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दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका

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05 Jun 2010
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श्वान पर गोली-हिन्दी हास्य व्यंग्य (bullet on dog-hindi hasya vyanga)

उस बालक ने श्वान पर ही प्रस्तर प्रहार किया था। जब बालक श्वान पर प्रहार करने वाला था तो उसने देख लिया और भाग गया। बालक का निशाना भी कोई अचूक नहीं था और वह हमारे साइकिल के बीचों बीच निकल कर पास से निकल रहे एक स्कूटर को जा लगा। स्कूटर चालक के साथ एक महिला
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अमन और तरक्की गेंहूं की तरह पिसते हैं-हिन्दी शायरी (aman aur tarakki piste hain-hindi shayari)

खिली हुई हैं उनकी बाछें,बिछ गयी हैं फिर जमीन पर आज कुछ लाशें,क्योंकि कातिलों से उनके जज़्बातों के रिश्ते हैं।अपने ख्यालों का ओर छोर पता नहीं,हमख्याल जहां देखते, कोरस गाने लगते हैं वहीं,अपनी अक्ल किराये पर चलाते हैं,पर आजाद खुद को बताते हैं,खूनखराबे और
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May 30 2010 05:06 PM
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आधुनिक युग का मूलमंत्र-हिन्दी शायरी (adhunik yug ka mulmantra-hindi shayari)

गरीबी हटाओ,धर्म बचाओऔर चेतना लाओजैसे नारों से गुंजायमान हैपूरा का पूरा प्रचार तंत्र।चिंतन से परे,सुनहरी शब्दों से नारे भरे,और वातानुकूलित कक्ष मेंवक्ता कर रहे बहस नोट लेकर हरे,खाली चर्चा,निष्कर्ष के नाम पर काले शब्दों से सजा पर्चा,प्रचार के लिये बजट
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May 26 2010 07:53 PM
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चूहे का वेश छोड़ना होगा-हिन्दी शायरी (choohe ka vesh-hindi shayri)

हाथ जलने के डर सेदियासलाई नहीं जलायेंगेतो फिर रौशनी भी नहीं पायेंगे।चूहों की तरह अंधेरे में छिपने की आदत हो गयी तोहर जगह बिल्लियों के आंतक तलेअपना जीवन बितायेंगे।कभी न कभी तो लड़ना होगा,चूहे का वेश छोड़ इंसान बनना होगाआग जलने दो अनाचार के खिलाफवह ताकतवार
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तलवार और शब्द-हिन्दी शायरी (talwar aur shabad-hindi shayari)

बुद्धिमान लोगपहले से ही तयशुदा जंग लड़ते हैं,एक दूसरे को नीचा दिखाने के लियेकहीं तलवार हवा में हिलातेकहीं कागज पर शब्द भरते हैं। सच में जो उतरते मैदान मेंउनको अब कोई नहीं पूछता,क्योंकि अब पर्दे के आसपास हीसिमट गयी हैं लोगों की आंखेंजिनके दृश्य केवल
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अच्छी थी अपनी तन्हाई-हिन्दी शायरी (apni tanhaii-hindi shayari)

ख्याल आया इंसानों से जुड़ने का,अकेलेपन से भीड़ के रास्ते मुड़ने कामगर बहुत जल्दी आ गयीसामने जिन्दगी की सच्चाई।मुफ्त में प्यार नहीं मिलता,धोखे के बिना व्यापार नहीं हिलता,चीख रहे हैं लोगअपनी बेहाली छिपाने के लिये,मुस्कराहट ला रहे चेहरे पर जबरनदिल का खालीपन
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May 10 2010 10:51 PM
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प्रेम जीवन और गृहस्थ जीवन में अंतर होता है-हिन्दी आलेख (love life and home life-hindi editorial)

वह लड़की एक पत्रकार थी और अपने परिवार से दूर रहती थी। उसने अपनी जाति से इतर एक युवक से प्रेम किया किया था। वह प्रेम विवाह करने की इच्छुक थी पर उसके परिवार के लोग इसके लिये तैयार नहीं थे। अंततः वह लड़की अपने प्रेमी को छोड़कर अपने घर आयी और वहां उसकी संदिग्ध
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कसूर की सजा मिलती है-हिन्दी शायरी (kasoor ki sajaa-hindi shayari)

