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10 Jun 2010
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कांग्रेस सरकार का एतेहासिक फैसला

वर्षों से लंबित हिन्दू मैरिज एक्ट में शंसोधन को आखिकार कांग्रेस सरकार ने फैसला ले ही लिया । इस फैसले से सैंकड़ों नर यवम नाडी को बहुत बड़ी राहत मिली । इस फैसले से वैसे माता-पिता को नुक्सान पहुंचा होगा जिन्होंने दहेज़ प्रथा कानून के आड़ में वैसे लड़के-लड़की
 
सुरेन्द्र Verma
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जिधर देखे खीर उधर गए फिर

भारतीय मीडिया का आज़ादी के बाद अब तक यही रवैया रहा है की "जन्हा देखा खीर उन्ही गया फिर"। बड़ी से बड़ी खबर को आप गौर से देखेंगे तो आपको लगेगा की कंही न कंही इसमें मीडिया कर्मी अपना उल्लू सीधा किया है। भारत के चौथी अस्तभ और समाज के दर्पर्ण कहलाने वाले ये
 
सुरेन्द्र Verma
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"कुत्ता भूके हज़ार हांथी चले बाज़ार"

दीदी ने यह साबित कर दिखाया की "कुत्ता भूके हज़ार हांथी चले बाज़ार "। बंगाल की जनता ने दीदी को भाड़ी मतों से जीत दिलाकर यह साबित कर दिया की मीडिया सिर्फ भुकता है, तमाम तरह के हथकंडो को उपयोग कर दीदी के तेवर को कम करना चाहा पर दीदी के तेवर ने बंगाल में एक नई
 
सुरेन्द्र Verma
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नितीश जी का ब्लॉग

बिहार के मुख्या मंत्री जी का ब्लॉग ! वाह-वाही से भरा पड़ा है। अगर आप इनके ब्लॉग पर कोई आरोप-प्रत्यारोप करते है तो नहीं प्रकाशित होगी। प्रकाशित वाही होगी जिसमे थोड़ी - बहुत मुख्यमंत्री जी का वाह-वाही हो। इसमे कोई सक नहीं की लालू से अच्छे मुख्या मंत्री
 
सुरेन्द्र Verma
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सुशील मोदी बनाम नितीश कुमार

दोस्तों! बिहार राज्य में नितीश कुमार का आज भी कोई संगठन नहीं है। ये फक्र कहिये माननियेअटल बिहारी वाजपेयी जी का जिन्होंने जातीय आधार पर बिहार का मुख्या मंत्री पद चुनाव से पहले घोषित कर दिया। वरना सुशिल मोदी होते बिहार का मुख्या मंत्री। बाजपेयी जी को लगा
 
सुरेन्द्र Verma
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ममता बनर्जी ने ठीक ही कहा यात्री जिम्मेवार.....

मैं बार-बार कह रहा हूँ की भारत देश की आबादी इतनी अधिक है की इसे संभालना किसी भी सरकार या गैर सरकार संगठन के लिए मुश्किल है। आबादी बढ़ गई पर भारत का आन्तरिक सुभिधाये नहीं बढ़ पाई रेल कर्मचारी क्या करे उसे जीतनी सुभिधाये दी गई है उसे ही वह अपना कर्तब्य समझता
 
सुरेन्द्र Verma
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अगर भारत में हिटलर होता .........

भा जा पाके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिससे किसी को आहत पहुंचे। अगर किसी को आहत पहुंचा हो भी तो वह सही मायेने में भारत का कुत्ता (डॉग) ही होगा। अफ़सोस है की भारत की जनता ७०% गाँव में रहती है, उनके पास गुमराही समाचार के अलावा कोई ऐसा माध्यम
 
सुरेन्द्र Verma
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संसद में अनंत जैसा नेता

लालू और अनंत कुमार का वाक्य युध्ध संसद में देखने और सुनने लायक तो नहीं था किन्तु भारत देश के ५४५ लोग जो भारत की तकदीर लिखते है वो इस तांडव में कुछ हंसते तो कुछ लड़ते दिखे। यह बात भी बिलकुल सही में कहा गया की लालू न तो देश के बारे में सोंचते और न ही बिहार
 
