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अपना पराया

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06 Jun 2010
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बंदा ये बिंदास है......

कैसे हो भाई? एकदम बिंदास। किसी-किसी को झक्कास भी कहते सुना होगा। ऐसा लगता है कि बिंदास और झक्कास एक ही मां के दो पूत हैं। खैर, जब किसी के मुंह से यह सुनते हैं तो चेहरे पर एक स्माइल तैर जाती है। आखिर हो भी क्यों न! इस शब्द ने अपनी सीमा से परे होकर एक अलग
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मुझे कुछ कहना है.....

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय....। महान गायिका आशा ताई की मधुर स्वरों में गूंजती यह सुरीली तान हमें खुद के पास ले जाता है। जहां, हम स्वयं से बात कर सकते हैं। हां खुद से। मां की लोरी सुनते-सुनते सोना हमारी आदत थी। उनकी आंचल के तले चोरी-छिपे
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इंसान की कीमत कितनी?

हादसा, मौतें और मुआवजा। यह इंसान की नीयत बन चुकी है। हर हादसे के बाद मुआवजे का ऐलान होता है। यह घोषणा वसुधैव कुटुम्बकम की तरह अब भारतीय संस्कृति की पहचान बन चुकी है। पर, यहां भी मुआवजे की राशि कई जातियों में बंटी पड़ी है। यदि आप प्लेन दुर्घटना में अपनी
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आईएसआई का बढ़ता मकड़जाल

बहुत दिनों पहले आमिर खान अभिनीत ‘सरफरोश’ फिल्म आई थी। इसमें आईपीएस ऑफिसर राठौड़ (आमिर खान) को देश के अंदर मौजूद आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों से लोहा लेता दिखाया गया है। साथ ही पड़ोसी मुल्क के लोग भी हमारे असंतुष्ट देशवासियों को अपनों के विरूद्ध मदद
May 22 2010 04:56 PM
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कौन हूं मैं....नक्सली तो नहीं!

मैं एक हिंदुस्तानी...पहचाना? नहीं न। मेरे कई और नाम हैं। मसलन भारतीय, इंडियन....। मुझे किसी भी नाम से पुकारो, आत्मा और मन तो वही रहेगा। पर आज कुछ अपने ही भाई मुझे पहचानने तक से इनकार कर रहे हैं। मैं उनकी नजरों में नक्सली, माओवादी, विद्रोही... और न जाने
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गुम हो गया खाकी वर्दी में सजा डाकिया

बदलते रिश्ते और समय के साथ-साथ अब सब कुछ बदल गया है। यकीनन इस दौर में हमने खुद को बदलने के खातिर पता नहीं क्या-क्या बदल डाले। इसका अहसास हर पल होता है। पर दिल मोबाइल और इंटरनेट से छुट्टïी पाए तो सही! मसलन, अब खाकी वर्दी में सजा डाकिया नजर नहीं आता और अगर
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मुंबई में अराजकता का आलम

मुंबई में शिवसेना और मनसे की तानाशाही चरम पर है। 'मराठी मानुष ’ के स्वयंभू ठेकेदार बाल ठाकरे ने सभी लोगों को चेताया है कि उनकी हर हुक्म की तामील हो या फिर परिणाम भुगतने के लिए सभी (गैर मराठी!) तैयार रहें। आखिर एक तानाशाह से इससे अधिक क्या उम्मीद की जा
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क्या आप 'नेताजी’ बनेंगे?

सामने लजीज व्यंजन और जी न लपलपाए। ऐसा तो हो नहीं सकता। कुछ ऐसा ही स्वाद सत्ता का होता है। हर कोई चखना चाहता है, और खासकर जब राजनीति हमारी जीन में बसी हो। घर से लेकर देश-दुनिया की राजनीति में इतने सारे पेंच हैं कि आप कभी भी इससे अछूते नहीं रह सकते। इस
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किस बात की आजादी?

