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मेरी कलम

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10 Jun 2010
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बालीवुड मे रिश्तो का घलमेल

शाहरुख अक्की करीब आ रहे हैअक्की रियल लाइफ मे डबल रोल निभा रहे है क्योकि वो किंग खान और फरहा दोनो के करीब आ रहे हैऔर उधर किंग खान के जानी दुश्मन सलमान कभी शाहरुख की करीबी रही फरहा के साथ अपनी नजदीकिया बढा रहे हैजी हाँ दोस्ती का अजब घालमेल चल रहा है इन
 
Ujjawaltrivedi
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राजनीति को तीन स्टार्स

प्रकाश झा की राजनीति मे माडर्न महाभारत की सारी क्वालिटीज है...एक मजबूत स्क्रिप्ट....एंटरटेनमेंट के लिये अलग अलग तरह के किरदार और एक के बाद एक ऐसे सीक्वेंस जो आडियेंस को बांधे रखते है...फिल्म की कहानी रनबीर कपूर और उनकी फैमिली के इर्द गिर्द घूमती है रनबीर
 
Ujjawaltrivedi
Jun 10 2010 01:34 PM
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सलमान का खौफ

सलमान से खौफजदा है बालीवुडसलमान के डर से थर थर कांपते हैं सितारेसलमान के सामने भीगी बिल्ली से रहते है सितारेसलमान से डरती है बिल्लो डरते है सैफू और करीनाविवेक का तो कहना ही क्या किंग खान की भी हो जाती है हालत खराबगर सलमान का डर ना होता तो विवेक से खूब
 
Ujjawaltrivedi
Jun 10 2010 01:27 PM
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शाबाश शाहरुख

किंग खान शाहरुख का ये बयान कि पाकिस्तानी खिलाडियो का जिक्र कर के उन्होने कुछ भी गलत नही किया शिवसेना जैसी दादागिरी दिखाने वाली पालिटिकल पार्टी के गाल पर करारा तमाचा है। शिवसेना का चेहरा तो अब देखने लायक होगा ही साथ ही शाहरुख ने ये साबित कर दिया कि
 
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रहमान तुझे सलाम!!

फरवरी के महीने की इससे अच्छी शुरूआत हिन्दुतान के लिये और क्या हो सकती थी कि जिस अलसाई सुबह आप अपनी रजाई मे दुबके ठंड मना रहे थे उसी वक्त संगीत का जादूगर ए आर रहमान आपको अपना सिर ऊंचा करके चलने की एक और वजह दे रहा था..ए आर रहमान ने १ फरवरी की सुबह एक और
 
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बचा लो टाइगर

हम जब न होगे तो रो रो के दुनिया ढूंढेगी मेरे निशान...हमारे नेशनल एनिमल टाइगर पर ये लाइने बिल्कुल सटीक बैठती है जो सिर्फ अब १ हजार ४ सौ ग्यारह ही बचे है अगर वक्त रहते इस नीचे जाते काउंट डाउन को कंट्रोल नही किया गया तो हालात बद से बदतर हो सकते है आज देश के
 
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जीना सीखना होगा

दोस्तो क्या आपने आमिर खान की फिल्म थ्री ईडियेट्स देख ली है अगर नही तो जरूर देखिये इसी संडे थोड़ी सी फुर्सत निकाल कर क्योकि कुछ काम बिना फायदा देखे दिल को खुश करने के लिए भी करने चाहिये। इस फिल्म को देखने के बाद शायद ही कोई होगा जिसका जिंदगी को रोजमर्रा
 
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अरसे बाद यूं ही..

आज एक अरसे के बाद लिखने का मन हुआ तो लिखने बैठा गया...अच्छा लगा ये सोचकर कि चलो कुछ तो है जिसे मन के मुताबिक कर सकते है...मसलन लिखना, अब देखो ना एक साल तक मन नही हुआ तो नही लिखा और जब मन हुआ तो शूरू कर दिया...वक्त कब पंछी बनकर उड़ जाता है कुछ पता ही नही
 
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ये जग मिथ्या...

पिछले दिनो किसी से मुलाकात हुई बातो का सिलसिला निकला तो जिक्र आध्यात्म और भगवान तक पहुच गया...सामने वाले ने तर्क ये रखा कि हम सब किसी की कल्पना है मतलब जिसको हम भगवान मानते है उसी भगवान की हम सब एक इमेजिनेशन है.....इसीलिए कहा भी जाता है कि ये जग मिथ्
 
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Dec 29 2009 11:59 AM
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मेरा भारत महान

प्रिय बंधुओ, पिछले करीब २० दिनो तक मेरा लैपटॉप खराब रहा इसलिए कोई पोस्ट नहीं लिख पाया इतने दिनो तक न लिख पाने की वजह से ऐसा लग रहा है मानो पेट खराब हो गया है,बीते दिनो काफी कुछ घटा मुंबई के कुर्ला में लाइव एन्काउंटर से लेकर राज ठाकरे की गिरफ्तारी तक
 
