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18 Jun 2010
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साझा धन खेल और मजदूरों का शोषण

समिति की रिपोर्ट आई,हमारी गर्दन शर्म से झुक गई,युद्ध स्तर पर चलता निर्माण कार्य,मजदूरों से युद्ध करते खेल आयोजक,न्यूनतम वेतन नहीं,ओवरटाइम का कोई पैसा नहीं,केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार,मजदूरों का कर रही हैं शोषण,अमानवीय परिस्थित्तियों में वाध्य काम करने
 
Suresh Chnadra Gupta
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नेता का जन्म दिन और गरीब के बच्चे की मौत

अरे तुम रोटी खा रहे हो,हमारी नेता का जन्म दिन है भूल गए,उनका जन्म दिन तो अक्सर आता है बाबू,कई दिन बाद रोटी मिली है आज,भूखे हैं बच्चे, खाने दो न,पिछले जन्म दिन में भी,छीन ले गए थे तुम सारी मजदूरी,नेता को हार बना कर पहना दी थी,हफ्ता भर भूखे रहे थे सब,क्या
 
Suresh Chnadra Gupta
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होली आई, होली आई

होली आई, होली आई,रंग बिरंगी होली आई,किशिता की तैयारी पूरी,सिया की तैयारी पूरी,नया रंग और नई पिचकारी,गुब्बारे और लाल गुलाल,होली आई, होली आई.दही बड़े, आलू की चाट,कचरी, पापड़ और समोसे,सबने मिलकर दादी के संग,मावे की गुझिया बनबाई,गन्ने और गेहूं की बालें,होली
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: holika dahan
Feb 26 2010 10:14 AM
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क्या जलाओगे इस होली पर?

वर्मा जी ने पत्रकारिता शुरू की,पहला प्रोजेक्ट होली पर,लोगों से एक सवाल पुछा,क्या जलाओगे इस होली पर?जो जवाब मिले देखिये,आतकंवादी - लोगों के बीच प्रेम,सास - छोटे बेटे की बहू,राजनीतिबाज - जनता का धन,अध्यापक - बच्चों का भविष्य,पत्नी - पति का बटुआ,पति - पत्नी
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: teacher
Feb 22 2010 05:41 PM
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मंहगाई है जनता का भाग्य !!!

आखिरकार वह वक्त आ ही गया,सरकार ने माना मंहगाई है,कवायद शुरू हो गई,मंहगाई कम करने की नहीं,इल्जाम लगाने की एक दूसरे पर,विरोधी पक्ष ने बात पकड़ ली,तो फिर सब मिल गए,मंहगाई की बात फिर गए भूल,जनता का भाग्य जब यही है,तब सरकार क्या करे?
 
Suresh Chnadra Gupta
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फिर आ गई छब्बीस जनवरी

फिर आ गई छब्बीस जनवरी,फिर निकलेगी राज मार्ग पर,जो परेड हर साल निकलती,थके ऊंघते नेता दर्शक,मजबूरी में आना पड़ता,राष्ट्रीय कर्तव्य हमारा,हर साल दिखावा करना पड़ता,थकी थकी राष्ट्रपति महोदया,हाथ उठाओ, हाथ गिराओ,प्रथम नागरिक के जीवन में,सबसे कठिन यही एक दिन
 
Suresh Chnadra Gupta
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सरकार विज्ञापन क्यों देती है?

शर्मा जी ने पूछा,सरकार विज्ञापन क्यों देती है?करोड़ों रूपए खर्च कर देती है,किसे फायदा होता है इस से?सरकार को या जनता को?वर्मा जी ने समझाया,फायदा न सरकार को न जनता को,विज्ञापन में जो लिखा है,और वह क्यों लिखा है,सरकार और जनता दोनों जानते हैं,फायदा होता है
 
Suresh Chnadra Gupta
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सरकार, निगम और मानवता

कुछ दिन पहले एक सत्य प्रस्तुत किया था,दिल्ली बनेगी दुल्हन,उजाड़ दिया था बसेरा ग़रीबों का,दिल्ली सरकार और नगर निगम ने,छीन ली थी टूटी फूटी छत,ग़रीबों के सर से,गरीब रोते रहे, बिलखते रहे,किसी का दिल नहीं पसीजा,न सरकार में, न निगम में,अदालत ने हुकुम दिया,तब
 