आज हम आजाद हैं! हर साल की तरह इस बार भी हमारे हाथ में तिरंगा होगा और मंच पर भाषण देते जनता के (सच्चे) प्रतिनिधि। टीवी-रेडियो पर देशभक्ति के गाने बजेंगे और फिर अचानक एक शून्य...। काल के पहिए यथावत ही चलते रहेंगे और तब तक स्वतंत्र भारत एक और बसंत पार क
Dec 29 2009 11:50 AM
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मौत ने बनाया विलेन को हीरो

पॉप सिंगर माइकल जैक्सन नहीं रहे। इस खबर ने हर किसी को अंदर से झकझोर दिया। वैसे तो हर मौत दुखदायी होती है, पर यदि कोई अपना हमसे बिछुड़ता है तो मानो गमों का पहाड़ टूट पड़ता है। पर क्या किसी की जिंदगी का मूल्यांकन उसकी मौत के बाद ही करना सही है? पॉप जगत
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कुम्हलाता कमल!!!

आपसी खींचतान और गुटबाजी भाजपा को कहां ले जाएगी, कोई नहीं जानता? पहले जसवंत सिंह और अब यशवंत सिन्हा....। यह आंधी तो अभी बस शुरू हुई है, पता नहीं कब किसको उड़ा ले जाए। कमल पताका को लिए ये नेता उसी अनुशासन और समर्पण की बात कर रहे हैं, जिसे उन्होंने बार-
Dec 29 2009 11:50 AM
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बच्चे मन के सच्चे......

बच्चे मन के सच्चे, सारे जग के आंखों के तारे ये जो नन्हें फूल हैं, भगवान को लगते प्यारे....... गुनगुनाती एक मासूम लड़की जब टीवी पर आती है तो एक पल के लिए हर किसी की नजर ठहर जाती है। मासूम मुस्कान, गालों पर डिंपल और सबको सम्मोहित करती आवाज हर किसी के ल
Dec 29 2009 11:50 AM
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मुस्कुराया विजय...

खुशियां किसी खास वक्त की मोहताज नहीं होती है। सच में दिल में उमंग-तरंग हो तो फिर चेहरे पर मुस्कान खुद-ब-दुख दस्तक देती है। इस मुस्कान का कायल सिर्फ हमारा दिल नहीं होता, बल्कि आसपास भी यह अपनी सुगंध छोड़ देता है। पर, यह खुशी उस मासूम की है जिसने लड़कप
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बिलखता पाक अवाम

आर्मी और अमेरिका। इस दो 'अ ’ ने पाकिस्तानी अवाम को हर बार नुकसान ही पहुंचाया है। पर अब तीसरे 'अ ’ (दुर्भाग्य से) आसिफ अली जरदारी सब पर भारी पर रहे हैं। कभी 'मिस्टर टेन परसेंट ’ (हर टेंडर में दलाली) के नाम से कुख्यात रहे जरदारी ने बेनजीर की मौत के बाद
Dec 29 2009 11:50 AM
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वाह यूकी......, तेरा क्या कहना!

वाह यूकी, तूने तो कमाल कर दिया। ऑस्ट्रेलियन ओपन में जूनियर वर्ग का एकल खिताब जीतकर सचमुच तूने एक नया इतिहास रचा। मशहूर कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण के 'कॉमन मैन ’ के चेहरे पर एक खूबसूरत मुस्कान देने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं। मेलबर्न के इस नए प्रिंस को
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कोई मेरी भी शादी करा दो......

