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31 Dec 2009
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बेबसता की छलक

हट साले..रोज-रोज चला आता है भिख मांगने। तेरे मां-बाप नहीं है क्या? वह चिढ़ते हुए कहा। हर दिन हराम की कमाई खाने की आदत है साले को। ऐसे लोगों की न जात का पता होता है न घरवालों का! ऐ तो अपने जन्म का भोग रहे हैं। ऐसे कहने वाले वही साहब थे, जो हर रोज स्टे
 
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यकीन...

रात को बिजली की गड़गड़ाहट के साथ बारिश की बंदे की टप-टप की अवाजें सीने में हलचल मचा रहा था। लोग अपनी नींद की आगोश में थे। सपनों की दुनिया देख रितु को भी सुबह की बेला में झपकी लगी थी कि अचानक में किसी की आवाज सुनकर उठ गई। अरे वह यहां! उसका एहसास गगनचु
 
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बचपन

वह पिपल की छांव, खुली आकाश में हमारा बचपन वह बलखाती सी हवाएं, अमृत सा धूप जिस पर कुर्बान थी हमारी बचपन की शरारतें आज तड़पाती है बचपन की नदानी भरी शरारतें गर्मी की छुट्टी में गांव जाना हरियाली की छांव तले रहना फूलों से घिरी लताएं के बीच महलों में रहना
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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बातों की अनकही..

बातों की अनकही कोई क्या जाने,न भी जाने तो क्या जाने, जाने भी तो क्या जाने, बातों का छलावा तो बहुत करते है, कोई खुद उस छलावा को जाने तो समझे,ख्वाबों के टूटने का गम नहीं, जितनी बातों के बदले का होता है, दर्द तो ख्वाबों के टूटने का भी होता है, पर उस दर्
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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राजनैतिक पर लक्ष्मी जी की अपार माया

आज कि युग में लक्ष्मीजी की माया आपार है। हमारे प्राचीन ग्रन्थों में लिखा है के वे यदि खुश हो जाए तो दुखीराम सुखीराम हो जाए और गंगूतेली भोजराज। मगर इस घोर कलियुग में इन पुराण कथाओं पर लोगों का विश्वास कहां। वे तो अपनी आंखों से सारा चमत्कार देखना चाहते
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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शुभ दीवाली

दीवाली आने को है और मौसम का रूख बदला है। कहीं खुशी है तो कही गम है। दुकानों में दीये, तोरण, लक्ष्मी-गणेश, बर्तन और मेवे के सजावटी डिब्बों की भरमार है। बाजारों की उठा-पटक के बाद हर ओर एक आशा कि किरण है कि शायद फिर वही रौनक आएगी। कहीं लाठियों की मार है
 
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गांगुली के कैरियर का घटनाक्रम

जनवरी 1992- वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिस्बेन में एकदिवसीय क्रिकेट में पदार्पण। तीन रन बनाकर आउट। टीम से बाहर। जून 1996- इंग्लैंड के खिलाफ ला‌र्ड्स में पदार्पण टेस्ट में ही शतक जमाया। ट्रेंट ब्रिज में अगले टेस्ट मैच में भी शतक जमाया। अगस्त 1997- कोलंबो म
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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गाता रहे मेरा दिल...

अगर किसी पूजा घर में जलते दिये की रोशनी और घंटियों की पवित्र आवाज को मिलाकर इंसानी सूरत में बदला जाए, तो शायद वह कुछ-कुछ लता मंगेशकर की सी तस्वीर होगी। वही लता, जिसके बारे में एक दफा उस्ताद बड़े गुलामअली खां ने कहा था कि क म्बख्त कभी गलती से भी बेसुर
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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सेल

चकचौंध भरी रौशनी में दुनिया को दिखाती नही स्वत्रंत राज में इन्सान इन्सान के खून से नहाता है ला शो के ढेर पर खरी है इंसानियत बाजारों में सेल के भाव बिकती है इस देश में वफादारी की कसौटी पर संदेह देखती है अब तो लोकतंत्र की मन्दिर में भी सेल लगने लगी है
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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किनारे की तलाश में भटकती जिंदगी

भूख से तड़प रही जिंदगी किसी का आसियाना खो गया तो किसी का अपना खो गया। बिहार में कोसी नदी में आयी प्रलयंकारी बाढ़ फिल्मी नहीं है, लेकिन इसने कई ऐसी त्रासद कहानियां छोड़ी हैं जो फिल्मों में ही दिखती हैं कि पानी के प्रवाह में पूरा का पूरा हंसता खेलता पर
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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माया की मंजिल

मायावती की शोहरत अब देश के बाहर भी फैल रही है। फो‌र्ब्स ने उनको देश की महाशक्शिली महिलाओं में शामिल कर लिया है। इस बात पर शायद किसी को एतराज होगा। एक निम्न मध्यवर्गीय दलित परिवार से आने वाली मायावती के लिए राह बनाना आसान नहीं , लेकिन अपने बुलंद इरादो
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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हार्दिक बधाईयां

सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाईयां। देश के खातिर जान वाले शहीदों को सत-सत नम। उन जबाज युवाओं को सलाम जो सरहद पर मुश्तैदी से डटे हैं और उन मां बहनों को भी सलाम जिसने अपने भाई-बेटों को देश के खतिर कुर्बान कर दिया।एक बार फिर ह
 
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रिश्तों का संबंध

रिश्ते के बीच जीना आसान नहीं होता जीवन में दिल से रिश्तों का बनना आसान नहीं होता जिंदगी में ऐसे मोड़ आए कि मन में रिश्तों का लगाव हो गया फैसलों से फासले कुछ इस तरह से तय हुए कि अनछूए रिश्ते दिल में बरबस हो गया अपनत्व का रिश्ता दिल से दिल का है तभी तो
 
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जुड़ी थी जमीं के तार

शहरों में न सिर्फ आसमान की रंगीनी एक जैसी थी, बल्कि जमीन पर लोगों का उत्साह भी एक जैसा ही था। चांद, तारा, कंठा बेलन, छड़ीला, अद्घा और मोमबत्ता की डोर थामे बच्चे बूढ़े सब न सिर्फ अपनी पतंगबाजी कौशल को आजमाए थे, बल्कि दूसरे के पतंग की डोर काटने की होड़
 
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ये जिंदगी एक सवाल है?

ये जिंदगी एक सवाल है? फिर भी नाज है इस पर राह चलते मुसाफिर को देखो लगता है खुशियों ये भरा संसार पर नजदीक से देखो तो खुली किताब है ये जिंदगी एक सवाल है? किसी को मंजिल मिली तो किसी आशाएं इस मायाजाल में सब है समाएं कोई कर जाता है मंजिल के खातिर कुर्बानी
 
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मन कोमल सा

एक साधारण की लड़की हर बड़े-छोटे शहर में कहीं हालात से कहीं खुद से उलझी। रंग गेहुआ सा। उम्र वहीं कोई बीस बाइस साल। यौवन पर चढ़ाव, मन कोमल सा। भोली-भाली सी सुरत। आंखें सुख झील सा। दिखे जैसे बसंत में खिले सरसों सा। पर उसके अंदर हुक था, जो जान सका न कोई।
 
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नववर्ष की शुभकामनाएं

खुशी और गम देने वाले बीते वर्ष 2008 को नई विदा कर नववर्ष 2009 का उम्मीदों का दामन खोले आप सभी ब्लागरों का स्वागत है। नववर्ष में बहुत कुछ नया होने वाला है, पर मैं बीते सालों की कुछ यादों को भूलना नहीं चाहती। शायद इसलिए कि वह मेरे लिए खास है। नववर्ष की
 
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