If  tired, rest here's Image

If tired, rest here

http://kalihawa.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
02 Feb 2010
कुल प्रविष्टियां
26
पाठक भेजे
991
पसंद
6
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
38.12
पसंद करें
0
नापसंद करें

बीती विभावरी जाग री.....

बीती विभावरी जाग रीअम्बर पनघट में डुबो रहीतारा घट उषा नागरीखग कुल कुल सा बोल रहाकिसलय का अंचल दोल रहालो लतिका भी भर लायी मधु मुकुल नवल रस गागरीअधरों में राग अमंद पिए अलकों में मलयज बंद कियेतू अब तक सोयी है आलीआँखों में लिए विहाग री--- जय शंकर प्रसाद
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

त्रिकालदर्शी!

कई वर्ष पूर्व एक अंग्रेजी सीरयल 'स्टार ट्रेक' देख रहा था। कॅप्टन कॅर्क ने एक महत्वपूर्ण बात कही। हुआ यूँ के अपनी एक यात्रा के दौरान वे पृथ्वी पर पहुंचे जहाँ उन्हें कुछ अच्छी तरह संरक्षित मनुष्यों के शव प्राप्त हुए। चूंके उनके पास टेक्नोलोजी उपलब्ध थी
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

फिर क्या शंकर विफल नही रहे..........

उपसंहार ! मुझे ईश्वर में क़तई आस्था नही है लेकिन फिर भी कई बार तीर्थ स्थानों की यात्रा करनी पड़ती है। दरअसल हम पैदा ज़रूर आज़ाद होते हैं लेकिन उसके बाद हर तरह की बंदिशें झेलनी पड़ती हैं और यही कारण था के कुछ वर्ष पुर्व मुझे केदारनाथ की यात्रा पर जाना पड़
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शंकर की सफलता ....

भालू के असामान्य आकार से शंकर आश्चर्य में डूब गए जबकि उनके शिष्य भयभीत थे। कुछ देर सोच विचार के बाद शंकर ने भयभीत शिष्यों की तरफ़ नज़र डाली फिर उन्हें अपने पीछे आना का इशारा किया। शंकर शांत भाव से अहिस्ता अहिस्ता भालू के पास से गुजर गए और उनके पीछे पी
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

चीख . . .!

कहते हैं एक तसवीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है और मुंबई क़त्ले आम के संदर्भ में तो एडवार्ड मुन्ग्क (Edvard Mu nch) के यह तसवीर अनगिनत अल्फाज़ बयान करती है। तसवीर का शीर्षक है 'चीख' (The Screem)। क्या कुछ और कहने की ज़रूरत है?
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

फीनिक्स !

फीनिक्स ग्रीक गाथा का एक पौराणिक पक्षी है; सुंदर व चिरयुवा जो अपनी ही राख से पुनर्जीवित हो उठता है। दहसतगर्द फीनिक्स ही तो हैं आदर्शवादी , हौसले में पक्के और जितने मारो उतने नए खड़े हो जाते हैं। अक्सर समझदार व्यक्ति तर्क देते हैं के जब तक कारण समाप्त
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रजातीय विकास और क्रोध

प्रजातीय विकास के संधर्भ में क्रोध कब विकसित हुआ होगा और हमारे संरक्षण सन्दर्भ में क्या इसका कोई उपयोग भी है? क्रोध का विकास कैसे हुआ होगा इसका तो आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है आख़िर किसी भी उकसावे की कोई तो भावनात्मक प्रतिक्रिया होनी चाहिए, क्रोध
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जीवन पद्धती!

हिंदू कोई धर्म नही , सम्प्रदाय नही बल्कि एक जीवन पद्धती है ! हैरत है ! इस सोच के पीछे कुछ और नही सिर्फ़ हमारी विलक्षण होने की फितरत है . हम कुछ अलग हैं , विशेष है , श्रेष्ठ हैं , यह प्रकट रूप से कहा नही जा रहा है किंतु इस धारणा के मूल में यह अप्रत्यक
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

धर्म और नैतिक व्यव्हार

सवाल उठता है की क्या समाज में नैतिक व्यवहार (ethical behavior) धर्म की वजह से है और अगर ऐसा है तो धर्म की आवश्यकता अपरिहार्य है अन्यथा धर्म मात्र हमारी अध्यात्मिक मांग है सामाजिक ज़रूरत नही। अक्सर धर्म को हमारे नैतिक व्यवहार का कारण माना जाता है जबके
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अहम् ब्रह्म आष्मि!