सुरेन्द्र Verma
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१९७७ के कुत्ते

रामायण युग में भ्रष्ट, अत्याचार और राक्षसों के बिनाश के लिए राम की बानर सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । हलाकि लोग कहते है आज भी उनके वंशज है पर उदंड, लालची और कोहराम से भरा। वर्तमान युग में १९७७ के कुत्ते का कोहराम पुरे देश के लोग झेल रहे हर कोई के
 
सुरेन्द्र Verma
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क्या ३३% महिला विधेयक से सभी वर्ग के महिला को लाभ होगा?

देश पर भारी कुछ खास वर्ग ही है ऐसे में यह तो तय करना ही चाहिए की ३३% आरक्षण में सिर्फ उन्ही वर्ग के महिला संसद में न पहुंचे जो पहले से मजबूत है। सभी पार्टी या दल के चुनाव समिती के सदस्य गन उच्य वर्ग से प्रायः आते है और जब सिम्बोल देने की बात आती है तो
 
सुरेन्द्र Verma
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आनंद से भरा महिला विधेयक

पुरे देश पर भारी टिकरी (मुलायम, लालू यवम शरद )। आखिर ऐसी कौन सी मज़बूरी हो गई जिससे रूलिंग पार्टी या संसद को महिला विधेयक पास करने में इतना बिलम्ब हो रहा ? ३३% तो सभी वर्ग के लिए है इस बात को बुध्धिजीवी वर्ग इन तिकरियों को समझाने में असमर्थ क्यों है? भा ज
 
सुरेन्द्र Verma
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राहुल की शहनाई में संघ यवम भाजपा

एक ओर संघ ने हिन्दुत्व को साइड कर "राष्ट्रवाद और संस्कृतिवाद " का नारा बुलंद किया तो एक टीवी चैनल ने राहुल महाजन के सगाई के लिए १६ लड़कियों को खुलेआम डेटिंग, डांसिंग और न जाने कितने रशमो-रिवाजो को भारतीय सभ्यता के खिलाफ दिखाया। १५ लड़कियों के लिए तो खतरा
 
सुरेन्द्र Verma
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Feb 28 2010 06:47 PM
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२०१०

सभी को नव वर्ष मंगलमय - २०१०
 
सुरेन्द्र Verma
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Dec 31 2009 05:24 PM
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भारत में मंदी का खेल उच्च्स्तरिये

भारत अभी मंदी के दौड़ से बहुत पीछे है किंतु एलर्ट है। भारत में अब भी आम जन-जीवन पर इसका असर होता दिखाई नही दे रहा है किंतु बड़े -बड़े उद्योग घराने ने मंदी का खेल व्यापक रूप से खेलना शुरू कर दिया है। सरकार के तमाम कोशिशें के वावजूद निचले अस्तर के कर्म
 
सुरेन्द्र Verma
Dec 29 2009 11:55 AM
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मंदी के दौड़ में सिगरेट का धुंआ उरता रहा

मंदी-मंदी-मंदी........................................कहाँ है मंदी ? ये मंदी क्या होता है भाई आदि सवाल का जखीरा सिगरेट के धुँए में उरता रहा । जब मैंने उस व्यक्ति से ये जानने की कोशिश की कि भाई आप कौन सा सिगरेट पीतेहो और कितना पीते हो तो जवाब में उन्ह
 
सुरेन्द्र Verma
टैग: मंदी
Dec 29 2009 11:55 AM
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आयोग महिलाओं के प्रति उदासीन

महिला आयोग की अध्यक्ष महोदया महिलाओं के प्रति उदासीन ही अब तक दिखी है। चुकी अब तक न तो वो भारतीये महिलाओं को भारतीये सभ्यता का पाठ पढ़ा पाई है और न तो उनके प्रति जागरूक । मैं व्यक्तिगत तौर पर उनसे यह पूछना चाहता हूँ की वो इस पद पर अस्थापित होने के लि
 
