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31 Dec 2009
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बदन होता है बूढा

बदन होता है बूढा, मन अपनी फितरत छोड़ता है क्या पुराना होकर भी कुकर सिटी बजाना छोड़ता है क्या बीमार दिल के लोग साथ-साथ मिलेंगे वक्त की धारा ने सिकंदर को बहा दिया चाहत की सुनामी ने कई लोगों को बहा दिया जो जीत के दावे थे, सभी हार हो गए हम कल्लुओं के साम
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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हर दिल कुछ कहता है

विष्णु राजगढ़िया हर इंसान के सीने में एक धड़कता हुआ दिल है। हर दिल को दर्द होता है। यह दर्द किसी को अपना बनाने, किसी का लव पाने के लिए होता है. हर दिल की अपनी कहानी होती है. हर इंसान के अपने सपने होते हैं. लेकिन नार्मली हम किसी कॉमन परसन के सपनों को न
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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अरे जूता बनानेवाले कहां हो तुम।

अरे जूता बनानेवाले कहां हो तुम। देखो तेरे बनाये गये जूते की कीमत 50 करोड हो गयी है और तू सो रहा है। अपने जूते की कीमत वसूल भाई और पत्रकार मुंतजिर अल जैदी को रायल्टी देने का वादा कर। नहीं तो तू गरीब है, गरीब ही रह जायेगा। भाई ब्लागरों जूता बनाने वाले
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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रोने पर पहरा

मीनाक्षी सिन्हा जहां है अख्श गम का वहां होगा जरूर खुशियों का चेहरा जहां है हंसने पर बंदिशें वहाँ होगा जरूर रोने पर पहरा जहां जिंदगी में है गहरा अंधेरा वहां छुपा होगा जरूर स्वर्णिम सबेरा जहां छिपा है अज्ञानता और असत्यता वहां होगा जरूर गूढ़ ज्ञान तथा सत
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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लवली कहाँ है

लवली हमारे बीच से चली गई. ब्लागरों के लाख माना करने के बाद भी लवली ने अपनी घोषणा के अनुरूप संचिका को मौत दे दी। किसी को इससे दुःख हो या न हो लेकिन मुझे बहुत दुःख हुआ है, क्योंकि उसके ब्लॉग संचिका एवं भुजंग डॉट ब्लागस्पाट डॉट कॉम को लगातार देखता एवं प
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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आक्रामकता की मिसाल हैं सौरभ

दीपक अंबष्ठ क्रिकेट के मैदान पर अब कभी प्रिंस आफ कोलकाता नजर नहीं आयेंगे, लेकिन उन्होंने भारतीय क्रिकेट में लड़ने का जो जज्बा पैदा किया है वह कभी नहीं भूलेगा। सौरभ गांगुली एक ऐसा नाम जो अब खेल के मैदान से विदा हो चुका है, लेकिन उसकी उपलब्धियां किताबों
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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ईश्वर! कहाँ हो तुम

सुनील मंथन शर्मा ईश्वर है! इसे सदियों से ढूंढा जा रहा है। कोई पत्थरों में ढूंढ रहा है तो कोई मंदिरों में। कोई तस्वीरों में तो कोई तीर्था में, धामों में. भूखे-प्यासे, नंगे पांव, श्रद्धा-विश्वास के साथ, पागलों की तरह. सीधे कहें, कलियुग में ईश्वर के लिए
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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इस हिरोइन का नाम है....

यह हिरोइन तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलगु भाषा की फिल्मों में काम करती है। हिरोइन का नाम तस्वीरों के नीचे है। Name : Sneha Real Name : Suhasini Rajaram Naidu Born : oct 12,1981 Place of Birth: Bombay,India Acted in : Telugu,Tamil,Malayalam and Kannada स्
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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जरा इस हिरोइन का नाम बताइए तो

जवाब अगली पोस्ट में
 
सुनील मंथन शर्मा
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दीपक रे ! जलते रहना

आनंद अनल एक बार फिर आ गयी दिवाली चमकती हुई, उजाला बिखेरती हुई। दिवाली उत्सव की प्रतीक है, तो जीवन में स्वच्छता, शुचिता, पवित्रता का संदेशवाहक भी। संदेश ग्रहण करना और बात है, मगर उत्सव मनाना हमारी संस्कृति है। युगों से हम अपनी संस्कृति, सभ्यता की रक्ष
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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बहुत अच्छे हैं महाराष्ट्र के लोग

पुणे में मेरी एक बहन रहती है। आज सुबह फोन पर उससे बात हो रही थी। अचानक बात राज ठाकरे और महाराष्ट्र के लोगों को लेकर होने लगी। मैंने पूछा, महाराष्ट्र के तमाम लोग राज ठाकरे का समर्थन कर रहे हैं, तो तुम लोगों को कोई दिक्कत तो नहीं हो रही हैं। सुनते ही क
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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सुशील प्रकरण : मेरा भी हाथ थाम लीजिये गुरूजी

वेब पत्रकार सुशील कुमार सिंह को फर्जी मुकदमें में फंसाने के विरुद्ध दिल्ली में हुई बैठक का स्वागत है। एचटी मीडिया में शीर्ष पदों पर बैठे कुछ मठाधीशों के इशारे पर वेब पत्रकार सुशील कुमार सिंह को फर्जी मुकदमें में फंसाने और पुलिस द्वारा परेशान किए जाने
 
सुनील मंथन शर्मा
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मत बनाओ नफरत की दुनिया

फ़िल्म खुदा गवाह, कोहराम, तूफान, कभी क्रांति कभी जंग, सरफरोश के अलावा अन्य कई फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाने वाले अली खान मनसे प्रमुख राज ठाकरे की करतूतों से नाराज हैं। इस संदर्भ में अली खान ने प्रभात ख़बर से बात की। प्रभात ख़बर में 24 अक्तूबर क
 