दरअसल यह सही है उतना ही जितना यह संसार सत्य है। हर एक व्यक्ति इस विश्व का केन्द्र है। विश्व हमारी सोच का प्रतिबिम्ब मात्र है। गौर करें: हर ज़र्रा चमकता है अनवार ऐ इलाही से हर साँस ये कहती है, हम हैं तो ख़ुदा भी है! या यूँ कहें "हम हैं तो ये विश्व भी ह
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

खोलो प्रियतम खोलो द्वार

शिशिर कणों से लदी हुई कमली के भीगे हैं सब तार चलता है पश्चिम का मारुत ले कर शीतलता का भार भीग रहा है रजनी का वह सुंदर कोमल कबरी भाल अरुण किरणसम कर से छु लो, खोलो प्रियतम खोलो द्वार - जयशंकर प्रसाद बचपन में ये कविता पढ़ी थी, आज तक नही भूला। अफ़सोस हिन्द
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अतियथार्थवाद

उन्नीसवीं शताब्दी के अंत पर जब एक थका हुआ सा Post- Impressionism आखिरी साँसें गिन रहा था, हेनरी मातिस की अगुवाई में एक क्रांतिकारी आन्दोलन 'फाओइज्म' योरोपीय चित्रकल में उभर कर आया (फाव का फ्रांसीसी भाषा में अर्थ जंगली जानवर होता है) यह आन्दोलन शुद्ध
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रतिध्वनि!

हिन्दी ज़बान में मेरी दख़ल न के बराबर है फिर भी जितना इल्म है उस लिहाज़ से 'प्रति' उपसर्ग दो अर्थों में इस्तेमाल होता है, अंग्रेजी प्रीफिक्स 'per' और 'anti' के समकक्ष। उदाहरण के तौर पर प्रतिदिन, प्रतिशत और प्रतिवाद इत्यादि। बाकी़ पाठक अपना मत ज़ाहिर कर
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

'काल यात्रा' अर्थात 'टाइम ट्रेवेल' ! ! !

काल यात्रा' में शायद वह प्रभाव नही या वह सटीक अर्थ नही जो अंग्रेजी लफ्ज़ 'टाइम ट्रेवेल' में है। इसमें कोई आश्चर्य नही क्योंकि अकसर लफ्जों का महत्व या वज़न इस बात पर निर्भर करता है के हम उसे कितनी सघनता से अनुभव करते हैं। उदाहरण के तौर पर 'अनुभूति' उर्
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

काला और सफ़ेद

हम चीजों और छवियाँ को रंगों में देखते हैं इसलिए काला और सफेद मीडियम प्राकृतिक नहीं है। ब्लैक एंड व्हाइट छवियाँ इस प्रकार होती हैं मानो किसी ने इनकी एडिटिंग की है। बावजूद इसके काला और सफेद माध्यम उबाऊ अथवा उदासी की भावना को उभारने वाला नही होता है बल्
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सफ़ेद धुआं

इक अलसाई सर्दी की सुबह जमुना में कोई हलचल ही नही खिसकता था नभ में,पुल के ऊपर सूर्य में कोई चमक ही नही ज़मीं से कुछ ही ऊपर टंगा था घना सफ़ेद धुआं छिप गया था शहर का चेहरा घिनौना था जो इसके बिना मृत, नदी के किनारे पड़ा लावारिस एक बच्चे का शेष धुंध का शुक्
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सूर्य प्रभाव

पिघला सोने के भद्दे स्ट्रोक उतने ही कम हैं जितना सोना दुर्लभ हैं और नीलिमा का फैलाव उसे आसानी से परास्त कर देता है। कोई भी सुबह की निःशब्दता को भंग करने का साहस नही जुटा पा रहा है। हलके धुंध की दूर पहाडों को ढंकने की कशिश व्यर्थ जा रही है। अकेला नावि
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

हवा में दरार

कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें मूल कृतियाँ बटोरने का जूनून होता है। आख़िर इंसान की हर सूरत में विशिष्ट होने की हवस के पीछे क्या राज़ है? अगर तर्कसंगत तरीक़े से सोचा जाए तो अक्सर मूल कृति के पीछे विचार ज्यादा अहम् होता है न की कारीगरी। जब नकली कृति को एक्स
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आख़िर बाबर मरा कैसे?

