इस्लाम के महान विचारक इमाम हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (अ.) की ये भविष्यवाणी लोगों को अपनी आँख खोलने के लिए पर्याप्त है :लोगों पर एक दौर आएगा जब उन् में सिर्फ कुरआन के चिन्ह और इस्लाम का सिर्फ नाम बाक़ी रह जाएगा. उस वक़्त मस्जिदें निर्माण व सज्जा के लिहाज़
आई. जी. राघवेन्द्र ने इं. दिनेश के हाथ से रिसीवर लिया. दूसरी और वही था जिसने अपने पास पोर्ट्रेट होने का दावा किया था. उसने इं. दिनेश से पोर्ट्रेट के सम्बन्ध में किसी महत्वपूर्ण अफसर से बात कराने के लिए कहा था. अतः इं. दिनेश ने आई जी को बुलाया था. "हे
किंतु आप केवल बीस हज़ार में विज्ञापन तैयार करके अपना घाटा क्यों सह रहे हैं?" "अपनी विज्ञापन कंपनी का विज्ञापन के लिए. कल हमारी प्रतियोगिता का समाचार समाचार पत्रों में प्रकाशित होगा. जिससे बहुत से बिजनेसमैनों की दृष्टि में हमारी कंपनी आ जाएगी." सेठ सं
आपने भारत की जानी मानी विज्ञापन कंपनी 'बुकरात कंपनी' का नाम तो अवश्य सुना होगा. मैं ही उसका चेयरमैन हूँ." "आप बुकरात कंपनी के चेयरमैन हैं. बड़ी प्रसन्नता हुई आपसे मिलकर." सेठ ने उठकर हंसराज से हाथ मिलाया. उसके दोबारा बैठने के बाद हंसराज ने कहा. "तो मै
उन्हें सेठ धीरुमल का मकान तलाश करने में कोई कठिनाई नही हुई. क्योंकि धीरुमल भरतपुर का प्रसिद्ध हलवाई था. हंसराज ने पहले से पता कर लिया था कि सेठ इस समय घर पर है. सेठ धीरुमल का मकान शानदार हवेलीनुमा था. हंसराज ने घंटी पर उंगली रख दी. थोडी देर बाद एक नौ
इसलिए क्योंकि मैं उसके लिए ठग नही बल्कि एक सरकारी जासूस था. जो ट्रेनिंग के लिए उसके पास आया था. यह लगभग दो वर्ष पहले की बात है. जब मुझे एक छोटे से जुर्म में एक सप्ताह की सज़ा हो गई थी. जब मुझे जेल ले जाया जा रहा था उस समय जेलर से एक व्यक्ति की बातचीत
इसमें गुस्सा होने की क्या बात है. आज नहीं तो कल सभी तुम्हें मिसेस हंसराज कहेंगे." इस बार अजनबी की आवाज़ बदल गई थी. और सोनिया ने गहरी साँस छोड़ी, क्योंकि यह हंसराज का स्वर था. "ओह, तो तुम हो. तुमने तो मुझे डरा ही दिया था." वे दोनों अन्दर आ गये. हंसराज
गंगाराम के जाने के बाद मुसीबतचंद भी उठा और बाहर जाने का इरादा किया. लेकिन उसी समय उसे ध्यान आ गया कि वह वहां किस कारण से आया था. उसने फोटोग्राफर को संबोधित किया, "अरे भाई, कब तक रोकोगे. अब मेरा फोटो खींच दो." फोटोग्राफर, जो शायद हंसराज का हुलिया अपने
इसलिए, क्योंकि मैं नही चाहता कि किसी व्यक्ति की दृष्टि यहाँ आते हुए मुझ पर पड़े. क्योंकि मैं एक सरकारी आदमी हूँ. अगर किसी कि दृष्टि मुझ पर पड़ गई तो मैं जेल के अन्दर हो जाऊँगा." "किंतु मुझ पर अपनी अस्लियत खोलने में क्या हर्ज है? आज तक तुम ने नही बताया
और अब अपने फाएदे की बात सुनो. तुम तुंरत गाँव वापस जाओ क्योंकि वहीँ तुम्हें एक बड़ा लाभ होने वाला है." "कैसा लाभ ज्योतिषी महाराज?" "समय आने पर मालुम हो जाएगा. मैं जाता हूँ. मुझे देर हो रही है." मुसीबतचंद ने उसे रोकना चाहा किंतु वह जल्दी से पीछा छुड़ाकर
वाह वाह. क्या शानदार बात बताई. " उसने कहकहा लगाया, "बहुत मज़ा आता है गटर में. एक बार मैं गिर चुका हूँ. हर ओर खुशबू ही खुशबू. लगता है जैसे स्वर्ग में पहुँच गए. लेकिन वहां बोतल नही मिल पाती." "कोई बात नहीं. बोतल तो तुम्हें असली स्वर्ग में भी नही मिलेगी.
जी हाँ. मेरा डाएरेक्ट कान्टेक्ट चाँद, तारों, ग्रहों सभी से हर समय रहता है. जब उनकी छाया मैं किसी की हथेली पर देखता हूँ तो उस हथेली के भविष्य के बारे में सब कुछ जान लेता हूँ." "तो ठीक है. मेरा हाथ देखकर बताओ कि आजकल मेरे पति देर से घर क्यों आ रहे हैं.
