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तीखी नज़र

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14 Jun 2010
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माना जाता अतिथि को भारत में भगवान

माना जाता अतिथि को भारत में भगवानएंडरसन जी का अत: पार्थ किए सम्मानपार्थ किए सम्मान भक्ति का सूत टटोलातब होकर मजबूर सजाया उड़न खटोलादिव्यदृष्टि उड़ गया फुर्र शव का व्यापारीकिंतु रही महफूज 'गैसमय' नीति हमारी
 
दिव्यदृष्टि
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रोये बेबस बाप देख नयनों का फूला

शैशव में जो आंख के तारे के मानिंदवही जवानी में बना पुत्र मोतियाबिन्दपुत्र मोतियाबिन्द 'मान-मर्यादा' भूलारोये बेबस बाप देख नयनों का फूलादिव्यदृष्टि फरजंद सताए सांझ-सकारेअत: प्रशासन उसे मौत के घाट उतारे
 
दिव्यदृष्टि
Jun 12 2010 05:40 PM
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अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीक

अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीककेवल अपने कथ्य ही मानें हरदम ठीकमानें हरदम ठीक, नजरिया निजी अनूठा'साथी' जो कुछ कहें उसे बतलाएं झूठादिव्यदृष्टि इसलिए 'सही' अवसर बोलेंगेएंडरसन के 'अतिथि' भेद सगरे खोलेंगे
 
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अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीक

अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीककेवल अपने कथ्य ही मानें हरदम ठीकमानें हरदम ठीक, नजरिया निजी अनूठा'साथी' जो कुछ कहें उसे बतलाएं झूठादिव्यदृष्टि इसलिए 'सही' अवसर बोलेंगेएंडरसन के 'अतिथि' भेद सगरे खोलेंगे
 
दिव्यदृष्टि
Jun 11 2010 05:11 PM
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भारत में आतंक का हामी पाकिस्तान

यह सच्चाई दोस्तो जाने सकल जहानभारत में आतंक का हामी पाकिस्तानहामी पाकिस्तान बीज कटुता के बोएउग्रवाद की फसल बढ़ा मस्ती में सोएदिव्यदृष्टि 'सींचे' उसको आईएसआईजाने सकल जहान दोस्तो यह सच्चाई।
 
दिव्यदृष्टि
Jun 10 2010 03:12 PM
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पुलिस तक्षकों में बढ़ा काम वासना रोग

रक्षक की वर्दी पहन भक्षक बनते लोगपुलिस तक्षकों में बढ़ा काम वासना रोगकाम वासना रोग, भोग में वृद्धि निरन्तरपद की गरिमा घटी हुई निष्ठा छू-मंतरदिव्यदृष्टि कद-मद में करते गुंडागर्दीभक्षक बनते लोग पहन रक्षक की वर्दी
 
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तुलसी बाबा कह गए दोषी नहीं समर्थ

तुलसी बाबा कह गए दोषी नहीं समर्थएंडरसन पर इसलिए शोर मचाना व्यर्थशोर मचाना व्यर्थ इंडियन बकरी खाएफिर अमेरिकी बाघ रोज हम पर गुर्राएदिव्यदृष्टि चाहे वह कर दे खून खराबादोषी नहीं समर्थ कह गए तुलसी बाबा
 
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निगल हजारों जिन्दगी गैस गई भोपाल

निगल हजारों जिन्दगी गैस गई भोपालकितनों के जन्मे कई लूले-लंगड़े लाललूले-लंगड़े लाल, दर्द से भर कर आहेंरहे मांगते 'न्याय' नित्य फैला कर बाहेंदिव्यदृष्टि इस भांति सदी बीती चौथाईकिन्तु दंड की गूंज नहीं पड़ रही सुनाई
 
दिव्यदृष्टि
Jun 07 2010 06:30 PM
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बेमतलब अखबार उन्हें संलिप्त बताएं