कल का शेष .......... यह सुन वह आश्चर्य में डूब गया, अनायास ही उसके मुंह से शब्द निकल पड़े, "अल्लाह तुम सर्वशक्तिशाली हो, जो भी इस कायनात में होता है तुम्हारे इशारों से होता है। सम्पुर्ण ब्रह्मांड तुम्हारे निर्देशों से ही चलता है। उद्देश्य के बिना घटना
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

बाबर

हुमायूं जब मृत्युशय्या पर पड़ा था, बाबर ने उसकी तीन बार परिक्रमा की और अल्लाह से प्रार्थना की के वह हुमायूं की ज़िन्दगी बख्स दे चाहे बदले में उसकी ज़िन्दगी ले ले। फिर ऐसा ही हुआ, हुमायूं तो ठीक हो गया लेकिन बाबर शीघ्र ही बीमार हो कर चल बसा। जब मैं पां
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

दिमाग़ (Brain) और ज़ेहन (Mind)

अक्सर ये दोनो लफ्ज़ पर्यायवाची की तरह इस्तेमाल होते हैं लेकिन सच्चाई यह है के इन दोनो शब्दों का अर्थ जुदा है। दिमाग़ हमारा मस्तिस्क यानी वह गूदा है जो हमे खोपडी में भरा है जबके ज़ेहन अमूर्त है, हमारा मानस। अगर कंप्यूटर का सादृश्य लें तो समझ लीजिये के
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

धर्म!

हर धर्म मेरे लिए विरोधाभास की इन्तेहा है. मेरी नज़र में हिंदू धर्मं या फिर जिस भी नाम से वे इसे पुकारते हैं एक कबीलाई धर्म है. मुझे `हनुमान' में या फिर किसी अफ्रीकी देवता में कोई अन्तर नही सूझता सिवाय इसके के 'हनुमान' सिल्क की वस्त्र और कुछ सुवर्ण आभू
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

दसवां रस!

हर व्यक्ति जो ललित कलाओं में रुच रखता है वह 'नव रस' से अनभिज्ञ न होगा। लेकिन इन नव रसों के अतिरिक्त भी एक ऐसी अनुभूति है जिसे ऋषि भरत 'नाट्य शास्त्र' में शामिल करना भूल गए! "अम्बुआ की डाली डाली , कोयल ......" गीत सुनते है यादों का एक सैलाब उमड़ पड़ता
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आत्मा !

माया मरी न मन मारा, मर मर गया शरीर आशा तृष्णा न मरी कह गए दास कबीर जो भी विचार हमारे मस्तिष्क से गुज़रता है दरअसल हम उसे सुनते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई हमारे विचारों को पढ़ रहा है। शायद इसी वजह से यह आभास होता है के इस शरीर से परे भी कोई अमूर्
 
Kali Hawa
Dec 29 2009 11:49 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

वजू़द! (भाग १)

समुद्र के छोर पर खडा एक व्यक्ति जिसे इस बात का क़तई आभाष न था के दुनिया गोल है, विचार करने लगा आखिर इस क्षितिज तक फैली जलराशी के अंत पर क्या है? वह अभिभूत था लिहाज़ा एक कठोर और परीक्षापूर्ण यात्रा पर निकल पड़ा. वह साहसी और दृड़ निश्चयी था इस लिए निरंत
 
Kali Hawa
पसंद करें
0
नापसंद करें

यज्ञ!

दरअसल यज्ञ एक बहत ही विचित्र आयोजन है जिस से हम ईश्वर के विचार की उत्पत्ति का आभास पाते हैं. हमारी दो अत्यन्त ही स्वाभावित प्रवृत्ति है स्वयं को सुरक्षित रखना और सौदा करना. अगर इन दोनों प्रवृत्तियों को लेकर प्रक्षेपण करें तो हमें पायेंगे की किस प्रका
 
Kali Hawa