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वो चुप न रह सका

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11 Jun 2010
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भारत की सरकार न्यौत चुकी है भोपाल से भी बड़ा जीनोसाइड... भारत क्या तुम इसके लिये तैयार हो?

भोपाल की टीस फैसले के बाद उभर चुकी है. मुनाफे के वहशी भेड़ियों के द्वारा किया गया वह कत्ले-आम बाहर वालों के लिये सिर्फ चंद तस्वीरें बन कर रह गया है लेकिन भोपाल वालों के सीने में अब भी धधक रहा है. 20,000 लोगों की मौत पर मारा गया $470 मिलियन का तमाचा, आज़ाद
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शीला दीक्षित की दिल्ली सरकार नहीं चाहती की आपका बिजली का बिल घटे – DERC को कीमतें घटाने से रोका

सबसे पहले एक पहेली – पिछले साल दिल्ली की दोनों निजी बिजली कंपनियों ने कितना मुनाफा कमाया? पहली ने करीब 450 करोड़ रुपये, और दूसरे ने करीब 468 करोड़ रुपये. लेकिन दिल्ली सरकार को लगता है की निजी कंपनियां का मुनाफा बढ़ना चाहिये आम आदमी की कीमत पर इसलिये
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सुन्नी मुसलमानों ने किया पाकिस्तान में अहमदियों का कत्लेआम – मुस्लिम देशों में मुसलमान माइनोरिटी असुरक्षित

जुमे की नमाज़ के दिन इस्लामाबाद के अहमदिया मुसलमान (जिन्हें पाकिस्तान में कुत्ते से भी बदतर औकात नसीब है) खुदा में भरोसा रखने वाले हर मुसलमान की तरह मस्ज़िद गये, लेकिन उन्हें इल्म नही था कि वह दिन खुदा की इबादत का नहीं, अजाब का होगा. इस्लामाबाद कि दो
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Delirium and realization

कभी खुद को घेर कर किसी तन्हा कोने में ले जाकर, बाजू कस कर पकड़ कर ज़ोरदार जिरह कर लेनी चाहिये. आप सबसे झूठ बोल सकते हैं लेकिन खुद से नहीं. इसलिये जब आप खुद से सवाल करना शुरु करते हैं तो जवाब इतनी इमानदारी भरे मिलते हैं कि सुनने के लिये दिल कड़ा करना पड़ता
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देश की लोकसभा कुत्तों के हवाले किसने करी?

The parliament has gone to the dogs. देश कि संसद की ज़िम्मेदारी होती है कानून पर बातचीत करना और अपनी सम्मति से पेश हुये बिलों को कानून का दर्जा देना. इस देश की जनता की ज़िम्मेदारी थी वहां ऐसे सज्जन और जागरुक व्यक्तियों को भेजना जो ज्यादा से ज्यादा बिलों को
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भारत से सबूत दरयाफ्त करने वाले पाकिस्तान कि अमेरिका के आगे घिग्घी बंधी… देख ली रे जेहादियों कि हिम्मत!

पाकिस्तान दुनिया के नक्शे पर एक बदनुमा दाग़ है… एक ऐसा मुल्क जो दुनिया भर के इस्लामिक आतंकवादियों के लिये पनाहगाह भी है,  और उनके विचारों का पोषक भी.  चाहे तालिबान हो या अल-कायदा या फिलिस्तीन की PLO सभी इस्लामी आतंकवादी संगठनों के तार यहां से
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इज़राइल के सब्र का पैमाना अब छलकना ही चाहिये

पूरी दुनिया में एक ही देश है जो अपने दुश्मनों से चारों तरफ से घिरा होने के बावजूद भी उनसे लड़ रहा है और इस्लामिक आतंकवाद को इस कदर छठी का दूध याद दिला रहा है कि अगर किसी आतंकवादी को कब्ज़ की समस्या सताती है तो वह इज़राईल का नाम लेता है और बंद दरवाज़े फौरन
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शरद पवार की बेटी ने माना कि उसने झूठ बोला था

