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संदीप शर्मा

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26 Apr 2010
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क्या यही काम रह गया है मीडिया का?

पिछले कई दिनों से ललित मोदी एक हव्वा था। मोदी नाम के इस शख्स से क्रिकेट के जानकारों के अलावा शायद ही किसी को कोई लेना-देना था, लेकिन प्रिंट और टेली मीडिया ने एक ऐसा वातावरण पैदा कर दिया कि आईपीएल का यह कमिश्नर उस आदमी की आंखों में भी खटकने लग गया, जिसे
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पीळियो और लिछमी

वो पल बहुत खूबसूरत रहा होगा, जब लिछमी की आंखों में खोकर पीळिये ने प्यार का इजहार किया था। उसकी उंगलियां लिछमी की कोमल हथेली में थी। हवा का पास से गुजरना भी तब साफ सुन रहा था। जाने क्यों वो तपता सूरज इतना ठंडा हो गया था। उसकी आग कहां खो गई, कोई नहीं जानता
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जनार्दन के जन्मदिन का इन्तजार कब तक करेगी जनता

कल माया मैडम का 54वां जन्मदिन था। मतलब मैडम हो गई पूरे तरेपन की। तोहफे भी मिले, पर जिसका जन्मदिन था उसको नहीं, उसी की तरफ से। वो भी पूरे 74 अरब के। देखे हैं कभी 74 अरब के तोहफे। यहां देखिए- ऊर्जा कृषि सुधार योजना (2600 करोड़), गरीबों को 56180 मकान (1400
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बधाई वाले कृपया दूर रहें

लो नया साल शुरू हो गया। पूरा विश्व खोया है नव वर्ष की उमंगों में। जयपुर में भी धूम-धाम मची है। पर इन सबके बीच मात्र एक शख्स ऐसा भी है, जो अभी भी अपनी टेंशन में घुसा हुआ है। बार-बार जोर-जोर से चिल्ला रहा है- `बधाई वाले कृपया दूर रहें´, `अरे पूरा पेज त
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क्या इन्हें कोई हक नहीं

मेरे मन में ब हुत पहले से ही इन बच्चों के लिए कुछ करने की तमन्ना रही है। कुछ किया या नहीं अथवा कुछ कर पाऊंगा या नहीं- खुदा जाने, पर एक कदम बढ़ा चुका हूं। `मीरा´ नाम से चाइल्ड एजुकेशन को समर्पित एक एनजीओ शुरू होने की लगभग पूरी तैयारी हो चुकी है। एनजीओ
Dec 29 2009 11:45 AM
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किसलिए बना दी 'पा'...

कल रात पा फिल्म देखने का मौका मिला। पूरी फिल्म देखने के बाद समझ नहीं आया कि आखिर अमिताभ जैसे महानायक ने क्या सोचकर यह फिल्म बनाने की सोची। क्या सिर्फ दुनिया को यही दिखाने के लिए कि अड़सठ साल का नायक 13 साल के बच्च्चे का किरदार कैसे निभाता है। पूरी फिल
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स्वप्नागार...

ऑफिस से बहुत थक गया था। आज जल्दी घर जाने का सोचकर टेबल से उठ खड़ा हुआ। घड़ी में शाम के सात बज रहे थे। बॉस के केबिन की लाइट जल रही थी। मैं अंदर चला गया। अंदर पहुंचते ही मुझे दिखाई देना बं द हो गया। सर्दी भी जमकर लग रही थी। मैं कांपता हुआ बाहर निकला तो ब
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एक खत सिर्फ डेली न्यूज स्टाफ के लिए...

दुनिया भर की यादें मुझसे मिलने आती हैं, शाम ढले मेरे सूने घर में मेला लगता है... चार दिन से जिंदगी जैसे परेशान सी हो उठी है। बैठे-बैठे वापस उसी पुरानी जगह लौट जाने का मन करता है। बड़ी जगह और बड़े शहर का उल्लास कभी मन से दूर नहीं हो सकता, पर जिंदगी के उ
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मे आई हैव योर अटेंशन प्लीज...

नई दिल्ली का रेलवे स्टेशन। बाहर से ही काले-पीले कई लोगों को देखकर मिस्टर एक्स बिदक सा गया। कंधे के नीचे फुदकती हुई सी कोई चीज कह रही थी कि बस अच्छा ऑप्शन है। पर कदम एक प्लेटफार्म तय कर चुके थे। प्लेटफार्म नं. 18, समय - शाम 7.30 बजे मिस्टर एक्स (चाय व
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मां के कंगन

शहर में एक ऊंची बिल्डिंग बन रही है। ठेकेदार ने पहले जमीन की चारदीवार बनवा दी थी ताकि कोई सामान या मजदूर भी इधर-उधरना हो जाए। अब अंदर का काम चल रहा है। चार- एक माले बन चुके हैं। पांचवे पर काम जारी है। मोहनराम वहीं बाहर चाय की थड़ी के पास खड़ा है। उनके झ
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रोड इंस्पेक्टर

पापा ये शंकर अंकल क्या काम करते हैं' छोटू अपने पापा की गोद में चढ़कर बोला। 'क्यों क्या हुआ?' पापा ने गंभीर होकर पूछा। 'बस ऐसे ही ...। अंकल कितने अच्छे हैं ना। हमें सारे दिन साइकिल पर घुमाते हैं।' छोटू ने कहा- 'और मुझे साइकिल चलाना भी सिखा रहे हैं।' 'औ
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बस यूं ही...

