इतना ही एह्सास बहुत है, वो अब मेरे पास बहुत है । उसके आगे सच्चे मन से, दो पल ही अरदास बहुत है । क़िस्मत न हो सीता जैसी, महल हैं कम, बनवास बहुत है । जो हैं पानीदार यहाँ पर, उनकी देखो प्यास बहुत है । ये सुनना गाली लगता है, ’तू अफ़सर का खा़स बहुत है’ । अन