शरद पवार की पार्टी पावर में हो और घपला न हो ऐसा कहीं होता है? एनसीपी को देखकर तो अपने पाक दामन पर लालू प्रसाद जैसे भी गर्व कर सकते हैं. चाहे तेलघी  हो, या शक्कर या आईपीएल के शेयर ये लोग खाने में हमेशा अव्वल रहते हैं. झूठ बोलने में नेता तो जगजाहिर ही
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भारत में बिग ब्रदर इज़ वाचिंग यू... हिन्दुस्तानी सरकार की नज़र आप पर है

आपकी गतिविधियों पर सरकारी बिग ब्रदर की नज़र है. अगर आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जिससे सरकार सोचती है कि वह प्रभावित हो रही है तो हो सकता कि आप पर भारतीय सुरक्षा या जासूसी तंत्र की नजर हो. गूगल ने आज एक नया पेज बनाया है जिसमें बतलाया गया है कि किन देशों ने अपने
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मेरा आइलेंड किसने चुराया?

ग्लोबल वार्मिंग के कारणों के बारे में चाहे संशय हो उसकी असलियत से इंकार करना मुश्किल होता जा रहा है. मैं सिर्फ भारत में इस साल पड़ रही भीषण गर्मी की बात नहीं कर रहा हूं, बात इससे आगे बढ़ चुकी है. बदलते मौसम चक्र के कारण ग्लेशियर और आइसबर्ग पिघल रहे हैं
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क्योंकि हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं होता

1. हिन्दू शब्द कितना पुराना है? इसकी जवाब जरूरी नहीं क्योंकि हिन्दू शब्द दूसरों द्वारा दिया गया है. हिन्दूओं को क्योंकि बदलाव से परहेज नहीं, इसलिये अब वह उनकी पहचान है. वैसे तो अल्लाह शब्द भी दूसरों का दिया हुआ है. मुहम्मद ने मूर्तिपूजक अरबों के कई
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तो क्या मुस्लिम पुरुषों को आखिरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकार दिखने लगे?

वैसे तो महिलाओं कि किस्मत पहले ही इतनी जबर्दस्त है कि कितने ही पुरुष उनकी मर्यादा के सीमांकन और उसकी रक्षा के लिये इस कदर तत्पर हैं. ऊपर से मुस्लिम महिलाओं की किस्मत और भी जोर मारती है कि मुस्लिम पुरुष उन्हें बुर्के का हक दिलाने सुप्रीम कोर्ट तक चले जाते
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अबु आजमी ने कितने आतंकवादियों को बचाया? शहजाद, जुनैद… या कुछ और भी हैं?

अभी-अभी टीवी पर खुलासा हो रहा है कि मुम्बई के सपा नेता अबु आजमी बाटला हाउस के आतंकी शहजाद और जुनैद से मिला और उन्हें पैसा दिया कि वो छुप के रहें. चौरसिया और अजमानी मिलकर अबु आजमी से फोन पर बात कर रहे हैं, और कम से कम पहली बार चौरसिया के मुंह से कठिन सवाल
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शिमोगा या यो कहें कि घुटन सिर्फ तस्लीमा के हिस्से में ही क्यों आती है?

तस्लीमा नसरीन ने बयान दिया कि कर्नाटक के अखबार में छपा लेख तो बहुत पुराना है, और छापा भी उनसे इजाज़त लिये बगैर है. तस्लीमा होकर जीना हिम्मत का काम है. तस्लीमा ने यह नहीं कहा कि लेख मैंने नहीं लिखा. Taslima, we apologize for those who didn’t understand. वो
Mar 03 2010 12:05 PM
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नक्सलीयों के 72 दिन शांति नहीं, अपने बचाव की कारवाई. हिन्दुस्तानी सरकार क्या तुम जाल में फंसोगी?

किशन 'जी?' की 72 दिन की शांति की पेशकश से पहले ही नक्सली कुत्तों का सामुहिक रूदन शुरु हो चुका है. कुछ ने तो इस पेशकश को भारतीय सरकार के लिये घोर गनीमत बना दिया है, कि नक्सली तुम्हारे पृ्ष्ठभाग पर जो कदमताल कर रहे हैं लो उनकी दया पर 72 दिन आराम कर लो.
Feb 23 2010 10:59 AM
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भारत, प्रधानमंत्री और पहला हक अल्प-संख्यकों का और पाकिस्तान के वो अल्प-संख्यक सिक्ख.

