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तेताला

http://tetalaa.blogspot.com/
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10 Jun 2010
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पाखी पत्रिका की प्रतिभा कुशवाहा चांद पर लेकर चल रही हैं, आप भी साथ चलें

बाल ब्‍लॉगों की वाटिकाहेमन्‍त कुमार अग्रवाल के  स्‍नेहांचल बालसभा एक अभियान हैहेमंत कुमार का फुलबगियारश्मि प्रभा का मीठे बोलविमला भंडारी का बाल साहित्‍यमानसी का परी कथाअभिव्‍यक्ति, सृजनगाथा, हिन्‍दी युग्‍म, हिन्‍दी समय, सरस पायस। पाखी पत्रिका के जून
 
अविनाश वाचस्पति
टैग: पाखी
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विज़ुअल चर्चा

विभिन्न ब्लागों पर दिखाई दिए चित्र इस पोस्ट में संकलित करने का प्रयास किया गया है. यदि आप केवल चित्र का अवलोकन कर तृप्त हैं तो आपका स्वागत है. यदि चित्र का संदर्भ जानने की उत्कंठा जागृत हो तो कृपया चित्र पर क्लिक कर संबंधित ब्लाग पर जा सकते हैं आप. -काजल
 
काजल कुमार Kajal Kumar
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मंज़िल चलकर आयेगी तुम्हारे पास

अंधेरा बहुत गहरा होतो समझनासुबह क़रीब हैलड़ना नहीं तमस सेअपनी शक्ति जाया मत करना शून्य में इंतज़ार करना सूर्य के उगने काअंधेरा ख़ुद-ब-ख़ुदभाग खड़ा होगातुम्हारे रास्ते सेदुःख जब भी आएघबराना नहीं, विचलित मत होना सुख पास ही खड़ादेख रहा होगातुम्हारी बेचैनी
 
डा.सुभाष राय
टैग: kavita
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मत भटकिए इधर उधर दसवीं का परिणाम जानने के लिए आइये इधर

यहां पर क्लिक करें जो विंडो खुले उसमेंअपना रोल नंबर भरेंऔर जानेंपरिणाम।
 
अविनाश वाचस्पति
Jun 01 2010 04:25 PM
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प्रिंट मीडिया में मोबाइल चर्चा : दांत भी हुआ हाइटैक (IDHBM)

जानिए तकनीकमानिए तकनीकबिल्‍कुल यूनीक।
 
अविनाश वाचस्पति
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थिर हो गई पत्‍ती : दुनिया मेरे आगे में श्‍याम विमल को पढि़ए

कविता कैसी लगीयह भी बतलाइये ?दैनिक जनसत्‍ता दिनांक 20 मई 2010 से ब्‍लॉगहित में साभार।
 
अविनाश वाचस्पति
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इसे नहीं पढ़ा तो क्‍या पढ़ा समझो ब्‍लॉगिंग निरर्थक गई : प्रस्‍तुति नवीन तिवारी

श्री नवीन तिवारी जी ने ई मेल से खास आपके लिए हैं भिजवाए । आप इसे पढ़ लें तो मुझे सुकून आये।जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते
 
अविनाश वाचस्पति
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कल गब्‍बर के पास चला गया सांभा (अविनाश वाचस्‍पति)

मैकमोहन से आप खूब परिचित हैं। उनकी अदाकारी ने दर्शकों से खूब लोहा लिया है। लोहा लेने में गब्‍बर सिंह भी कम नहीं रहे। शोले फिल्‍म ने भी खूब लोहा लिया। परन्‍तु एक दिन लोहे सोने का खेल खत्‍म हो जाता है। इस खेल के पूरा होने पर सबको जाना पड़ता है। गब्‍बर से
 
अविनाश वाचस्पति
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विश्‍व क्रिकेट कप (अविनाश वाचस्‍पति)

हर बार यही होता हैहर बार यही होना हैतो फिर हमें क्‍यों दुखी होना हैजानने के लिएखुशी पाने के लिएइमेज पर क्लिक कीजिएऔर वह पढ़ जाइये जोसुमन सौरभ मासिक में अप्रैल 2007के अंक में प्रकाशित हुआ था।
 