कई दिनों से कुछ नहीं लिखा, तो बस यूं ही...उस घर लगी थी आग, और मैं यहां डरा था।तेरा दिया था जख्म, वो जख्म भी हरा था।छिप गया मैं जाकर, पीपल की आड़ में,अब भी वहीं खड़ा हूं, तब भी वहीं खड़ा था।।मद्धम है आंच उसकी, ठंडी है बिजलियां।शायद संभल भी जाए, वो पगली
Sep 11 2009 09:42 PM
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आई लव यू पापा

ये वो शब्द हैं, जो कभी बोल नहीं पाया और शायद जिंदगी में कभी बोल भी नहीं पाऊंगा। कई बार घर जाने पर मम्मी की गोद में भले ही सर रख दिया हो, पर पापा की गोद को तो वो अवसर भी नहीं मिला कभी। मम्मी के पेट प र मुंह रखकर पचासों बार ´फुर्र´ कर दिया, पर पापा को
 
संदीप शर्मा
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एक मेरा फ्रेंड, एक उसकी गर्लफ्रेंड...

मेरा एक फ्रेंड, उसकी एक गर्लफ्रेंड। लड़का कुम्हारों का और लड़की प्योर राजपूत। ऊपर से उसके पिता पुलिस में। मैं और मेरा मित्र लगभग-लगभग साथ-साथ ही रहते थे। ऑफिस में मेरा जूनियर था लेकिन गर्लफ्रेंड के मामले में सदा मेरा सीनियर रहा। मैं इस मामले में हमेशा
 
संदीप शर्मा
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राजू रतनानी की सड़क हादसे में मौत

एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर के एसोसिएट प्रोफेसर राजू रतनानी की सड़क हादसे में पत्नी सहित मृत्यु हो गई। वे कार से जयपुर से अजमेर जा रहे थे। उनकी कार आगे चल रहे टे्रलर से भिड़ गई, जिससे उनकी पत्नी मीना की मौके पर ही मौत हो गई और राजू रतनानी ने अस्पताल में द
 
संदीप शर्मा
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सभी ब्लॉगरों को एक मंच पर लाने का प्रयास

हमा रे पत्रकार साथी राजीव जैन ने देशभर के ब्लॉगरों को एक ही जगह इकट्ठा करने का प्रयास शुरू किया है। उन्होंने 'लिंक रोड' नाम से ब्लॉग बनाकर सभी ब्लॉगरों के एचटीएमएल पते वहां लगाए हैं। अगर आप भी ढूंढना चाहते हैं अपने शहर के ब्लॉगरों के नाम तो इस ब्लॉग
 
संदीप शर्मा
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घूम रही माया ठगनी...

कई दिनों से कोई पोस्ट नहीं लिख पाया। कुछ वक्त की कमी और कुछ अपनी सुस्ती के कारण। पांचेक दिन पहले ही गंगानगर में छुट्टी बिताकर जयपुर आया हूं। वहां बहुत सारा समय टीवी के आगे गुजरा। केबल पर कई नई-पुरानी फिल्में देखीं। एक फिल्म जो बेहद उम्दा लगी- वो थी '
 
संदीप शर्मा
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प्यार का चोथा-पांचवां ख़त लिखने में...

लव लैटर की बात चले, तो चौधरी की याद आना बहुत जरूरी है। चौधरी उस समय शायद नवीं क्लास में था। वो अपनी ढाणी के पास ही एक लड़की को बेइन्तहा प्यार करता था। उस समय लड़के-लड़कियों के अलग-अलग स्कूल थे। चौधरी ने प्लानिंग की उस लड़की को लव लैटर देने की। पूरी रात ब
 
संदीप शर्मा
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बहन छायावती और छज्जू बाबा

पर माननीय न्यायाधीश महोदय... ये आज मुझे पप्पी देना चाहता है, कल को कुछ और देने की कोशिश करेगा...' `तो...' न्यायाधीश ने नाक से चश्मा खिसकाया। `तो क्या महोदय... आज तो मैं कुर्सी पर हूं। जवान हूं, अपनी रक्षा स्वयं करना जानती हूं। कल बूढ़ी भी होऊंगी। तब ह
 
संदीप शर्मा
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दम-ए-दुश्वार या दिमागी दिवालियापन

दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा भारत के गृहमंत्री को जूता मारना क्या वाकई "साहस अथवा बहादुरीं" का काम है या फिर दिमागी दिवालियापन की अंतिम निशानी। सीबीआई द्वारा 1984 के सिख दंगों में कांग्रेसी टाइटलर को क्ली न चिट देने से आहत इस सिख पत्रकार ने य
 
संदीप शर्मा
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बेज्जती पर बेज्जती...

