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ज्ञानसिंधु

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08 Jun 2010
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भगीरथ की कविताएं

पानी पहाड़ों की विशालकाय चट्टानों सेरिसता पानी‘ओस’ और फर्न के कोमल पौधों के बीच सेरेंगता पानीपहाड़ी झरनों सेगिरता पानीचट्टानों से टकराताबर्फ सा ठंडा जलपानी रिसता है , रेंगता हैगिरता है , पड़ता हैटकराता हैकिंतु , टूटता नहींअपना वजूदबरकरार रखता हैपानीथोर
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श्याम कुमार पोकरा के कहानी संग्रह 'माँ का आँचल' का लोकार्पण

(दाएं से बाएं दिलीप भाटिया , मनोज कुमार शर्मा , राधेश्याम मेहर , विजय जोशी,भगीरथ, हंसराज चौधरी)श्याम कुमार पोकरा के कहानी संग्रह "माँ का आँचल " का लोकार्पण दिलीप भाटिया , मनोज कुमार शर्मा, राधेश्याम मेहर , विजय जोशी, भगीरथ, हंसराज चौधरी ने किया इस अवसर
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भीतर का सच

अशोक भाटियाबच्ची सो चुकी थी । वह खाना खाकर खाली था। उसने काम के हिस्से के तौर पर, ब्रश किया, टी.वी. ऑन किया और बैड पर पसर गया । उधर रमा सुबह के लिए दही जमाने, सब्जी बनाने और कपड़े तहाने के बीच , ताबड तोड घुम रही थी । वह खाली हुई तो पति ने बाहरी दरवाजे बंद
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धर्म - संस्कृति

प्रश्न पत्रविषय - धर्म - संस्कृतिप्रश्न १ धार्मिक उन्माद धर्म है ? क्या उन्माद पैदा करने वाले लोग धार्मिक होते हैं ?२ क्या गुबंद का तोड़ा जाना परम सौभाग्य का प्रतीक है ? क्यों?३ गुलामी के एक प्रतीक को नष्ट करना क्या हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य नहीं ? इस
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मंच के कवि

मंच के कवि उभरते हुए युवा कवि जिसे देखा उसे पकड़कर ले गये और अपनी कविता पेल दी । हालांकि कविता सुनाने के पहले चाय कचौड़ी का आदेश दे मारते थे । उन्हें फायदा यह हो जाता था कि एक श्रोता को ही चाय कचैड़ी खिलानी पड़ती थी और उसे माध्यम बनाकर वे पूरे रेस्त्रां के
Apr 01 2010 12:20 PM
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प्रश्न पत्र

प्रश्न पत्रकक्षा - दशम विषय - राजनीतिशास्त्रनिर्देश - उत्तर व्यवहारिक ज्ञान पर आधारित है न कि किताबी ज्ञान पर।प्रश्न 1)मक्खियाँ गुड पर इकट्ठी होती है इसी तर्ज पर बताइये कि विधायक कहाँ इकट्ठे होते है ? गलत पर टिकमार्क करोअ)जहाँ सत्ता हो। ब)जहाँ धन हो।
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कानूनी किताबों के बारे में

कानूनी किताबों के बारे में जरा ऊंची देकर पटखनी दो तब कहीं जाकर कमाई होती है,कानूनी किताबों के भरोसे कमा खाना यहॉं असम्भव है। मुवक्किल ही तुम्हारा मुर्गा है और मुवक्किल ही तुम्हारी मुर्गी । तुम चाहो तो मुर्गा काट लो और तुम चाहो तो मुर्गी के अण्डे खाते रहो
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डॉ कुमार विनोद की गज़लें

कुमार विनोद डॉ कुमार विनोद की गज़लें हाल ही के वर्षों में जिन ग़ज़लकारों ने हिंदी ग़ज़ल के राष्ट्रीय परिदृश्य पर बेहद प्रभावी ढंग से अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज की है - युवा ग़ज़लकार कुमार विनोद उनमें से एक हैं। कुमार विनोद की ग़ज़लें हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ,
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मकड़ियाँ