कामधेनु-पय से धुला है सारा परिवारखूब सफाई दे रहे जमकर शरद पवारजमकर शरद पवार इरादा नेक जताएंबेमतलब अखबार उन्हें संलिप्त बताएंदिव्यदृष्टि जिसके दम से सेंटर में सत्ताआईपीएल में चाहेगा वह क्यों 'पत्ता'
 
दिव्यदृष्टि
Jun 05 2010 01:54 PM
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लालमहल को रौंद कर विहँस रहा तृणमूल

लालमहल को रौंद कर विहँस रहा तृणमूललेफ्ट हैंड में जा चुभा सख्त-सियासी-सूलसख्त-सियासी-सूल, 'पीर' बढ़ रही निरंतरचली कोलकाता में ममता लोकल जमकरदिव्यदृष्टि बुद्धा बाबा बिलखें पल-पल कोविहँस रहा तृणमूल रौंद कर लालमहल को
 
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दिया सड़क पर मौत का नारी को उपहार

दिया सड़क पर मौत का नारी को उपहारफिर उसके शव पर रहे लोग चलाते कारलोग चलाते कार, कहें इसको 'मनमानी'या हो गया समाप्त सभी नयनों का पानीदिव्यदृष्टि हे राम जमाना कहे फड़क करनारी को उपहार मौत का दिया सड़क पर
 
दिव्यदृष्टि
May 31 2010 07:06 PM
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झुकता उनके कृत्य से मानवता का भाल

लेकर झंडा लाल जो करें धरा को लालझुकता उनके कृत्य से मानवता का भालमानवता का भाल चाल है निर्मम शातिरनिरपराध मर रहे रेल में विवश मुसाफिरदिव्यदृष्टि अफसोसनाक उनका हथकंडाकरें धरा को लाल लाल जो लेकर झंडाबनियागीरी छोड़ कर मनमोहन जी आपनक्सलियों के मर्ज को समझें
 
दिव्यदृष्टि
May 29 2010 07:03 PM
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कायम करो 'मिसाल' उतारें लोग आरती

तकलीफों का बूट से करके काम-तमामबेटे ने रोशन किया दलित पिता का नामदलित पिता का नाम लगन से करी पढ़ाईलिए 'इरादा पक्का' वह चढ़ गया चढ़ाईदिव्यदृष्टि की दुआ यही अभिषेक भारतीकायम करो 'मिसाल' उतारें लोग आरती
 
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कालकोठरी में ताई अब मुझे न रहना

शीला मेरी मौत से करिये नहीं मजाकपड़ा-पड़ा मैं जेल में होता रोज हलाकहोता रोज हलाक कष्ट पड़ता है सहनाकालकोठरी में ताई अब मुझे न रहनादिव्यदृष्टि है नागवार यह शासन ढीलाकरिये नहीं मजाक मौत से मेरी शीला
 
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खूब चली बेशर्म पर अदालती बंदूक

सजा बढ़ी राठौर की बंद हो गई हूकखूब चली बेशर्म पर अदालती बंदूकअदालती बंदूक चूक प्रत्यक्ष सुधारीपूरी किया वसूल रही जो शेष उधारीदिव्यदृष्टि जो काम करे नामर्दी वालाबेइज्जत हो इसी तरह वह वर्दी वाला
 
दिव्यदृष्टि
May 27 2010 12:59 PM
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किसी तरह बेगम उसको हासिल हो जाए

सजायाफ्ता कसब की यही आखिरी चाहकिसी तरह करवाइए उसका आप निकाहउसका आप निकाह, तमन्ना दिली बताएकिसी तरह बेगम उसको हासिल हो जाएदिव्यदृष्टि फिर बचाखुचा जो काम अधूराकरे 'कसाई' का 'वारिस' वह फौरन पूरा
 
दिव्यदृष्टि
May 25 2010 07:22 PM
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चल गांधी की राह बदन पर लगा लंगोटी

