1
काबुलीवाला
(रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानी)मेरी पाँच बरस की लड़की मिनी से घड़ीभर भी बोले बिना नहीं रहा जाता। एक दिन वह सवेरे-सवेरे ही बोली, "बाबूजी, रामदयाल दरबान है न, वह ‘काक’ को ‘कौआ’ कहता है। वह कुछ जानता नहीं न, बाबूजी।" मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने दूसरी बात
- 7 10 टिप्पणियां [0]
May 09 2010 02:15 AM


Shuffle








