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खिड़कियां

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05 Jan 2010
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बदलती दुनिया में खबरें

सारी दुनिया की समाचार एजेंसियों के लिए यह एक कठिन दौर है। सूचना प्रौद्योगिकी के तेजी से बढ़ते दखल और सारी दुनिया में इंटरनेट के असीमित विस्तार ने उनके सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। सारी दुनिया में यह माना जा रहा है कि समाचार एजेंसियों का भविष्य तभी
 
दिनेश श्रीनेत
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कॉमिक्सः वो कहानियां, वो किरदार

इंद्रजाल कॉमिक्स में जाहिर तौर पर ली फॉक के किरदार ही छाए रहे, मगर बीच का एक दौर ऐसा था जब इसने कुछ नए और बड़े ही दिलचस्प कैरेक्टर्स से भारतीय पाठकों से रू-ब-रू कराया। मैं उन्हीं किरदारों पर कुछ चर्चा करना चाहूंगा। कॉमिक्स की बढ़ती लोकप्रियता के चलते
 
दिनेश श्रीनेत
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हमारे समय में ‘नचिकेता का साहस'

साहित्य में साक्षात्कार की परंपरा को अगर हम तलाशना शुरू करें तो इसका आरंभ प्राचीनकाल से ही दिखाई देने लगता है। साक्षात्कार अपने प्राचीनतम रूप में दो लोगों के बीच संवाद के रूप में देखा जा सकता है। आमतौर पर इस संवाद का इस्तेमाल ज्ञान मीमांसा के लिए होत
 
दिनेश श्रीनेत
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हर शहर का अपना एक आसमान होता है

मैं शहरों को उनके आसमान से पहचानता हूं। आप किसी भी शहर की जमीन को जब अपने पैरों से टटोलते हैं... तो थोड़ा ठिठककर चंद कदम पीछे हटकर ऊपर की तरफ देखें। उस आसमान को पहचानें। यकीनन वह वहां से अलग होगा... जहां से आप आए हैं। बस यहीं से शुरुआत होती है उस शहर
 
दिनेश श्रीनेत
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ऋचा गोडबोले अब कहां हैं?

मुझे नहीं मालूम ऋचा गोडबोले अब कहां हैं। सूचनाओं के इस दौर में भी उनके और मेरे बीच एक अद्श्य-सा पर्दा है। उनके बारे में कोई मराठी साहित्य का जानकार ही बता सकता है। शायद वह आज की लोकप्रिय युवा कवियित्रियों में शामिल हो गई हों या लाखों-करोड़ों इंसानों
 
दिनेश श्रीनेत
Dec 29 2009 11:59 AM
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अभिव्यक्ति की छटपटाहट और खतरे

मैं खुद को एक ऐसा निबंधकार मानता हूं जो उपन्यास शैली में निबंध लिखता है और निबंध शैली में उपन्यास, लिखने की बजाय मैं उन्हें फिल्मा देता हूं। यदि कभी सिनेमा न रहा तो मैं इस नियति को सहजता से स्वीकार कर लूंगा और टेलीविजन की ओर मुड़ जाऊंगा, यदि टेलीविजन
 
दिनेश श्रीनेत
Dec 29 2009 11:59 AM
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तुर्गनेवः करुणा और आशा

ईवान सेर्गेयेविच तुर्गनेव को पढ़ना मेरे लिए कुछ ऐसी स्मृतियां लेकर आता है जैसे सर्दियों के मौसम में कभी न खत्म होने वाला बारिश का झुटपुटा। शायद इसलिए कि उसी दौरान हमारे शहर में रूसी किताबों की प्रदर्शनी लगा करती थी। हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में हजार
 
दिनेश श्रीनेत
Dec 29 2009 11:59 AM
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सिलिकॉन सिटी की तलछट

हफ्ते भर से बैंगलोर में बारिश हो रही है, जाने कहां से आसमान में इतने बादल उमड़ते आ रहे हैं, दोपहर बाद, शाम और फिर सारी रात बरसते पानी का शोर सुनाई देता रहता है. तेज बारिश होते ही यहां सड़कों पर पानी उमड़ पड़ता है. बसें, कारें, बाइक्स जैसे किसी छिछली
 
दिनेश श्रीनेत
Dec 29 2009 11:59 AM
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साइबर समाज में जनतंत्र

कम से कम जिस तरह अमर्त्य सेन ने अपनी किताब ‘द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन’ में एक महाबहस की परंपरा में भारतीयता को पहचानने की कोशिश की थी, हम हल्के-फुल्के तौर पर यह तो मान सकते हैं हम हिन्दुस्तानी बहसबाज और जमकर बतकही करने वालों में हैं। यह बहसबाजी वेब 2.
 
दिनेश श्रीनेत
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गूगल-गूगल कित्ता पानी

गूगल ने पिछले दिनों समंदर के भीतर भी कदम रख दिए। गूगल अर्थ के बाद की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना गूगल ओशन में हमारी दुनिया में मौजूद महासागरों और साइबर स्पेस में सूचनाओं के महासागर का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सतह के भीतर की समुद्री दुनिया का थ्
 
दिनेश श्रीनेत
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हंसी के विरुद्ध

जिन लोगों ने हाल में प्रदर्शित अनुराग कश्यप की फिल्म 'गुलाल' देखी होगी वे फिल्म के उस दृश्य को कभी नहीं भूल पाएंगे, जब सनकी से किरदार में पियूष मिश्र अपने हिजड़े साथी के संग गीत गाते घूमते हैं और अपनी हार से तिलमिलाए केके खुद पर यह व्यंग बर्दाश्त नही
 
दिनेश श्रीनेत