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महावीर

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15 Jun 2010
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भारत से सुभाष नीरव की दो लघु कथाएं

लेखक परिचय हिंदी कथाकार/कवि सुभाष नीरव लगभग पिछले 35 वर्षों से कहानी, लघुकथा, कविता और अनुवाद विधा में सक्रिय हैं। अब तक तीन कहानी-संग्रह ”दैत्य तथा अन्य कहानियाँ (1990)”, ”औरत होने का गुनाह (2003)” और ”आखिरी पड़ाव का
 
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Jun 15 2010 07:41 PM
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यू.के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

‘राज़ ‘ - प्राण शर्मा धर्मपाल ने टेलिफ़ोन का चोगा उठाकर सतपाल का फ़ोन नंबर मिलाया.फ़ोन की लाइन अंगेज थी.” पता नहीं कि लोग फोन पर क्या- क्या बातें करते हैं? घंटों ही लगा देते हैं.किसी और को बातकरने का मौक़ा ही नहीं देते हैं.” खीझ कर
 
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कनाडा से विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय “उड़नतश्तरी” हिंदी ब्लॉग के समीर लाल “समीर” की दो लघुकथाएं

समीर लाल का जन्म २९ जुलाई, १९६३ को रतलाम म.प्र. में हुआ. विश्व विद्यालय तक की शिक्षा जबलपुर म.प्र से प्राप्त कर आप ४ साल बम्बई में रहे और चार्टड एकाउन्टेन्ट बन कर पुनः जबलपुर में १९९९ तक प्रेक्टिस की. सन १९९९ में आप कनाडा आ गये और अब वहीं टोरंटो नामक शहर
 
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आयरलैंड (यू.के.) से दीपक चौरासिया “मशाल” की दो लघुकथाएं

दीपक चौरसिया ‘मशाल’ २४ सितम्बर सन् १९८० को उत्तर प्रदेश के उरई जिले में जन्मे दीपक चौरसिया ‘मशाल’ की प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के ही कोंच नामक स्थान पर हुई. बाद में आपने जैव-प्रौद्योगिकी में परास्नातक तक शिक्षा अध्ययन किया और
 
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भारत से डॉ. मधु संधु की दो लघुकथाएं

डॉ. मधु संधु शिक्षा : एम. ए. पी.एच. डी.(हिंदी) पी.एच.डी. का विषय : सप्तम दशक की हिन्दी कहानी में महिलाओं का योगदान सम्प्रति :गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर एवं विश्विद्यालय अनुदान की बृहद शुद्ध परियोजना की प्रिंसिपल
 
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यू.के. से फ़हीम अख़्तर की लघुकथा – लाल कुर्सी

लाल कुर्सी फ़हीम अख़्तर लन्दन, यू.के. जूली और उसके शौहर दोनों मार्केट में घूम रहे थे कि अचानक जूली कि नज़र उस कुर्सी पर पड़ी जो बेहद बड़ी और लाल कपड़ों में पूरी तरह ढकी हुई थी. जूली के आग्रह पर उसका शौहर उस कुर्सी को ख़रीदने को तैयार हो गया. अब जूली का
 
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‘मदर्स डे’ पर प्रसिद्ध कवि डॉ. कुंअर बेचैन की कविता – ‘मां’

आज अमेरिका और कनाडा आदि देशों में मदर्स-डे मनाया जा रहा है. उसके उपलक्ष में प्रसिद्ध कवि ‘डॉ. कुंअर बेचैन’ जी की ‘मां’ पर लिखी एक कविता- ‘मां’ डॉ. कुंअर बेचैन कभी उफनती हुई नदी हो, कभी नदी का उतार हो मां रहो किसी भी दिशा-दिशा में,
 
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यू.के. से प्राण शर्मा की कहानी – तीन लँगोटिया यार

तीन लँगोटिया यार - प्राण शर्मा राजेंद्र ,राहुल और राकेश लँगोटिया यार हैं. तीनों के नाम ” र ” अक्षर से शुरू होते हैं. ज़ाहिर है कि उनकी राशि तुला है. कहते हैं कि जिन लोगों की राशि एक होती है उनमें बहुत समानताएँ पायी जाती हैं. राजेंद्र,राहुल और
 
