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साहित्य शिल्पी

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हिन्दी साहित्य का आदिकाल - अजय यादव

हिन्दी साहित्य के इतिहास की प्रथम अवस्था को विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग नाम दिये हैं। जार्ज ग्रियर्सन इसे चारणकाल कहते हैं तो मिश्रबंधु प्रारम्भिक काल; आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इसे वीरगाथाकाल कहा तो आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने आदिकाल; राहुल
 
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May 27 2010 08:35 AM
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एक किस्सागो से मुलाकात [संस्मरण] - रूपसिंह चंदेल

संस्मरणों की इस श्रृंखला में मैंने कुछ बड़े साहित्यकारों पर लिखा है और उन लोगों पर भी जिनका साहित्य से दूर का भी रिश्ता नहीं था। जिन साहित्यकारों पर लिखा उन्होंने किसी न किसी रूप में मुझे प्रभावित किया और दूसरे लोगों की मेरे जीवन में कुछ स्मरणीय भूमिका
 
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लघुता में गुरुता 'सलिल', अलंकार है अल्प. [काव्य का रचना शास्त्र: ६२] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

जब कवि लघुता या अल्पता का वर्णन इस तरह करे कि उसमें हीनता के स्थान पर चमत्कार की प्रतीति हो तो वहाँ अल्प अलंकार होता है. इसमें अत्यंत छोटे अधर से भी आधेय का वर्णन किया जाता है.लघुता में गुरुता 'सलिल', अलंकार है अल्प.क्षुधा न हरती प्रचुरता, तृप्ति दे सके
 
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साहित्य शिल्पी पर प्रकाशित नवीनतम रचनाएं

साहित्य शिल्पी पर प्रकाशित नवीनतम रचनाएं हमारी नई वेबसाइट http://www.sahityashilpi.in/ पर उपलब्ध।
 
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उनकी ख़ैरो-ख़बर नही मिलती [ग़ज़ल] - डॉ. कुमार विश्वास

आज जाने माने कवि और मंच-संचालक डॉ. कुमार विश्वास का जन्म-दिन है। साहित्य शिल्पी परिवार उन्हें इस अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं देता है। इस मौके पर आज प्रस्तुत है उनकी एक खूबसूरत ग़ज़ल:उनकी ख़ैरो-ख़बर नही मिलतीहमको ही खासकर नही मिलतीशायरी को नज़र नही
 
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Feb 10 2010 12:00 PM
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आकाश की आत्मकथा[कविता]- जयप्रकाश मानस

नितांत एकाकी नदी हूँ जब कोई न था, जब कुछ भी नहीं रहेगा अंत के बाद भी बहता रहूँगा वह उस दुनिया का सबसे बड़ा भ्रम ही है जिन्हें दीखता है मेरी गोद में सूर्य, चंद्र, सितारे नक्षत्र उनसे भी अलग एकदम अकेला अपने रचयिता का सुनसान के सिवाय कुछ भी नहीं हूँ मैं
 
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महाकवि नीरज से एक संक्षिप्त वार्ता: देवेश वशिष्ठ खबरी

हिन्दी साहित्य में एक युग-पुरुष बन चुके नीरज जी का आज जन्मदिन है। इसी शुभ अवसर पर साहित्य शिल्पी की नई साइट की विधिवत शुरुआत की जा रही है। इस मौके पर हमारे साथी देवेश वशिष्ठ ने नीरज जी से दूरभाष पर बातचीत की। इस दौरान साहित्य शिल्पी को आशीर्वाद स्वरूप
 
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कटी पतंग [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी

------ रचनाकार परिचय:- अभिषेक तिवारी "कार्टूनिष्ट" ने चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग कर रहे हैं। ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के
 
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डॉ. महेंद्र भटनागर के गीतों में अलंकारिक सौंदर्य [आलेख] – आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

जगवाणी हिंदी को माँ वीणापाणी के सितार के तारों से झंकृत विविध रागों से उद्भूत सांस्कृत छांदस विरासत से समृद्ध होने का अनूठा सौभाग्य मिला है. संस्कृत साहित्य की सरस विरासत को हिंदी ने न केवल आत्मसात किया अपितु पल्लवित-पुष्पित भी किया. हिंदी सहित्योद्यान
 
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Feb 07 2010 05:00 AM
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चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा [भाग-11] - अनुवाद एवं प्रस्तुति: सूरज प्रकाश और के पी तिवारी