आज चिमनी झुंझलाता हुआ आता दिख गया। मुझे मालूम था कोई बकवास जरूर करेगा। इसलिए पहले से ही तैयार होकर बैठ गया। `क्यों भाई आज चेहरे पर साढ़े बारह क्यों बजे हैं?` वैसे मुहावरा बारह बजने का है। उसके आते ही मैंने पूछा। `कुछ ना पूछो भैया` चिमनी ने बगैर नाक-भौ
 
संदीप शर्मा
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पुरानी किताब के पन्ने

पड़ोसी मुसलमान कालू के घर रामायण देखते तीन बच्चे। फर्श पर बिछे गद्दों पर आराम से बैठा कालू, उसका परिवार। और ठंड के बावजूद फर्श पर बैठे तीनों- दो हम भाई और एक मौहल्ले का ही साथी, अब नाम याद नहीं। रामायण उन दिनों सबसे ज्यादा देखे जाने वाला सीरियल था। घर
 
संदीप शर्मा
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टोटल टाइमपास

गैरों के थिरकते शाने पे... यूं हाथ गंवारा कैसे करे... वो बात गंवारा कैसे....` `कुछ और सुनाओ ना..` `क्यों ये अच्छा नहीं लगा` `गाना अच्छा नहीं, तुम्हारी आवाज अच्छी है।` `तो फिर...` `बस ऐसे ही। कुछ और सुना दो ना प्लीज `कौनसा सुनाऊं` `जो तुम्हे पसंद हो..
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma
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भैणचो... एक था चौधरी

एक था हमारा साथी। नाम था चौधरी। पूरा नाम बोले तो परदीप (प्रदीप) चौधरी। श्रीगंगानगर शहर के अच्छे-खासे जमींदार परिवार का लड़का। इनका परिवार शहर से दो-चार किलोमीटर दूर ढाणी में रहता था। जाटों के बारे में आप सबने कहावत सुनी होगी- `सोलहा दुनी आठ´ यानिके ह
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma
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क्या आपको जवाब मालूम है...

इस बार सरदारजी कौन बनेगा करोड़पति की हॉट सीट पर बैठे हैं। उनके लिए कार्यक्रम के नियमों में परिवर्तन कर दिया गया है। उन्हें दो करोड़ रुपए जीतने के लिए मात्र पांच प्रश्नों के जवाब देने पर हैं, पर वे नहीं दे पाए। आसान सा क्विज है, पर उनकी समझ में नहीं आ
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma
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शिल्पा बेहद प्रसन्न है...

शिल्पा बेहद प्रसन्न है। सालों से चल रही दोस्ती प्यार की चौखट पर खड़ी है। बेहतरीन भारतीय अदाकारा शिल्पा शेट्टी और यूके बेस्ड कंपनी - यूके टे्रडकॉर्प लि. के सीईओ राज कुंदरा के दरमियान क्या-कुछ चल रहा है, सारी दुनिया के सामने है। कभी शिल्पा लंदन में रही
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma
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कुछ हसीन लम्हे...

बहुत कुछ ऐसे वाकये हम लोगों के साथ बहुत बार घटित हो जाते हैं, जो भुलाए नहीं भूलते। कुछ हंसाते हैं, कुछ रुलाते हैं। ज्यादातर हंसाते ही हैं। हम तीन भाई हैं। बचपन में तीनों ही अव्वल दर्जे के शरारती थे। शायद अब भी हों। हमारे घर में होली-दिवाली पर जब भी क
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma
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बैंड बजा देंगे `भैंस की टांग´

वेलेन्टाइन डे बहुत करीब है। प्रेमी-जोड़े हालांकि रोज ही तैयार रहते हैं, लेकिन इस दिन के लिए बेसब्र और उधर इस दिन के विरोधी भी मुस्तैद। एक तरफ प्रेम धर्म तो दूसरी ओर लट्ठ धर्म। आज यूनिवर्सिटी के दो-एक मित्रों से मिलना हुआ। उनका कहना था- `शनि को क्या क
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma
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सरप्राइज को सरप्राइज

पापा ने आज सुबह-सुबह ही फोन कर दिया। मम्मी से पूछा कि छोटी वाली अटैची तुम लोग साथ में ले आए थे क्या। मम्मी ने कहा- नहीं। पापा ने फिर पूछा कि वहां बाजरा पड़ा है या नहीं। मम्मी ने कहां हमने तो एक बार भी बाजरे की रोटी नहीं बनाई। पापा ने एक प्रश्न और पूछ
 
संदीप शर्मा Sandeep sharma