अविनाश वाचस्पति
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दो मई को हो रहा है पुस्‍तक लोकार्पण : आपको भी किया जा सकता है सम्‍मानित (अविनाश वाचस्‍पति)

कहां हो रहा हैकौन लेखक हैक्‍या पुस्‍तक हैकौन कर रहे हैंकौन आ रहे हैंकौन बतला रहे हैंसुबह होगाया होगा शाम कोआज शाम कोबतलायेंगे नुक्‍कड़ परहर खास-ओ-आम कोतो जानने के लिएमजदूर दिवस परशाम तक आपटहलते रहिएजल्‍द ही खबरदूंगा पर अभी दे दीतो आप भूल जाएंगेवैसे इतना
 
अविनाश वाचस्पति
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tumhe dhona samay ka bhar Thodi chal tej karo

तुम्हे ढोना ही समय का भार थोड़ी सी चल तेज करो , थोड़ी सी चाल तेज करोजिन्दगी को जिन्दगी बनाने के लिए , जिन्दा दिल की रातो मे उछाल लाईयेमांगने से रौशनी मिलेगी न कभी , रौशनी के बास्ते मशाल लाईयेमोन है व्यब्स्ता तो बदल दीजियेतुम्हे ढोना है ----------------
 
Tumhe dhona h samay ka bhar
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Alag sa: अपनी सेना के वीर जवानों की खातिर इसे पढ़ें और पढवाने की कोशिश जरूर करें.

Alag sa: अपनी सेना के वीर जवानों की खातिर इसे पढ़ें और पढवाने की कोशिश जरूर करें.
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
Apr 27 2010 09:48 AM
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Alag sa: जय हिंद, जय जवान. इसे जरूर पढ़ें और कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ सकें.

Alag sa: जय हिंद, जय जवान. इसे जरूर पढ़ें और कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ सकें.
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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छिपा नहीं छपा है कि सब्जियां शराब पीकर डांस कर रही हैं (अविनाश वाचस्‍पति)

छपा है छिपा भी है। पर आप सिर्फ इमेज पर क्लिक करते जाइये। यह क्लिक करना पसंद या नापसंदगी के चटके नहीं हैं। ये वो झटके हैं जो आजकल सब्जियों को शराबडांस करते देखकर किसान को लग रहे हैं परन्‍तु सब्जियों को शराब की लत भी तो किसानों ने ही डाली है। जानने के लिए
 
अविनाश वाचस्पति
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नुक्कड़ ब्लाग के लेख की प्रतिक्रियास्वरूप - काजल कुमार

नुक्कड़ ब्लाग पर अविनाश वाचस्‍पति जी के "माननीय रतन टाटा जी से अनुरोध कि टाटा मोटर्स की इस खराब कार के मामले में हस्‍तक्षेप करने का कष्‍ट करें ? " लेख पर टिप्पणी तो मैंन प्रतिक्रियारूप ही लिखनी शुरू की थी किंतु मुद्दे इतने सारे इकट्ठे हो गए कि मुझे लगा
 
काजल कुमार Kajal Kumar kajalkumar@comic.com
टैग: टाटा
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अभिव्‍यक्ति में पढि़ए अचार में चूहा

अचार में चूहाचूहा, छिपकली इत्‍यादि तो इतने बड़े होते हैं कि बाद में अचार में आँखों से दिखलाई दे जाते हैं परंतु काक्रोच, गोभी के कीड़े, सुर्रियाँ इत्‍यादि जो अचार बनाते समय इसमें घुल जाते हैं, क्‍या वे कभी पकड़े जा सकते हैं? और क्‍या इंसान इस डर से कभी
 
अविनाश वाचस्पति
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सबके दिलों के सरदार माननीय ललित शर्मा जी ने हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग को अलविदा कहा

