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31 Dec 2009
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ज़रा एक नज़र इधर भी

कोई ब्लॉगर साथी इसका तर्जुमा हिन्दी में कर दे तो मेहरबानी होगी। इस प्रविष्टी का ब्लॉग जगत ही नहीं दूसरी जगहों में भी पढ़ा जाना नितांत आवश्यक है। ये शोभा डे द्बारा लिखित 'Bombay Times' में छपा लेख है जो मुझे ई-मेल के ज़रिये मिला। हालांकि लेखिका के कथा स
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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आएन्स्टाइन और मानवीय सौहार्द

अपने भावुकता के क्षणों में एक महान वैज्ञानिक के विचार आपके सम्मुख रखना चाहता हूँ। पेश है- "St r ange is our situation here on Earth. Each one of comes for a short visit, not knowing why, yet sometimes seeming to divine a purpose. From the standpoint
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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सपना और शुरुआत

स्व. वेणुगोपाल जी की ये पंक्तियाँ बहुत दिनों से दिमाग़ में गूँज रही थीं। सोचा आप सभी से बांटता चलूँ। "न हो कुछ भी, सिर्फ़ सपना हो, तो भी हो सकती है शुरुआत। और ये शुरुआत ही तो है, कि वहाँ एक सपना है। "
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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चल राज ठाकरे घर आपनो

एक ई-मेल आया, जिसे हू-ब-हू आपके सामने रख रहा हूँ। भेजने वाले की मंशा सामाजिक चेतना जागृत करने की है, पर मैं नहीं जानता कि बेहया मोटी खालों में ऐसी सूई चुभेगी या नहीँ। यद्यपि ये बातें गूढ़ नहीं हैं, फिर भी तार्किक और विचार्णीय हैं। मुलाहिज़ा हो - This i
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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जिन्ना, राज ठाकरे, तोगड़िया, शाहबुद्दीन जैसे लोग और धार्मिक ग्रन्थ.

क्षमा, अहिंसा, आपसी सद्‍भाव वग़ैरा वग़ैरा मानवीय संवेदना से उपजे भाव हैं. इन्हे सीखने या समझने के लिए किसी क़ुर'आन, वेद, गीता या बाईबल की ज़रूरत नहीं है. इन ग्रंथों की सार्थकता तब रही होगी जब ये ४५०० साल से लेकर १५०० साल पहले तक लिखे गये थे, आज नहीं
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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कॉंग्रेस के राज्य में नेहरू का कबूतर

एक सफ़ेद कबूतर, उसके दो पर, एक इधर, एक उधर। दो व्यक्ति, पहने हुए, सफ़ेद धोती, सफ़ेद कुर्ता, सफ़ेद टोपी, एक सफ़ेद कबूतर के इधर, एक उधर, नोचने को तैयार, सफ़ेद कबूतर के पर। अगली सुबह, सफ़ेद कबूतर माँग रहा था प्राणों की भीख, बेचारा चिल्लाय भी तो कैसे, चि
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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हम और हमारा 'बुर्क़ा'

हिन्दुस्तान के विभाजन के वक़्त हिंदू मुस्लिम के बीच भड़के दंगों में दस लाख लोग मारे गये और पंद्रह लाख लोग बेघर हुए। मारने वालों और मरने वालों का सिर्फ़ एक कारण था - 'धर्म'। उन्हे विभाजित करने वालों के सिरों पर सिर्फ़ एक 'लेबल' था - 'धर्म'। क्या हम वा
 
हर्ष प्रसाद
Dec 29 2009 11:46 AM
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उल्लुओं से क्षमा याचना सहित...

एक पुरानी कहावत है कि 'जिस बाग़ में एक भी उल्लू डेरा डाल ले वो बाग़ सूख जाता है'। एक शेर अर्ज़ है - बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है,हर शाख़ पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा.
 
हर्ष प्रसाद
टैग: पंडित
Aug 23 2009 12:16 PM
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डॉ कलाम और शाहरुख़ खान

हालाँकि ये मुद्दा पुराना हो चुका है फिर भी....कह रहा है दरिया से समंदर का सुकूत,जिसका जितना ज़र्फ़ है उतना वो ख़ामोश है।( सुकूत - ख़ामोशी, ज़र्फ़ - सामर्थ्य, दिमाग़, क़ाबिलियत )- इक़बाल
 
हर्ष प्रसाद
Aug 19 2009 10:37 PM
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बाँके बिहारी

ऐ बाँके बिहारी, आओ, लोग आपस में लड़ कर मर रहे हैं. उनमे से बहुत से हैं जो तुम में आस्था रखते हैं, और जिन्हें कोई भी आस्था बचा नहीं पा रही. बहुत से जो बचा लिए जा रहे हैं, उनसे तुम्हारा कोई लेना देना नहीं, न बचने वालों का, न बचाने वालों का. ऐसा क्यों हैं
 
हर्ष प्रसाद
Aug 14 2009 01:06 AM
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मुक्ति

सलाख़ों को हम गुलबदन देखते हैं, नवा-ए-बलाबिल सुख़न देखते हैं, ख़यालात-ए-पैहम की ये ख़ुशख़रामी?कफस में फ़ज़ा-ए-चमन देखते हैं.- हर्ष( गुलबदन - फूलों जैसी नर्म, बलाबिल - बुलबुल का बहुवचन, नवा-ए-बलाबिल - पिंजरे में बंद पक्षियों का आर्त्तनाद, सुख़न - काव्य,
 
हर्ष प्रसाद
Aug 11 2009 10:37 PM
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धर्म और स्वामी विवेकानंद

जिस सर्वाधिक विरोधाभासी, तर्कहीन बकवास का दुनिया भर में प्रचार किया गया है, वो केवल एक भ्रमित पागल दिमाग़ का स्वाभाविक शब्दजाल है जो उसे प्रेरणा की भाषा में पारित करना चाहता है' - स्वामी विवेकानंद
 
हर्ष प्रसाद
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एकाँत - मेरी कुछ तसवीरें

ये ना सुबह-ए-बहाराँ है, ना है शाम-ए-फिर्दौस ( सुबह-ए-बहाराँ - वसंत प्रभात, शाम-ए-फिर्दौस - स्वर्ग संध्या)
 
हर्ष प्रसाद
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आए कुछ अब्र...

आए कुछ अब्र, कुछ शराब आए, उसके बाद आए जो अज़ाब आए. - फैज़ अहमद 'फैज़' ( अब्र - बादल, अज़ाब - मुसीबत)
 
हर्ष प्रसाद
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बारिश और तुम

आवारा बादलों की कादंबिनी का, मेरे चेहरे को सहलाती, नर्म फुहारों की नमीं का, एक नाम ढूँढ निकाला, तुम.
 
हर्ष प्रसाद
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इतनी बहस बुर्क़े पर

मैं फिर अपना शेर दोहराता हूँ - न जाने कुफ्र-ओ-ईमां की कहाँ जाकर हदें छूटें, चलो ढूँढें नया कोई अमीर-ए-कारवाँ अपना। ( कुफ्र-ओ-इमाँ - आस्तिकता और नास्तिकता , हदें छूटें - सीमाओं से बाहर आयें, अमीर-ए-कारवाँ - नेतृत्व करने वाला, कारवाँ की अगुवाई करने वाल
 
हर्ष प्रसाद
टैग: आज़ादी
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शाम

सरे शाम ख़ुर्शीद ढलने का आलम, वो चिड़ियों कि जाती चहक धीमे धीमे। - हर्ष
 
हर्ष प्रसाद
Jun 21 2009 12:04 PM
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मेघदूत का झांकता सूरज

किसी काम के सिलसिले में महाबलेश्वर गया था। वहाँ पहुँच कर काम धाम तो भूल गया अपने कमरे से इस प्राकृतिक छटा का आनंद लेने लग गया... अपनी ली हुई तस्वीरें आप सभी से बाँटना चाहता हूँ । अनायास ही 'मेघदूत' के यक्ष की पीड़ा हूक बन कर उठती है... यक्ष मेघ से कह
 
हर्ष प्रसाद
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मेरी शंकाएँ

हममें से बहुतों के धर्म के स्रोत और उसकी उत्पत्ति के प्रति अपने अपने सिद्धांत और मत हैं। ये मत कहाँ से उत्पन्न हुए और मानव संस्कृति ने इन्हें क्यों ग्रहण कर लिया? कुछ तो है जो हमें इन धार्मिक धारणाओं से मिलता है, जैसे, ढाढ़स, आश्वासन, तसल्ली, धैर्य, द
 
हर्ष प्रसाद
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टिप्पणियों पर टिप्पणी

की एक प्रविष्टि ' हमारे देवी-देवताओं के जननेंद्रिय नहीं होते ' पर की गयी टिप्पणियों पर एक टिपण्णी. मेरे प्रश्न श्री रजनीश परिहार और डॉ अनुराग जी की टिप्पणी से उपजे हैं। मुझे सच्चिदानंद जी के मौलिक काव्य ( जिस पर विभा जी ने बेहद सार्थक लेख लिखा है) के
 
हर्ष प्रसाद
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क्या है किसी अबोध बच्चे का धर्म?

कहीं किसी वक़्त बात करते करते मेरे मुंह से किसी एक बच्चे के लिए निकल पड़ा कि 'फलां फलां का illegitimate child (अवैध संतान) है'। मेरे बड़े भाई ने टोका 'बच्चा illegitimate (अवैध) है या उसके माँ बाप? ख़बरदार जो कभी किसी बच्चे को illegitimate (अवैध) कहा।
 
हर्ष प्रसाद
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साम्राज्यवाद और आज का भारत

साम्राज्यवाद की दलाल भारत सरकार बेशक़ लगातार ये दावा करती रही है कि वैश्विक महामंदी का असर अपने देश पर नहीं पड़ने दिया जायेगा, मगर भारत सरकार के ही श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2009 तक क़रीब 15 लाख लोग सूचना प्रौद्योगिकी, निर्यात उद्योग त
 
हर्ष प्रसाद
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तुम कौन हो? एक आज़ाद नज़्म

तुम कौन हो? तुम कौन हो, जो दबे पाँव आकर, चुपके से, मेरे कानों में कुछ कह जाती हो? फिर मैं, जैसे मौज-ए-आवारा कोई, वुस्सअ'त-ए-दरिया की संजीदः रवानी में बह जाती हो। तुम कौन हो? तुम कौन हो, इसी ख़याल से, सजता रहे आहंग-ए-नज़्म, कटता रहे हस्ती का सफ़र। मगर
 
Harsha Prasad