Suresh Chnadra Gupta
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उनकी तरक्की पर देश है शर्मसार

मिलिए उन पुलिस वालों से,रुकावटें डालीं जिन्होनें न्याय के रास्ते में,जान वूझ कर बरती लापरवाही,अपना कर्तव्य निभाने में,दुरूपयोग किया कानून का,करने को मदद अपराधी पुलिस वाले की,बदले में मिली तरक्की और सम्मान,एक कर रहा है जांच सुप्रीम कोर्ट के लिए,गुजरात के
 
Suresh Chnadra Gupta
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नए वर्ष की शुभकामनाएं

मैं लाया हूँ,ढेर सारी शुभकामनाएं,नए वर्ष की,ले लो जिस को जितनी चाहिए,सुगन्धित वायु और जल,सुरक्षित सड़कें, रेल-वायु मार्ग,सब को समान अवसर,सब को समान आदर,सब को समान न्याय,भरत जैसा राज्य,राम जैसी मर्यादा,ले लो जिस को जितनी चाहिए.
 
Suresh Chnadra Gupta
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ऎसी पुलिस न होना ज्यादा बेहतर है

पुलिस वालों की डाइनिंग टेबल पर, जो पकवान परोसे जाते हैं, जिस पैसे से पुलिस वाले ऐयाशी करते हैं, वह पैसा उस जनता की जेब से आता है, जिस पर वह रात दिन अत्याचार करते हैं, रुचिका की कहानी है, इस बेशर्म पुलिस की कहानी, पुलिस की जरूरत है, पर, ऎसी पुलिस न हो
 
Suresh Chnadra Gupta
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जन राजनीति

जनता ने मोर्चा लगाया, मंहगाई के खिलाफ नारा लगाया, महंगाई ने मोर्चे में शामिल हो कर, जनता का हौसला बढ़ाया, शर्मा जी चकराए, वर्मा जी के पास आये, भैया यह क्या चक्कर है? यह जन राजनीति है, वर्मा जी ने समझाया, जनता और मंहगाई, आपस में मिल गए हैं, जिस पार्टी
 
Suresh Chnadra Gupta
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ईश्वर की सच्ची पूजा

मानवीय संबंधों का आदर करो, परिवार के प्रति कर्तव्यों का पालन करो, यही ईश्वर की सच्ची पूजा है. बड़ों का आदर करो, उनके सुख दुःख का ध्यान रखो, यही ईश्वर की सच्ची पूजा है. बच्चों से प्रेम करो, उन्हें सही शिक्षा दो, यही ईश्वर की सच्ची पूजा है. पड़ोसियों स
 
Suresh Chnadra Gupta
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पंद्रह अगस्त - क्या भूल गए क्या याद रहा

मैं बच्चा था एक वर्ष का, जब पंद्रह अगस्त आया था, आधी रात सूरज निकला था, माँ ने मुझको बतलाया था, आजादी के रंग में रंग कर, नया तिरंगा फहराया था, कई सदियों के बाद आज फिर, भारत माता मुस्काई थी, कितने बच्चों की कुरबानी देकर यह शुभ घडी आई थी. रंग-बिरंगे वस
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:41 AM
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चुनाव या सत्ता का बँटवारा?

सबने कहा यह चुनाव है, मैंने कहा सत्ता का बँटवारा है, चुनाव तो एक बहाना है, असली उद्देश्य सत्ता में आना है, मिल बाँट कर खाना है. जनता का वोट बेकार नहीं जाएगा, कोई न कोई तो चुना जाएगा, जो चुना जाएगा, पाँच वर्ष तक देश को खायेगा. सत्ता के गलियारों में, स
 
Suresh Chnadra Gupta
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भद्रपुरुष बिकाऊ हैं

वर्ष २००८, आस्ट्रेलिया में मास्टर ब्लास्टर, बजी घंटी फोन की, बोले मुम्बई इंडियंस के मालिक, किन्हें रखना चाहेंगे अपनी टीम में? सचिन ने अभी सोचा नहीं था इस पर, पर तुरत एक नाम आया दिमाग में, सनत जयसूर्या, तुरत खरीद लो उसे , और खरीद लिया मुकेश ने, भद्रपु
 
Suresh Chnadra Gupta
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नया प्रजातंत्र

