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08 Jun 2010
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अपमान झेलती प्रतिमाएं

-डॉ. अशोक प्रियरंजनज्ञानपुर के गांधी उद्यान में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर ३० मई की रात कुछ शरारती तत्वों ने शराब की बोतल फोड़कर एक फटा-पुराना कंबल लपेट दिया। राष्ट्रपिता के अपमान से जब स्थानीय कांग्रेसी भड़क उठे और धरना-प्रदर्शन
 
dr. ashok priyaranjan
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घटता आत्मविश्वास, बढ़ती आत्महत्याएं

डॉ. अशोक प्रियरंजनआजकल जिस तरह से विद्यार्थियों में आत्महत्याएं करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, उससे तो यही लगता है कि कहीं न कहीं आत्मविश्वास की कमी के चलते ही यह घटनाएं होती रहती हैं। सीबीएसई की १२वीं की परीक्षा में फेल होने पर रुड़की की आवास विकास
 
dr. ashok priyaranjan
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मेरठ अंचल ने दिए हिंदी को अनमोल रतन

डॉ. अशोक प्रियरंजनमेरठ क्षेत्र की सुदीर्घ साहित्यिक परंपरा रही है। यहां के साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य में न केवल इस क्षेत्र के जनजीवन के सांस्कृतिक पक्ष को अभिव्यक्त किया, बल्कि इस अंचल की भाषिक संवेदना को भी पहचान दी। इन साहित्यकारों के बिना हिंदी
 
dr. ashok priyaranjan
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अंग्रेजों की जमीन पर हिंदी के फूल खिले

-डॉ. अशोक प्रियरंजनहिंदी भाषा और साहित्य से विदेशी भूमि भी आलोकित हो रही है। अंग्रेजी के लिए जाने जाना वाले इंग्लैंड तक में हिंदी के फूल खिल रहे हैं। यूरोप में हिंदी भाषियों की बड़ी संख्या है। भारतवंशी अनेक साहित्यकार विदेशों में हिंदी साहित्य सृजन कर
 
dr. ashok priyaranjan
Feb 26 2010 11:42 PM
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मेरठ की माटी से महका साहित्य

-डॉ. अशोक प्रियरंजनहिंदी के चर्चित हस्ताक्षर गिरिराज किशोर के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास 'ढाई घर'की शुरुआत कुछ इस तरह होती है-'मेरा नाम भास्कर राय है। मैं उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके के एक पुराने खाते-पीते राय खानदान का अंतिम राय हूं।
 
dr. ashok priyaranjan
Feb 13 2010 10:46 PM
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मेरठ में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी 12 से

-डॉ. अशोक कुमार मिश्रभारत का हृदयस्थल पश्चिमी उत्तर प्रदेश। इसी का सबसे महत्वपूर्ण शहर है मेरठ। पूरी दुनिया में यह शहर कई कारणों से मशहूर रहा है। अंगेजों के जमाने में इसी शहर से आजादी की लड़ाई की शुरुआत हुई। सन् 1857 की क्रांति का उद्गम स्थल माना जाना
 
dr. ashok priyaranjan
टैग: हिंदी
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रावण तेरे िकतने रूप

डॉ अशोक प्रियरंजन हर साल िवजयदशमी पर रावण का पुतला जलाया जाता है । पूरे देश में कागज के पुतले तो जला िदए जाते हैं लेिकन समाज में मौजूद अनेक रावण अभी भी िजंदा हैं । कागज के पुतलों से अिधक जरूरी उन रावणों को जलाना है जो पूरे देश की जनता को परेशान िकए ह
 
dr. ashok priyaranjan
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कितनी लडाइयां लडेंगी लडकियां

डॉ. अशो क़ प्रियरंजन मेरठ के सरधना क्षेत्र के वपारसी के े ग्रामीणों ने पंचायत के बाद जो फैसला लिया वह यह सवाल खडे करता है कि लडकियों को अपनी जिंदगी की राह में तरक्की के फूल खिलाने के लिए कितनी लडाइयां लडऩी होंगी । कॉलेज पढऩे जाते समय वपारसी की एक लडक
 
dr. ashok priyaranjan
Dec 29 2009 11:54 AM
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इस देश के हालात से बापू उदास हैं