घटे साल के अन्त तक महंगाई की आयुतब तक रामगरीब तू खा प्यारे जल वायुखा प्यारे जल वायु छोड़ रोटी का टुकड़ाबन संतोषी जीव सुना मत नाहक दुखड़ादिव्यदृष्टि मत मार रोज शासन को सोंटीचल गांधी की राह बदन पर लगा लंगोटी
 
दिव्यदृष्टि
May 24 2010 04:34 PM
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मन्नू भाई जब तलक चला रहे सरकार

मन्नू भाई जब तलक चला रहे सरकारनहीं थमेगी तब तलक महंगाई की मारमहंगाई की मार, प्राण पब्लिक के छूटेंप्रणव मुखर्जी किन्तु हाथ से दोनों लूटेंजमाखोर की दिव्यदृष्टि नित बढ़े कमाईचला रहे सरकार जब तलक मन्नू भाई
 
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लगा राम की मूर्ति बनें पॉलिटिकल पंडा

दूर इलेक्शन का अभी दीखे सूत-कपासलेकिन लट्ठमलट्ठ की वरुण अदाएं खासवरुण अदाएं खास, सियासी चादर बुनते'राजनीति की रुई' नित्य नफरत से धुनतेदिव्यदृष्टि फिरते हैं 'भगवा' ओढ़ दुशालालिए 'राम को गोद' चढ़ें सिंहासन लालाराम-लला की कृपा से हों यदि सत्तासीन'माया
 
दिव्यदृष्टि
May 20 2010 07:26 PM
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फांसी की फाइल रहीं शीला बैठी दाब

फांसी की फाइल रहीं शीला बैठी दाबचार बरस जूं कान पर रेंगी नहीं जनाबरेंगी नहीं जनाब, चिदम्बर ने दी दस्तकतब ठनका मजबूरी में अंटी का मस्तकदिव्यदृष्टि क्या खूब राजनीतिक स्टाइलशीला बैठी रहीं दाब फांसी की फाइल
 
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भगदड़ में जाये भले मुसाफिरों की जान

भगदड़ में जाये भले मुसाफिरों की जानममता जी देतीं नहीं फिर भी कोई ध्यानफिर भी कोई ध्यान न कतई नेह जतातीं'पैसेंजर-की-ही-गलती' वे स्वयं बतातींदिव्यदृष्टि हर हाल उन्हें 'तृणमूल' सुहायेमुसाफिरों की जान भले भगदड़ में जाये
 
दिव्यदृष्टि
May 17 2010 05:40 PM
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केश कटाकर मंदिरा किया न चंगा काम

केश कटाकर मंदिरा किया न चंगा कामफिर चिपकाया पीठ पर टैटू रब का नामटैटू रब का नाम बहुत ही हरकत 'ओछी'कहते ज्ञानी लोग हिमाकत समझी-सोचीदिव्यदृष्टि सीने पर लिख तू इक ओंकारातभी 'पंथ' से मिट पाये नफरत का नारा
 
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ज्यादा भोजन से सदा होता है अतिसार

ज्यादा भोजन से सदा होता है अतिसारटीम इंडिया इसलिए फौरन करे विचारफौरन करे विचार जीभ काबू में रक्खेमुर्गा मछली छोड़ दाल-रोटी ही भक्खेदिव्यदृष्टि प्लेयर 'सेहत' के बनें न बैरीवरना 'मोटू' बता करें चुगली गुरु गैरी
 
दिव्यदृष्टि
May 14 2010 07:03 PM
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चूहे को यदि गडकरी बतलायेंगे स्वान

चूहे को यदि गडकरी बतलायेंगे स्वानमुहावरा साहित्य का हो इससे अपमानहो इससे अपमान इसलिए पहले सीखेंबेशक उसके बाद सभा-रैली में चीखेंदिव्यृ़ष्टि ज्ञानी बन बोलें मोहक बोलीवरना होगी रुष्ट सियासी ग्वाला-टोली
 
