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मन की परतें

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15 Jan 2010
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कार वाले हॉकर...

('प्रताप केसरी' के संस्थापक-संपादक स्व.कमल नागपाल जी की आज पुण्यतिथि है)उन्हें गए कितने दिन हुए...एक और बरस बीत गया। एक से दो, दो से तीन, तीन से चार...इसी तरह बरस बीतते जाएंगे और हम हमेशा यही कहेंगे कि इतने साल हो गए उन्हें गुजरे, लेकिन यूं लगता है जैसे
 
Dileepraaj Nagpal
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मैंने किसी का दिल दुखाया है...

दो रातों से सोया नहीं हूं। मैंने किसी का दिल दुखा दिया है, क्योंकि वही दिल मुझे बेवकूफ बनाता है। मेरी आंखों में आंसू लाता है। एक बार नहीं, बार-बार। कितनी बार माफ करूं। हर बार यही सोचता हूं कि एक मौका और...पर इस बार नहीं...। भरोसा टूटता है फिर जुड़ता है पर
 
Dileepraaj Nagpal
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श्यामलाल को घर जाना है...

जब भी कोई किस्सा-कहानी किसी को सुनाता हूं तो अक्सर सामने से आवाज आती है कि ऐसा तुम्हारे साथ ही क्यों होता है...सभी लोग तुम्हे ही क्यों मिलते हैं? हर बार की तरह मेरा एक ही जवाब कि छोटी-छोटी बातों में कुछ बड़ा छिपा होता है। जरा-सा कुरेदकर देखो तो सब ओर
 
Dileepraaj Nagpal
Dec 29 2009 11:46 AM
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लड़की होने का फायदा!

एक लड़की ने दूसरी से पूछा-तू अगले जन्म में लड़की होना चाहेगी या लड़का? जवाब मिला-लड़का। हम पर कितनी बंदिशें हैं। बाहर ना जाओ, ये ना पहनो, ये ना खाओ, ज्यादा मत हंसो, कम बोलो...उन्हें कोई कुछ नहीं कहता। लड़का होने में बहुत मजा आता होगा ना? इन बातों को सुनकर
 
Dileepraaj Nagpal
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वो तो...रांड है!

शीर्षक पढ़कर प्लीज यह मत सोचिएगा कि कुछ अश्लील लिखा है। दरअसल शीर्षक कुछ और भी हो सकता था, लेकिन इन चंद शब्दों का असर जिन साहब पर चाहता हूं, उन्हें ब्लॉग-व्लॉग पढ़ने का शौक नहीं है। ब्लू फिल्मों की तरह कभी-कभार ब्लॉग पर कुछ `ब्लू´ पढ़ने को मिल जाए तो
 
Dileepraaj Nagpal
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गुलाब ज़्यादा बिके या कंडोम?

वेलेंटाइन्स-डे है तो विरोध के स्वर भी गूंजने लगे हैं। वेलेंटाइन्स समर्थक प्यार के विरोधियों का विरोध कर रहे हैं तो विरोधी यह कहकर विरोध जारी रखे हैं कि इससे भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंच रहा है। दोनों में कौन सही और कौन गलत...ये तो थोड़ी दूर की बात
 
Dileepraaj Nagpal
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...वो तो काली है!

भले ही ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बन गए हैं, लेकिन अपने इंडिया की हालत न जाने कब सुधरेगी। यहां काले-गोरे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तो बनते रहते हैं, लेकिन बात लड़कियों की हो तो न जाने क्यूं उनका काला होना अपराध माना जाता है। अपने बेटे के
 
Dileepraaj Nagpal
Dec 29 2009 11:46 AM
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हम पागल ही अच्छे हैं...

निर्धन परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाने का लक्ष्य लेकर चल रहे विद्यार्थी शिक्षा सहयोग समिति के संस्थापक श्यामसुंदर माहेश्वरी के पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित होने की खबर के बाद से ही उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा है। फोन की
 
Dileepraaj Nagpal
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मम्मी, बहलाना-फुसलाना क्या होता है?

बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। वो एक गीत भी तो है-बच्चे मन के सच्चे...। भई बच्चों का मन तो सच्चा है, लेकिन वे भगवान का रूप सिर्फ तभी तक हैं, जब तक वे सही मायने में बच्चे ही रहते हैं। अब वो जमाना तो रहा नहीं कि पंद्रह-सोलह साल स
 
Dileepraaj Nagpal
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मेरा आना और उनका जाना...

पुण्यतिथि-15 जनवरी) हर रोज न जाने हम कितने लोगों से मिलने की ख्वाहिश करते हैं, लेकिन मुलाकात सिर्फ उन्हीं से होती है, जहां दिल से पुकार होती है। पिछले साल लोहड़ी पर घर आने की कोई प्लानिंग नहीं थी। शायद कमल अंकल के अंतिम दर्शन नसीब में थे, जो बिना किस
 
Dileepraaj Nagpal
Dec 29 2009 11:46 AM
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हंगर ज़ीरो

कल मानव अधिकार दिवस है। हम कैसे इस दिवस को मना सकते हैं जब हम लोगों को दो जून की रोटी नहीं दे पाए हैं। इस निजाम ने तो इनसान के निवाले छीनने शुरू कर दिए हैं। दाल-रोटी के ही दाम आसमान चीरते जा रहे हैं। अधिकारों की बात तो तब हो, जब पेट भरा हुआ हो। महंगा
 
Dileepraaj Nagpal
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मदद करें...

कुछ सवाल परेशान करते हैं। उन्हीं में से एक है कि भगवान हैं या नहीं? कोई कहेगा कि हां हैं तो कोई कहेगा नहीं हैं। इसी आधार पर इनसानों के दो हिस्से हो जाएंगे-आस्तिक और नास्तिक। काफी लोगों से यह सवाल पूछा। हां बोलने वाले ज्यादातर लोगों से मेरा अगला सवाल
 
Dileepraaj Nagpal
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बीवी बड़ी या ब्लॉग?

काफी वक्त पहले यूं ही हमसे किसी ने पूछा था कि अक्ल बड़ी या भैंस? मैंने भी वैसा ही जवाब दे दिया कि भैंस तो देखी है, जरा अपनी अक्ल के दर्शन करवा दें तो आपके सवाल को एकदम सही हल कर दूं। ...खैर, अब एक नई कहावत रचने का मन है-बीवी बड़ी या ब्लॉग? देखा तो सभी ने
 
Dileepraaj Nagpal
Sep 10 2009 12:22 AM
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जवाब मिल गया है...

कुछ सवालों के जवाब खुद-ब-खुद मिल जाते हैं। स्वयं का अनुभव है कि कोई सवाल परेशान कर रहा हो तो भगवान से उसका जवाब मांगें। देर हो सकती है, लेकिन खुली या बंद आंखों में ख्वाब बनकर ऊपर वाला जवाब जरूर देता है। ...खैर, यह ख्वाब से जवाब का अनुभव कुछ व्यक्तिगत है,
 
Dileepraaj Nagpal
Jul 29 2009 04:35 PM
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मैं सुधर गई हूं!

मेरे एक सहकर्मी की कॉलर ट्यून सुनिए-'आज की ताजा खबर...आओ काका जी इधर, आओ मामाजी इधर...ले लो दुनिया की खबर...´ 'सन ऑफ इंडिया´ फिल्म का यह गाना पत्रकारों की कॉलर ट्यून के लिए एकदम फिट है। अखबार में काम करने वाला हर शस (पत्रकार भी और गैर-पत्रकार भी) दु
 
Dileepraaj Nagpal
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अमर प्रेम की गजब कहानी...