दंगे औ फसादात से बापू उदास हैं, इस देश के हालात से बापू उदास हैं । सपनों की जगह आंख में है मौत का मंजर, हिंसक हुए जजबात से बापू उदास हैं । बढते ही जा रहे हैं अंधेरों के हौसले, जुल्मों की लंबी रात से बापू उदास हैं । बंदूक बोलती है कहीं तोप बोलती, हिंस
 
dr. ashok priyaranjan
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कहीं आतंकी तो कहीं अपराध, कैसे बढे पर्यटन

आज २७ सितंबर क ो विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है । पूरी दुनिया में पर्यटन क ो बढावा देने मकसद से आज के दिन अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । इस बात पर विचार किया जाता है कि कैसे पर्यटन को बढावा दिया जाए । भारत पर्यटकों के लिए बडा मनोरम स्थल रहा है
 
dr. ashok priyaranjan
Dec 29 2009 11:54 AM
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महापुरुषों का यह कैसा सम्मान ?

मंगलवार क ो जम्मू क े मुबार क मंडी क ांप्लेक्स में राष्टï्रपिता महात्मा गांधी क ी प्रतिमा क े गले में रस्सी बांध क र रोशनी क े लिए लाइट लट क ा दी गई । ए क समारोह क ी तैयारियों में जुटे टेंट हाउस के क र्मचारी बापू क ी प्रतिमा पर चढ़ गए । उन क े क ंधे
 
dr. ashok priyaranjan
Dec 29 2009 11:54 AM
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संस्कृत को समृद्ध नहीं करेंगे तो संस्कृति कैसेे बचेगी?

संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है । देववाणी है, व्याप क क्षेत्र में निवास क र रहे जनमानस क ी आस्था क ा प्रती क है । तमाम भारतीय पौराणि क ग्रंथों क ी रचना संस्कृत में हुई है, इसलिए इस भाषा क े प्रति ए क धार्मि क श्रद्धा क ा भी भाव है । भारतीय संस्क
 
dr. ashok priyaranjan
Dec 29 2009 11:54 AM
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टूटते रिश्ते, दरकते संबंध

भारत ऐसा देश रहा है जहां सामाजि क और पारिवारि क संबंधों क ो विशेष महत्व दिया जाता रहा है । रिश्तों क ी आत्मीयता भारतीय संस् क ृति में रची बसी है । भारतीय संस्ृति में जीवित होने पर ही नहीं बल् क ि मृत्यु होने क े बाद भी रिश्ते क ा निर्वाह क िया जाता ह
 
dr. ashok priyaranjan
Dec 29 2009 11:54 AM
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छेड़छाड़ पर हो सख्त सजा

मेरठ में चलती बस में ए क विदेशी युवती से छेड़छाड़ क ी गई । यह युवती भारत क ी जिस छवि क ो अपने मन में ले क र यहां आई होगी, निश्चित रूप से वह जाते समय बदल गई होगी । दरअसल, छेडछाड़ क ी घटनाएं लगातार बढती जा रही हैं, जिस क ा बडा व्याप क असर समाज में दिखा
 
dr. ashok priyaranjan
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महिला संबंधी अपराधों के लिए जिम्मेदार केौन

े वैश्वीकरण से बदले परिदृश्य और आधुनिकता क ी बयार ने महिलाओं क ी महत्वा क ांक्षाओं और सपने में नए रंग भर दिए हैं । इसीलिए आज महिलाएं घर क ी दहलीज से नि क ल क र जिंदगी क े रंगमंच पर विविध क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमि क ा निभा रही हैं । रोजगार क ा क ो
 
dr. ashok priyaranjan
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आत्मïिवश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग

डॉ. अशोक प्रियरंजन आत्मविश्वास की कमी के चलते अब हजारों लोग जिंदगी की जंग हारकर मौत को गले लगा लेते हैं । आत्महत्या की बढती घटनाएं समाज के विविध वर्ग के लोगों के जीवन में बढ़ रही निराशा, संघर्ष करने की घटती क्षमता और जीने की इच्छाशक्ति की कमी की ओर स
 
dr. ashok priyaranjan
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उर्दू की जमीन से फूटी हिंदी गजल की काव्य धारा