अपराध की कामयाबी सेतभी आदमी तक डोलता हैजब तक वह सिर चढ़कर नहीं बोलता है।यह कहना ठीक लगता है किजमाना खराब है,चमक रहा है वही इंसानजिसके पास शराब और शबाव है,मगर यह सच भी है किसभी लोग नहीं डूबे पाप के समंदर में,शैतान नहीं है सभी दिलों में अंदर में,भले इंसान
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गरीब देश की पहचान मिटाने का विकल्प-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (gareeb desh ki pahachan mitane ka sankalp-hindi vyangya kavitaen)

देश की गरीबी ऐसी पहेली हैजिसे वह बूझ रहे हैं।इसलिये वह बना रहे हैं नये राजा महाराजा,बजायेंगे शराब पीकर और जुआ खेलकरजो दुनियां के सामने तरक्की का बाजा,उनके रहने के वास्तेमशहूर जगहों परमहल बनाने की तैयारी मेंगरीबों को अपनी झौंपड़ियों समेतदूरदराज इलाके में
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Apr 25 2010 10:08 PM
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तरक्की के नाम पर-हिन्दी शायरी (tarakki ke nam par-hindi shayari)

अपने घर में जगह नहीं बचीअब परदेस में अपनी दौलत भरने लगे हैं,कहने को तो अपने ही सगे हैं। कमाने के नाम पर लूटा,सारी तिजोरियां भर गयीफिर अपनों से उनका विश्वास भी रूठा,कभी कभी अपने होने का दिखावा वह कर लेते हैं,दान की दलाली के धंधे  मेंसमाज सेवा करते
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बेबस इंसान सभी जगह रोता-हिन्दी शायरी (bebas insan sabhi jagah rota-hindi shayri)

वह इसलिये भोले नज़र आते हैंक्योंकि उनकी चालाकियां कोई पकड़ नहीं पाया।उनके घर के बाहर नाम पट्टिका परसाहूकार लिखा हैक्योंकि उनकी चोरी कोई पकड़ नहीं पाया।कौन उठायेगा उंगली उनके काम परपहरेदार को ही अपने घर लगाया। --------------कितने भलमानस इस धरती परविचर रहे
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Apr 15 2010 10:57 PM
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गरीबी, भुखमरी, शोषण तथा महंगाई समस्यायें नहीं बल्कि परिणाम हैं-हिन्दी लेख (economics thought for india-hindi article

अगर देश में व्याप्त भुखमरी, बेरोजगारी, बेबसी तथा भ्रष्टाचार से त्रस्तता को देखकर किसी भी क्षेत्र में हिंसा का समर्थन किया जायेगा तो यह समझ लीजिये मुद्दों से भटकाव की तरफ हम जा रहे हैं। मुश्किल यह है कि भुखमरी, बेरोजगारी तथा महंगाई समस्यायें नहीं बल्कि
Apr 10 2010 10:03 PM
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अनमोल तोहफ़ा-हिन्दी शायरी (anmol tohfa-hindi shayri)

तूफान जैसा क्योंभागना चाहते हो,हवा की तरह बहने में भी मजा आता है।उम्र कम है तेजी से दोड़ने वालों कीबढ़ती गति के साथडोर टूट जाती है ख्यालों कीआसमान छूने की चाहत बुरी नहीं हैपर तारे हाथ आयें या चंद्रमापत्थर के टुुकड़ों या मिट्टी के ढेर के अलावा हाथ क्या आता
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दौलत के खिलाड़ी-हिन्दी शायरी (daulat ke khiladi-hindi shayri)

दौलत के खिलाड़ी, दूसरों के जज़्बातों समझते नहीं,जहां मौका मिलता है, गेंद समझकर खेलते हैं वहीं।उनके मोहब्बत का पैगाम, होते हैं हमेशा एक धोखा,फायदे के लिये नफरत उगलते उनको देर लगती नहीं।कुछ पेट कम भर लेना, चीथड़े भी ओढ़ना अच्छा है,अपने जज़्बातों का जनाज़ा
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Apr 01 2010 11:05 PM
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नायक और खलनायक-व्यंग्य कवितायें (nayak aur khalnayak-hindi vyangya kavitaen)

धोखे, चाल और बेईमानी काअपने दिमाग में लियेबढ़ा रहे हैं वह अपना हर कदम,अपनी जुबान से निकले लफ्ज़ोंऔर आंखों के इशारो सेजमाने का भला करने का पैदा कर रहे वहम।भले वह सोचते हों मूर्ख लोगों कोपर हम तोलने में लगे हैं यह किकौन होगा उनमें से बुरा कम,किसे लूटने दें
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ख्यालों के खेल में-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (khyalon ke khel men-hindi satire poem)

