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हिन्दू आध्यामिक दर्शन-भक्ति के विभिन्न स्वरूप मान्य (hindu adhyamik sandesh-bhakti ke alag laga roop)
विरोधः कर्मणीति चैन्नानेकप्रतिपत्तेर्दर्शनात्।।हिन्दी में भावार्थ-यदि देवताओं की पूजा, यज्ञादि कर्म में विरोध आता है तो उसे ठीक नहीं मान लेना चाहिये क्योंकि उनके द्वारा एक ही समय में अनेक रूप धारण करना संभव है-ऐसा देखा गया है।वर्तमान संदर्भ में संपादकीय
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Jun 06 2010 01:50 PM


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