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किंतु कागजी शेर ढेर हो ताकें अंबर

आईसीसी र्वल्ड कप लगे हमारे हाथगए वेस्ट इंडीज वे इस दावे के साथइस दावे के साथ, रवाना हुए धुरंधरकिंतु कागजी शेर ढेर हो ताकें अंबरदिव्यदृष्टि जब थके हुए थे इतने भाईतो जाकर परदेस करी काहे रुसवाई
 
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सोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलें

चलती रही रमेश की यूं ही अगर जबानदुनिया भर में देश की रोज घटेगी शानरोज घटेगी शान, इसलिए जब मुंह खोलेंसोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलेंदिव्यदृष्टि वरना मनमोहन कर लें कुट्टीबिगड़े पर्यावरण केबिनेट से हो छुट्टी
 
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May 11 2010 07:18 PM
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सोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलें

चलती रही रमेश की यूं ही अगर जबानदुनिया भर में देश की रोज घटेगी शानरोज घटेगी शान, इसलिए जब मुंह खोलेंसोचें-समझें तभी बात अपनी वह बोलेंदिव्यदृष्टि वरना मनमोहन कर लें कुट्टीबिगड़े पर्यावरण केबिनेट से हो छुट्टी
 
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May 11 2010 07:00 PM
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जोड़-तोड़ से सब 'सरकारी माल' पचाओ

उचित व्यवस्था कीजिए दोनों अनिल-मुकेश'के जी बी' से मिल गया उन्हें 'सुपर' संदेशउन्हें 'सुपर' संदेश, व्यर्थ मत 'रार' मचाओजोड़-तोड़ से सब 'सरकारी माल' पचाओदिव्यदृष्टि उत्पन्न न हो फिर 'मल्ल' अवस्थादोनों अनिल-मुकेश कीजिए उचित व्यवस्था
 
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May 07 2010 04:06 PM
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सुन कर फांसी की सजा गया कसाई कांप

सुन कर फांसी की सजा गया कसाई कांपफंसा न्याय के जाल में दुष्ट 'लश्करी' सांपदुष्ट 'लश्करी' सांप, बैठ कर बिल में सोचेदेख 'मृत्यु' सन्निकट विषैली केंचुल नोचेदिव्यदृष्टि दर्जनों डस गया जालिम चुन करगया कसाई कांप सजा फांसी की सुन कर
 
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ट्रेनिंग सेंटर टेरर का बना हुआ है पाक

ट्रेनिंग सेंटर टेरर का बना हुआ है पाकउसके अड्डे को मगर करे न कोई खाककरे न कोई खाक नाक चाहे कट जाएकिंतु न कोई उसके ऊपर ' हाथ ' उठाएदिव्यदृष्टि नित शह देता डालरिया मेंटरबना हुआ है पाक टेरर का ट्रेनिंग सेंटर
 
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दुखी मुसाफिर फिर रहे बेचारे-बेचैन

दो दिन से हड़ताल पर बैठे मोटरमैनदुखी मुसाफिर फिर रहे बेचारे-बेचैन बेचारे-बेचैन, किस तरह दफ्तर जायेंकोई सरल उपाय नहीं चव्हाण बतायेंदिव्यदृष्टि पीटते 'मराठी-मानुष' छातीकिंतु न कोई हमदर्दी ममता जतलातीं
 
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May 04 2010 04:26 PM
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महबूबा पर कर दिया मंत्री-पद कुरबान

हुए शान से मुस्तफी रखा इश्क का मानमहबूबा पर कर दिया मंत्री-पद कुरबानमंत्री-पद कुरबान, मार कुसीर् को ठोकरफेथ जताये पुष्कर में खुद रुसवा होकरदिव्यदृष्टि 'यारी' प्यारी उनको जहान सेरखा इश्क का मान मुस्तफी हुए शान से
 
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व्यापारी होता नहीं कभी किसी का मित्र