खुद रहे जो जिंदगी में नाकामदूसरों को कामयाबी कापाठ पढ़ा रहे हैं।सभी को देते सलीके से काम करने की सलाह,हर कोई कर रहा है वाह वाह,इसलिये कागज पर दिखता है विकास,पर अक्ल का हो गया विनाश,एक दूसरे का मुंह ताक रहे सभीकाम करने के लियेजो करने निकले कोई उसकी टांग
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मुंह फेर लिया-हिन्दी शायरी

हमने तो उनको मौका दिया वफा निभाने अपनी जरूरत बताकरउन्होंने लाचारी समझकर मुंह फेर लिया।अपनी ताकत दिखाकर वह खुश होंगेपर शायद ही सोचा हो किउन्होंने अपने विश्वास को खो दिया।----------हाथ उठाकर कुछ नहीं मांगापर इशारों में समझाकारअपना आसरा उन पर टिका दिया।अपना
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Mar 16 2010 09:18 PM
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गरीब के कल्याण का सवाल-व्यंग्य चिंतन (welfare of poor man-hindi satire article)

अमेरिका में एक गोरी महिला पर आनलाईन आतंकवादी भर्ती करने का मुकदमा दर्ज हुआ है। बताया गया है कि वह लोगों को मीठी बातों में फंसाकर अपने जाल में फंसाती थी। दुनियां भर के गरीबों का भला करने की बात करती थी! भर्ती करने वालों को धन का प्रलोभन भी देती थी! वगैरह
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संतों का कर्म और आचरण प्रमाणिक होना चाहिये-हिन्दी लेख (sadhu aur santon ka achran-hindi article)

अपने आपको धर्मात्मा कहलाने की चाहत किसे नहीं होती। कई लोग तो ऐसे हैं जो धर्म के नाम पर न तो दान करते हैं न ही भक्ति उनको भाती है पर दूसरों के सामने अपने धर्मात्मा होने का बखान जरूर करते हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो सर्वशक्तिमान के दरबार में हाजिरी लगाने ही
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चरित्र की कालिख-होली पर हिन्दी लघुकथा तथा हंसिकायें (chartra par kalikh-hindi short story and comic poem on happy holi)

वह दो नंबर की कमाई के कारण बदनाम हो गये थे। तमाम तरह की जांचें चल रही थी। अखबार में बहुत सारी बातें अक्सर उनके बारे में छपती रहती हैं। इस बार होली पर लोग उनके घर पर पहुुंचे। लोगों का क्या है? वह तो जिसके पास भी दौलत होती है उसके बारे में यही कहते हैं कि
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Mar 01 2010 03:22 PM
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पेशा है अमीरों को गलियां देना-हिन्दी व्यंग्य शायरी (trede of welfare-hindi satire poem)

 नारे लगाकर हुई कमाई सेवाद चलाये जाते हैं,आतंक वाले उदार दिखने की कोशिश करतेतो लोगों की तरक्की के लिये जूझने वालेहिंसा को जरूरी बताये जाते हैं।इस अर्थयुग में जमाने का मुफ्त में भला करने वालेकहां से आयेंगे,ख्याल हैं जिनके पुरानी किताबों के गुलामकब
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Feb 23 2010 08:20 PM
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देशभक्ति का व्यापार-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (deshbhakti ka vyapar-hindi comic poem)

आदर्श पुरुषों ने अपनी दरबार मेंदेशभक्ति का नारा बड़े तामझाम के साथ सजाया।बाजार को बेचनी थी मोमबत्तियोंशहीदों के नाम पर,इसलिये प्रचारकों से नारे को संगीत देने के लियेशोक संगीत भी बजवाया।भेजे आदर्श पुरुषों के नाम से रुपयों से भरे लिफाफेजिनकी समाज सेवा से आम
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सच बोलने पर इनाम नहीं होता-हिन्दी व्यंग्य शायरी (sach bolen par inam-hindi vyangya shayri)

इंसान की हर अदा पर मिलते हैंपर सच बोलने पर कोई इनाम नहीं होता।कितना भी हो जाये कोई अमीर,पीछा नहीं छोड़ता उसका जमीर,कैसे दे सकते हैं इनाम, उस शख्स कोबोलता है हमेशा सच जो,खड़ी है दौलत की इमारत उनकी झूठ परचाटुकारों को लेते हैं, अपनी बाहों में भरक्योंकि सच
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Feb 15 2010 08:28 PM
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वैलेंटाईन डे आ रहा है-हिन्दी हास्य कविता (velantineday-hindi comic poem)