1. हिन्दुस्तानी सरकार के नुमाइंदे अपील कर रहे हैं कनाडा, यूएसए और यूरोप में बैठे सिक्खों से कि वो अपनी सरकारों पर दबाव बनायें कि वह सब मिल कर पाकिस्तान से कहें कि सिक्खों की जानमाल की रक्षा करो. 2. हिन्दुस्तान पाकिस्तान से बातचीत करने को तैयार है. कश्मीर
Feb 22 2010 08:49 PM
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'बेगुनाहों' ने मार दिया बाटला अभियुक्त को गिरफ्तार कराने वाले मास्टर को

दिल्ली के बाटला कांड के 'बेगुनाह' अब भी जेल में सड़ रहे हैं और उनके सुराग देने पर दिल्ली पुलिस की एटीएस आजमगढ़ जाकर शहजाद को पकड़ लाई. वही शहजाद जिसने कबूल किया कि उसने भी वीर शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा (जिसके परिवार की सुरक्षा दिल्ली सरकार ने वापस
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जो किसी की नाक से टकराकर खत्म हो जाये

अंग्रेजी भाषा में एक कहावत है - 'Your freedom stops where the tip of my nose starts.' मतलब तो इसका होता है कि स्वतंत्रता का इस्तेमाल किसी और की कीमत पर नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ लोगों ने इसका मतलब समझते हैं कि हम चाहे जहां नाक घुसेड़ दें, वहीं सबका
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उस आयोजित कार्यक्रम के बाहर खड़े थे कुछ प्रायोजित बच्चे

"नक्सलियों नें मेरी आखों के आगे बेरहमी से मेरे मां-बाप को मार दिया, वो याद करके आज भी मैं थर्रा जाता हूं" - राजेन्द्र कुमार (अब अनाथ आदीवासी बच्चा), दन्तेवाड "मैं भी बड़ा होकर पुलिस बनूंगा, जिन नक्सलियों ने मेरे पापा को मारा, मैं उन्हें मार दूंगा" -
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स्वतंत्रता ही नियती है

स्वतंत्रता का न ओर हो सकता है न छोर, लेकिन सत्य में तो स्वतंत्रता का दायरा उतना ही सीमित या विस्तृत होता है जितने की आपका समाज इजाज़त दे. जहां भौंहें उठना चालू होती हैं वहां choices बहुत जल्दी embarassment बन जाती हैं. लेकिन अगर कोई ध्याद दे तो पायेगा कि
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क्रांति अब कभी नहीं होगी

इंकलाब या क्रांति. एक ऐसा संघर्ष जिसका समापन व्यवस्था के पलटने से हो. बूढ़ी हो चुकी व्यवस्था क्रांति का शिकार होकर अचानक ढेर हो जाये और उसकी जगह आये एक नया विचार जिसे फिर अपनी कसौटी पर परखें लोग. पर लगता है कि आखिरी क्रांति बहुत पहले गुजर चुकि और जो
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आप गुलाम रहिये क्योंकि अपने कमीनेपन पर हम काबू नहीं कर सकते

मुझे लगता है कि फेमिनिज़्म से कुछ लोगों के लिये इतना तकलीफदेह बन गया है कि किसी भी स्वतंत्र नारी को देखकर वह बिना कसमसायें और फब्तियां कसे नहीं रह सकते. उनके लिये असहनीय होती है एक ऐसी स्त्री जो किसी पुरुष के आधीन न हो, जो आत्मनिर्भर होकर पुरुषों कि
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मासूम माओवादी, और भूख दो कौर रोटी की. उफ!

मेरा दिल लरज रहा है. अभी-अभी माओवादी मासूमियत की कौशल गाथा पढ़ कर चुका हूं. मासूम, भोले, प्यारे, बेचारे नक्सली भूख से इतने बेहाल हैं कि छुरी-कांटों से लैस होकर (बंदूक तो वहां थी नहीं! कहते हैं कुछ खास लोग) ट्रेनों की पैन्टृी कार लूट रहे हैं. मजबूरी क
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बिकोज़ छत्रधर महतो इस ए गुड मैन

अपनी एक ट्रेन माओवादी आतंकवादियों के कब्जे में है. कई सौ यात्री हैं उस ट्रेन में उन सब की जिंदगी दांव पर है, और सौदा करने वाले हैं हमारे देश के नेता. माओवादी भी तैयार है सौदे के लिये, 1 के बदले 400. बोलो क्या कहती हो दिल्ली सरकार? छत्रधर महतो को छोड़
Oct 27 2009 07:27 PM
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क्या राष्ट्रवाद एक चुका हुआ विचार है?