सुरेन्द्र Verma
Dec 29 2009 11:55 AM
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किस्मत का धनी कसाब

मुंबई कोहराम में सैनिक कारबाई से ९ आतंकियों का ढेर होना और अफज़ल आमिर कसाब का बचना पुरे विश्व के लिए एक चुनौती भरा प्रश्न है तो वही कसाब के लिए किस्मत का धनी होना । पाकिस्तान को ठोस सबूत चाहिए , भारतीये अदालत को भी ठोस सबूत चाहिए , मानवाधिकार को भी ठ
 
सुरेन्द्र Verma
Dec 29 2009 11:55 AM
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अवसरवादियों का प्रवचन

लोग कहते आए हैं की अपने गिरिवान या अपने को सही कर ले तो देश अपने आप सुधर जाएगा । लेकिन मैं अपने ४२ वें बसंत में देखा है की लोग नही सुधरे । मैं डेल्ही में १९९० के दशक में कदम रखा और संघ लोक सेवा की तैयारी में लग गया । मेरी सोंच बिल्कुल पारदर्शिता थी ।
 
सुरेन्द्र Verma
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क्या राहुल गाँधी बिहार का नेतृत्व करेंगे?

देश के युवा कर्मठ , तेजस्वी , होनहार यवम झुझारू राहुल गाँधी अगर बिहार का नेतृत्व अपने हाँथ लेने को तैयार हो तो बिहार में एक नया संचार व क्रांति लाया जा सकता है । संचार व क्रांति के लिए जिन अस्त्र - शस्त्र की जरूरत होती वो राहुल गाँधी के पास है । लोकन
 
सुरेन्द्र Verma
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बिहार के विकाश में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण

बिहार - बिहार - बिहार हल्ला हो रहा है , लोग चर्चा - परिचर्चा कर रहे हैं फिर भी बिहार का विकाश नही हो पा रहा है । आख़िर क्यों ? जबकि बिहार से ५४ प्रतिनिधि संसद में बैठकर भारत का इतिहास - भूगोल बनाते - बिगारते रहते आए हैं तो बिहार को विकाश का मार्ग प्र
 
सुरेन्द्र Verma
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Dec 29 2009 11:55 AM
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भारतीये तंत्र व्यवस्था

भारत को आजाद हुए ६२ वर्ष हो गए किंतु आज भी भारत की तंत्र व्यवस्था ढीली और लोचपूर्ण है। एक कहावत है " जिधर देखें खीर उधर गए फिर" । भारत में अभी तक ऐसा ही देखने को मिला है। भारत में अगर आज़ादी है तो वह है " बोलने और लिखने " का। आडवानी जी जब तक गृह मंत्र
 
सुरेन्द्र Verma
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Dec 29 2009 11:55 AM
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हाई वोल्टेज ड्रामा

बहुत जल्दबाजी होगी यह कहना की मुंबई में आतंकवादियों द्वारा यह हाई वोल्टेज ड्रामा के पीछे क्या राज थी ? क्या यह पुरी अर्थव्यवस्था पर आतंक था या फिर आम जनमानस पर या फिर किसी राजनीत की कुटनितये तमाम सवालों का जवाब न तो सरकार के पास है न जनता के पास और न
 
सुरेन्द्र Verma
टैग: आतंक
Dec 29 2009 11:55 AM
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वोट बैंक में नई खोज

नितीश गए हवा खाने। नितीश जी मीडिया को अपने हाँथ और मुठी में ले लेने से वोट बैंक में इजाफा कंहा तक हुआ? अब चुनाव आने वाला है। बिहार वासियों को ढेर सारे उपहार नितीश देने वाले है। ताकि वोट बैंक सही-सलामत रह सके। झारखण्ड में तो बूंट लादने गए अब तो उनकी ह
 
सुरेन्द्र Verma
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भारत में ट्रिपल "बी" की बीमारी

