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अमाँ यार.....

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11 Jun 2010
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हुस्न की तारीफ़ भी इक फन है...

ये चांदनी रूखे-रौशन से आती है या तुम्हारे पैराहन से आती हैसितारों का नूर तुम पर बरसता है दिल में आवाज़ यहाँ छन से आती है उसी खुशबू से मुअत्तर हैं जुल्फें जो उरूसे शब के बदन से आती है तुम्हारा अक्स दिल में जब उभरता है रौशनी याद के रौज़न से आती है हुस्न की
 
हिमांशु बाजपेयी
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वाजिद अली शाह अख्तर के दुर्लभ शेर

आज जाने-आलम वाजिद अली शाह "अख्तर" के दो शेर आपकी खिदमत में पेश कर कर रहा हूँ। ये लखनऊ वालों के लिए अपने आखिरी नवाब की यादगार है जबकि उन लोगों को एक जवाब है जो जाने-आलम को एक विलासी नवाब भर समझते हैं। ज़रा इसके काफिए पर गौर करियेगा । उस दौर में उस्तादों
 
हिमांशु बाजपेयी
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शहरे-वफ़ा के नाम

यहाँ पहले आप हैपूरे जहाँ में होड़ है,आज भी लखनऊ काकहाँ कोई जोड़ है !!************************लखनऊ जो समझना है ज़रा पास आइयेइस काम के लिए बतौरे-ख़ास आइयेगोमतीनगर में लखनऊ मिलता नहीं हुजूरअमीनाबाद, चौक और नक्खास आइयेहिम लखनवी
 
हिमांशु बाजपेयी
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ग़ालिब दीवाने थे क्या ?

आज अचानक दाग देहलवी का एक जाना पहचाना मकता कान में पड़ा तो भोपाल की कुछ यादें ताज़ा हो गयीं ...शेर कुछ यूं है- है खेल नहीं दाग,यारों से ये कह दो के आती है उर्दू जुबान आते-आते भोपाल में माखन लाल विश्वविद्यालय में हमारे एक सहपाठी हुआ करते थे । एक दिन जनाब
 
हिमांशु बाजपेयी
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मयंक की याद में ..

हमारे फोटोजर्नलिस्ट साथी स्व मयंक की याद में उत्तर प्रदेश फोटोजर्नलिस्ट संघ ने एक फोटो प्रदर्शनी लाल बारादरी में लगाईं थी। आयोजकों का फ़ोन मुझे आया जो मयंक पर लिखा मेरासंस्मरण वहां आदमकद करके लगाना चाहते थे। मैंने मंज़ूरी दे दी। उन्होंने मुझसे कहा आप भी
 
हिमांशु बाजपेयी
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सिन्फे नाज़ुक की शहरे-वफ़ा आमद...

इमामबाड़े परफ्रेंच विद्वान् जिल के साथइमामबाड़े पर भूलभुलैया में नवाबी दौर के साथनवाब जाफर साहब का दौलतखाना नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह की नशिस्त में नवाब और गुलाब
 
हिमांशु बाजपेयी
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मैं जिसको ढूँढता हूँ, वो लखनऊ कहाँ है

माना बहुत हंसी है, माना बहुत जवां है मैं जिसको ढूँढता हूँ, वो लखनऊ कहाँ है यादों की सरज़मी है, ख़्वाबों का आसमां है बस्ती है नवाबों की, शहरे सुखन-वरां है सब कुछ है जैसे फिर भी हर शै धुंआ-धुंआ है मैं जिसको ढूँढता हूँ वो लखनऊ कहाँ है इक्के हैं अब न तांगे
 
हिमांशु बाजपेयी
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तुमने जितनी समझी उससे,मेरी कीमत ज्यादा थी

तुमने जितनी समझी उससे,मेरी कीमत ज्यादा थीजितनी मैंने मांगी थी क्या उतनी मुहब्बत ज्यादा थीहीरे मोती ला पाता, तो शायद तुम मेरे होतेसीमो-ज़र कम थे लेकिन दिल की दौलत ज्यादा थीभूल गया हूँ ज्यादातर पर कुछ लम्हे याद आते हैंमुझसे तुम्हे तकल्लुफ था और गैर से
 
हिमांशु बाजपेयी
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वाजिद अली शाह"अख्तर" और जावेद अख्तर !!!