ज्ञानसिंधु' में आपका व्यंग्य 'क्रेडिट कार्ड' पढ़ा। बहुत बढ़िया लगा। बाज़ारवार के चलते क्रेडिट कार्ड की त्रासदी को झेलते आज के मध्यम-निम्न मध्यम वर्ग के आदमी की त्रासदी को रेखांकित करने का प्रयास दो तीन वर्ष पूर्व मैंने अपनी लघुकथा 'मकड़ियां' में किया था।
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परिवार में जनतंत्र यानी सारी दुनिया में जनतन्त्र

कुमकुम संगारी के लेख का अंश परिवार में बराबरी का आधार है बेटी का माँ - बाप की संम्पति में बेटे के बराबर का हिस्सा होना । ऐसे कुछ कानून बन चुके हैं जो कुछ हद तक इस बराबरी की इजाजत देते हैं लेकिन हम जानते हैं कि ९९ प्रतिशत मामलों में ये कानून लागू नहीं
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तालीम देने का खब्त

समाज को सभ्य बनाने में तालीम की अहम भूमिका है । पहले यही भूमिका अंग्रेज इस हद तक अदा कर रहे थे कि उन्हे हिन्दुस्तानियों को सभ्य बनाने का खब्त सवार था । कुछ लोग सभ्य हो गये इससे नुकसान अंगेजों को ही हुआ उन्हें यह मुल्क छोड़कर वापस इंग्लिस्तान जाना पड़ा
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डाकुओं की संगठित गेंग के बारे में हलफिया बयान

डाकुओं की संगठित गेंग के बारे में हलफिया बयान पुलिस के बारे में एक जज साहेब ने टिप्पणी की थी कि पुलिस डाकुओं की एक संगठित गेंग है । भई ! यह तो बहुत ही सख्त टिप्पणी है पुलिस सेवा के बारे में । चूंकि जज साहब को तो सरकार चलानी नहीं , इसलिए वे तो ऐसी टिप
Dec 29 2009 11:48 AM
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प्रत्याशी से पूछताछ

एक एम.एल. उम्मीदवार से चुनाव समिति ने निम्न प्रश्न पूछे ! अब आप बताएंगे कि चुनाव समिति ने सवाल क्यों पूछे - और इनकी प्रासंगिकता क्या है ? जिला प्रमुख सुजीत जायसवाल ने पार्टी से एम.एल.ए. का टिकट मांगने का निश्चय कर , चुनाव समिति के समक्ष साक्षात्कार क
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उदारह्दय

उदारह्दय आप बहुत उदार है, इसलिए आपका समय उदारवादी कहलाता है आप उदार है निजी हितों के लिए ,निजी लाभ के लिए। तमाम प्रतिबन्ध हटाओ कि निजी क्षेत्र विस्तार चाहता है, कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अपना साम्राज्य विस्तार चाहती है। अब सरकार हमारी नहीं रह गई , यह
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देवेन्द्र रिणवा की कविताएं

देवेन्द्र रिणवा इन्दौर के पास महूगांव में जन्म स्नातकोत्तर तक औपचारिक शिक्षा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं आकाशवाणी से रचनाएँ प्रकाशित - प्रसारित 1 हाँ-न हीं हाँ बोलने में जितनी लगती है ठीक उससे दुगुनी ताक़त लगती है नहीं बोलने में हाँ बोलना यानि शीतल हव
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युगल की कथाएं

जात युगल छोटी जात वालों के कुएं में कुछ गिरा । जाग हो गयी । कई लोग कुएं पर जमा हो गए । कुएं में अंधेरा था । कुछ पता नहीं चल रहा था कि क्या गिरा है । एक आंशका थी कि शायद कोई आदमी गिरा हो । मजबूत रस्से में झग्गर बांध कर डाला गया । चार -पांच आदमियों ने
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अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन 3 अक्टूबर 2009

अठारवां अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन 3 अक्टूबर 2009 , युवक साहित्य सदन, सिरसा , हरियाणा में आयोजित हुआ यह सम्मलेन पंजाबी त्रैमासिक ‘भिन्नी’ एवं हरियाणा साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा लेखिका मंच , के सहयोग से सम्पन्न हुआ । पहले सत्र क
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लोकार्पण

शिवराम के नाटक के लोकार्पण पर ली गई तस्वीरें । देर से प्राप्त बाएँ से - महेंद्र नेह, मंजरी वर्मा , शिवराम , रविन्द्र कुमार रवि , नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी , शैलेश चौहान दर्शक दीर्घा लोकार्पण की पूरी रिपोर्ट पिछ्ली पोस्ट में पढ़े ।
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शिवराम के नाटक - पुनर्नव , गटक चूरमा का लोकार्पण