यह सच हैमैं तेताला हूंमेरे से जुड़े रहे हैं ललित शर्मा जीअब यहां भी नहीं हैंअपनी ब्‍लॉग पोस्‍ट पर टिप्‍पणी भी बंद कर दी हैंजिसका अर्थ हैदरवाजे से घंटी का बटन ही हटा लिया हैजिससे आप यह न समझेंकि वे टंकी पर चढ़े हैंवैसे मुझे तो लग रहा हैऐसा ही होना हैहम
 
अविनाश वाचस्पति
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सानिया की शादी, टीवी वाले बाराती में रवीश कुमार बतला रहे हैं

आज दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में ब्‍लॉग वार्ता : सानिया की शादी, टीवी वाले बाराती में रवीश कुमार ने खूब कहा है और जिक्र किया है अनिल पाण्‍डेय की ब्‍लॉग पर गर्माहट का, कृष्‍ण मुरारी प्रसाद की दलील का, उपदेश सक्‍सेना के उपदेश नहीं तर्क का, और सुधा सिंह ने जो
 
अविनाश वाचस्पति
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चीनी और महंगाई की जुगलबंदी (अविनाश वाचस्‍पति)

करिए इमेज पर क्लिक और पढि़ए मित्रवैसे मनाही तो दुश्‍मनों को भी नहीं हैपर क्‍या करूं मैं मेरे दुश्‍मन ही नहीं हैंटिप्‍पणी देने के लिए यहां पर क्लिक कीजिए
 
अविनाश वाचस्पति
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फूल एक अप्रैल में खिलता है (अविनाश वाचस्‍पति)

उस फूल का नाम बतलायेंजो अप्रैल में खिलता हैदिमाग का पोर पोरउससे हिलता हैफूल देता है खुशीसुगंध देता है बाद मेंनाम सुनते हीइस दिन कामन चंचल हो उठता है।उस फूल का नाम बतलायेंजो एक अप्रैल को खिलता हैखिलता भी हैखुलता भी हैइससे दिमाग।गाते हैं इस फूल को देखकरसब
 
अविनाश वाचस्पति
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बृहस्‍पतिवार को पोस्‍ट किए गए कुछ महत्‍वपूर्ण लिंक्स ...... संगीता पुरी

सीमा सचदेव जी के द्वारा प्रेषित किए गए आज के विचार से मैं इस चर्चा की शुरूआत कर रही हूं .... अंतरमन की शुद्धि से, मिट जावें सब पापअपनी भूलों पर करे , जो दिल से पश्चातापदिल से पश्चाताप , मन संताप मिटावेहो जाए जो भूल , क्षमा से मुक्ति पावेंकह सीमा समझें
 
संगीता पुरी
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सवारी ले जाने से इनकार नहीं कर सकते ऑटोवाले (अविनाश वाचस्‍पति)

पढि़ए बतला रहे हैं आदित्‍य मित्र जीआज 28 मार्च 2010 को दैनिक नवभारत टाइम्‍स में।वैसे वो खूब करते हैं इनकारअकड़ते हैं और नहीं ले जाते हैं मीटर को तो खराब बताते हैंगैस नहीं हैभरवाने जा रहा हूंऐसे बहाने भी बनाते हैंघर जाने का समय हैरात भर जगा हूं।पर अगर आप
 
अविनाश वाचस्पति
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तेताला पर नए चिट्ठों का स्वागत कीजिए-------ललित शर्मा

ब्लाग जगत में नित नये हिंदी के चिट्ठों का आगमन हो रहा है, हम उनका हार्दिक स्वागत करते हैं तथा उनसे कामना करते हैं कि वे अपने सार्थक ले्खन से ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे, चलिए मैं ललित शर्मा आपको कुछ नये चिट्ठों की सैर कराता हुं------सबसे पहले एक चिट्ठा
 
ललित शर्मा
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Alag sa: हे श्रीराम, आज हमें तुम्हारा जन्मदिन नहीं, तुम्हारा सान्निध्य चाहिए.