डॉ. अशोक प्रियरंजन मेरठ प्रिय नितिन, कल एक साप्ताहिक पत्र में तुम्हारा एक गीत और एक गजल पढऩे को मिली । गीत मुझे बेहद अच्छा लगा लेकिन गजल नाम से जो पंक्तियां तुमने लिखी हैं, वे गजल के मिजाज से कोसों दूर लगीं । मुझे तुम्हारी रचनात्मक यात्रा से खासा लगा
 
dr. ashok priyaranjan
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महिलाओं के सपनों की सच्चाई बयान करती तस्वीर

डॉ अशोक प्रियरंजन मेरा शहर मेरठ - मेयर मधु गुजॆर । मेरा प्रदेश उत्तर प्रदेश - मुख्यमंत्री मायावती । मेरा देश भारत-सत्तारूढ यूपीए की चेयरमैन सोिनया गांधी । ये सब प्रतीक हैं उस सत्ता के जिसके शीषॆ पर िवराजमान हैं मह ि लाएं । एक शहर से लेकर देश की उच्च
 
dr. ashok priyaranjan
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आतंकवाद, मंदी और क्षेत्रवाद से उपजा संकट

डॉ . अशोक प्रियरंजन आतंकवाद, मंदी और क्षेत्रवाद की समस्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है । पूरी दुनिया सिर्फ मंदी को झेल रही है जबकि भारत के समक्ष इसके साथ ही दो और संकट आतंकवाद और क्षेत्रवाद लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं । आर्थिक संकट के साथ
 
dr. ashok priyaranjan
Dec 29 2009 11:54 AM
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हुआ तिमिर का देश निकाला दीपक जलने से

डॉ . अशोक प्रियरंजन सोने जैसा हुआ उजाला दीपक जलने से, भाग गयाअँधियारा काला दीपक जलने से । आंगन आंगन, बस्ती बस्ती और सभी चौबारों पर, सजती मोती जैसी माला दीपक जलने से । चमक उठे घर देहरी आंगन और गांव की चौपालें, जगमग मन्दिर और शिवाला दीपक जलने से । ज्ञा
 
dr. ashok priyaranjan
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लडिकयों को खुद ही लडनी होगी अपनी लडाई

डॉ अशोक प्रियरंजन इस ब्लाग पर नारी िवमशॆ से जुडे िविभन्न मुद्दों को लेकर हुई िवचारोत्तेजक बहस में शािमल िटप्पिणयों के आधार पर यह िनष्कषॆ िनकलता है िक लडिकयों को अपनी लडाई खुद ही लडनी होगी । िजन्दगी को खुशनुमा बनाने के िलए तमाम कोिशशों की पहल उन्हीं क
 
dr. ashok priyaranjan
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पुरुषवादी सोच में तबदीली से बदलेगी महिलाओं की जिंदगी

डॉ . अशोक प्रियरंजन १२ अक्टूबर को इस ब्लाग पर िलखे अपने लेख-सुरक्षा ही नहीं होगी तो कैसे नौकरी करेंगी मिहलाएं- पर जो प्रितिक्रयाएं आईं उन्होने बहस को आगे बढाते हुए कई सवाल खडे कर िदए । इसके साथ ही वैचािरक मंथन से कुछ एेसे िनष्कषॆ भी िनकले िजन पर िवचा
 
dr. ashok priyaranjan
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सुरक्षा ही नहीं होगी तो कैसे नौकरी करेंगी मिहलाएं

डॉ अशोक प्रियरंजन छह अक्टूबर को इस ब्लाग में िलखे अपने- लेख िकतनी लडाइयां लडंेगी लडिकयां -पर जो कमेंट्स आए, उन्होंने मेरे सामने कई सवाल खडे कर िदए । इन सवालों पर वैचािरक मंथन करने पर लगा िक यह िवषय अभी और िवस्तार की संभावना िलए हुए है । इस पर सार्थक
 
dr. ashok priyaranjan
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घरेलू हिंसा से लहूलुहान महिलाओं का तन और मन

डॉ. अशोक प्रियरंजन बेहतर जिंदगी और श्रेष्ठ समाज के लिए सबसे जरूरी चीज है संवेदना । संवेदना यानी दूसरे की वेदना को खुद भी महसूस कर पाना । संवेदना ही मनुष्यता को विस्तार देती है । पारिवारिक सदस्यों में परस्पर संवेदनशीलता जितनी ज्यादा होगी, रिश्ते उतने
 
dr. ashok priyaranjan
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संस्कृत को रोजगार से जोड़ें