शिवराम के नाटक - पुनर्नव , गटक चूरमा का लोकार्पण20 सितम्बर 2009 को कोटा की कला दीर्घा में शिवराम के दो नाट्य संग्रहों पुनर्नव व गटक चूरमा का विमोचन डा. ‘रविन्द्र कुमार रवि’ , अध्यक्ष विकल्प अखिल भारतीय जनवादी , जनसांस्कृतिक - सामाजिक मोर्चा, डा. मंजरी
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राष्ट्रपिता के सपने

एक देश हुआ हिन्दुस्तान अब इंडिया हो गया है , इसके एक राष्ट्रपिता थे , जिन्होने अपनी लाठी से अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया । वे अंहिसावादी थे उन्होने कभी लाठी चलाई नहीं , हाँ कभी - कभी दिखा देते थे । जैसे नमक आन्दोलन में ।उनके तीन बन्दर बहुत
Sep 15 2009 08:38 AM
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क्रेडिट कार्ड

फ्रीज खरीदना है ? पैसे नहीं है ? कोई बात नहीं , चिंता मत कीजिए , हम हैं न आपकी सेवा के लिए हमारा क्रेडिट कार्ड लीजिए, दुकानदार को दीजिए , एक साईन कीजिए और फ्रीज ले आइये । है न सरल तरीका । क्या कहा ? आपके पास आई.सी.आई.सी.आई का क्रेडिट कार्ड पहले से ही है
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डा. शकुंतला किरण की शोध पुस्तक ‘हिन्दी लघुकथा ’ का लोकार्पण

डा. शकुंतला किरण की शोध पुस्तक ‘हिन्दी लघुकथा ’ का लोकार्पण दिनांक 26 जुलाई 2009 , जवाहर आडोटोरियम, अजमेर में लघुकथा के वरिष्ठ कथाकार भगीरथ व बलराम अग्रवाल ने किया , साथ ही उनकी ही कविता की पुस्तक ‘ एहसासों के अक्स ’ का लोकार्पण कुमार शिव व ताराप्रकाश
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इक्कीसवी सदी

मदारी डुगडुगी बजाता हुआ गोलचक्कर काटता है । लोग जमा हो रहे है । लो , मजमा लग गया है ।'' हाँ तो भाईसहाब , मेहरबान , कद्रदान कमर कस कर बैठिए और एक से एक नायाब खेल देखिये ।जमूरे !हाँ उस्तादजायेगा?हाँ जाऊंगा ।कहाँ जायेगा ?इक्कीसवी सदी में ।ये मुँह और मसूर की
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मौनव्रत

जिलाधीश कार्यालय के सामने शामियाने के नीचे एक आदमी अपने मुँह को दोनों हाथों से ढाँपे , गांधीजी के बंदर की मुद्रा में बैठा है । ठीक उसके ऊपर एक बैनर टंगा है बैनर पर मौन व्रत लिखा है । कुछ और खद्दरधारी उसी मुद्रा में उसके दोनों ओर धरने पर बैठ जाते है।
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लडो डट कर लडो

लडो डट कर लडो भाई -भाई लड़ते है] हिन्दु मुस्लिम भाई - भाई है] इसलिए आपस में लड़ते है। अगर भाई - भाई नहीं होते तो आपस में नहीं लड़ते । पहले हिन्दी चीनी भाई -भाई थे इसलिए आपस में लड़े । जब से दुश्मन हुए है] नहीं लड़े । जब हम कहते हैं कि हिन्दु - मुसलमान लड़त
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श्याम पोकरा के उपन्यास बेलदार का लोकार्पण

शारदा' पत्रिका एवं 'बेलदार' उपन्यास का विमोचन शारदा साहित्य मंच के तत्वाधान में दिनांक १९।०४.०९ को डा. भीमराव अम्बेडकर भवन , रावतभाटा में लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया । जिसमें मंच की वार्षिक पत्रिका ‘शारदा’ एवं श्री श्याम कुमार पोकरा के उपन्यास
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मैत्रेयी पुष्पा के साक्षात्कार के अंश