मेरी पहचान का एक शख्स अपने प्रेम को 'अमर प्रेम´ कहता है। साथ पढ़ने वाली एक लड़की प्यार को सिर्फ टाइमपास बताती है। एक वरिष्ठ प्रेम को खुदा का दूजा रूप मानती हैं। ऐसे लोग भी देखे हैं, जो तू नहीं कोई और सही...पर चलते हैं। खुद की बात करूं तो अपने जीवन के त
 
Dileepraaj Nagpal
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पापा कहते हैं...

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा...लेकिन जब वे ऐसा ज्यादा ही कहने लगते हैं (खास तौर पर मेरे सामने) तो जाने क्यों खीझ उठता हूं। किसी से भी मिलवाते वक्त मेरा परिचय देने का उनका अंदाज मुझे जरा भी नहीं भाता। बहुत बार तो कह भी जाता हूं-'पापा, मैं अभी इतना बड़ा
 
Dileepraaj Nagpal
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सांभर वड़े और थोड़ा-सा प्यार

पेइंग गेस्ट हाउस में शिफ्ट हुए अभी एक महीना ही हुआ है। अंकल-आंटी की कृपा से बढ़िया खाना तो नसीब हो ही रहा है, लेकिन साथ रहने वाले कुछ जवानों की बातों से दिल भी बाग-बाग रहने लगा है। टेलीफोनिक प्रेमी तो सुबह जगने से लेकर रात को सोने तक नजर आते ही हैं, ल
 
Dileepraaj Nagpal
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नस्लभेद, नफरत या कुछ और...

इन दिनों सभी भारतीयों के दिल में ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए नफरत भड़क रही है। हम सोच रहे हैं कि वहां रह रहे भारतीयों पर अत्याचार हो रहा है। सच्चाई खैर जो भी हो, लेकिन हाथ की सभी उंगलियां एक-सी तो नहीं होतीं। डेली न्यूज की पत्रिका ´खुशबू´ के लिए मेलबर्न
 
Dileepraaj Nagpal
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बताइए न...!

रात बारह बजते ही (आठ जून) बेस्ट फ्रेंड्स डे शुरू हो जाएगा। ये फालतू के दिवस मनाने से अपना कोई सरोकार नहीं है। फिर बात बेस्ट फ्रेंड्स डे की हो रही है तो हम तो कबीरा के कहे पर चलते हैं-'कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर...ना काहू से दोस्ती, ना काहू से
 
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जरा रुकिए, कपड़े बदल रही हूं...

दोपहर तीन बजे का वक्त होगा। किसी काम से एक परिचित के घर दाखिल हुआ ही था कि मियां-बीवी का जोरदार झगड़ा सुनाई देने लगा। यहां पति को शक है कि पत्नी को कम सुनता है और पत्नी को लगता है कि जब तक ऊंची आवाज में बात ना करे पति पर असर नहीं होता। इसी चक्कर में द
 
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प्यार से प्यारी बात

पिछले साल आज ही के दिन यहां (जयपुर) बम धमाके हुए थे। आज के अखबार और न्यूज चैनल्स देख पुरानी यादों के जख्म ताजा हो उठे, लेकिन वो धमाके मुझे एक ऐसी सीख दे गए, जिसे समझ लिया जाए तो दोस्ती, प्यार और हर रिश्ता कभी दरकेगा नहीं। करीब दो साल होने को हैं। हर
 
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सिर्फ प्रेमियों के लिए...

ये है एक प्यारा-सा ई-मेल, पढिये और दिल में एक ख़ुशी के साथ थोडा मुस्कुराइए...ये पोस्ट सिर्फ प्रेमियों के लिए है...यानी सभी के लिए, क्यूंकि प्यार तो सभी को होता है...जरूरी नहीं की प्यार के लिए प्रेमिका का होना जरूरी हो...और भी बहुत-से रिश्ते है...माँ
 
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अगला जूता मेरी ओर से...