UjjawalTrivedi
Dec 29 2009 11:59 AM
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भूलने की भूल

जो लोग दो अक्टूबर को गाँधी जयंती मनाने वाले है उनमे से शायद किसी के लिए भी आज यानि २९ सिंतबर का दिन कोई खास मायने नहीं रखता- और रखे भी क्यों आज किसी महात्मा गाँधी का जन्मदिन तो है नहीं जो लोगो को सरकारी छुट्टी मिले- ये दिन उनके लिए किसी भी दूसरे आम द
 
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अच्छे होने का हक

अरे नहीं, ये तो इंडिया हो ही नहीं सकता... कुछ यही शब्द मेरे मुंह से उस वक्त निकले जब मैं डिस्कवरी पर इंडिया के ईस्टर्न स्टेट्स पर बनी एक डॉक्यूमैंट्री देख रहा था- अब इसे यशराज की फिल्मो का असर कहे या हमारी गुलाम मानसिकता- कोई भी अच्छी सीनरी हमें भारत
 
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गुबार

पिछले हफ्ते नसीरुद्दीन शाह की फिल्म ए वैडनैसडे देखी- बेहद पसंद आई- पसंद आने की वजह नसीर और अनुपम खेर की एक्टिंग से ज्यादा ये थी कि इस फिल्म ने मेरे जैसे एक आम इंसान के अंदर दबे गुबार को निकालने का मौका दिया। ये फिल्म हर उस उस इंसान के लिए एक स्ट्रेस
 
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Dec 29 2009 11:59 AM
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सपने का डर

आज जब सोकर उठा तो डरावने सपने का खौफ चेहरे पर लिये सुनहरी सुबह से सामना हुआ- घड़ी देखी तो 9 बज चुके थे- अखबार देखा तो फ्रंट पेज पर खबर थी एक और रईसजादे की बीएमडब्लू के नीचे 7 की मौत- दिल्ली की ब्लू लाइन का कहर अब भी जारी - सफदरजंग के पास ब्लू लाइन ने
 
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Dec 29 2009 11:59 AM
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लक्ष्यविहीन तमाशबीन

शेक्सपियर महोदय कहते है कि ये दुनिया एक रंगमंच की तरह है और हम सब यंहा अपने अपने किरदार जी रहे है- जो कुछ हम कहते सुनते या बोलते है वो हम सबकी स्क्रिप्ट है जो दिमाग की फाइल में पहले से फीड है- मतलब ये मानते ही हम सब सारे पाप पुण्य से मुक्त होकर ये मा
 
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Dec 29 2009 11:59 AM
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ज़िंदगी मिलेगी न दोबारा

अभी कही फिल्म रॉक ऑन का वो गाना सुन रहा था जिसके बोल है - ज़िंदगी मिलेगी न दोबारा- कहने को तो गाने के बोल है लेकिन दिल मे तीर की तरह चुभ गये- वाकई अगर जिंदगी एक ही बार मिलनी है तो क्या आप उसे ऐसे ही जीना चाहेगे जैसे कि जी रहे है- शायद ज्यादातर लोगो क
 
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सहूलियत का दाम

ब्लाग्स ने इंसान की जिंदगी को खुली किताब की तरह बना दिया है कोई भी कही भी बैठकर पढ सकता है जान सकता है कि किसी दूसरे की जिंदगी मे कैसी उठा- पटक का खेल चल रहा है-बशर्ते लोग सच लिखने की हिम्मत करे- जो कि काफी कम होता है- लोग कहते है कि कंप्यूटर का ये य
 
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Dec 29 2009 11:59 AM
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बोरिवली की आँखो देखी

पटरी पर बैठे नारा लगाते लोग और चारो तरफ हाहा कार बुधवार सुबह मुंबई के बोरिवली रेलवे स्टेशन पर कुछ ऐसा ही नजारा था वजह थी मुंबई की लाइफ लाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन्स के अराइवल प्लेटफार्म का बार बार ऐन वक्त पर बदला जाना। मुंबई मे रोजाना करीब 60 लाख
 
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फितरत ही कुछ और है...

हम भारतीय भी कमाल है मानो ठान लिया है कि खुश तो हमे होना ही नही तो क्या कि इस वक्त की सबसे लोकप्रिय चर्चित और सबसे ज्यादा सराही जाने वाली फिल्म स्लम डाग मिलियेनर मे कई भारतीय कलाकारो ने काम किया है तो क्या उन्हे पूरी दुनिया मे फिर से एक नयी वजह से पह
 
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क्यो भागे आदित्य?

पिछले दिनो मशहूर फिल्मकार आदित्य चोपड़ा मुंबई के जूहू इलाके मे बने पीवीआर थियेटर से निकले और सड़क पर बेतहाशा दौडने लगे मानो पीछे कोई डंडा लेकर भाग रहा हो या फिर कही से वो कोई चोरी करके आ रहे हो लेकिन ऐसा कुछ भी नही था बात दरअसल ये थी कि उनका एक १४ सा
 
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