जी हाँ चौंकिए मत! ट्रिपल "बी"यानि (बुत्तोक्क, बरेअस्त बेल्ली अंग्रेजी के शब्द है) हिन्दी में नितंभ, छाती और चीतल मांछी पेट कहते है। भारत में यह बीमारी कुछ एक युवतियों और महिलाओं में अर्धनग्न फैशन से फैला है। इस बीमारी की सबसे खास बात ये है की इससे पुरूष
 
सुरेन्द्र Verma
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Sep 03 2009 12:44 AM
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आज का युवक कृष्ण हो सकता युधिष्ठिर नही

कौन कहता है संघ में ५५-६० का ही उम्र है। आज संघ के प्रमुख ने मीडिया के सामने बयां जो दिया उसमे तनिक भी सच्चाई नही दिखती । के सी सुदर्शन और आज के प्रमुख पहले अपनी उम्र तय करे की उन्हें कब तक काम करना है तभी किसी पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने की चेष्टा करे। संघ
 
सुरेन्द्र Verma
Aug 29 2009 12:08 AM
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भारत आज़ाद किंतु गुलामी आज भी पसंद

भाजपा में हो रहे उथल-पुथल से यही ज्ञात होता है की अटल - आडवानी और संघ को छोड़ पार्टी में कुछ है ही नही। कहने को भाजपा चाल, चरित्र , चिंतन और अनुशाशन वाली पार्टी है पर वास्तव में दपोर्शंख है। भाजपा की ये आदत रही है की वो अपने कद से ऊँचे नेता को उभरने देती
 
सुरेन्द्र Verma
Aug 27 2009 10:01 PM
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भाजपा को मुद्दे की लडाई लड़नी चाहिए न की धर्म और मजहब की

संघ परिवार में व्यापक रूप से भ्रष्टाचार आ चुका है। संघ का जब से राजनीतिकरण हुआ तभी से संघ का प्रत्येक सदस्य मूल उद्देश्य से भटक गया। संघ में पैसों का खेल खेला जाने लगा जैसे क्रिश्चानिटी में हो रहा है। संघ की शाखा अब एक्के-दुक्के ही लगतीहै। संघ से जुड़े
 
सुरेन्द्र Verma
Aug 27 2009 12:22 AM
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१.५ करोड़ की आबादी को संभालना किसी की भी सरकार के लिए मुश्किल

भारत की राजधानी दिल्ली और १.५ करोड़ आबादी में एक मात्र अखिल भारतीये आयुर्विज्ञान संस्थान ( अ भा आ सं) नईदिल्ली । इसमे इलाज़ कराना बहुत ही कठिन है । अगर किसी गाँव - देहात से आए बीमार व्यक्ति और उनके परिजन एम्स में इलाज़ कराने आते हो तो निम्न बातों का ध
 
सुरेन्द्र Verma
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जोड़ - तोड़ की राजनीत में प्रणव मुख़र्जी प्रधानमंत्री

१६ मई २००९ से लोक सभा के परिणाम आने शुरू हो जायेंगे। इस बीच जोड़-तोड़ की राजनीत शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री के दौड़ में कई नाम शामिल है। लेकिन जोड़दार शब्दों में मनमोहन सिंह , राहुल गाँधी और लाल कृष्ण अडवाणी का नाम सामने आ चुका है। चुनावी हल्ला- बोल
 
सुरेन्द्र Verma
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फर्नांडिस साहब लोक सभा ०९ का चुनाव जीतते-जीतते हारे

फ़र्नान्डिस साहब लोक सभा चुनाव मुजफ्फरपुर से हार रहे है यह लिखना बिल्कुल ही ग़लत है । पर आप सभी को चुनाव परिणाम पूर्व बताना भी मेरा धर्म है क्योंकि मैं अभी बिहार भ्रमण कर दिल्ली लौटा हूँ। फर्नांडिस साहब भारत ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व में अपनी पहचान
 
सुरेन्द्र Verma
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नीतिश और लालन में दम हो तो राबरी का जवाब दे