आजादी के बाद, हुआ बहुत बुरा व्यवहार, राज परिवारों के साथ, छीन कर उनके राज्य पकडा दिए प्रिवीपर्स, फिर छीन लिए यह प्रिवीपर्स भी, खड़ा कर दिया उन्हें, उनकी प्रजा के साथ, और यह छीनने वाले, स्वयं बना कर नए राज परिवार, जा बैठे गगनचुम्बी अट्टालिकाओं में, प्
 
Suresh Chnadra Gupta
Dec 29 2009 11:41 AM
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साझा खेल - दिल्ली बनेगी दुल्हन

दिल्ली नगर निगम, दिल्ली सरकार, कर रहे हैं अत्याचार, गरीब बेघर आम आदमियों पर, नाईट शेल्टर तोड़ कर, सैंकड़ों लोगों को जमा दिया सर्दी में, मचा दिया हाहाकार, गरीबों की जिंदगी में, औरतें, बच्चे, बूढ़े, कहाँ जाएँ कंपकंपाती सर्दी में, कहीं भी जाएँ, हमसे मतल
 
Suresh Chnadra Gupta
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चालीस साल पहले

चालीस साल पहले, जिंदगी बहुत आसान थी, हमने ३२५ बेसिक पर शुरू की थी, केंद्र सरकार में नौकरी, तीन कमरों का मकान था, सब कुछ बहुत सस्ता था, आना-जाना, खाना-पीना, मन में कोई तनाव नहीं, जिंदगी जीते थे तब. फिर देश ने तरक्की की, जिंदगी मुश्किल होने लगी, अब देश
 
Suresh Chnadra Gupta
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रावण और राम राज्य

वह एक मंजे हुए राजनीतिबाज हैं, भाषण देना उन की आदत है, एक सभा में भाषण दे दिया, देश में राम राज्य लायेंगे. कल एक जवान लड़के की मौत हो गई, शमशान भूमि में उस के पिता को रोते देखा, अचानक नेताजी का भाषण याद आया, देश में राम राज्य लायेंगे, यह कैसा राम राज
 
Suresh Chnadra Gupta
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दीवाली बाद की पहली सुबह

दीवाली आई, दीवाली गई, कुछ बदला क्या? नहीं, कुछ नहीं बदला, फिर कर दी बेकार, एक और दीवाली. खूब पटाखे बजाये, खूब शोर मचाया, पर जगे नहीं, सोते रहे, प्रगाढ़ निद्रा में, झूट, चोरी, बेईमानी, नफरत, हिंसा, अन्याय की. खूब दिए जलाए, मोमबत्तियां जलाईं, विजली की
 
Suresh Chnadra Gupta
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आई दीवाली, आई दीवाली

आई दीवाली, आई दीवाली, खुशियाँ लेकर आई दीवाली. चाची ने घर खूब सजाया, मम्मी ने भी हाथ बटाया, मैंने और सिया ने मिल कर, उनकी हिम्मत खूब बढ़ाई. आई दीवाली, आई दीवाली, धन धान्य ले आई दीवाली. चाचा लाये अनार, फुलझडी, पापा लाये बिस्कुट मेवे, दादी लाई मिठाई बता
 
Suresh Chnadra Gupta
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आराम हलाल है

एक मंत्री ने ट्विटर पर ट्वीट किया, बापू के जन्मदिन पर सब काम करें, पढ़ कर अच्छा लगा, कोई है तो है काम करने वाला, यह और बात है कि कुछ दिन पहले, यही मंत्री जी शिकायत कर रहे थे, काम बहुत ज्यादा है दफ्तर में. बापू ने कहा कर्म पूजा है, बापू ने तो सिर्फ दो
 
Suresh Chnadra Gupta
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कब तक कुप्रयोग करोगे बापू के नाम का?

बापू का नाम भुनाया तुमने, आज़ादी से पहले, आज़ादी के बाद, अपनी निजी स्वार्थसिद्धि के लिए, सिर्फ नाम ही भुनाया, बापू का कोई गुण नहीं अपनाया, आज भी लगे हो, बापू का नाम भुनाने में, करोडों रुपये के विज्ञापन, अपनी तस्वीरों के साथ, जरा नहीं शरमाये शामिल करन
 
Suresh Chnadra Gupta
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क्या इस बार भी सिर्फ रावण ही जलेगा?