वैसे तो देश और राष्ट्र का विचार मुझे प्रिय है, लेकिन जब सोचने बैठता हूं तो कभी-कभी यह भी लगता है कि कहीं यह अवधारणा भी गुटबाजी का एक और स्वरूप तो नहीं? किसी भी राष्ट्रवादी के लिये यह उहापोह बड़ी समस्या है. बात ऐसी है जैसे मदर टेरेसा ने कहा था कि मेरे
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नक्सलियों को मारना जरूरी है, कल नहीं आज, आज नहीं अभी

सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान की बात ही की है अभी (वो भी यह कह दिया कि वायुसेना कोई स्वतंत्र अभियान नहीं चलायेगी सिर्फ आत्मरक्षा करेगी), और बुद्धुजीवियों का सामुहिक रूदन शुरु हो गया. जितना प्यार इन हत्यारों के लिये छलक रहा है उतना कभी इस राष्ट्र
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अमर सिंह की कांग्रेस को धमकी

खबर के अंदर की खबर पढ़ना भी एक कला है. अब राजनीति से दो-चार होते कई साल बीत चुके हैं तो राजनेताओं की चालों का अंदाजा लगाना भी अब कुछ-कुछ समझ में आने लगा है. बात है अमर सिंह की. ये पुराने चालबाज हैं. इनके पत्ते सधे होते हैं और अपने काम निकालने के लिये
May 21 2009 11:59 AM
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आडवाणी जी का फैसला सही है

आडवाणी जी ने फैसला किया है कि वह अब विपक्ष के नेता नहीं होंगे. बीजेपी में अभी भी नये स्तरीय नेतृत्व की कमी है, और शायद इतनी जल्दी भरपाई भी नहीं होगी, लेकिन फिर भी आगे की राजनीति के हिसाब से मुझे लगता है कि आडवाणी जी का फैसला सही है. आडवाणी जी जानते ह
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माओ कि मसखरियां

माओ इतने सालों तक चीन के सर्वोच्च पद पर रहे. इतने बड़े देश के सर्वोच्च पर पर पहुंचे लोगों से अपेक्षा यह तो है ही कि उनमें ‘common sense’ नाम की uncommon चीज थोड़ी मिले, लेकिन विश्व के बाकी देशों से चीन अपवाद क्यों बने. अपने देश समेत हर देश में सनकी,
May 14 2009 11:32 AM
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वो एक कमजोर कौम थी…

हिन्दू और यहूदी धर्म में वैसे तो कोइ समानता नहीं, लेकिन फिर भी आज दोनों धर्म समान धरातल पर खड़े दिखते हैं. यहूदी धर्म से जहां इस्लाम और इसाइयत दोनों का ही उद्भव हुआ, वहां हिन्दू धर्म तो खुद ही बहुत सारे धर्मों का समागम है, और भी कई दूसरे धर्मों का जन
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सरकार को पता है कि स्विस बैंको में माल किसका है, लेकिन आपको पता नहीं चलेगा

कांग्रेस के काम में भी बात है. वह जो भी करते हैं खुल्ले में, पूरे शानो-शौकत गाजे-बाजे के साथ करते हैं और कहते हैं, लो बेट्टा, कल्लो जो करना है. \अपने पूर्व वित्तमंत्री चिदम्बरम जी ने पहले कहा कि उन्हें जर्मन सरकार ने नाम नहीं दिये – ‘लीगल प्रोसेस है
May 03 2009 06:40 PM
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राष्ट्रवाद क्यों?