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यू.के. से डॉ. गौतम सचदेव की लघुकथा

दान और दानी डॉ. गौतम सचदेव सेठ धनीराम अपनी माता जी की पहली बरसी के उपलक्ष्य में ग़रीबों में कम्बल बाँट रहे थे । ख़बर सुनते ही उनके घर के बाहर सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई । सेठ जी ने सबसे लाइन बनाने को कहा, लेकिन कोई इसके लिये तैयार नहीं हुआ । जब [...]
 
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भारत से सुकेश साहनी की दो लघुकथाएं

प्रतिमाएं -सुकेश साहनी उनका काफिला जैसे ही बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के नज़दीक पहुँचा, भीड़ ने घेर लिया। उन नग-धड़ंग अस्थिपंजर-से लोगों के चेहरे गुस्से से तमतमा रहे थे। भीड़ का नेत्तृव कर रहा युवक मुट्ठियाँ हवा में लहराते हुए चीख रहा था, “मुख्यमंत्री—मुर्दाबाद
 
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यू.के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

मेहमान -प्राण शर्मा घर में आये मेहमान से मनु ने आतिथ्य धर्म निभाते हुए पूछा-” क्या पीयेंगे,ठंडा या गर्म?” ” नहीं, कुछ भी नहीं.” मेहमान ने अपनी मोटी गर्दन हिला कर कहा. ” कुछ तो चलेगा?” ” कहा न, कुछ भी
 
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यू.के. से महेंद्र दवेसर “दीपक” की लघुकथा – ‘त्रिशूल’

महेन्द्र दवेसर “दीपक जन्म: नई देहली¸14 दिसम्बर 1929 शिक्षा तथा संक्षिप्त जीवन चित्रण: 1947 में विभाजन के समय डी. ए. वी. कॉलेज, लाहौर में F.Sc (Final) के विद्यार्थी। प्रभाकर (पंजाब विश्वविद्यालय, 1950)। पंजाब युनीवर्सिटी कैम्प कॉलेज, नई देहली में एम. ए. –
 
महावीर
Apr 07 2010 05:05 AM
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भारत से आचार्य संजीव ‘सलिल’ की दो लघुकथाएं

गाँधी और गाँधीवाद आचार्य संजीव ‘सलिल’ बापू आम आदमी के प्रतिनिधि थे. जब तक हर भारतीय को कपड़ा न मिले, तब तक कपड़े न पहनने का संकल्प उनकी महानता का जीवत उदाहरण है. वे हमारे प्रेरणास्रोत हैं’ -नेताजी भाषण फटकारकर मंच से उतरकर अपनी मंहगी आयातित कार में
 
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भारत से रामेश्वर कम्बोज ‘हिमांशु’ की दो लघुकथाएं

ऊँचाई रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी, “लगता है बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था। अपने पेट का गड्‌ढा भरता नहीं, घर वालों का कुआँ कहाँ से भरोगे?” मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने
 
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यू.के.(बेलफास्ट, आयरलैंड) से दीपक ‘मशाल’ की लघु कथा

“मुझे नहीं होना बड़ा” दीपक ‘मशाल’ आज फिर सुबह-सुबह से शर्मा जी के घर से आता शोर सुनाई दे रहा था. मालूम पड़ा किसी बात को लेकर उनकी अपने छोटे भाई से फिर कलह हो गयी.. बातों ही बातों में बात बहुत बढ़ने लगी और जब हाथापाई की नौबत आ
 
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भारत से सुधा अरोड़ा की दो लघुकथाएं

परिचय : सुधा अरोड़ा जन्म : अविभाजित लाहौर (अब पकिस्तान) में ४ अक्टूबर १९४६ को हुआ. शिक्षा : १९६५ में श्री शिक्षायतन से बी.ए. ऑनर्स और कलकत्ता विश्वविद्याय से एम.ए. (हिंदी साहित्य). कार्यक्षेत्र : १६५-१९६७ तक कलकत्ता विश्वविद्यालय की पत्रिका
 