खबरची को किया उसके गुरु ने फोनऔर बहुत दिन से न मिलने का दिया तानातब वह बोला‘गुरुजी क्या बताऊंखबरों की दुनियां हो गयी है जंग का मैदानपिछ़ड जाओ एक दिन तोमिट्टी में मिल जाती है बरसों से कमाई अपनी शान,पहले क्रिकेट में जीत पर लिखना था,क्योंकि देशभक्त दिखना
Feb 12 2010 09:36 PM
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बखान-हास्य कविता (bakhan-hasya kavita)

सचिव ने कहासमाज सेवक से कहा‘आ गया है जमकर चंदाचलेगा अपना जोरदार धंधाअपने हिस्से का सही अंदाज बतायेंतो शुरु करें अब गरीबों के नाम पर कल्यान।’समाज सेवक पहले चौंकेफिर बोले-‘अरे, क्या कहते हो,भला, क्यों जज़्बात में बहते हो,अभी तक नब्बे फीसदी थाअब सौ फीसदी कर
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सौदागर और ढिंढोरची-हिन्दी व्यंग्य कविता (market and media-hindi comic poem)

चौराहे पर चार लोग आकरचिल्लाते जूता लहरायेंगे,चार लोग नाचते हुएशांति के लिये सफेद झंडा फहरायेंगे।चार लोग आकर दर्द केचार लोग खुशी के गीत गायेंगे।कुछ लोगों को मिलता है भीड़ को भेड़ों की तरह चराने की ठेकावह इंसानो को भ्रम के दरिया में बहायेंगे।सोच सकते हैं जो
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ख्वाबों की दुनियां-हिन्दी शायरी (khvabon ki duniya-hindi literature poem)

दीवार के पीछे हीअपना चेहरा छिपाये रहो तुम,तुम हो एक सजा सजाया ख्वाब,कितने भी सवाल करूंनहीं देना उनका जवाब,तुम्हारे दिल के स्वर हीदिमाग की सोच में बजते रहे हैं,कई  शेर कहे हमने यह मानकरजैसे कि तुमने कहे हैं,अपने कड़वे सच के घूंटहमने जहर की तरह पिये
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धोती और टोपी-हिन्दी हास्य व्यंग्य (dhoti aur topi-hindi hasya vyangya)

दीपक बापू जल्दी जल्दी सड़क पर जा रहे थे, सामने से थोड़ी दूरी पर स्कूटर पर सवार फंदेबाज आता दिखा। उनका दिल बैठ गया वह सोचने लगे कि ‘यह अब समय खराब करेगा। इससे बचने का उपाय भी तो नहीं है।’ फिर उन्होंने देखा कि वह तिराहे से गुजर रहे हैं और तत्काल अपने बायें
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दहेज का मामला-हिन्दी व्यंग्य कविता

शिक्षक पुत्र ने वकील पिता से कहा ‘पापा, मेरी शादी में आप दहेज की मांग नहीं करना यह बुरा माना जाता है देश के समाज की हालत सुधारने का श्रेय भी मिल जायेगा हम पर कभी ‘दहेज एक्ट’ भी नहीं लग पायेगा उससे बचने का यही उपाय मुझे नजर आता है।’ वकील पिता ने कहा
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इंसान की बुनियाद-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (insan ki buniyad-hindi vyangya kavitaen)

शहर को बढ़ते देखासड़कों को सिकुड़ते देखा,इंसानों की जिंदगी मेंबढ़ते हुए दर्द के साथहमदर्दी को कम होते देखा।.......................आसमान छूने की चाहत मेंकई लोगों को जमीन परऔंधे मुंह गिरते देखा,बार बार खाया धोखाफिर भी हर नये ठग कीचालों में उनको घिरते
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जो लालटेन से कंप्यूटर चलाने का अविष्कार करे-हिन्दी व्यंग्य (laltan aur bill gets-hindi satire)

अमेरिकन लोगों का विश्वास है कि अगला बिल गेट्स भारत या चीन में पैदा होगा। यह एक सर्वे करने वाली एक ऐजेंसी ने बताया है। जहां तक चीन का सवाल है उसकी वर्तमान व्यवस्था में यह संभव नहीं लगता कि कोई एकल प्रयासों से ऐसा कर लेगा। फिर यह भी पता नहीं कि वहां
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हिन्दी ब्लाग लेखकों के साथ यह धोखाधड़ी रोकनी होगी-आलेख (cheeting with hindi blogger-hindi blog)

