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दिमाग की हलचल

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13 Jun 2010
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प्रेम का शिकारा

मैंने शिकार नहीं शिकारा ही लिखा है। दरअसल पति और पत्‍नी शादी के तुरंत बाद गृह‍स्‍थी के शिकारे पर आ गिरते हैं। कश्‍मीर की वादियों जैसी खूबसूरत लगने वाली दुनिया में घर एक डल झील बन जाता है और पति और पत्‍नी शिकारे में... अब शिकारे में तो एक ही व्‍यक्ति बैठ
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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उफ़ ये गर्मी

इन दिनों बीकानेर में पारा ४७ डिग्री के पार है और हवा में नमी ५ से ७ प्रतिशत बनी हुई है. ऐसे में मटकी का ठंडा पानी अमृत की तरह लगता है. 
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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सूनी-सूनी अक्षय तृतीया

आज मैं अपने अनुज आनन्‍द के साथ शहर की तंग गलियों के बीच घूम रहा था तो कुछ पुराने घर दिखाई दिए। अपने नानी के खाली पड़े घर के करीब से गुजरते हुए भी उसे नजरअंदाज करने की कोशिश की। पास ही एक घर में हम कुछ दिन किराए पर रहे थे, उसकी छत पर आज दूसरे लोग दिखाई
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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और मैं बन गया इल्‍ली

मैं सच्‍ची मुच्‍ची इल्‍ली बन गया था। जब तक मुझे अपनी गलती का तब तक तो मैं पेस्टिसाइड से त्रस्‍त इल्‍ली की तरह तड़प रहा था। बहुत साल पहले शरद जोशी का व्‍यंग्‍य पढ़ा था, जीप में सवार इल्लियां, तब चने के खेत में घूम रहे सरकारी अधिकारियों पर कटाक्ष करते हुए
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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सर्वाधिक मूर्खताएं - माइक्रोपोस्‍ट

इंसान तीन जगहों पर सर्वाधिक मूर्खताएं करता हैबच्‍चे के साथशीशे के सामनेऔर प्रेमिका के साथ उसके सामने...
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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अब तो मामाजी भी (हा हा हा हा हा हा)

एक बार मेरे मामाजी जब कक्षा सात या आठ में थे, तब उनका पर्सनेलिटी टैस्‍ट किया गया था। जयपुर में। जांचकर्ता ने कहा कि यह लड़का इंजीनियर बन सकता है। परिस्थितियों ने कुछ ऐसा मोड़ लिया कि मामाजी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो दूर कक्षा नौ में भी कॉमर्स लेने के
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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एक अभिव्‍यक्ति

आज पुरानी डायरी में दो पंक्तियां दिख गई... सफाई का काम छोड़कर पहले उन्‍हें ही पोस्‍ट करने बैठा हूं... मेरी पद्य की दो-चार रचनाओं में से एक.... वक्‍त की मौज ने हमको देखा है एक बार अब तो हमीं याद करते हैं बिताए पलों को बार-बार
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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नींद - एक और कविता पुरानी डायरी से

जैसा कि मैं स्‍वीकारोक्ति कर चुका हूं कि मुझे पद्य की समझ नहीं है इसके बावजूद मैंने कुछेक धृष्‍टताएं इस क्षेत्र में की हैं।ऐसी ही एक कविता... पता नहीं कैसी है...प्‍यारी नींदआज फिर तैयार हो निकला मैंइस संग्राम मेंनई भोर में नया जीवन लिएभिड़ने को तैयार
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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फिर जुड़ गया होम्‍योपैथी से

सालों पहले, यानि वर्ष 1997 और उससे पहले मेरे दिन के कुछ घंटे चाहे-अनचाहे होम्‍योपैथी के साथ गुजरते थे। रोग हो या न हो, सत्‍यव्रत सिद्धांतावलंकार, बोरिक और नैश पढ़ने को मिल जाते थे। कई बार क्‍लार्क की रैपरेटरी के पन्‍ने भी उलटने पड़ते। यह सब होता मेरे
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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अच्‍छी रही इस बार की होली...