सुनील मंथन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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दीपक रे ! जलते रहना

आनंद अनल एक बार फिर आ गयी दिवाली चमकती हुई , उजाला बिखेरती हुई। दिवाली उत्सव की प्रतीक है , तो जीवन में स्वच्छता , शुचिता , पवित्रता का संदेशवाहक भी। संदेश ग्रहण करना और बात है , मगर उत्सव मनाना हमारी संस्कृति है। युगों से हम अपनी संस्कृति , सभ्यता क
 
सुनील मंथन शर्मा
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तुमसे एक गुजारिश है कि

सुनील मंथन शर्मा मौत तू जाना अपनी जगह पर, तुमसे एक गुजारिश है कि जाने से पहले मुझे फिर से एक जिन्दगी दे जाना कि जी सकूँ तेरे दुश्मन-संघषों के साथ कि जी सकूँ वक्त के थपेडों, दम घुटती सांसों के साथ और बनाऊं एक ऐसा जीवन जहाँ आने से पहले तेरी रूह कापें म
 
सुनील मंथन शर्मा
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भगवान बेच कर रोटी खरीदने की कोशिश...

कविताएं लिखने, किसी और की कविताएं पढ़ने और उन्हें सहेजकर रखने की मेरी पुरानी आदत है। एक कविता जो आज से आठ-नौ साल पहले प्रभात खबर के रविवार के अंक में छपी थी, उसकी कतरन अन्य कतरनों के साथ पड़ी हुई थी। आज अचानक कतरनों को उलटते वक्त उस पर नजर गयी और कई बा
 
सुनील मंथन शर्मा
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पागल

मेरी यह लघुकथा 'जनसत्ता सबरंग' के 6 मई 2001 के अंक में प्रकाशित हुई थी। मेरी इच्छा है कि ब्लागर भाई इस लघुकथा को पढ़ने के बाद आज के संदर्भ में नए रूप में गढें, ताकि आपके विचार सामने आ सके। सुनील मंथन शर्मा पागल लड़का बी ए करने के बाद कंप्यूटर सीखकर ए
 
सुनील मंथन शर्मा
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लगाव जरुरी है

अमिताभ प्रियदर्शी ब्लॉग पर आए मुझे कुछ अधिक दिन नहीं हुए। इस बीच काफी अच्छा लगा यह जानकर कि ब्लॉग लोगों से जुड़ने का अच्छा जरिया है। अच्छा लगता है जब अपनी रचना पर, अपनी बात पर हमें प्रतिक्रिया मिलती है। लेकिन, एक बात मुझे जो खटकती है वह यह है कि मुझे
 
सुनील मंथन शर्मा
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बैठा रहा मैं उसके इंतज़ार में

अ मिताभ प्रियदर्शी जिन्दगी मेरे पास से हो कर गुजर गई, बैठा रहा मैं उसके इंतज़ार में। गुलों की तिजारत करता रहा उम्र भर, पर तकदीर फंस कर रह गयी खार में। क्यों मुहबत्त को करें बदनाम यारा, जब दिल ही बेवफाई कर गया। धोखा, फरेब, रुसवाई सब बेचारे हैं ये ख़ुद
 
सुनील मंथन शर्मा
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...और राज भाटिया जी को गुस्सा आ गया

जनवरी को मैंने एक तस्वीर के बारे में 'राज भाटिया और लवली जी के लिए' शीर्षक से पूछा था. कई ब्लागरों ने भी जवाब दिया. पहले तो राज भाटिया जी ने ही जवाब दिया कि यह कुकुम्बर है. उन्होंने आशंका जताते हुए Zucchini भी कहा. उसके बाद आए आर सी मिश्रा जी. उन्हों
 
सुनील मंथन शर्मा
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राज भाटिया जी एवं लवली जी के लिए

राज भाटिया जी एवं लवली जी अचानक मुझे एक तस्वीर दिख गई। यूं तो मैं पहेली पूछता नहीं हूँ, लेकिन ब्लागरों की ओर से पूछी गई पहेली का जवाब देने का प्रयास जरुर करता हूँ। तस्वीर दिखी तो लगा सबसे पूछ लूँ। फ़िर आप दोनों की याद या गई कि आप दोनों पहेली पूछने में
 
सुनील मंथन शर्मा
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मोहब्बत का पैगाम

अरविंद कुमार एक राम लिख देना, दूसरा रहमान लिख देना एक दूसरे के दिल में मोहब्बत का पैगाम लिख देना न हिंदू न मुस्लिम सिर्फ़ इंसान लिख देना गर बहे शरीर का एक भी कतरा तो हर कतरे पर अपना प्यारा हिंदुस्तान लिख देना
 
सुनील मंथन शर्मा
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उफ़ ये आतंकवाद

अरविन्द कुमार युद्ध के माहौल में शान्ति की कोई बात नही होती देशभक्तों के लिए कभी दिन या रात नही होती आइये मिलकर करें मुकाबला आतंकवाद से क्योंकि आतंकवादियों की कोई धरम या जात नहीं होती। कवि प्रभात ख़बर गिरिडीह में ब्यूरो चीफ हैं.
 
सुनील मंथन शर्मा
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ऐसा हो साल नया

खेतों को अनाज मिले बैलों को सानी जंगल को पेड़ मिले नदिया को पानी बिटिया को प्यार मिले बेटे को काज तवे को रोटी मिले चूल्हे को आग बटिया को राही मिले प्यासे को कुआं बच्चों को खेल मिले चिमनी को धुआं सागर भी नीला रहे पर्वत हो धानी ऐसा हो साल नया जिसके हों
 
सुनील मंथन शर्मा
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