आज समीरलाल जी से ने हिन्दी ब्लाग जगत से दूसरों की पोस्ट उठाकर अपने ब्लाग चमकाने वाले एक शातिर खिलाड़ी को पकड़ा। कहना चाहिये कि सात दिन से उसे पकड़ा है और उसे तब से टिप्पणियों के माध्यम से नोटिस भी पकड़ायें हैं। उसने हम दोनों की रचनाओं का जमकर उपयोग किया। एक
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साहबी संस्कृति-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (boss culture-hindi satire poem)

दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर वह झूल जाते हैं। -------------------- नयी दुनियां में पुजने का रोग सभी के सिर पर चढ़ा है। कामयाबी का खिताब नीचे से ऊपर जाता साहब की तरफ नाकामी की लानत का आरोप
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कल्पनातीत-हिंदी शायरी (Unthinkable - Hindi poetry)

बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब याद आती है सुबह अखबार में छपी तरक्की की खबरें और उसे सभी में बांटने के लिये शोर करते लोगों के जूलूस की फोटो याद तब बरबस हंसी आ जाती है उनको कल्पनातीत प
Dec 29 2009 11:41 AM
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गमों के शेर-हिंदी कविता (gamon ke sher-hindi sahityak kavita)

बेजान चीजों के इश्क ने अपने ही रिश्तों में गैर का अहसास घोल दिया है। किसी से दिल लगाना बेकार लगता है दोस्ती को मतलब से तोल दिया है। हर तरफ चलती है मोहब्बत की बात आती नहीं कभी चाहने की रात सुबह से शाम तक तन्हा गुजारता इंसान तड़ता है अमन के पलों के लिये
Dec 29 2009 11:41 AM
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गद्दार कदम-हिन्दी साहित्य कविता (gaddar kadam-hindi sahitya kavita)

अपनी खुशियां मिलकर बांटते होते हम। तब नहीं छाये होते पूरे जमाने के दिल में गम। अब जज़्बातों के सौदागर सपने बेच रहे हैं बाजार में लोगों के दर्द पर, करके अपनी आंखें नम। अपने नाम के पैसों खाता देखकर,  खुश हो रहे अमीर बढ़ते आंकड़ों में देख रहे जिंदगी
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कमीशन की नीति-हिन्दी साहित्य कवितायें (policy of commision-hindi sahitya kavita)

सरकार और साहुकारों ने इतने वर्षों से बहुत दान किया है कि इस देश से पीढ़ियों तक गरीबी मिट जाती। अगर कमबख्त यह कमीशन की रीति दान बांटने वालों की नीति न बन जाती। --------- नया बनाने के लिये पुराना समाज टुकड़े टुकड़े किये जा रहे हैं। कुछ नया नहीं बन पा रहा
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आंसुओं का हिसाब-हिन्दी व्यंग्य कविता (ansuon ka hisab-hindi sahitya kavita)

शानदार इमारतों के नीचे दबे पड़े हैं, बुनियाद में जो पत्थर वह चमकदार नहीं होते। अमीर इंसानों की दौलत के आंकड़े खातों में लिखे होते  पर उसको बढ़ाने वाले मेहनतकशों के पसीने की बूंदों के हिसाब नहीं होते। रौशनी फैली है जहां तक वहां तक पूरा जहां चमक रहा
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एक बूंद रौशनी-हिन्दी लघु कथा (ek boond roshni-hindi short story)

बड़े शहर के विशाल मकान में रहने वाला वह शख्स एक दिन बरसात के दिनों मे गांव की ओर जाने वाली पगंडडी पर पानी मे अंधेरे में कांपते हुए कदम रखता हुआ आगे बढ़ रहा था। दरअसल शाम के समय वह बस मुख्य सड़क पर उतरा था उस समय बरसात धीरे शुरु हुई थी। उसे गांव जाना था
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भारतीय प्रचार माध्यम, तिब्बत और चीन-आलेख (indian media, tibbat and china-hindi artcile)

भारत के बौद्धिक वर्ग में बहुत कम लोग इस बात का अनुमान लगा पाये थे कि विश्वव्यापी मंदी इतने व्यापक रूप से विश्व में अंतर्राष्ट्रीय समीकरण बदल देगी। कुछ विशेषज्ञों ने इस बात से आगाह कर दिया था कि यह मंदी चैंकाने वाले  बदलाव लायेगी क्योंकि विश्व की
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