Alag sa: हे श्रीराम, आज हमें तुम्हारा जन्मदिन नहीं, तुम्हारा सान्निध्य चाहिए.
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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हिन्‍दी फिल्‍म निर्देशक अनवर जमाल से बातचीत (अविनाश वाचस्‍पति)

यह बातचीत गत वर्ष द्वितीय हरियाणा अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह, यमुनानगर द्वारा प्रकाशित दैनिक बुलेटिन में प्रकाशित हुई थी। उसी का स्‍कैनबिम्‍ब लगाया गया है। इमेज पर क्लिक करके इसे पढ सकते हैं
 
अविनाश वाचस्पति
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हिन्‍दी ब्‍लॉगर से अंग्रेजी दैनिक हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स ने बातचीत की (अविनाश वाचस्‍पति)

आप जरूर मिले होंगेचाहे एक बार हीकवि सुमित सेउनके ब्‍लॉग परहो सकता हैहुए हो रूबरू भीदिल्‍ली पुलिस में हैंवैसे कहा जाता हैन दोस्‍ती न दुश्‍मनीपुलिस की होती भलीपर अगर हो कविपुलिस वाला तोटूटती है यह छवि।उपर इमेज पर करें क्लिकऔर जाने कवि सुमित कोउनके बारे में
 
अविनाश वाचस्पति
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ब्लॉग में अपार संभावनाएं हैं : कनिष्क कश्यप

ब्लॉगप्रहरी एक उम्दा सोच का रिज़ल्ट ही है,  आज उस उम्दा सोच के धनी कनिष्क कश्यप से हुई भेंट वार्ता सादर सुधि श्रोताओं के लिए सादर प्रस्तुत है सुनने के लिए चटका लायें यहाँ
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
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महंगाई क्‍यों बढ़ रही है अगर जानना चाहते हैं तो रुकिए ? (अविनाश वाचस्‍पति)

दैनिक नवभारत टाइम्‍स ने 16 मार्च 2010 के अंक में सचित्र समाचार के जरिए खोली है पोल, आप भी देखिए महंगाई क्‍यों बढ़ रही है खौल खौलस से सरकारस से साईकिलऔर स से ही संभालनासंभाला कुछ नहीं जा रहापर हौंसले बुलंद हैंवोटर भी इनकी मस्‍ती मेंजाने क्‍यों रजामंद है
 
अविनाश वाचस्पति
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आम पुलिसकर्मी नहीं काट सकते चालान : यातायात और चालान के नियमों को जानें (अविनाश वाचस्‍पति)

नवभारत टाइम्‍स रविवार14 मार्च 2010 के अंक मेंआदित्‍य मित्र ने दी है बहुत महत्‍वपूर्ण जानकारीपढ़ लें और जान लें अपने अधिकारइमेज पर करें क्लिक और याद लेंउपर आने से रह गया है जो हिस्‍सावो नीचे है उसे भी पढ़ लें आलस मत करें
 
अविनाश वाचस्पति
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Alag sa: "ग्लोबलाइजेशन" की ई-मेलीय परिभाषा

Alag sa: "ग्लोबलाइजेशन" की ई-मेलीय परिभाषा
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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अभिषेक कश्‍यप को पहला युवा कथा सम्‍मान : विख्‍यात कवि-कथाकार उदय प्रकाश ने प्रदान किया (अविनाश वाचस्‍पति)

चित्र में दिखलाई दे रहे हैं जोउनके नाम भी बतलाइये तोक्लिक इमेज पर करिएगा, तभी देख पाइएगा और पढ़ सकिएगासोपानस्‍टेप मासिक मार्च 2010 के अंक से साभार
 
अविनाश वाचस्पति
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अज्ञेय जन्‍मशती समारोहों की शुरुआत (अविनाश वाचस्‍पति)

बहुत भला लगाअज्ञेय जी कोउनकी ही आवाजमें सुनना।पढ़ने के लिए इमेज पर चटका लगाएं । जनसत्‍ता से साभार
 
अविनाश वाचस्पति
Mar 08 2010 08:59 PM
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नवभारत टाइम्‍स महिला दिवस पर हिन्‍दी ब्‍लॉग की खबर दे रहा है (अविनाश वाचस्‍पति)

ब्‍लॉग अच्‍छा है जीबिल्‍कुल सच्‍चा है जीपढ़ लीजिए इसकोजो पढ़ा है उन्‍होंनेपर नहीं दिया है नामजिक्र किया है जिनकाखुद ही पढ़ लोखुद ही जान लोआप कहां पर हैंआकर पहचान लोपढ़ने के लिए इमेज परमाउस चटका दीजिए
 
अविनाश वाचस्पति
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लाल बहादुर शास्त्री जी और मंगलवार का दिन !!!

