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एक कहानी समीर लाल उड़न तश्तरी की
ये समीरजी चाँद वाले और चाँद को खिलोना लिखने वाले। ये भी लिख डालते कि चाँद नहीं तो रमज़ान की ईद नहीं। जब चाँद पर इंसान बस जाएंगे तो बच्चे ईद कैसे मनाएंगे?
ये समीरजी, लिखते बहुत हैं और इनपर कई चिट्ठकारों ने काफ़ी कुछ लिखा है मगर ये हंसता मुसकुराता पुरुष कभी
Jun 14 2010 10:34 AM


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