गतांक से आगे.. [पिछले भाग पढने के लिये यहाँ चटखा लगायें - चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा (पूर्वकथन), चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 1, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 2, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 3, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 4, चार्ल्स
 
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वसंत तो आया है पर [कविता] – लावण्या शाह

रचनाकार परिचय:-लावण्या शाह सुप्रसिद्ध कवि स्व० श्री नरेन्द्र शर्मा जी की सुपुत्री हैं और वर्तमान में अमेरिका में रह कर अपने पिता से प्राप्त काव्य-परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।समाजशा्स्त्र और मनोविज्ञान में बी.ए.(आनर्स) की उपाधि प्राप्त लावण्या जी प्रसिद्ध
 
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बंद मुट्ठी [लघुकथा] - संजय जनागल

श्रवण बहुत ईमानदारी से जिया और मरते दम तक ईमानादारी दिखा गया। अंत समय में भी श्रवण ने दवाईयाँ लेने से मना कर दिया। कहने लगा “इलाज में कमीशन, दवाईयों में कमीशन, लाश लेनी है तो कमीशन। बस कुछ भी देना है तो बंद मुट्ठी दे दीजिए। आखिर, कब तक लोग भ्रष्टाचार में
 
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इक ज़रा सी बात पर [ग़ज़ल] – दीपक गुप्ता

रचनाकार परिचय:-दीपक गुप्ता [का जन्म 15 मार्च 1972 को दिल्ली में हुआ। आप दिल्ली विश्वविद्यालय से कला में स्नातक हैं। आपकी प्रकाशित कृति हैं:- सीपियों में बंद मोती (कविता संग्रह) – 1995; आप की रचनायें देश के सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित व
 
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भाषा की खुशबू [ग़ज़ल] - देवी नागरानी

लोरी सुना रही है हिंदी जुबां की खुशबूरग-रग से आ रही है हिन्दोस्तां की खुशबूरचनाकार परिचय:- 11 मई 1949 को कराची (पाकिस्तान) में जन्मीं देवी नागरानी हिन्दी साहित्य जगत में एक सुपरिचित नाम हैं। आप की अब तक प्रकाशित पुस्तकों में "ग़म में भीगी खुशी" (सिंधी
 
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कथा यू.के. के 15 वर्ष [महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (वर्धा) द्वारा 29-31 जनवरी 2010 को आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (वर्धा) द्वारा 29-31 जनवरी 2010 को आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी – कथा समय 2010 – के अवसर पर एक अनौपचारिक कार्यक्रम में कथा यू.के. के 15 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर कथा यूके की
 
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इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर [कविता] – प्रकाश पंकज

इतनी ऊँचाई न देना ईश्वर कि धरती पराई लगने लगे,इनती खुशियाँ भी न देना, दुःख पर किसी के हंसी आने लगे ।नहीं चाहिए ऐसी शक्ति जिसका निर्बल पर प्रयोग करूँ,नहीं चाहिए ऐसा भाव किसी को देख जल-जल मरूँ ।ऐसा ज्ञान मुझे न देना अभिमान जिसका होने लगे,ऐसी चतुराई भी न
 
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फ़रीदाबाद में हमकलम संस्था की नव वर्ष तथा वसंत विषयों पर संगोष्ठी

फरीदाबाद स्थित डॉ. रेणु राजवंशी के निवास पर हमकलम संस्था की नव वर्ष तथा वसंत विषयों पर संगोष्ठी सपन्न हुई। इस अवसर पर डॉ. रेणु राजवंशी के नये कहानी संग्रह "तमसो मा ज्योतिर्गमय" का लोकार्पण भी किया गया।गोष्ठी का आरंभ करते हुए डॉ. संतोष गोयल नें नव वर्ष पर
 
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बनने का श्रेय..............! [कविता] - जूबी मंसूर

बार- बार बिछुड़ने परसमझाता हूं स्वयं को एक वाक्य से.....रुदन बनने का श्रेय, मिला तेरे विश्वास सेमाना कि, पीड़ा का परिचायक हूँपर साथी भी तो हूँ तेराकारण अकारण आ जानाक्या सम्बन्ध साक्ष्य नहीं मेरानिनाद हूँ टूटे भावों काक्षोभ नहीं मैं साक्ष्य हूँअतीत की
 
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परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.[काव्य का रचना शास्त्र: ४७] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"