आजकल कुंआरों की जान आफत में है। लड़कियों की तादाद घटती जा रही है और उनकी मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। सरकारी आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो देश में एक हजार की आबादी पर मात्र ९२७ महिलाएं हैं। मतलब अभी भी ७३ अंकों का भारी फासला है। सैकड़ा में यह
Dec 29 2009 11:50 AM
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'द वाल ’ में दरार नहीं

मोहाली टेस्ट में शतकीय पारी के बाद भले ही राहुल द्रविड़ ने सहजता से बल्ले से ड्रेसिंग रूम के साथियों और दर्शकों का अभिवादन किया हो। पर उनकी यह शतकीय पारी उनके लिए कितनी अहमियत रखता है, उनके अलावा इससे ज्यादा कोई भी नहीं जानता। द्रविड़ आरंभ से ही भारत
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जरा याद उन्हें भी कर लो...

ए मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी... जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी। ये वो लफ्ज हैं जिन्हें सुनकर हर भारतीय की आंखें नम हो जाती है। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने इस गीत को दर्दभरी आवाज दी तो हमारे प्रिय चाचा नेहरू भी अपने आंसू नहीं
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'द्रोण' का 'किडनैप'

शुक्रवार का दिन. मैदान में तीन योद्धा. हर योद्धा के पास अलग-अलग रणनीतिक कौशल हैं. निर्णायक कलाबाजी में कौन बाज़ी मारेगा, कोई नहीं जानता. एक ओर जूनियर बी अभिनीत 'द्रोण' है तो दूसरी और युवा दिलों के धड़कन इमरान खान की 'किडनैप' . दोनों की लड़ाई को दिलचस्प
Dec 29 2009 11:50 AM
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विधानसभा को बना दिया सब्जी मंडी!

महाराष्ट्र विधानसभा में एमएनएस विधायकों के कुत्सित खेल से भारतीय लोकतंत्र एकबार फिर शर्मसार हुआ। एमएनएस के विधायकों ने हिंदी में शपथ ले रहे सपा विधायक अबु आजमी का माइक छीन लिया और उनके साथ हाथापाई की। बात यहीं तक नहीं रुकी, उन्होंने सभी विधायकों को म
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सिर्फ क्रिकेट पर ही हायतौबा क्यों?

एक मैच में हार और निराशा की बौछार। यही होता है भारत के क्रिकेट प्रशंसकों के साथ। हर क्रिकेट मैच के साथ वह टीवी से ऐसे चिपक जाता है मानो फेविकॉल का प्रचार कर रहा हो। हार-जीत तो खेल का शाश्वत नियम है, पर वह यह नहीं जानना चाहता। सिर्फ एक हार हमारे नायक
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मास्टर जी उसे सिखाना

मास्टर जी उसे सिखानासमय भले ही लग जाय, परयदि सिखा सको तो उसे सिखानाकि पाए हुए पांच से अधिक मूल्यवान-स्वयं एक कमाना पाई हुई हार को कैसे झेले,उसे यह भी सिखानाऔर साथ ही सिखाना,जीत की खुशियां मनानायदि हो सके तो ईष्र्या या द्वेष से परे हटानाऔर जीवन में
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कुर्सी के पीछे भागते 'जनसेवक’

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के आंध्रप्रदेश में जिस तरह राजनीति का कुत्सित खेल खेला जा रहा है, वह अक्षम्य और अप्रशंसनीय है। वाईएस राजेशखर रेड्डी की मौत के बाद सीएम की कुर्सी को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो गई है। मौत के अभी चंद दिन ही गुजरे हैं, किंतु वहां
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अब तेरा क्या होगा पंटर?

खेल में हार और जीत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह हर खिलाड़ी के जीवन में आता है। पर यदि कोई खिलाड़ी सिर्फ हार के बाद (हार का डर?) आगामी सीरीज (इंग्लैंड के खिलाफ) में आराम करने की चाहत दिखाए, उसे आप क्या कहेंगे। ऐसा ही कुछ हमारे कंगारू कप्तान रिकी
Aug 26 2009 09:18 PM
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किंग खान घेरे में, बौना साबित हुआ 'कॉमन मैन’

दुनिया बदल गई। हिंदुस्तान ने आजादी के 62 साल पूरे कर लिए। पर क्या हमारी मानसिकता और सोच ने इस बदलाव को स्वीकार किया? और जब यह खबर आई कि अभिनेता शाहरुख खान को अमेरिका में यात्रा के दौरान कस्टम अधिकारियों ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया तो मानो भारतीय
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मेरा क्या कसूर?

यह कहानी है हमारे-आपके जैसे आम युवक की। खेत-खलिहान में खेलते-कूदते बड़ा हुआ । हमारे पास खेत बस इतनी थी कि बमुश्किल दो वक्त का खाना मिल पाता। मेरी पढ़ाई गांव में हुई, तो स्वाभाविक रूप से अंग्रेजी में कमजोर रहा। और एक दिन गांव की चौपाल से निकलकर शहर मे
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नौकरी मिली है, मिठाई खाइए

लीजिए, मिठाई खाइए। क्यों शादी तय हुई क्या? नहीं सर, ट्रेनी बना हूं। ...तो दिल ने कहा कि क्यों न सभी का मुंह मीठा कराया जाए। और फिर आपके सामने पेश है लजीज और ताजा-ताजा गुलाबजामुन। मिठाई देखते ही हर किसी के पेट में चूहे उछलने लगे। यह चूहा कभी इधर फुदकत
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अधूरी रह गई हबीब की कहानी

जन्म और मौत दुनिया का शाश्वत नियम है। पर अपना जब कोई हमसे दूर हो जाए तो दिल बिलखता है। दिल रोता है और अनायास ही वह न जाने क्यों परमपिता पर भी कुपित हो जाता है। ऐसा ही कुछ तनवीर हबीब के चले जाने से हो रहा है। तनवीर साहब को गुजरे कई दिन हो गए, पर ऐसा ल
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ब्रेकिंग न्यूज : मैं अभी जिंदा हूं!

मंथर चाल से कंप्यूटर की कीबोर्ड पर ऊंगलियां चल रही थी। हल्की झपकी और उबासी के बीच हर कोई अपने काम में मशगूल था। कि अचानक, टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज आया?????? दाऊद इब्राहिम मारा गया!!!! हर कोई अवाक रह गया। आपस में गुफ्तगू का शोर मचने लगा। अरे ये क्या दाऊ
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बढ़ता मनमोहनी कुनबा

आखिरकार हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कुनबा बढ़ ही गया। लंबी माथापच्ची के बाद 59 मंत्रियों ने शपथ ली। ताजपोशी-1 और ताजपोशी-2 के बाद अब कुल सदस्यों की संख्या 78 तक पहुंच गई है। कानून के मुताबिक मनमोहन परिवार की अधिकतम संख्या 81 हो सकती है।
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...दरवाजा कभी खुले या न खुले

आजकल हर कोई भारतीय लोकतंत्र के महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। राजनीतिक पार्टियों से लेकर मीडिया में बस यही चर्चा है कि आखिर किसके सिर पर पीएम पद की ताजपोशी होगी। आखिर कौन है जो कांटों का ताज झटकने में कामयाब होगा। ऐसा लगता है कि इस बार चूके
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''पुष्प की अभिलाषा''

चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूंथा जाऊँ. चाह नहीं प्रेमी माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ . चाह नहीं सम्राटों के शव पर, हे हरि डाला जाऊँ. चाह नहीं देवों के सिर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊं . मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फ़ेंक. मातृभूमि पर श
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’छुक-छुक चलती ट्रेन टू मैरिज ’

मेरे एक मित्र हैं। उम्र ३० की हो चुकी है। जब उनसे कोई उनकी उम्र के बारे में पूछता तो वे लड़कियों की तरह शरमाते हैं। बस वैसे ही जैसे अपनी लाजवंती छूते ही सिकुड़ जाती है। पर वे लाजवंती की तरह रूठते नहीं है, सदा हंसते-मुस्कराते रहते हैं। जिंदादिली उनमें