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तो खुद को पाती हूं ठगा हुआ
क्यूं परिपक्वता को बचपन की दहलीज पर कदम रखने से रोका मैंने? क्यूं दी जीवन की आहूति किसी गैर के आशियाने में ? आज वो नहीं आया अपनी खुशियों में बुलाने मुझे बस छोड़ गया ठगा हुआ मुझे मेरे अश्कों के साथ खोखले आशियाने में देखती हूं किसी की डोली उठते तो अहसा
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Dec 29 2009 12:03 PM


Shuffle