- साल दर साल होली बेहतर होती जा रही है। इस बार भी होली अच्‍छी रही। - सौहार्द बना रहा: सुनारों, लोहारों, ब्राह्मणों, राजपूतों, नाइयों, नायकों सहित सबने अपनी-अपनी होली जलाई। किसी ने एक दूसरे की पंचायती नहीं की।- दिल मिल गए- कॉलोनियों में जहां लोग एक-दूसरे
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
Feb 28 2010 07:29 PM
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New ATM machine

MALE VS. FEMALE AT THE ATM MACHINE A new sign in the Bank Lobby reads--- Please note that this Bank is installing new Drive-through ATM machines enabling customers to withdraw cash without leaving their vehicles. Customers using this new facility are
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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बहुत सोचा अब लिख रहा हूं

थ्री इडियट्स देखी, फिर चकरी ले आया, फिर बार बार देखी, कई बार देखी, बीच- बीच में से देखी। कई सीन दोहराकर देखे, फिर सोचा कि अब लिखूं तो देखा कि लोगों ने जमकर पहले ही लिख दिया है। सुकून की बात यह है कि मैं जो सोचा वह यहां कहीं मिला नहीं और कहीं लिखा भी गया
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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ब्‍लॉगिंग में संप्रेषणीय आग्रहता

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में लेखकों का उत्‍साह लगातार बढ़ता हुआ देख रहा हूं। एक तरफ पचासों लोग हैं जो आमतौर पर भी कुछ भी लिख दें तो पूरी शिद्दत के साथ पढ़ा जाता है। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी लेखकों की मिसालें भी हैं जो ऐसा लिखते हैं कि पाठक पढ़ना चाहते हुए भी
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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एक नया अध्‍याय शुरू हुआ बीकानेर में

मैं संयोगों पर यकीन करता हूं। ये बार बार होते हैं। हर बार होते हैं और मुझे पहले से अधिक आश्‍चर्यचकित छोड़ जाते हैं। इस बार फिर ऐसे ही संयोग हुए जिन्‍होंने ने न केवल मुझे सोचने पर मजबूर किया बल्कि कई दूसरे लोग भी इन संयोगों की चपेट में आए। जैसा कि मैं
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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बीकानेर में हुई ब्‍लॉग कार्यशाला वक्‍ता संजय बेगाणी

अहमदाबाद से बीकानेर आए संजय बेगाणी को मुख्‍य वक्‍ता के रूप में रखकर एक ब्‍लॉग गोष्‍ठी का आयोजन शनिवार को किया गया। इसमें डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के पूर्व निदेशक डॉ. एच.पी. व्‍यास, एशियन चैस एसोसिएशन के पूर्व उपाध्‍यक्ष, एनसीडीईएक्‍स और एमस
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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मानसिक स्‍तरों में विचरण

शुरू से मैं यह जानता नहीं था या कह दूं कि मानता नहीं था कि मानसिक स्‍तरों में उतार चढ़ाव होता है और कई बार यह खतरनाक भी हो सकता है। बहुत छोटा था तब मुझे कॉमिक्‍स पढ़ते देख मेरे पड़नानाजी स्‍वर्गीय डॉ. माधोदासजी व्‍यास मुझे टोका करते थे। वे कहते कि एक
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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छद्म और अंध विश्‍वास में अंतर है

लवली कुमारी जी के ब्‍लॉग संचिका पर मैं अंधविश्‍वास के बारे में हैडिंग देखकर पढ़ने चला गया। विज्ञान की छात्रा लवली कुमारीजी की मेधा पर बहुत कम लोगों को शक होगा लेकिन इस बार उन्‍होंने ऐसा टॉपिक छेड़ा कि मैं न चाहते हुए भी उसमें कूद पड़ा। वहां चर्चा का
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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जब संबंध प्रोफेशनल रह जाते हैं

आज एक मेल मिली... मुझे लगा यह बहुत काम की है। ऐसे समय में तो अधिक काम की नजर आती है जब रिश्‍ते बस प्रोफेशनल रह जाते हैं, दोस्‍ती गुम हो जाती है, जानकार नाम के रहते हैं, संबंध बोझ बन जाते हैं, एक-दूसरे की देखभाल समय की खराबी बन जाती है, किसी और का ध्‍
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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जनकवि को श्रद्धांजलि

हरीश भादाणी इस दुनिया में नहीं रहे। वे शायद स्‍वर्ग में नहीं जाएंगे। क्‍योंकि जीते जी जो ईश्‍वर के नाम पर बनाए हर सिस्‍टम का विरोध करते रहे वे मरने के बाद भी संभव है अपनी इस कोशिश को जारी रखें। केवल इसी कारण नहीं बल्कि आम आदमी की तकलीफ और दर्द को अपन
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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लड़का ही क्‍यों...

पिछले तीन दिन से बस सोच ही रहा हूं। आमतौर पर किसी एक विषय को लेकर सोचने का क्रम कभी इतना लम्‍बा नहीं चल पाता है लेकिन पिछले तीन दिन में हर काम करते-करते, उठते-बैठते, आते-जाते, सोते-जागते यही सोच रहा हूं। बचपन में मां सरस्‍वती की एक तस्‍वीर थी। उसमें
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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अभिभूत हूं

सात सितम्‍बर को मेरा जन्‍मदिन था। जब पच्‍चीस साल का हुआ था तो लगा था कि बहुत बड़ा हो गया। तब से हर बार वर्षगांठ आने पर लगता कि अरे अभी तक कुछ किया भी नहीं और चौथाई जिंदगी निकल गई। आस-पास का माहौल भी कुछ ऐसा ही था। सो लगता कि जन्‍मदिन आने का मतलब है बहुत
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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क्‍या हम अपनी ही ताकत से डरते हैं ?

