रमता जोगी बहता पानी....'s Image

रमता जोगी बहता पानी....

http://kuchankahi-shruti.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
09 May 2010
कुल प्रविष्टियां
14
पाठक भेजे
806
पसंद
54
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
57.57
पसंद करें
5
नापसंद करें

मदर्स डे के बहाने- माएँ आ गई हैं !

मदर्स डे.......माँ के लिए निर्धारित एक दिन...मेरी माँ के लिए शुरू से ये दुकानदारी चलाने का दिन था। सासूँ माँ के लिए टीचर्स डे की ही तरह एक दिन जब उन्हें उनकी कुछ छात्राएँ ग्रीटिंग कार्ड देती थीं......और मेरे लिए? मैं उन बच्चों में से हूँ जिसने माँ बनने
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुछ अहसास...

कुछ अहसास ओस की बूंदो के जैसे करते है रुह को ताजा ... कुछ अहसास ठंडी हवा की तरह देते हैं मन की अगन को सुकून... कुछ अहसास भीगे होठों की तरह भरते हैं बंजर जमी में नमी... कुछ अहसास प्रेम की बूँदों के जैसे आंखों से बहने से पहले संभल जाते हैं... गिर के जम
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
0
नापसंद करें

महाशक्ति को जूता !

बुश साहब बेज्जती के जो सपने हम बगदादियों को चैन की नींद सोने नहीं देते जूते के रूप में ऐसे ही सपने तुम्हें भी मुबारक हो " गुस्सा, नफरत, भय और भयावह रुदन के बीच रोज मरती आत्मा। सपनों में, हकीकत में खुद को धिक्कारती...बार-बार अहसास दिलाती कि आत्मसम्मान
 
श्रुति अग्रवाल
Dec 29 2009 12:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोशे तुमसे मैं क्या कहूँ.......

मम्मी तुम मुझे छोड़कर क्यों चली गई? प्लीज, जल्दी वापस आ जाओ.........वरना मैं भी तुमकों छोड़कर चला जाऊँगा।" प्यार, मुनहार और धमकी मिले यह वाक्य मेरे नन्हें उस्ताद के हैं.......मेरे बेटे के। चौथे वसंत में कदम रखने के लिए उतावले हो रहे आयुष के वाक्यांश
 
श्रुति अग्रवाल
Dec 29 2009 12:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

रात अभी बाकी है.....

गहन अंधेरा है उजास नजर आता नहीं हर तरफ कुहासा है क्योंकि रात अभी बाकी है.... ताज पर फिर फहरा गया तिरंगा लेकिन जमीं पर बिखरा खून अभी बाकी है शर्मिंदा है जमीर, माँ की नहीं कर पाया रक्षा हर सिर है झुका क्योंकि रात अभी बाकी है.... उजाले के लग रहे हैं कया
 
श्रुति अग्रवाल
Dec 29 2009 12:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक पाती भईया राज के नाम...

राज ठाकरे जी कदाचित नाराज होंगे....मैंने उन्हें उत्तर भारतियों की तरह भईया जो कह दिया। क्या करूँ, रहती मध्यप्रदेश में हूँ लेकिन दोस्त पूरे देश में फैले हैं...तो भईया राज आप कौन सी कुंभकर्णी नींद में सोए हो। मुंबई जल रही है लेकिन आप नजर नहीं आए। क्यों
 
श्रुति अग्रवाल
Dec 29 2009 12:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

घर कब आओगे

सुनो मेरी दास्तां , समझो सियासी चालें... दंगे में वीरान हो चुके गुलाबगंज की जो दास्तां आपको सुनाई थी...आज दिखाने जा रही हूँ। हर बार दंगों के बाद ऐसा ही होता है..कुछ मुहल्ले बेनूर होते हैं लेकिन राजनेताओँ के चेहरे से नूर टपकता है। नूर वोटों की ताजी फस
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
0
नापसंद करें

रमता जोगी बहता पानी....

वीरान बस्ती ..उजाड़ मोहल्ला बुरहानपुर....मध्यप्रदेश का एतिहासिक शहर...एक जरा सी बात पर सियासत और सियासती दाँवपेंचों में झुलसता शहर। टैम सेंटर होने के कारण कई बार नजदीक से देखा था इस शहर को। जब भी यहाँ आती इतिहास का एक नया दस्तावेज हमारी बाट जोहता नजर
 
श्रुति अग्रवाल
Dec 29 2009 12:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिन रोली हल्दी के साथ परदेस में बंधी राखी....

चार से पाँच माह बीत गए...लंबे समय से कम्प्यूटर से दूर पहले तो आँखों का ऑपरेशन...फिर बहन की शादी...इसके बाद परदेसी होना। मेरा ब्लॉग भी मेरी माँ की तरह तन्हा हो गया..लंदन की आबोहवा के बाद भारत की गर्माहट और दो माँओं का दुलार....इसके बाद न्यूजीलैंड का
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
8
नापसंद करें

कभी-कभी खुद को पत्रकार मानने में शर्म आती है !

आज भी याद है वह सुबह जब एक ख्यात अखबार में उनके जर्नलिज्म स्कूल के खुलने की बात लिखी थी...पापा को बताया कि पत्रकारिता जैसा कुछ करना चाहती हूँ। यह बात सुनते ही माँ नाराज हो गईं। उनका मानना था कि पत्रकार केवल थैला लटकाकर यहाँ से वहाँ घूमते रहते हैं...फ
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
5
नापसंद करें

वैशाली की नगर वधू से लेकर फैशन फिल्म तक

क्या मिलेगी नारी को अपनी ही देह से मुक्ति फिर एक साल बदल गया......कलैंडर में 2008 की जगह अब 2009 चस्पा नजर आता है लेकिन क्या स्थितियाँ बदलेंगी। खासकर महिलाओं के लिए.....क्या उन्हे मुक्ति मिलेगी अपने ही देह के जाल से। क्या उन्हें सुंदर देह की कठपुतली
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
6
नापसंद करें

नारी सिर्फ देह नहीं...

कल रात चैनल सर्फ करते हुए निगाहें कलर्स पर टिक गईं। डॉसिंग क्वीन करके एक और रियलिटी शो आ रहा था...कजिन जिद्द करने लगी। दीदी न्यूज छोड़ों, दिन भर सीरियल चलता रहा...फिर न्यूज अब तो कुछ लाइट देखने दो। पुराने दिनों की तरह कजिन के साथ मस्ती करने लगी....एक
 
श्रुति अग्रवाल
पसंद करें
8
नापसंद करें

आतंक के दानव का सिर कुचल दो

कल रात से नींद आखों से गायब है...पूरी रात चैनल बदलने, मुंबई के हालातों की पल-पल की खबर देखनें में बीता। चैनल बदलते हुए बैचेनी बहुत थी। बैचेनी के दो कारण थे एक ये कि आखिर क्यों बार-बार हमारे ही देश को निशाना बनाया जा रहा है? दूसरा यह कि जब मेरे पति, ज