जैसे ही इं.दिनेश की जीप कंट्रोल रूम के सामने रुकी, एक सिपाही उसके पास आया. "आई जी साहब स्पेशल रूम में आपका इन्तिज़ार कर रहे हैं." "ठीक है, मैं आता हूँ." इंजन बंद करने के बाद इं.दिनेश अन्दर प्रविष्ट हो गया. "क्या समाचार है?" इं.दिनेश को देखते ही आई जी
उसने सूटकेस भूमि पर रखा और खोलने लगा. इं.दिनेश भी गौर से उधर ही देख रहा था. उस व्यक्ति के हाथों में रखी टॉर्च की रोशनी सूटकेस पर पड़ रही थी.फिर सूटकेस के खुलते ही दोनों के मुंह से एक साथ निकला, "ओह! ये क्या?" दोनों के स्वरों में विस्मय था. क्योंकि सूट
इं. दिनेश ने सिगरेट समाप्त करने के बाद रेडियम डायेल की घड़ी पर दृष्टि की. आठ बजकर दस मिनट हो गए थे. उसने मुंह खोलकर एक जम्हाई ली और बडबडाया, "कहाँ मर गया साला. लगता है डर गया. सपने में आने लगी होंगी पुलिस की हथकडियाँ." उसी समय पहाडियों की ओट से एक व्
अच्छा तो अब मैं चलता हूँ." मुसीबतचंद उठ खड़ा हुआ. वेटर के कानों में मुसीबतचंद के शब्द नहीं पड़ सके. क्योंकि उसकी ऑंखें बंद थीं और वह भविष्य के रंगीन सपनों में खो गया था. "अब मैं मालिक हो जाऊंगा. मैं मालिक हो गया. मैं मालिक हूँ." वह बडबडा रहा था. उसे न
बात यह है कि मैं एक ज्योतिषी हूँ. और तुम्हारे भाग्य की रेखाएं देख रहा हूँ. बहुत शानदार है तुम्हारा भविष्य." "कुछ बताइये न ज्योतिषी महाराज मेरे बारे में." वेटर खुश होकर बोला. "मुझे यह ज्ञात हुआ है कि तुम्हारा पेट अक्सर ख़राब रहता है." ज्योतिषी जी ने र
मुसीबतचंद ने गाँव जाना फिलहाल कैंसिल कर दिया था. क्योंकि अब उसे उस समय तक शहर में रूकना था जब तक की उसका फोटो न मिल जाता. जिसे फोटोग्राफर ने दो दिन बाद देने को कहा था. इस समय वह एक पेड़ तले बैठा हुआ था और उसे जोरों की भूक लग रही थी. उसने अपनी जेब टटो
उसने अपने आपको पूरी तरह झाड़ियों में छुपा लिया था. थोडी देर बाद जीप की हेडलाईट दिखाई देने लगी. वह इसी रास्ते पर आ रही थी. हंसराज ने गौर से जीप में बैठे व्यक्तियों को देखने का प्रयास किया किंतु हेडलाईट की तेज़ रौशनी और जंगल के अंधेरे ने उसे कुछ देखने न
हंसराज ने पहाडियों की सीमा आरंभ होने से लगभग पाँच किलोमीटर पहले ही बस छोड़ दी. इस समय वह जिस स्थान पर खड़ा था, वहां से आठ दस कदम दूर मेन रोड से एक शाख निकल कर जंगल के अन्दर गई थी. उस जंगल का विस्तार लगभग दो किलोमीटर था और उसके बाद वह रास्ता एक मैदान स
तो वह भरतपुर से वापस आ गया है. और आज पहाडियों पर पोर्ट्रेट और डालरों का आदान प्रदान होगा." गंगाराम ने कहा. उसके सामने वही अज्ञात इन्फोर्मेर बदले हुए हुलिए में बैठा था. "हाँ. यदि तुम उसे वहां पकड़ सको तो न केवल पोर्ट्रेट हासिल हो जाएगा बल्कि यह भी मालु
तो तुम जा रहे हो पहाडियों पर!" सोनिया ने हंसराज को तय्यारी करते देखकर कहा. "हाँ. आशा है कि वे लोग हमारी बात मान गए होंगे." हंसराज के सामने आईना रखा हुआ था, जिसमें देख देखकर वह अपना मेकअप कर रहा था. "मेरा तो दिल धड़क रहा है." सोनिया के चेहरे पर चिंता
कागज़ पूरा पढने के बाद आई. जी. ने कहा, "इसके अनुसार हमें नोट एक सूटकेस में रखकर पूर्व की पहाडियों पर पहुँचाना होगा. वहीँ पर पोर्ट्रेट और सूटकेस का आदान प्रदान होगा. सूटकेस नीले रंग का बिना लाक का होगा. और उसे हममें से एक व्यक्ति जीप से एक विशेष रास्त
फिर उसे इसका मौका मिल गया। एक लगभग बारह वर्ष का लड़का फटे कपडों में आ खड़ा हुआ. यह एक भिखारी था. हंसराज को तरकीब समझ में आ गई. उसने अपनी जेब में हाथ डालकर पाँच पाँच के दो नोट निकाले और लड़के को दिखाता हुआ बोला,"देखो, ये दोनों नोट तुम्हारे हो जायेंगे,
गंगाराम अपने हाथ में पकड़े चित्र को गौर से देख रहा था. यह चित्र उसी चित्रकार ने तैयार करके दिया था जिसने इससे पहले पोर्ट्रेट की नक़ल तैयार की थी. "तो यह है वह व्यक्ति, जिसके पास इस समय असली पोर्ट्रेट है." वह बड़बड़ाया. वास्तव में उसके हाथ में हंसराज का