मुझे लगता है हां, कई बार यह इतनी अधिक हो जाती है कि समझ में नहीं आता कि इसका क्‍या किया जाए। तब या तो इसे नष्‍ट करने के तरीके ढूंढने लगते हैं या फिर उसे डायवर्ट कर देते हैं। वास्‍तव में पूरी ताकत का क्‍या किया जाए इसका जवाब काफी टेढ़ा है। गांधी, नेहरू,
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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दार्शनिकता कब शुरू होती है

               दो साल तक ऑ‍फीशियली दर्शन का विद्यार्थी रहा। ऑफीशियली का मतलब पोस्‍ट ग्रेजुएट का विद्यार्थी रहा। उन दो सालों में ओशो, कृष्‍णामूर्ति, अरविन्‍द और विवेकानन्‍द के जीवन दर्शन से इतर
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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चाइनीज कॉल सेंटर में

  Caller: Hello, can I speak to Annie Wan? Operator: Yes, you can speak to me.. Caller: No, I want to speak to Annie Wan! Operator: Yes I understand you want to speak to anyone. You can speak to me.. Who is this? Caller: I'm Sam Wan .. And I need to
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
Aug 29 2009 12:43 AM
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बाबे के पीरत्‍व में कमी

भादवे ही दशमी को बाबा रामदेव का मेला भरेगा। एकम् को बीकानेर से हजारों पैदल यात्रियों ने 200 किलोमीटर से अधिक लम्‍बी यात्रा शुरू की। कई लोग तो बीकानेर से भी दूर से आए थे, जैसे हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर से। यानि यात्रा में कुछ सौ किलोमीटर और जुड़ गए।
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
Aug 26 2009 03:14 PM
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अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पर बैठकर...

  यहां बीकानेर में पाकिस्‍तान की अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पर बैठकर एक भारतीय दिल्‍ली और शिमला में हो रही उठापटक के क्‍या मायने देख सकता है। मुझे सोचता हूं कि सिंधु नदी के इस पास सुदूर दक्षिण में हिन्‍द महासागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और उत्‍तर में
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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दो मामा की भूखी भानजी

  अनाथ चंपूबाई के दो मामा हैं। छोटे हैं जो हल्‍दी की गांठ लेकर पंसारी की दुकान चलाते हैं और बड़े ट्रेडिंग से जुड़े हैं। वे पुराने सामान से लेकर घर के बर्तनों तक की ट्रेडिंग करते हैं। जब चंपूबार्इ के बड़े मामा की शादी पक्‍की हुई तो ससुराल वालों ने
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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ओपन सोर्स ब्‍लॉगिंग का वक्‍त आ गया है

पिछले दिनों चिठ्ठा चर्चा में चोरी पर पूरी एक पोस्‍ट बन गई थी। तब उसमें हो सकता है बहुत से लोगों का ध्‍यान गया हो लेकिन मुझे इस कमेंट ने बहुत प्रभावित किया। यह था कि आप खुद को स्‍वतंत्र महसूस करें मेरे लेखों को चोरी करने के लिए। निशांत मिश्राजी ने इसके
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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Aug 19 2009 01:05 AM
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अकेला केला ही कर दिखाएगा

अभी मेल से मुझे केले के बारे में विशद जानकारियां हासिल हुई हैं। मैंने कॉपी पेस्‍ट कर इसे यहां पोस्‍ट में ठेला है। आप भी देखिए क्‍या फायदे हैं अकेले केले के ही। Two Bananas a Day Keep all Doctors Away Never put banana in the refrigerator! !! Bananas c
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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उड़न तश्‍तरी की सबसे लम्‍बी टिप्‍पणी :)

आज कुछ ऐसा हाथ लगा कि सोचा सबको बताया जाए। यह है एक टिप्‍पणी। हमारे समीर भाई की टिप्‍पणी। जिनके बारे में ब्‍लॉगजगत में मशहूर है कि वे उम्‍दा, बढि़या, रोचक, लगे रहिए, आभार से अधिक कम ही लिखते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों पोस्‍ट जो पढ़ने होते हैं। लेकिन इस बा
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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ब्‍लॉग साहित्‍य नहीं है। कन्‍फर्म.