१९९६ में आई श्याम बेनेगल की फिल्म सरदारी बेगम में एक ठुमरी है जिसे आशा भोसले जी और आरती ने गाया है। बोल हैं - मोरे कान्हा जो आए पलट के, अब के होली मैं खेलूंगी डट के। आप में से जो लोग लोक संगीत या अच्छे फिल्म संगीत का शौक रखते होंगे वो इस ठुमरी से अनजान
 
हिमांशु बाजपेयी
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थोडा बहुत ही सही लखनऊ बाकी है...

खानाबदोश पाते थे मंजिल कभी यहाँ सजती थी शबोरोज़ महफ़िल कभी यहाँ मुल्क के फलक पे कभी आफताब था तहज़ीब का शहर ये कभी लाजवाब थाउस सुनहरे दौर की खुशबू बाकी है थोडा बहुत ही सही लखनऊ बाकी है सीखते थे बोलना, अहले जहां यहाँ मिलते आज भी बहुत शीरीं ज़ुबां यहाँ माना
 
हिमांशु बाजपेयी
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जहाँ भी तू रहे लेकिन ख़ुशी के साथ रहे

ये मानता हूँ हर एक बार याद आएँगे ये मानता हूँ सरे दार याद आएँगे तेरे वो फूल से रुखसार याद आएँगे तेरे वो गेंसू-ए- खमदार याद आएँगे बजाई जाएगी ढोलक सजाई जाएगी तू किसी सजी हुई महफ़िल में लाइ जाएगी तू मेरी निगाह से यक्सर बचाई जाएगी तू किसी के सेज की जीनत बनाई
 
हिमांशु बाजपेयी
Mar 26 2010 01:16 PM
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मौत रोज़ निवाले बदलती रहती है...

(कुछ रोज़ पहले हमारे बहुत अज़ीज़ मित्र और साथी फोटोजर्नलिस्ट मयंक का सड़क दुर्घटना में दुखद निधन हो गया। मयंक के निधन की खबर सुनी तो उससे जुड़े संस्मरण याद आ गए...)समय चाहें कितना भी तेज़ दौड़े मन चुनिन्दा लम्हों को अपने आप में कैद करने का हुनर जानता है.ये
 
हिमांशु बाजपेयी
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मुझसे बंधन क्यों बांधा था जो मेरा विश्वास नहीं था ?

मुझसे बंधन क्यों बांधा था जो मेरा विश्वास नहीं था ?चार दिवस ही बीते हमको पास विह्वलता से आए एक दूजे का ह्रदय टटोला संग-संग सकुचे मुस्काए तेरी इस निर्ममता का मुझे कोई आभास नहीं था मुझसे बंधन क्यों बांधा था जो मेरा विश्वास नहीं था ? तुमको अपने मन की बात
 
हिमांशु बाजपेयी
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अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आनासिर्फ अहसान जताने के लिए मत आनामैंने पलकों पे तमन्‍नाएँ सजा रखी हैंदिल में उम्‍मीद की सौ शम्‍मे जला रखी हैंये हँसीं शम्‍मे बुझाने के लिए मत आनाअब अगर आओ तो जाने के लिए मत आनाप्‍यार की आग में जंजीरें पिघल सकती हैंचाहने वालों
 
हिमांशु बाजपेयी
Feb 26 2010 11:30 AM
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अरसे बाद, खिताबे-दोस्ती...

दोस्ती का तज़किरा अय्यार से न होगा, तेरा बयां रिवायती मेयार से न होगा,बहुत चापलूस है ये लखनवी शायर,तेरी अज़मतों का जि़क्र खा़कसार से न होगा । ये जादु-ए-सुख़न तेरे ऊपर न चलेगा,बाकियों पे जो चला तुझ पर न चलेगा,मै ज़र्रा-ए-ज़मीन हूं तू शम्स-ए-आसमां,कितना भी
 
हिमांशु बाजपेयी
Feb 24 2010 12:28 PM
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गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं ...

गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत शुभकामनाएं। इधर काफी दिनों से कुछ लिख नहीं पाया। नौकरी बदल रहा था, मसरूफियत ज्यादा थी। अब सब कुछ सामान्य है आप सबसे मुलाक़ात होती रहेगी।
 
हिमांशु बाजपेयी
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दोस्त तुम्हे दूं क्या उपहार ?

तीन जनवरी को मेरे सबसे प्यारे दोस्तों में से एक अर्पिता का जन्मदिन था। अर्पिता मुंबई में टीवी १८ समूह की पत्रकार हैं। सालगिरह पर तोहफा देने का रिवाज़ पता नहीं कितना पुराना है । अक्सर बिना ये बताये की तोहफे में क्या दिया जा रहा है , तोहफा दिया जाता है
 
हिमांशु बाजपेयी
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लखनऊ के गैर मुस्लिम मर्सियानिगार

पिछले मुहर्रम पर मैंने लखनऊ के मुहर्रम पर कुछेक पोस्ट लिखीं थीं तब गुरुदेव मयंक सक्सेना की फरमाइश आई थी की लखनऊ के गैर - मुस्लिम मर्सिया निगारों पर भी कुछ लिखा जाए । उन्हें ऐसा लगता है की नाचीज़ इन विषयों की बेहतर जानकारी रखता है । गुरुदेव का लगना कि
 
हिमांशु बाजपेयी
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बॉलीवुड-2009

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए साल 2009 एक ठीक-ठाक साल ही कहा जाएगा. बड़ी हिट्स के लिहाज से ये साल कुछ खास नहीं रहा. जिन फिल्मों ने सबसे ज्यादा कमाई की वे भी ब्लाक बस्टर की श्रेणी में नहीं रखी जा सकती. साल के अंतिम दिनों में पा और थ्री ईडियट्स से उम्मी
 
हिमांशु बाजपेयी
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ईमां मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र...

सालगिरह के दिन ( २७ दिसंबर ) मिर्ज़ा असदुल्लाह ग़ालिब को याद करने की वजह सिर्फ इतनी नहीं की हिन्दुस्तानी अदब के हज़ारों शैदाई उन्हें खुदा - ए - सुखन के खिताब से नवाजते हैं . हकीकी मायनों में मिर्ज़ा ग़ालिब मुल्क में शायर और शायरी दोनों के पर्याय हैं . ये
 
हिमांशु बाजपेयी
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नौशाद साहब की सालगिरह पर !!

भारतीय फिल्म संगीत में नौशाद का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। नौशाद हिन्दी सिनेमा के उन पहले संगीतकारों मे से हैं जिन्होने फिल्म संगीत मे लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत की त्रिवेणी बहायी। 25 दिसंबर 1919 को लखनऊ के एक रिवायती परिवार में जन्में नौशाद के घर
 
हिमांशु बाजपेयी
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पा...

कल रात भोपाल के ज्योति सिनेप्लेक्स में पा देखी। बच्चन साहब परदे पर आये और पहले सीन में ही रुला दिया। ( औरो- २ की आवाज़ के बीच अवार्ड लेकर झूमने का शॉट याद करें।) मुझे जानने वाले ये बात कह सकते हैं फिल्में देखते वक़्त मैं आदतन रोता हूँ इसलिए मेरे रोने
 
हिमांशु बाजपेयी
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तेरे जाने के बाद-2

तेरे जाने के बाद कई रोज़ तक बहते रहे थे मेरे आंसू और कविता फिर एक दिन मैं रोया लेकिन आंसू नहीं आये और आज कविता भी कागज़ पर नहीं उतरी
 
हिमांशु बाजपेयी
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क्रिकेट,किताब और राजनीति

अपनी बेबाक बयानी के लिए मशहूर भारतीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन शहरयार खान के साथ मिल कर एक किताब लिखी है। ये किताब भारत-पाकिस्तान क्रिकेट के साठ सालों के सफ़र की पड़ताल करती है। ल
 
हिमांशु बाजपेयी
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जीना यहाँ मरना यहाँ...