से मैत्रेयी पुष्पा के साक्षात्कार के अंश इसे फ़रोग की कविता के साथ पढें ज्ञानसिन्धु पोस्ट दिनांक 23. 4. 09 संवाद कहने का मतलब यह है कि प्यार से लबरेज आंखे लिए ही में जीवन में आने वाली आंधियों का सामना कर सकी हूं और हर पुस्तक रचना मे जता रही हूँ कि स्त
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पाप

से फ़रोग फ़रोखज़ाद की एक कविता अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्र कविता के साथ चित्र : अवधेश पाप बाँहों मैंने पाप किया पर पाप में था निस्सीम आनंद समा गई गर्म और उत्तप्त में मुझसे पाप हो गया पुलकित, बलशाली और आक्रामक बाँहों में। एकांत के उस नीरव कोने में
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक दृष्टिकोण नेहरुजी चाहते थे कि यह पुराना हिन्दुस्तान, जो विश्वास में डूबा है विज्ञान में उन्नति के शिखर चूमे । वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर अपनी जीवन शैली को वैज्ञानिक -दृष्टि सम्पन्न बनाएं । हुआ भी वही , बडे -बडे बाँध बने ,बिजली घर बने ,बडे-ब
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युगल की लघुकथा' जूते

जूते 0 युगल चैतू राजमिस्त्री के साथ का काम करता था । एक दिन सिर पर से ईंट उतारते समय एक ईंट पाँव पर आ गिरी । उँगलियॉ कुचल गई । पत्नि बोली - पाँव मे जूते होते तो उँगलियों नहीं कुचलती ।'' चैतू ने उँगलियॉ में उठती बिच्छु के डंक के समान टीस को दाँत पर दा
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गजल

चाँद शैरी की गजल मुल्क तूफाने बला की जद में है दिल सियासत दान का मसनद में है अब मदारी का तमाशा छोड कर कल वो आदमी संसद में है एकता का तो दिलों में है मुकाम वो कलश में हैं न वो गुम्बद में है जिंदगी भर खून से सींचा जिसे वो शजर मेरा निगाहे बद मे है फिर ह
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एंट्रेंस टेस्ट

हमारे देश के विश्वविद्यालय बहुत प्रसिद्ध है यहाँ का एंट्रेस टेस्ट बहुत मुश्किल है । कोई शूरवीर ही टिक पाता है वरना तो टै बोल देता है। काँलेज में घुसते ही उसे सीनियर घेर लेंगे । फिर आदेश देंगे 'पतलून उतारो' !… 'नहीं उतारता' ? एक ने आकर उसके गाल मरोड़ द
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ज्ञानसिंधु

प्रदीप कान्त 22 मार्च 1968 को रावत भाटा (राजस्थान) में जन्म । अजमेर विश्व विद्यालय से गणित में स्नातकोत्तर के पश्चात भौतिकी में भी स्नात्तकोत्तर। कथादेश, इन्द्रपस्थ भारती, सम्यक, सहचर, अक्षर पर्व आदि साहित्यिक पत्रिकाओं व दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रि
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अकबर महान

अकबर महान भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है - अकबर को अकबर महान क्यों कहते हैं ? कारण सहित उत्तर लिखो । इधर इतिहास की पुस्तकें पढकर विद्यार्थी इसका उत्तर कुछ इस तरह लिखते है। प्रथम दृष्ट्या यह प्रश्न ही गलत है । अकबर महान नहीं हो सकता इसके कई
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गोविन्द गौड की गज़लें

गोविन्द गौड की गज़लें हो रहा है क्या गज़ब इधर ये जंग की तरह बह रहा है यहां लहू भी क्यों रंग की तरह हाय क्यों मचा हुआ है शोर मार-काट का कुछ न कुछ पिये हुये हैं लोग भंग की तरह बीच शहर आज उसका बुत खडा हुआ मिला लाश जिसकी कल मिली थी एक नंग की तरह किस कदर बा
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छात्राओं के लिए प्रश्नपत्र

नोट- किन्ही दस प्रश्नो के उत्तर दो। अन्तिम प्रश्न अनिवार्य है ? 1 कभी-कभी रसोईघर में स्टोव क्यों फट जाता है और उससे बहुएँ ही क्यों जलती है । घबराएँ नहीं , और सही उत्तर दें ? 2 कई बार ऐसा होता है कि ससुराल मे बहू की लाश पंखे से झूलती नजर आती है; क्यों