हर साल जलाते हो तुम रावण को, क्या इस बार भी सिर्फ रावण ही जलेगा? रावण से जुड़ी बुराई कब जलेगी? कभी सोचा है तुमने? तुम राम की पूजा करते हो, पर करते हो प्रतिनिधित्व रावण का, राम का कोई आदर्श नहीं अपनाया, रावण की हर बुराई अपना ली, किसे धोखा देते हो जला
 
Suresh Chnadra Gupta
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चाँद खतरे में है

कल टीवी पर खबर देखी,चाँद पर पानी मिला है,देखते देखते सो गया,आँख खुली तो देखा,चाँद पर मीटिंग चल रही है,बहुत चितित हैं चाँद वाले,अब क्या होगा?इंसान ने पहले धरती खराब की,अब चाँद को खराब करेगा, चाँद पर पहले से गड्ढे हैं,पर इंसान आकर सड़क बनाएगा,फिर उसमें
 
Suresh Chnadra Gupta
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कब तमीज सीखोगे तुम?

अरे ओ दिल्ली वालों,कब तमीज सीखोगे तुम? शीला दीक्षित, तेजिंदर खन्ना,और अब पी चिदंबरम, सबका मन दुखता हे,तुम्हारे असभ्य व्यवहार से,पर तुम निकाल देते हो,इस कान से सुन कर उस कान से,कब बदलोगे अपना असभ्य सोच? कामनवेल्थ खेलों में,आयेंगे बड़े-बड़े मेहमान,जिनके थे
 
Suresh Chnadra Gupta
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आओ मजाक करें

मनमोहन जी ने कहा,जो थरूर ने कहा,मजाक में कहा.शर्मा जी को अच्छा नहीं लगा,वर्मा जी ने समझाया,क्या गलत कहा?बाबू और राजनीतिबाज,मजाक ही तो करते हैं जनता से,साठ साल हो गए यह मजाक होते,पर आप अभी भी नहीं समझ पाए.थरूर पहले बाबू थे,अब राजनीतिबाज हो गए हैं,सो मजाक
 
Suresh Chnadra Gupta
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मीठा-मीठा मैं, कड़वा-कड़वा तू

रोज सुबह दिल्ली के अखवारों में,छपते हैं अनेक विज्ञापन,सरकार का हर अच्छा काम,दर्शाते हैं यह विज्ञापन,और छपती है इन विज्ञापनों में,मुख्य मंत्री की तस्वीर.अखवार में निकला एक समाचार,सरकार के एक स्कूल में, भगदड़ मच गई,पांच लड़कियां मर गईं, चौतीस घायल हो
 
Suresh Chnadra Gupta
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राष्ट्रपति ने चाय पिलाई

राष्ट्र ने मनाया स्वतंत्रता दिवस,राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री,राज्यपाल और मुख्यमंत्री,सबने औपचारिकता निभाई,आम आदमी को भाषण सुना कर,आम आदमी ने भी निभाई, यह सारे भाषण सुन कर.भाषण सुनने का और सुनाने का,सुन सुना कर तुरत भूल जाने का, अनवरत चल रहा है,सिलसिला इस
 
Suresh Chnadra Gupta
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वर्ल्ड क्लास शहर का वर्ल्ड क्लास पार्क

समझ नहीं पाता हूँ मैं,शिकायत करुँ या करुँ धन्यवाद?दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार,कौन है धन्यवाद का हकदार?सांसद, एम्एलए, पार्षद, किसे पहनाऊं प्रशंसा का हार?उपराज्यपाल, डीडीए उपाध्यक्ष, किस की प्रशंसा का हूँ मैं कर्जदार?डीडीए डिस्ट्रिक्ट पार्क पश्चिम पुरी,गढ़
 
Suresh Chnadra Gupta
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बलात्कार एक दलित महिला का

एक दलित महिला का बलात्कार हुआ, राजनीतिबाज सक्रिए हो उठे, मीडिया ने खबर तोड़नी शुरू कर दी, जिसको जिसमें जैसा फायदा लगा, उसने वही बात कहनी शुरू कर दी. बल्लात्कार बन गया एक बिजनेस, नेता वोट कमाने लगे, मीडिया रीडरशिप रेटिंग, सरकार ने कर दी घोषणा, आर्थिक
 