व्यापारी होता नहीं कभी किसी का मित्रसिर्फ लाभ का ही उसे रुचे हमेशा चित्ररुचे हमेशा चित्र जहाँ भी देखे घाटाअपनेपन को त्याग दूर से बोले ' टा - टा 'दिव्यदृष्टि अनुभव - प्रसूत है ' राय ' हमारीकभी किसी का मित्र नहीं होता व्यापारीप्रतिदिन बैरी पाक की दुष्ट
 
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Apr 17 2010 06:21 PM
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सिद्दीकी की शर्त को आखिर किए कबूल

गए बैक फुट पर मलिक मानी अपनी भूलसिद्दीकी की शर्त को आखिर किए कबूलआखिर किए कबूल लोग काफी समझाएतब वे कहीं तलाक आयशा को भिजवाएदिव्यदृष्टि सानिया किन्तु फिरतीं खिसियाई'बीवी नम्बर टू' को मिलती गजब बधाई।
 
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फिर भी पायें डबल तरक्की बल्ले-बल्ले

बने विधायक मगन हो भर मन में उत्साहलेकिन अब होने लगा उनको कष्ट अथाहउनको कष्ट अथाह चाह 'सेवा' की भागीजन-सेवक जी बने महज 'मेवा' अनुरागीदिव्यदृष्टि पब्लिक की काटें जेब निठल्लेफिर भी पायें डबल तरक्की बल्ले-बल्ले
 
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Apr 06 2010 03:02 PM
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करें केंद्र से वार्ता छोड़ 'घमंडी' चीख

हिन्दुस्तानी नक्सली लें प्रचंड से सीखकरें केंद्र से वार्ता छोड़ 'घमंडी' चीखछोड़ 'घमंडी' चीख प्रेम से आगे आएं'शास्त्रार्थ' से सभी समस्याएं सुलझाएंदिव्यदृष्टि सत्ता को कर दें पानी-पानीलें प्रचंड से सीख नक्सली हिन्दुस्तानी
 
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Mar 29 2010 04:43 PM
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जबसे जनप्रतिनिधि बने दुष्ट, उठाईगीर

जबसे जनप्रतिनिधि बने दुष्ट, उठाईगीरतबसे बढ़ती जा रही जनमानस की पीरजनमानस की पीर नीर नयनों में भरकरसहें नित्य संताप विवश हो रहते डरकरदिव्यदृष्टि दल यहां न कोई रहा अछूताजो न उठाये गुण्डों, मक्कारों का जूता
 
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चौथेपन में 'खेल' खेलती बुढ़िया माई

दिल्ली वाले आजकल दीख रहे बेजारहोता उनके हृदय पर भारी 'शिला' प्रहारभारी 'शिला' प्रहार, न जाने 'पीर' पराईचौथेपन में 'खेल' खेलती बुढ़िया माईदिव्यदृष्टि रोजी-रोटी के पड़ते 'लाले'दीख रहे बेजार आजकल दिल्ली वाले
 
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कांग्रेस की आंख का तारा थे अमिताभ

कांग्रेस की आंख का तारा थे अमिताभमगर मोतियाबिंद अब लगते उसे जनाबलगते उसे जनाब साइकिल पर जो घूमेकाहे को चव्हाण हाथ उसका तुम चूमेदिव्यदृष्टि यदि रूठ गईं सोनिया भवानी'बत्ती, बंगला छिने याद आ जाये नानी
 
दिव्यदृष्टि
Mar 26 2010 12:51 PM
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भूल गये 'औकात' वर्करों को लतियाये

सत्ता की सस्ती सनक सिर पर हुई सवारपद-मद-में मदहोश हो मटक रहे सत्तारमटक रहे सत्तार, 'लाल बत्ती' जब पायेभूल गये 'औकात' वर्करों को लतियायेदिव्यदृष्टि मंत्री पद लाया अभिनव मस्तीसिर पर हुई सवार सनक सत्ता की सस्ती।
 
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