कभी-कभी कुछ ऐसा घटता है जिसके सामने कोई भी तर्क काम नहीं करता और हम इन संयोगों को मुंह बाए आंखें फैलाये कुदरती करिश्मा कह अपने आप को समझा लेते हैं। कुछ इसी तरह का अजीबोगरीब संयोग हमारे भूतपूर्व प्रधान मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी और मंगलवार के दिन
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
Mar 03 2010 06:44 PM
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Alag sa: अब पहले की तरह मौकापरस्तों का हाल बुरा नहीं होता.

Alag sa: अब पहले की तरह मौकापरस्तों का हाल बुरा नहीं होता.
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
Mar 02 2010 07:07 PM
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दिल्‍ली वाले आज तक पर हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की होली का प्रसारण होगा

भांग के नशे की शान काफूर न हो जाये तो कहिएगाभांग की मस्‍ती मेंन रहें सुस्‍ती मेंइसी या किसीशाम को7 बजे सेरात 9 बजे तकआज तक प्रसारण करेगाहिन्‍दी ब्‍लॉगरों कीब्‍लॉग पर मनाईगई होली परएक धमाकेदाररपटपर रपट मत जाना।भांग का असरअभी बाकी हैरात 9 बजेउतर जाएगीपूरी
 
अविनाश वाचस्पति
Mar 01 2010 03:27 PM
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संग ठन जाये ब्‍लॉगरों की आपस में ऐसा संगठन कभी नहीं चाहूंगा (अविनाश वाचस्‍पति)

होली का मजाक न समझें बिल्‍कुल गंभीर हूंसंग ठन जायेब्‍लॉगरों मेंऔर गठन चाहेमैं ऐसा नहीं हूं।साथ लेकर चलता हूंअब अकेला नहीं हूंअकेला नहीं रहने दूंगासबको साथ लेकर चलूंगासब आयेंगे साथ मेरेमन है विश्‍वास।समस्‍यायें सबकी साझी हैंविश्‍वास सबका साझा हैइकट्ठे
 
अविनाश वाचस्पति
Feb 25 2010 07:12 PM
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विश्वास और अंधविश्वास के बीच सिर्फ एक महीन लकीर होती है.

आज के मशीनी युग में आस्था, विश्वास, चमत्कार जैसी बातें दकियानूसी लगती हैं। पर कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है, जिसे आस्थावान चमत्कार और भौतिकतावादी संयोग कह कर संतुष्ट हो जाते हैं।बिना लाग-लपेट के एक सच्ची घटना बता रहा हूं। अब इसे चाहे संयोग माने चाहे अपने
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
Feb 21 2010 05:12 PM
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विश्वास और अंधविश्वास में ज़रा सा फर्क होता है.

बचपन में माँ के आंचल में छुप कर बच्चा निश्चिंत रहता है। पिता की ऊंगली पकड़ कर चलते हुए उसे कोई ड़र नहीं सताता। उसी तरह जब इंसान बड़ा हो अपने को पूरी तरह से प्रभू के आसरे छोड़ देता है तो फिर सदा के लिये भय मुक्त हो जाता है। यह विश्वास है। फसल अच्छी होगी यह
 
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
Feb 20 2010 06:14 PM
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बीमा का जोर है : कई कंपनियां हर ओर हैं (अविनाश

http://nukkadh.blogspot.com/2010/01/blog-post_30.htmlबीमा पर लिखी हुई कविताएं भेजने में विलम्‍ब न कीजिये
 
अविनाश वाचस्पति
Feb 15 2010 10:20 PM