शोमैन राजकपूर अगर आज भारतीय सिनेमा के शिखर पर काबिज़ हैं तो इसका राज़ उनकी ज़िन्दगी के शुरूआती दौर के इर्द-गिर्द घूमता है। 14 दिसंबर 1924 को पेशावर में जन्मे रणबीर राजकपूर से बचपन में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर ने कहा था की राजू बेटा नीचे से शुरू करोगे
 
हिमांशु बाजपेयी
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क्रिकेट के धर्मग्रन्थ की कहानी

में जॉन विजडन ने जब अपने नाम पर क्रिकेट के आंकड़ों को संजोती एक छोटी सी पत्रिका शुरू की थी तो उन्हें शायद ही अंदाजा रहा हो की वो तारीख के पन्नों पर एक नयी इबारत रच रहे हैं। ससेक्स की तरफ से एक सफल क्रिकेट करियर से विदाई लेने के बाद उन्होंने इसे अपनी द
 
हिमांशु बाजपेयी
Dec 13 2009 06:32 AM
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आप इन पंक्तियों से कितना सहमत हैं ?

अभी- अभी एक उम्दा पंक्ति पढ़ी -"A man never knows how to say goodbye; a woman never knows when to say it ." बेहद सच्ची। इससे पहले बच्चन जी की आत्मकथा में भी एक दिल में उतर जाने वाली पनकी पढ़ी थी- "पुरूष के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन तभी आते हैं जब क
 
हिमांशु बाजपेयी
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अब न रही वो मधुशाला...

ये महान दृष्य है/चल रहा मनुष्य है/अश्रु स्वेद रक्त से/लथ-पथ,लथ-पथ,लथ-पथ... हरिवंश राय बच्चन ने ये पंक्तियां एक अर्सा पहले जिंदगी के लिए इंसानी जद्दोजहद पर लिखीं थी। बच्चन जी चले गए लेकिन अग्निपथ पर आदमी की यात्रा अभी भी जारी है। ये बात अलग है कि आम आ
 
हिमांशु बाजपेयी
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तेरे जाने के बाद...

तेरे जाने के बाद मैं ढूंढता रहा कई अनकहे सवालों के जवाब तेरे जाने के बाद मेरी उदासी ने रचे कई तपते हुए अक्षर जिन्हें कह न सकने का दर्द सुलगता रहा मेरे सीने के भीतर तेरे जाने के बाद मैं बांटता रहा मोहब्बत सबको, तेरे बहाने रोज़ की डाक में ढूंढे तेरे ही
 
हिमांशु बाजपेयी
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मुनव्वर राणा से एक मुलाक़ात

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई/मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई ... ये मकबूल अशआर हैं आज के दौर के मशहूर-ओ-मारूफ़ शायर मुनव्वर राना के। अपनी रिवायत के ज्यादातर हिस्से में जो ग़ज़ल महबूब से गुफ्तगू का एक जरिया भर नज़र आती है व
 
हिमांशु बाजपेयी
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जन की सत्ता का स्तम्भ ढहा

प्रभाष जी चले गए । सचिन और क्रिकेट के दीवाने से टीम इंडिया की ऐसी रुसवाई देखी नही गई । सचिन जब आउट होता है और इंडिया हार जाती है तो क्रिकेट प्रेमी अक्सर दर्शक दीर्घा या कमरा छोड़ जाते हैं । प्रभाष जी दुनिया ही छोड़ गए । अगर वो होते तो निश्चित तौर पर सच
 
हिमांशु बाजपेयी
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जन्मदिन मुबारक शाहरुख !

किंग खान के नाम से मशहूर शाहरुख खान की बादशाहत फ़िल्मी दुनिया की रंगीनियों से लेकर फैन्स के दिलों की वादियों तक शिद्दत से कायम है। समकालीन हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े नुमाइंदों में से एक शाहरुख अपनी फिल्मों में ज्यादातर मुहब्बत के नाज़ुक रूमानी अहसासों म
 
हिमांशु बाजपेयी
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डेविड शेफर्ड की अम्पायरिंग याद है ?