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यू.के. से डॉ. गौतम सचदेव की दो लघुकथाएं

उपद्रवी डॉ. गौतम सचदेव किंग्स क्रॉस स्टेशन से बाहर निकलते ही रविन्दर सिंह बायें मुड़कर उस लगभग ख़ाली और छोटी-सी गली की ओर चल पड़ा, जहाँ उसने एक खंभे के सहारे अपनी साइकिल खड़ी की थी और हर रोज़ की तरह ज़ंजीर और ताले के द्वारा उसे खंभे से बाँध दिया था ।
 
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Mar 03 2010 03:40 AM
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यू.के. से नीरा त्यागी की लघुकथा

गले से गले को लगाती रहे : लुभाती रहे मन सुहाती रहे सदा होली रंगीं बनाती रही : सदा होली रंगीं बनाती रहे प्राण शर्मा उनकी नीली आँखों में अनगिनत किरणों की रौशनी.. नीरा त्यागी समुद्र कि लहरें उनके पाँव को चारों तरफ से चूमती हैं..उनकी घुटनों तक मुड़ी जींस को
 
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Feb 24 2010 03:40 AM
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यू.के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

“वक़्त वक़्त की बात” प्राण शर्मा सरिता अरोड़ा की देवेन्द्र साही से जान-पहचान कालेज के दिनों से ही है. कभी दोनों में एक-दूसरे के प्रति प्यार भी जागा था. आज देवेन्द्र साही का फिल्म उद्योग में अच्छा-खासा नाम है. फिल्म उद्योग उसके काम को अच्छी नज़र
 
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Feb 17 2010 03:42 AM
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भारत से सुकेश साहनी की दो लघुकथाएं

सुकेश साहनी जन्म : 5 सितम्बर, 1956(लखनऊ) शिक्षा : एम.एस-सी. (जियोलॉजी), डीआईआईटी (एप्लाइड हाइड्रोलॉजी) मुम्बई से। कृतियां : डरे हुए लोग, ठण्डी रजाई (लघुकथा-संग्रह), मैग्मा और अन्य कहानियां, (कहानी-संग्रह), अक्ल बड़ी या भैंस (बालकथा-संग्रह), लघुकथा संग्रह
 
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भारत से रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की दो लघुकथाएँ

रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जन्म : 19 मार्च,1949 शिक्षा : एम ए-हिन्दी (मेरठ विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में) ,बी एड प्रकाशित रचनाएँ : ‘माटी, पानी और हवा’, ‘अंजुरी भर आसीस’, ‘कुकडूँ कूँ’, ‘हुआ सवेरा’ (कविता
 
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गणतंत्र दिवस पर शाहिद मिर्ज़ा ‘शाहिद’ की ग़ज़ल

गणतंत्र दिवस पर “महावीर” और “मंथन” की ओर से शुभ कामनाएं भारत से पत्रकार शाहिद मिर्ज़ा ‘शाहिद’ की ग़ज़ल जश्ने-जम्हूरी हमें यूं भी मनाना चाहिये क़ौमी यकजहती का इक सूरज उगाना चाहिये दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में
 
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प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आप सब को शुभकामनाएं अखबार - प्राण शर्मा भरत उच्च शिक्षा के लिए यू.के. में आया था .पंजाब यूनीवर्सिटी से उसने अंग्रेज़ी में एम.ए. कर रखी थी. यूँ तो वो पढ़ा-लिखा था लेकिन यहाँ के रीती-रिवाजों से अनजान था. उसके आने के कुछ दिनों के
 
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यू. के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

ये इंग्लॅण्ड है,माई ब्रोदर –प्राण शर्मा गोपीनाथ से लन्दन जाने वाली कोच छूट गयी थी. एक अन्य कोच ड्राईवर ने बड़ी शिष्टता से उसको अगली कोच का समय बताया. गोपीनाथ को लगा कि उसने उस ड्राईवर को पहले भी कहीं देखा था. उसने भेजे पर जोर दिया.याद आते ही उसने
 
