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२५ साल का इंतज़ार और नाटकनुमा न्याय
कभी-कभी लगता है की शहर भी अपने लोगों की तरह हमें कर्ज़दार बनते हैं. आज भोपाल गैस त्रासदी पर अदालत का मज़ाकनुमा फैसला आने के बाद मुझे लग रहा है की भोपाल के गले से लिपट के रो लूँ. शायद उसका मन भी कुछ हल्का हो जाये. १५००० से ज्यादा मौतों और २५ साल के मानसिक
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Jun 07 2010 05:46 PM


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