मैंने दो प्रवृत्तियां स्‍पष्‍ट तौर पर देखी हैं। पहली जो परिवर्तन हो रहा है उसे स्‍वीकार नहीं करना और दूसरी कि जो नया है उसे पुराने के भीतर फिट करने का प्रयास करना। अपनी बात कहने से पहले एक किस्‍सा सुनाना चाहता हूं। कुछ दिन पहले हमारे ग्रुप में बात हो
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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मैं संक्रामक हो गया हूं !!

अब मैं कह सकता हूं कि मैं संक्रामक ब्‍लॉगर हो गया हूं। पिछले चार-पांच महीने में कई लोगों को ब्‍लॉग शुरू करवा दिए हैं। इनमें से कुछ ब्‍लॉग तो अच्‍छे खासे चल भी रहे हैं। मुझसे बातचीत करने वाले लोग कहते हैं कि थोड़ी देर की बात के बाद ही मैं ब्‍लॉग-ब्‍लॉ
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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चल मालिश करा के आते हैं!!?

छोटी काशी बीकानेर में हमेशा ही कुछ न कुछ धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। कुछ बड़े तो कुछ छोटे। एक बार एक महाराज आए। प्रखर जी महाराज। उन्‍होंने बीकानेर के धरणीधर महादेव मंदिर में 1008 कुण्‍डीय महायज्ञ शुरू किया था। एक महीने तक मंदिर के पास की सूखी हुई तल
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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सब कुछ है गांधीमय (रिंग, रिंग रिंगा भाग तीन)

मैं आजादी के बाद की बात कर रहा हूं। उससे पहले भले ही गांधीजी का जीवंत करिश्‍मा रहा होगा लेकिन इसके बाद कैश कराने की प्रवृत्ति के चलते सबकुछ गांधीमय हो चुका है। गांधी टोपी पहनी तो इसलिए कि गांधीजी ने कहा है और उतारकर रख दी तो इसलिए कि गांधीजी खुद नंगे
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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कॉफी डेस्‍क थीम के साथ

पिछले कई दिन से कॉफी डेस्‍क थीम अपने ब्‍लॉग पर लगाने की कोशिश कर रहा था लेकिन कामयाबी नहीं मिल पा रही थी। आज सुबह अखिल तिवारीजी से बात हुई और रात को मेल खोली तो उनका संदेश एक लिंक के साथ आया हुआ था। बस डाउनलोड किया और तैयार हो गई नई थीम। अखिल जी ने स
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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राहत की बात - मैं अकेला नहीं हूं :)

अभी सुरेश चिपलूनकर जी  टिप्पणी सम्बन्धी खुराफ़ात के बारे में बता रहे थे तब पहली बार लगा कि मैं अकेला नहीं हूं। इस कारण नहीं कि वे ज्‍योतिष और वास्‍तु जैसी विधाओं को कोसते रहे हैं। इस विषय पर तो मैंने उनका विरोध किया है। लेकिन उनकी कविता नहीं समझ
 
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चिडि़या पानी तो पी ले, लेकिन दूब न खाए

प्रकृति की नेमतें मुझे और भी हीनता का अनुभव कराती है जब मैं सोचता हूं कि मेरे घर के बगीचे में रखे पाळसिए यानि मिट्टी के बर्तन में रखे पानी को पीने के लिए चिडि़याएं आएं और पानी पीएं। इससे मेरे घर में चिडि़यों का संगीत गूंजता रहेगा। लेकिन इसके साथ ही म
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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जो ब्‍लॉगर मुझे प्रभावित करते हैं - चिठ्ठा चर्चा

पिछले कई दिन से लिखने के बजाय पढ़ने का क्रम बना हुआ है। नेट पर बैठता हूं। पहले अपने पसंदीदा ब्‍लॉग्‍स को खोलकर पढ़ता हूं। फिर वहां मिली कडि़यों से आगे बढ़ता जाता हूं। दो चार या छह घण्‍टे तक यही क्रम चलता है। इस दौरान लगा कि कई चिठ्ठे बहुत अच्‍छे हैं।
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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याद आई फैशन परेड

पिछले दिनों मेरे नानीजी श्रीमती राधादेवी हर्ष जयपुर से बीकानेर आई। अपने आवश्‍यक काम निपटाने के दौरान एक दिन मुझे पुराने घर बुलाया और मुझे एक शर्ट दिया। लाल चौकड़ी वाला। यह शर्ट मैं दूसरी या तीसरी कक्षा में  पहनता था। मैंने मुस्‍कुराते हुए पूछा य
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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जब अवार्ड लेकर आया था।

जनवरी में राजस्‍थान पत्रिका के पत्रकारिता पुरस्‍कारों में बीकानेर की जस्‍ट टीम को मिला बैस्‍ट स्‍पेशल कवरेज कैटेगरी में अवार्ड। लेने मुझे भेजा गया था। चित्र में दाएं से दूसरे आगे बैठे हुए पत्रकारों में से एक।
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi