प्रस्तुति - आईबीएन18ऐसे लोगों की कमी नहीं जो अपने समाज के सच्चे नायक हैं। अपनी और किसी ख़ासियत की वजह से नहीं बल्कि अपने काम की बदौलत वो बन गए रियल हीरोज़। अपने काम से हीराबाई ने जो कर दिखाया वो किसी भी मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में केस स्टडी बन सकती
प्रस्तुति - दैनिक भास्कर - रचना सिंह/दक्षा वैदकरइक दिन रघुपति पतंग उड़ाई.. रामचरित मानस की यह चौपाई राम के साथ पतंग का उल्लेख करती है। भले ही पतंग का प्रारंभ चीन से माना जाता हो और विश्व में सबसे बड़ी आधुनिक पतंग चीन व मैक्सिको में बनती हो लेकिन भारतीय
उठो, जागो और तब तक रुको नही जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये । जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। सत्य की ज्योति ‘बुद्धिमान’ मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक
जिंदगी के कठोर अनुभवों में पककर जानकी वज्र हो गई है। जोर-जुल्म के खिलाफ वह प्रतिरोध की एक नजीर है। किसी निर्बल और असहाय के समर्थन में अपनी सेना लेकर खड़ी होती है तो दबंग भी उससे थर्रा उठते हैं। वर्ष 2005 में उसका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए नामित हुआ।
प्रस्तुति - जागरण चमोली [दीपक फरस्वाण]क्या आपने कभी किसी ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में सुना या पढ़ा है, जहां लजीज खाने के बाद होटल मालिक द्वारा एक अनूठी डिश परोसी जाती है, वो भी बिल्कुल मुफ्त। स्वीट डिश भी ऐसी, जिससे पेट की नहीं ज्ञान की भूख शांत होती है।
प्रस्तुति - दैनिक भास्करस्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में पिछले 4 से 11 दिसंबर 2009 तक हुए नोबल पुरस्कार समारोह में भारत के अपूर्व मिश्रा को युवा वैज्ञानिक के अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पाने वाले वे अकेले भारतीय हैं। मात्र 19 साल के अपूर्व ने दो
नजीर यूं ही नहीं बना करते। इसके लिए सपने देखने होते हैं, सपनों को साकार करना होता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व.चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि छपरौली से सटे रठौड़ा गाव का एक प्राइमरी स्कूल और इंटर? कालेज ऐसी ही एक नजीर है। एक प्रवासी भारतीय का, जिसने सपने दे
प्रस्तुति - वार्ता दुनिया के सबसे जांबाज लड़ाकू विमान ‘सुखोई-30 एमकेआई’ की कॉकपिट पर अब तक के पुरूष वर्चस्व को चकनाचूर करते हुए एक भारतीय युवती ने इसमें उड़ान भर इतिहास रच दिया है। भारतीय युवती सुमन शर्मा ने रूस में हाल ही में सम्पन्न हवाई कार्यक्रम मे
प्रस्तुति - जागरण लखनऊ [प्रेम सिंह]। मेहनतकशों के लिए एक मौजू शेर है:- कुछ लोगों ने तदवीर से किस्मत संवार ली, कुछ लोग ज्योतिषियों को हाथ दिखाते रह गए। ज्वार-बाजरा और मोटे अनाजों की पैदावार के लिए उपयुक्त समझी जाने वाली बहराइच की जमीन के उन किसानों के
प्रस्तुति - जागरण नई दिल्ली। साहित्य, संगीत, रंगमंच और चित्रकला सहित विभिन्न कलाओं में महारत रखने वाले गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर मूलत: प्रकृति प्रेमी थे। वह देश विदेश चाहे जहां कहीं रहे वर्षा के आगमन पर हमेशा शांतिनिकेतन में रहना पसंद करते थे। रविंद्र
प्रस्तुति - जागरण जी तो चुपचाप रही थीं, लेकिन कीर्ति के प्रकाश का ऐसा उजाला हुआ कि पूरी दुनिया में पटना की यह 'साइकिल सिस्टर' सुविख्यात हो गई। नाम : सुधा वर्गीज। अदम्य साहस और दूसरों के लिए जीने की उत्कंठा का नया नाम। जन्म केरल में, लेकिन चार दशक से
प्रस्तुति - जागरण न्यूज नेटवर्क भारतीय खानपान में हल्दी का प्रयोग सदियों से होता आ रहा है। यह सिर्फ मसाला नहीं बल्कि गुणकारी औषधि भी है। यह खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर, पेट और त्वचा जैसी कई बीमारियों के इलाज में भी लाभप्रद है। आयुर्वेद में इसे अ
दवाइयों के क्षेत्र में नई खोज करने का किशोरावस्था से ही सपना देखने वाले डॉ. करतार सिंह लालवानी ने न सिर्फ विटामिन सप्लीमेंट के कई नए फॉर्मूले खोजे हैं, बल्कि वे न्यूट्रास्यूटिकल क्षेत्र की सफलतम ब्रितानी कंपनी वाइटाबायोटिक्स के संस्थापक और प्रमुख भी
पेड़ पौधे यूं तो पर्यावरण संरक्षण वातावरण की शुद्धता में अपना अतुलनीय योगदान देते ही हैं मगर क्या आप जानते हैं कि अगर इनके द्वारा पर्यावरण, मनुष्य जाति व भूमि को विभिन्न तरीकों के दिए जा रहे योगदान का आकलन किया जाए तो वह कम से कम 98 लाख रुपयों के बराब
तीन मूर्ति भवन के बगीचे में पेड़-पौधों के बीच से गुजरते घुमावदार रास्ते पर चाचा टहल रहे थे। तीन मूर्ति भवन प्रधानमंत्री का सरकारी निवास था और चाचा नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। पौधों पर छाई बहार से वे निहाल हो ही रहे थे कि उन्हें एक नन्हे बच्चे
जीवन में सफलता हासिल करने का वैसे तो कोई निश्चित फार्मूला नहीं है लेकिन मनुष्य सात आध्यात्मिक नियमों को अपनाकर कामयाबी के शिखर को छू सकता है। ला जोला कैलीफोर्निया में “द चोपड़ा सेंटर फार वेल बीइंग” के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी डा.दीपक चोपड़ा ने अपनी
स्रोत - जागरण सूचना का अधिकार यानी आरटीआई यानी राइट टू इनफारमेशन महज जानकारी प्राप्त करने का जरिया नहीं, बल्कि यह किसी के जीवन में सौभाग्य का दरवाजा भी खोल सकता है। शर्त सिर्फ यह कि व्यक्ति में लक्ष्य हासिल करने का जज्बा हो और इसी जज्बे को दिखाया है
प्रस्तुति - दैनिक भास्कर रायगढ़. रद्दी कागजों को गला कर फिर से नए कलेवर में सजाया जाता है। इसके बाद रंग-रोगन कर बनाए जाते हैं, घरेलू उपयोग में आने वाले ढेरों बर्तन। इन रद्दी कागजों को इस तरह आकार देकर महज आठ साल की ऋषिका श्रीवास्तव आर्टीफिशियल गमले,
प्रस्तुति - जागरण सुबह से शाम तक भागदौड़ करने में हमारे पैर सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। 28 हड्डियों और 35 जोड़ों से मिलकर बना पांव एक इंसान की पूरी जिंदगी में लाखों किमी की दूरी तय करता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके पांव पूरी जिंदगी यूं ही साथ निभाते रह
आपका पैसा आपकी मेहनत है। जब आप बाजार में कुछ खरीद रहे होते हैं, तो दरअसल आप अपनी मेहनत के बदले खरीद रहे होते हैं। इसलिए आप चाहते हैं कि बाजार में आपको धोखा न मिले। इसके लिए आप पूरी सावधानी बरतते हैं। लेकिन बाजार तो चलता ही मुनाफे पर है। अपना मुनाफा ब
उद्यमी बनने के लिए धन से ज्यादा जरूरी है आगे बढ़ने की सोच। इसी सोच के साथ मुंबई के राघव गुप्ता ने सीमित संसाधनों से अपना व्यवसाय शुरू करने का प्रयास किया। राघव को आज लोग मिस्टर कार बाथ के नाम से जानते है। दरअसल राघव ने मुंबई वासियों के लिए डोर टू डोर
प्रस्तुति - दैनिक भास्कर - रस्किन बॉन्डइस बात को लेकर हमेशा एक मामूली सा विवाद रहता है कि अपने ऊपरी उद्गम स्थल में वास्तविक गंगा कौन है - अलकनंदा या भगीरथी। बेशक ये दोनों नदियां देवप्रयाग में आकर मिलती हैं और फिर दोनों ही नदियां गंगा होती हैं। लेकिन कुछ
प्रस्तुति - दैनिक भास्करदुर्ग. बेबी बाई के लिए काला अक्षर भैंस बराबर है, वह कभी स्कूल की ड्यौढ़ी नहीं चढ़ी, लेकिन सीमेंट, रेती, गिट्टी का हिसाब पूरा आता है। वह मजदूरों को पेमेंट भी नाप-जोख के हिसाब से कर देती है।दुर्ग की पहली महिला ठेकेदार बेबी बाई
उन्हें ऐसे दौर में करोड़पति किसान होने का तमगा मिला, जब कर्ज और हताशा में डूबे किसानों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं अक्सर सुर्खियों में रहती थीं। हजारों किसानों ने अनुयायी बनकर, तो सरकारों ने सम्मानित करके उनके प्रयोगधर्मी जज्बे को मान्यता दी, यद्यपि
प्रस्तुति - भास्करउदयपुर. शहर में धर्मपुत्र ऐसे बुजुर्र्गो की सेवा कर रहे हैं, जिनके बेटे कमाने के लिए उदयपुर से बाहर गए हैं और बेटियां ससुराल चली गई हैं। यह सेवा नि:शुल्क नहीं है। बुजुर्ग की सेवा के अलावा धर्मपुत्र किसी के भी घर इमरजेंसी में दवाई
प्रस्तुति - जागरण अगर आप एटीएम से रुपये निकालने गए और रुपये तो निकले नहीं, लेकिन आपके खाते से राशि काट ली गई। इसके बाद आप अपनी रकम के लिए बैंक के चक्कर लगाते हैं। एटीएम में गड़बड़ी से होने वाली ऐसी परेशानी से ग्राहकों को बचाने के लिए रिजर्व बैंक [आरबीआ