मंगलवार को क्रिकेट की दुनिया में एक लम्बी खामोशी छा गयी। २२ साल तक अहम् मौकों पर अपने सधे हुए फैसलों से इस खेल के रोमांच को चरम पर पंहुचाने वाले पूर्व अंपायर डेविड शेफर्ड का निधन हो गया। घंटों तक मैदान पर एक ही मुद्रा में खड़े रहना कईयों को उबाऊ लग सक
 
हिमांशु बाजपेयी
Nov 17 2009 11:17 PM
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धर्म के कुँए में स्वतंत्र चिंतन की पालथी !

धर्म और स्वतंत्र चिंतन के सिलसिले की इस बहस में मेरा तर्क था की जब हम स्वतंत्र चिंतन की बात धर्म के परिप्रेक्ष्य में करें तो इसके केंद्र में यही बात रहनी चाहिए की आपका चिंतन धर्म के अवांछित पेचोखम में न उलझे, वरना आपका चिंतन भी उस मुसलसल ज़ंजीर की एक
 
हिमांशु बाजपेयी
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बिना कुछ कहे...

मैं बेफिक्र होकर सोया हुआ था तेरे नर्म ख्वाबों में खोया हुआ था खुदा जाने फ़िर क्या ज़रूरत हुई बिना कुछ कहे तू जो रुखसत हुई मुझे लग रहा था के लौट आएगी इस तरह तू क्यों चली जायेगी मैं पूरा यकीं तुझपे रखता रहा मुसलसल तेरी राह तकता रहा अपने मुकद्दर से दम भर
 
हिमांशु बाजपेयी
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साथी हमें अलग होना है...

ज़िन्दगी ज्यादातर गर्मियों की उमस भरी रात की तरह ही रहती है। कोई हरकत नही,कोई बरकत नही। ऐसे में हवा का एक झोंका भी बड़ी राहतें लेकर आता है। राहत से भी कुछ ज्यादा। बहुत ज्यादा। ये झोंका बिल्कुल ताज़ा है। भोपाल में पत्रकारिता विश्वविद्यालय के अन्दर-बाहर
 
हिमांशु बाजपेयी
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ऐश्वर्या की सालगिरह !

आज बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत अदाकारा ऐश्वर्या राय बच्चन की सालगिरह है। 1 नवम्बर 1973 को जन्मी ऐश्वर्या ने अपने करियर में ऐसे कई मकाम हासिल किये हैं जो आने वाली पीढियों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। 1994 में पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरती का परचम लहराने वा
 
हिमांशु बाजपेयी
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लखनवी तहजीब से ताज़ा मुलाक़ात

पिछले दिनों दिवाली के त्यौहार पर लखनऊ के नूर से नहाने के बाद नौकरी के लिए भोपाल वापस लौट रहा था। मंगलवार का दिन था । चारबाग स्टेशन के जिस हिस्से को रिवायती बोलचाल में छोटी लाइन कहा जाता है वहां से लखनऊ-एलटीटी एक्सप्रेस पर सवार हुआ। एस-४ बोगी में रिज़
 
हिमांशु बाजपेयी
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नही मानेगी वो अब...

सुर्ख गालों पे भंवर आज भी आते होंगे उस हँसी पर कई मर आज भी जाते होंगे जबीं को अब भी कोई जुल्फ सताती होगी ज़हनो-दिल में कई अरमान जगाती होगी उन निगाहों के दिए आज भी जलते होंगे अब भी आंखों में कई दर्द मचलते होंगे अब भी पलकों में कोई ख्वाब सजाया होगा खुश
 
हिमांशु बाजपेयी
Oct 14 2009 07:36 PM
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पत्रकारिता का प्रशिक्षण ज़रूरी

पिछले कुछ दिनों में मीडिया के क्षेत्र में आई क्रांति ने युवाओं के लिए इस क्षेत्र में भी करियर बनाने के अवसर खोले हैं. जिसके चलते पत्रकारिता जैसे अपारंपरिक विषय की भी पढाई के लिए तमाम शिक्षण संस्थाएं खुल गयीं हैं जो की प्रबंधन,इंजिनीयरिंग आदि की भांति
 
हिमांशु बाजपेयी