आज सुबह चाय के प्यालों के साथ नींद खुली अख़बार देखा -" राबर पर ऍफ़ आई आर " दर्ज । हँसी भी आई पर चर्चित पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राबरी देवी ने एक साहस और आत्मविश्वास के साथ यह वक्तव्य दे डालीं की -"ललनसिंह कौन हैं? ललन सिंह नीतिश का साला है। हम खुलेआ
 
सुरेन्द्र Verma
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फ़ोन + कैश + मोबाइल + नेम और फेम = संसद

आज की ताजा ख़बर है की हेमामालिन डेल्ही सीट से चुनाओ नही लडेंगी अब उनकी जगह पर अनिल कपूर को तलाशा जा रहा है। वाह भाई वाह बीजेपी के नेतागण ! बीजेपी अपने चाल, चरित्र और चिंतन के लिए अद्भुत पार्टी कही जाती रही है पर inake shirsh नेताओं ने डेल्ही की गद्दी
 
सुरेन्द्र Verma
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२१ वीं शदी का सही अर्थ कम समय में ज्यादा उपलब्धि

सभी ब्लॉग प्रेमियों से मेरा व्यक्तिगत आग्रह है की २१ वीं सदी का अर्थ समझे या समझाएं। भाई मैं ब्लॉग के बारे में बिल्कुल अनभिज्ञ हूँ। मुझे नही मालूम की इस ब्लॉग पर एक नोवेल लिखू या एक उपन्यास या कविता काब्य संग्रह। मुझे जो समझ में अब तक आया है वह यह की
 
सुरेन्द्र Verma
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दफ्तरों के काम-काज में देरी क्यों?

अंग्रेज भारत छोड़ गए परन्तु वो अपना मूल मंत्र भारतवासियों के लिए दे गए वह है "फुट डालो राज करो"। भारत में आज भी कई इमानदार प्रशासक है जो चाहते है की दफ्तरों में स्वक्ष काम हो जिससे आम जनता त्रस्त न हो सके। लेकिन दफ्तरों के बाबु लोग एक ही दिन में चाहते
 
सुरेन्द्र Verma
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मीटिंग, सीटिंग, इटिंग = दिल्ली

बहादुर साह ज़फर के बाद भारत की तस्वीर ऐसी बनी की कुछ लोग शासन- प्रशासन में व्यस्त रहे तो कुछ लोग आज़ादी का आनंद लेने में मशगुल । चारो ओर मीटिंग, सीटिंग और इटिंग होने लगा। यही परम्परा देश के कोने-कोने में होने लगी। इन तीन शब्दों में एक शब्द अधुरा था वह
 
सुरेन्द्र Verma
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देश के ७० फीसदी जनता बेलगाम

भारत आजाद हुआ लोग स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस मनाने लगे।लेकिन आज का भारत को देखने से लगता है की लोगों को पुर्णतः आज़ादी नही मिली। भारत का ७० फीसदी जनता त्रस्त है उन २० फीसदी लोगो से जिन्होंने भारत का खजाना अपने उपयोग में किया। १० फीसदी ऐसे है जिन पर ७०
 
सुरेन्द्र Verma
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देश पर भाड़ी दो पुजारी

नेपाल के पशुपतिनाथ मन्दिर से अगर हिंदू पुजारी को नेपाल सरकार हटा ही दिया तो इसमे हिंदू वर्ग को कैसा खतरा ? क्या वही दो पुजारी हिंदू धर्म के आधार हैं ? क्या उनके हटाने से हिन्दुओं के अस्तित्वा पर ही संकट खड़ा हो गया ? भला हम यह क्यों भूलने लगे की नेपा
 
सुरेन्द्र Verma
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जरूरत है - सुरक्षा में नई सोंच और नए तरकीब की

भारत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आज भी प्रश्न चिह्न लगा हुआ है आख़िर क्यों ? हमारे सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी क्या कमी है जिससे आतंकवादी या घुसपैठी सीमा रेखा को तड़प या फान कर हमारी आंतरिक व्यवस्था को धत्ता कर तहस - नहस कर देती है । सुरक्षा व्यवस्था क
 
सुरेन्द्र Verma