राष्ट्रवाद क्या है? जमीन के एक टुकड़े से प्यार? किसी जगह की सभ्यता, वहां रहने वाले लोगों, वहां की हर चीज के लिये दिल में जज्बा? क्यों हो हमें राष्ट्र नाम के इस टुकड़े से लगाव? क्यों हम बात करें इसके लिये, क्यों हम लड़ें राष्ट्र के लिये? क्यों हम विरो
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धर्म ने दुनिया को क्या-क्या दिया

धर्म ने दुनिया को क्या-क्या नहीं दिया. आज जो भी कुछ है इस दुनिया में सब धर्म की ही वजह से है. धर्म न होता तो वह सब भी नहीं होता जो हमारी सभ्यता की निशानी है. फिर दुनिया शायद एक अलग ही जगह होती. लेकिन धर्म की वजह से वह सब है, जो ऐसे नहीं होता. क्या-क्
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व्हाट अ कान्फीडेन्ट मैन!

ये सारे वो ‘कान्फीडेन्ट मैन’ हैं. इनका कान्फीडेन्स का राज इनका खुद पर नहीं अपने गुर्गों पर भरोसा है. अक्षय प्रताप सिंह अन्ना शुक्ला बालेश्वर यादव बृज भूषण शरण सिंह मुन्ना शुक्ला सलाउद्दीन ओवैसी अफज़ल अंसारी डी पी यादव गुड्डू पंडित पप्पु यादव तस्लीमुद्
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कसाब को किस कानून के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है?

अजमल कसाब जब पहले-पहल पकड़ा गया तो रो-रोकर उसने मांग की कि उसको मार दिया जाये, लेकिन थोड़ी ही देर बाद रोना अस्पताल में इलाज करवाने के लिये था. जेल गया तो पहले सारा कच्चा चिट्ठा उगल मारा. बाप-भाई, बहनोई सबके पते दे दिये, लेकिन हिन्दुस्तानी मेहमाननवाजी
Apr 17 2009 09:27 PM
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एक तितली के पंखों की फड़फड़ाहट क्या तूफान ला सकती है

ये कोई राजनैतिक लेख नहीं. अस्फुट, असंग्रहित विचार हैं. जो भी कुछ हम सोचते हैं, कहतें हैं, करते हैं क्या उस सब का कोई परिणाम कोई consequence भी होता है? या फिर पानी में गिरने वाले पत्थर उठी लहरों के समान कुछ पलों के बाद ही सब कुछ शांत हो जाता है, जैसा
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पंजे से हाथ मिला कर उन्होंने कमल का फूल सूंघा, और साइकल से होकर हाथी पर चढ़ गये

उत्तर प्रदेश की राजनीति बेमिसाल है. इसलिये नहीं कि यहां के नेता या जनता कोई बहुत अच्छा काम कर रही है, बल्कि इसलिये कि घटिया नेतृत्व और जातिभक्त जनता इतनी बेदर्दी से प्रदेश को खसोट रही है कि इसकी मिसाल नहीं मिलेगी. यहां वोट चलता है बनिया, ब्राहम्ण, दल
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तालिबान से लड़ने का सबसे सही तरीका… हथियार डाल दो… वो भी डाल देंगे

हां जी. तालिबान से लड़ने के एक ही तरीका है, हथियार डाल कर आत्मसमर्पण कर लीजिये, और वो जो करें करने दीजिये. कम से कम पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसफ अली जरदारी का यही ख्याल है, इसलिये उन्होंने पाकिस्तान के एक हिस्से को तालिबान के शरिया कानून को सौंपने वाले
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हिमाकत देखिये… गलत वक्त पर सही बात!

चुनाव का समय है, आजकल नेतादर्शन कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं. नेतागण टीवी पर भारी डिबेटें कर रही हैं और उसमें लचर-लचर दलीलें आंय-बांय बक रहे हैं, हम मुंह फाड़े झेल रहे हैं. ऐसी ही एक दलील का पोस्टमार्टम करते हैं दलील है – गलत वक्त पर सही बात बानगी पेश है
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समाजवादियों का मेनिफेस्टो… हंसी के गुलगुले

लोग सपा के मेनिफेस्टो पर हंस रहे हैं बहुतों का कहना है कि ऐसी बेवकूफी पहले नहीं देखी. इन्टरनेट पर जिस भी जगह मेनिफेस्टो के बारे में पढ़ा तो उस टिप्पणी करने वालों ने गुस्सा नहीं हंसी का इजहार किया. सचमुच अमिताभ के छोटे भाई, अनिल अंबानी के दोस्त ने जो