डॉ. अशोक प्रियरंजन सोमवार पांच अक्टूबर को संस्कृत दिवस है । वही संस्कृत जिसे देवभाषा माना गया । समस्त भाषाओं की जननी भी संस्कृत को ही कहा जाता है । इसी भाषा समस्त वेदों का ज्ञान समाहित है । संस्कृत भाषाओं के अनेक श्लोक जीवन का मार्गदर्शन करने में महत
 
dr. ashok priyaranjan
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उच्च शिक्षा में उपजे सवाल

-डॉ. अशोक प्रियरंजनइलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में नौ सितंबर को छात्रों ने जो तांडव मचाया वह शिक्षा और राजनीति के समीकरणों से जुड़े कई सवालों पर मंथन करने के लिए विवश करता है। छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे उग्र छात्रों ने वीसी दफ्तर पर
 
dr. ashok priyaranjan
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रोजगार और बाजार से जुड़ी हिंदी, जगा रही अपार संभावनाएं

-डॉ. अशोक प्रियरंजनहिंदी के प्रति अब नजरिया बदल रहा है । अब तक अंग्रेजी इसलिए ज्यादा पढ़ी जाती थी क्योंकि उसे रोजगार दिलाने में सहायक माना जाता था । अब हिंदी भी रोजगार और बाजार से जुड़ रही है। ऐसे में हिंदी के विस्तार की अपार संभावनाएं पैदा हो रही हैं ।
 
dr. ashok priyaranjan
Sep 14 2009 01:28 AM
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रचनात्मकता को विस्तार देते ब्लाग

-डॉ. अशोक प्रियरंजनचंडीगढ की डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी ने ब्लाग का जिस तरह से उपयोग करने की योजना बनाई है, वह दूसरे विद्यालयों के लिए अनुकरणीय हो सकता है । कमेटी ने तय किया है कि अब शिक्षक क्लास में तो पढ़ाएंगे ही, साथ ही रोजाना ब्लाग के माध्यम से
 
dr. ashok priyaranjan
Aug 11 2009 01:21 AM
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इन देशभक्त महिलाओं के जज्बे को सलाम

-डॉ. अशोक प्रियरंजन२५ जुलाई को १७८ महिलाओं ने देश में नया इतिहास रच दिया। इस दिन पहली बार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में शामिल होने के लिए १७८ महिला जवानों के फस्र्ट बैच ने होशियारपुर के गांव खड़कां स्थित सहायक प्रशिक्षण केंद्र में पास आउट किया । यह इसलिए
 
dr. ashok priyaranjan
Jul 27 2009 12:52 AM
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शिवभक्ति और आस्था का प्रवाह है कांवड़ यात्रा

डॉ. अशोक प्रियरंजन भगवान भोले शंकर की भक्ति, आस्था और श्रद्धा की प्रतीक है कांवड़ यात्रा । भोले के भक्त भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए श्रावण माह में कांवड़ में पवित्र गंगाजल लाकर उससे भगवान आशुतोष का अभिषेक करते हैं । पिछले कुछ वर्षों में कांवड
 
dr. ashok priyaranjan
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फेल होने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी

डॉ . अशोक प्रियरंजन ऐसा पहली बार नहीं हुआ। हर साल परीक्षाफल आने के दिनों में ऐसा ही होता है। फेल होने पर कई छात्र-छात्राएं जिंदगी से मुंह मोड़ लेते हैं। इस बार यह संख्या कुछ ज्यादा महसूस हुई। शनिवार ३० मई को हाईस्कूल में फेल होने पर मेरठ शहर में ही त
 
dr. ashok priyaranjan
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जीवन

जीवन अनमोल है । इसका सदुपयोग करना चाहिए । हर आदमी को जीवन संघर्षो का सामना करना चाहिए । जीवन जीने के लिए है इसलिए जिंदगी से कभी मुहँ नही मोड़ना चाहिए । जीवन में खुशी बांटनी चाहिए । ख़ुद भी खुश रहो और दूसरों को भी खुश रखो । बाँटने से खुशियाँ बढती हैं
 
dr. ashok priyaranjan