Suresh Chnadra Gupta
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कचरादान

कचरा ही कचरा हर तरफ़ , घर मे कचरा , घर के बाहर कचरा , सड़क पर कचरा , पार्क मे कचरा , मन्दिर , मस्जिद , गुरुद्वारा , चर्च , सब जगह कचरा ही कचरा , दिमाग मे कचरा , जुबान पर कचरा , जो काम किया वह भी कचरा , मानवीय सम्बन्ध हो गये कचरा , बेटे ने माँ बाप का
 
Suresh Chnadra Gupta
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भिक्षाम देही

भिक्षाम देही मां, भिक्षाम देही, एक अच्छा सा मंत्रालय, कमाई हो जिस में तगडी, बनी रहे सर पर यह पगड़ी, अर्पित है चरणों में तुम्हारे, चिट्ठी समर्थन की, भिक्षाम देही मां, भिक्षाम देही.
 
Suresh Chnadra Gupta
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शन्नो हमें माफ़ कर देना

हम तुम्हारे अपराधी हैं शन्नो, पर हम क्या करें? एक बड़े परिवार की बिटिया बीच में आ गई, और हमारा बिगड़ा सोच और ज्यादा गड़बड़ा गया, मैं मंत्री हूँ कोई कृष्ण नहीं, जो पहुँच जाऊं विदुर के यहाँ, तुम्हारे स्कूल के साथी अंग्रेजी नहीं बोलते, स्कूल के दरवाजे प
 
Suresh Chnadra Gupta
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बुरा न मानो होली है - शब्दों के रंग

प्रदेश के नेता के रूप में शपथ लेकर, उन्होंने कहा, मैं एक सीधा-सच्चा आदमी हूँ, उनका पहला आदेश था, पिछले मुख्यमंत्री के खिलाफ, चार्जशीट दाखिल करवाना. लोहे को लोहा काटता है, इस कहावत को चरितार्थ किया, उनकी सरकार ने, बीड़ा उठाया है उन्होंने, भ्रष्टाचार ख
 
Suresh Chnadra Gupta
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इस मन की यही कहानी है (३)

मन का अधिकार कर्म पर है, फल पर अधिकार नहीं मन का, गुरु-सखा कृष्ण का अर्जुन को, उपदेश बना मंतर मन का. जीवन से पूर्व, मृत्यु के बाद, क्या होता नही जानता मन, इस जीवन में खोया पाया, उस को ही सत्य मानता मन. ईश्वर के घर में देर सही, अंधेर नहीं कहता है मन,
 
Suresh Chnadra Gupta
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मन ढूँढ रहा है एक मित्र (२)

मन एक अकेला अभिमन्यु, कैसे सब से लड़ पायेगा? ज्यादा से ज्यादा यह होगा, इतिहास पुनः दोहराएगा. चाहों का रच कर चक्रव्यूह, मन की सेनाओं ने घेरा, इस पर मुझको अधिकार मिले, यह मैं लूँगा, यह है मेरा. कितना है कठिन युद्ध करना, जब साथ नहीं हो कृष्ण कोई, बिन गु
 
Suresh Chnadra Gupta
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प्रतीक्षा एक और अवतार की !!!

किस की प्रतीक्षा कर रहे हैं हम, एक और अवतार की? पिछले अवतार ने दिया था जो उपदेश, उसे अभी तक अपने जीवन में नहीं संजो पाए, बस याद रखा इतना ही, 'मैं बार-बार आता हूँ, धर्म को बचाने, अधर्म को मिटाने', भूल गए बाकी सब, करने लगे प्रतीक्षा एक और अवतार की. अच्
 
Suresh Chnadra Gupta
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खुशी चाहिए, अपने अन्दर झाँकों

एक कहावत पढ़ी थी बचपन में, 'कस्तूरी कुंडली बसे, मृग ढूंढे वन माहीं', इसका अर्थ भी पढ़ा था, भावार्थ भी, पर कितना समझ पाये? आज भी तलाश रहे हैं हम, खुशी यहाँ-वहां, इधर-उधर, पर नहीं झांकते मन के अन्दर, छुपा है जहाँ, खुशी का असीमित भण्डार.
 
Suresh Chnadra Gupta