गंधार कोमल लगते हैं। रिषभ तथा पंचम वर्जित है। इसकी जाति ओड़व ओड़व है तथा वादी स्वर धैवत व संवादी स्वर गांधार है। गायन का समय प्रातःकाल है। शुद्ध निषाद, रिषभ और
Dec 29 2009 11:55 AM
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देर से मिला पर मिला सही : पण्डित भीमसेन जोशी को भारत रत्न

संगीत शिरोमणि पण्डित भीमसेन जोशी को भारत रत्न दिया गया है। ऐसी शख्शियत जिनका कद दुनिया के किसी भी पुरस्कार से बड़ा हो गया है , हालांके मायने नही रखता, फ़िर भी हम जैसे उनके भक्तों के लिए ये खुशी की बात है। किराना घराने के शास्त्रीय गायक 86 वर्षीय पंडित
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राग बसंत

राग बसंत या राग वसंत शास्त्रीय संगीत की हिंदुस्तानी पद्धति का राग है। वसंत का अर्थ वसंत ऋतु से है, अतः इसे विशेष रुप से वसंत ऋतु में गाया बजाया जाता है। इसके आरोह में पाँच तथा अवरोह में सात स्वर होते हैं। अतः यह ओड़व संपूर्ण जाति का राग है। वसंत ऋतु
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अहीर भैरव

रागअहीर भैरव शास्त्रीय संगीत की हिंदुस्तानी पद्धति का राग है। यह भैरव थाट का सम्पूर्ण जाति का राग है । यह एक अत्यंत प्राचीन राग है जिसका उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। कुछ फिल्मी गीत जो इस राग पर आधारित है इस प्रकार है। पूछो न कैसे मैंने र
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भारतीय संगीत

भारतीय संगीत प्राचीन काल से भारत मे सुना और विकसित होता संगीत है इस संगीत का मूल स्रोत वेदों को माना जाता है। हिंदु परंपरा मे ऐसा मानना है कि ब्रह्मा ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था। वैदिक काल में सामवेद के मंत्रों का उच्चारण उस समय के वैदिक
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Raag Basant

Thaat Poorvi Prahar 8 (3am - 6am) Aaroha S - G - M - d - N - S' Vaadi S' Avroha S' - N - d - P - M - G, M - G - r - S Samvaadi M Pakad M - d - r' - S' - N - d - P - M - G - M - G Jaati Audav - Sampoorna Here is an Evening Raag Basant Bhakta Surdas sung
टैग: basant
Nov 04 2008 07:38 AM