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अमेरिका से देवी नागरानी की दो लघुकथाएं

देवी नागरानी न्यू जर्सी, यू.एस.ए. रिश्ता अमर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उच्च शिक्षा के लिए अमरिका जाकर पढने की इच्छा प्रकट की साथ में वादे भी किया कि वह पढ़ाई पूरी करते ही वापस आकर दोनों की देखभाल भी करेगा। दोनों बहुत खुश हुए । उन्होंने तमाम उम्र
 
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यू.के. से प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

लघुकथा दुष्कर्मी - प्राण शर्मा पंद्रह वर्षीय दीपिका रोते-चिल्लाते घर पहुँची. माँ ने बेटी को अस्तव्यस्त देखा तो गुस्से में पागल हो गयी– ” बोल ,तेरे साथ दुष्कर्म किस पापी ने किया है?” ” तनु के पिता मदन लाल ने. ” सुबकते हुए
 
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तेजेंद्र शर्मा की पुस्तक ‘सीधी रेखा की परतें’ का लोकार्पण और आचार्य संजीव ‘सलिल’ की लघु कथा

भोपाल में तेजेन्द्र शर्मा का रचना पाठ एवं पुस्तक लोकार्पण : उर्मिला शिरीष (भोपाल) – संस्कृति, साहित्य तथा ललित कलाओं के लिए समर्पित संस्था स्पंदन भोपाल द्वारा दिनांक २६ नवंबर ०९ को स्वराज भवन, भोपाल में लंदन के प्रतिष्ठित कथाकार तेजेन्द्र शर्मा
 
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यू.के. से नीरा त्यागी की लघुकथा

वो ऐसा नहीं है…….” नीरा त्यागी, यू.के. वो करीब दो महीने से नहीं मिले थे। वह रोज उसको फ़ोन करता, एस एम् एस करता, वोयेस मेल पर मेसिज छोड़ता और बाद में मन-मार कर अकेले पीने लगता। दो महीनो से यही सिलसिला जारी था। वह उससे शोपिंग माल में
 
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भारत से डॉ. बलराम अग्रवाल की दो लघुकथाएं

डॉ. बलराम अग्रवाल जन्म: २६ नवंबर, १९५२ को उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर में हुआ था. शिक्षा: हिन्दी साहित्य में एम.ए., अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, और ’समकालीन हिन्दी लघुकथा का मनोविश्लेषणात्मक अध्ययन’ विषय पर पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की. लेखन व
 
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साबरमती आश्रम – सर्व-धाम !

साबरमती आश्रम – सर्व-धाम आज गांधी-जयंती पर श्रद्धेय बापू को शत् शत् नमन! १९६३ में संस्था के कार्य-वश ‘साबरमती आश्रम’ में दो दिवस के लिये रहने का स्वर्णिम शुभ अवसर मिला था। यह कहने में अतिशयोक्ति न होगी कि जो शांति और आध्यात्मिक अनुभव इन दो दिनो
 
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Dec 03 2009 01:20 AM
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इधर उधर से

जॉन पॉल द्वितीय का निधन ८४ वर्षीय कैथलिक ईसाई के धर्म गुरु जॉन पॉल द्वितीय का शनिवार, २ अप्रैल २००५ को स्थानीय समयानुसार रात के ९. ३७ बजे वेटिकन सिटी में उनके आवास में निधन हो गया। …………………………
 
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Dec 03 2009 01:20 AM
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‘मेरी प्यारी बेटी’ – महावीर शर्मा

मेरी प्यारी बेटी’ -महावीर शर्मा साभार: ‘कादम्बिनी’ मार्च २००६ (‘एक बेटी का अभागा पिता’ के नाम से) लन्दन 15 जुलाई, 2005 मेरी प्यारी बेटी मेरे इस पत्र की तिथि देख कर तुम सोचती होगी कि इससे दो दिन पहले ही तो फ़ोन पर बात हुई
 