रात करीब एक बजे का वक्त होगा। काम से फ्री हुआ ही था कि मेरे एक कलीग ने आवाज दी-`आओ, कहीं चलकर आते हैं।' बिना कुछ कहे मैं उनके साथ हो लिया। सुबह से ही किसी बात पर मैं बहुत दुखी महसूस कर रहा था। उनकी बाइक के पीछे बैठा भी सैड सॉन्ग गुनगुना रहा था। दस-पं
 
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मिस कॉल गर्ल!

इन दिनों बहुत परेशान हूं। मोबाइल का बिल कुछ ज्यादा ही हो गया है। बहुत सारी मिस कॉल गर्ल का इसमें योगदान है। अरे भई, यहां शब्दों का स्पेस खत्म करने के चक्कर में भावना को गलत मत समझियेगा। मेरी भावना को समझेंगे, तभी तो भावना आपको समझेगी। क्यों...दरअसल,
 
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रिटायरमेंट कब?

कभी-कभी एक फोटो इतना कुछ कह जाता है, जितने हजार शब्द भी नहीं कह पाते। यह बात किसी किताब में पढ़ी थी, लेकिन कभी-कभी कुछ पल ऐसा महसूस करवाते हैं, जो हजार शब्द या फोटो भी नहीं कह पाते। काफी दिन पहले जवाहर कला केंद्र की सुरेख कला दीर्घा (जयपुर) में फोटो ए
 
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लेडिज टेलर के सपने

काफी वक्त पहले का एक धारावाहिक तो याद ही होगा। नाम था-`मुंगेरीलाल के हसीन सपनें। इन दिनों मैं बना हूं मुंगेरीलाल। सपनों में हसीनाएं आती हैं पर सपने जरा भी हसीन नहीं हैं। सुना था कि दिन के सपने सच होते हैं। अगर सच में ऐसा है तो फिर मुझ जैसे नाइट ड्यूट
 
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लड़की होने का फायदा!

एक लड़की ने दूसरी से पूछा-तू अगले जन्म में लड़की होना चाहेगी या लड़का? जवाब मिला-लड़का। हम पर कितनी बंदिशें हैं। बाहर ना जाओ, ये ना पहनो, ये ना खाओ, ज्यादा मत हंसो, कम बोलो...उन्हें कोई कुछ नहीं कहता। लड़का होने में बहुत मजा आता होगा ना? इन बातों को सुनकर
 
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वो तो...रांड है!

शीर्षक पढ़कर प्लीज यह मत सोचिएगा कि कुछ अश्लील लिखा है। दरअसल शीर्षक कुछ और भी हो सकता था, लेकिन इन चंद शब्दों का असर जिन साहब पर चाहता हूं, उन्हें ब्लॉग-व्लॉग पढ़ने का शौक नहीं है। ब्लू फिल्मों की तरह कभी-कभार ब्लॉग पर कुछ `ब्लू´ पढ़ने को मिल जाए तो
 
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गुलाब ज़्यादा बिके या कंडोम?

वेलेंटाइन्स-डे है तो विरोध के स्वर भी गूंजने लगे हैं। वेलेंटाइन्स समर्थक प्यार के विरोधियों का विरोध कर रहे हैं तो विरोधी यह कहकर विरोध जारी रखे हैं कि इससे भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंच रहा है। दोनों में कौन सही और कौन गलत...ये तो थोड़ी दूर की बात
 
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...वो तो काली है!

भले ही ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बन गए हैं, लेकिन अपने इंडिया की हालत न जाने कब सुधरेगी। यहां काले-गोरे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तो बनते रहते हैं, लेकिन बात लड़कियों की हो तो न जाने क्यूं उनका काला होना अपराध माना जाता है। अपने बेटे के
 
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मम्मी, बहलाना-फुसलाना क्या होता है?

बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। वो एक गीत भी तो है-बच्चे मन के सच्चे...। भई बच्चों का मन तो सच्चा है, लेकिन वे भगवान का रूप सिर्फ तभी तक हैं, जब तक वे सही मायने में बच्चे ही रहते हैं। अब वो जमाना तो रहा नहीं कि पंद्रह-सोलह साल स
 
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