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भारत से श्याम सखा की कहानी: एनकाउंटर

कहानी (यह कहानी हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष १९९८ में सर्वश्रेष्ठ पुस्तक से पुरस्कृत कथा संग्रह -अकथ से जिसे बाद में श्री दिव्य रजत अलंकरण भोपाल से भी नवाजा गया।) एनकाउंटर—-ए लव स्टोरी श्याम सखा बात कुछ यूँ शुरू हुई, कि तकरीबन दो महीने से
 
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समीर लाल ‘समीर’ की पुस्तक ‘बिखरे मोती’ पर देवी नागरानी की समीक्षा

वक्त की पाठशाला में एक साधक”-श्री समीर लाल ‘समीर‘ कलम आम इन्सान की ख़ामोशियों की ज़ुबान बन गई है. कविता लिखना एक स्वभाविक क्रिया है, शायद इसलिये कि हर इन्सान में कहीं न कहीं एक कवि, एक कलाकार, एक चित्रकार और शिल्पकार छुपा हुआ होता ह
 
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आचार्य संजीव ‘सलिल’ की दो लघुकथाएं

लघुकथा एकलव्य ‘नानाजी! एकलव्य महान धनुर्धर था?’ - ‘हाँ; इसमें कोई संदेह नहीं है.’ - ‘उसने व्यर्थ ही भोंकते कुत्तों का मुंह तीरों से बंद कर दिया था ?’ -’हाँ बेटा.’ - ‘दूरदर्शन और सभाओं में नेताओं औ
 
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देवी नागरानी की दो लघुकथाएं

देवी नागरानी लघुकथा असली शिकारी देवी नागरानी हमारे पड़ोसी श्री बसंत जी अपनी तेरह महीने के नाती को स्ट्रोलर में लेकर घर से बाहर आए और मुझे सामने हरियाली के आस पास टहलते देखकर कहाः “”नमस्कार बहन जी” “नमस्कार भाई साहब. आज नन्हें
 
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प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

अधजल गगरी छलकत जाए - प्राण शर्मा तीन बार दसवीं में फ़ेल कमाल जी की बातें सुनते रहिये और बोर होते रहिये. दोस्तों से मिलते ही वे शुरू हो जाते हैं- “मेरे चाचा जी एम .ए. और पी.एच .डी थे. सरकारी विभाग में सीनिअर ऐडवाईज़र थे. पांच हजार रूपये उनकी मंथल
 
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प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं

प्रेमिका -प्राण शर्मा अनुरागी और मधुरिमा के बीच इन्टरनेट पर रोज़ ही प्रेम-वार्तालाप होना शुरू हो गया. प्रेम-वार्तालाप में वे दोनो इतना खो जाते कि उन्हें खाने-पीने की कोई सुध नहीं रहती. मधुरिमा प्यारी-प्यारी और मधुए-मधुर बातें करती. इश्क के रटे हुए शे
 
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पंकज सुबीर की कहानी- ‘जब दीप जले आना’

जब दीप जले आना’ -कहानी पंकज सुबीर वो लड़की आज भी उसी प्रकार खिड़की में नज़र आ रही है । दोनों तरफ खड़े ग़ुलमोहर के पेड़ों के ठीक बीच बनी हुई वह खिड़की दूर से देखने पर किसी चित्र की तरह नार आती है । उस मकान के जितने दूर से होकर वह रोज़ गुजरता [...]
 
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प्राण शर्मा और देवी नागरानी की लघुकथाएं

लघुकथा- खट्टे संतरे प्राण शर्मा रमेश बड़े शौक़ से खाने के लिए साफ़ सुथरे और चमचम करते संतरे सुबह सब्जी मंडीसे खरीद कर लाया था. उसकी आदत है रात को रोटी खाने के बाद दो-तीन संतरे लेने की. रोटी खाने के बाद दो-तीन संतरे लेने से सुबह खुलकर पखाना आता है, ऎसी उ
 
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