जहाँ पर क्रिया को विशेष रूप से प्रकाशित करने या महत्व देने के लिए साभिप्राय विशेष्य या नाम का कथन किया जाता है वहाँ परिकरान्कुर अलंकार होता है.रचनाकार परिचय:-आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा, बी.ई., एम.आई.ई.,
 
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कोई एक पल [कविता] - विजय कुमार सपत्ति

रचनाकार परिचय:-विजय कुमार सपत्ति के लिये कविता उनका प्रेम है। विजय अंतर्जाल पर सक्रिय हैं तथा हिन्दी को नेट पर स्थापित करने के अभियान में सक्रिय हैं। आप वर्तमान में हैदराबाद में अवस्थित हैं व एक कंपनी में वरिष्ठ महाप्रबंधक के पद पर कार्य कर रहे हैं।कभी
 
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छतीसगढ का टेम्पल सिटी शबरीनारायण [आलेख] - प्रो. अश्विनी केशरवानी

महानदी के तट पर स्थित प्राचीन, प्राकृतिक छटा से भरपूर और छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी के नाम से विख्यात् शिवरीनारायण जांजगीर-चांपा जिलान्तर्गत जांजगीर से 60 कि. मी., बिलासपुर से 64 कि. मी., कोरबा से 110 कि. मी., रायगढ़ से व्हाया सारंगढ़ 110 कि. मी. और
 
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सड़कों का लेटनाईट सच [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी

------ रचनाकार परिचय:- अभिषेक तिवारी "कार्टूनिष्ट" ने चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग कर रहे हैं। ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के
 
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चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा [भाग-10] - अनुवाद एवं प्रस्तुति: सूरज प्रकाश और के पी तिवारी

गतांक से आगे.. [पिछले भाग पढने के लिये यहाँ चटखा लगायें - चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा (पूर्वकथन), चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 1, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 2, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 3, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 4, चार्ल्स
 
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मैं दर्द पिया करता हूँ [ग़ज़ल] - डॉ. अनिल चड्डा

मैं दर्द पिया करता हूँ, मर-मर के जिया करता हूँ,फिर भी इस दुनिया को, लहू अपना दिया करता हूँ!सब संगी-साथी छूटे, अपने थे जो वो रूठे,मन में जो बातें आयें, मैं खुद से किया करता हूँ!कोई वक्त न ऐसा आये, तुझको न याद दिलाये,अब तो मैं खुदा के बदले, तेरा नाम लिया
 
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भारत में मशीनी अनुवाद प्रणाली [आलेख] - डॉ. काजल बाजपेयी

अनुवाद चाहे मानव द्वारा किया जाए या फिर मशीन द्वारा दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही होता है- स्रोत भाषा के कथ्य को लक्ष्य भाषा में बदलना। कम्प्यूटर साफ्टवेयर की सहायता से एक प्राकृतिक भाषा के टेक्स्ट या कही गयी बात (स्पीच) को दूसरी प्राकृतिक भाषा के टेक्स्ट
 
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कुछ क्षणिकायें - अवनीश तिवारी

बचपन१.सिर मेरा गोद में ले ,देर तक जुयें निकालती रही ,माँ |२.हर शाम ,टाइम टेबल देख,मेरा बस्ता लगाती,माँ |बदलाव३.शोपिंग माल से झिझक ,उसी पुराने बाजार में,टहलती - खरीदती,माँ |४.मोबाइल के जटिल बटनों में फंसी,गलत नंबर मिलाती ,माँ |समर्पण५ .एक बार कहा आज ठण्ड
 
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मनोज शर्मा की कूची से - 7 [सामयिक कार्टून]

आत्मरक्षा में हत्या चाँद पर मूर्तियाँ पंजाबी सूट शुगरफ्री लड्डू
 
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स्वतन्त्रता-रवि [कविता] - प्रदीप भारद्वाज “कवि”

स्वतंत्रता अम्बर में जो रवि का प्रकाश है .वो भारती, प्रभावती का सुत सुभाष है.वो देश-भक्ति भावना का गहरा सिन्धु था.माँ भारती की वीरता का मान बिंदु था.नरपुंगवों का शौर्य था वीरों का जोश था.शंख पाञ्चजन्य का वो क्रांति-घोष था.अंग्रेजी राज का किया जिसने विनाश
 
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सठिया गया है देश चलो जश्न मनायें [गणतंत्र के साठ वर्ष पूर्ण होने पर - कविता] - राजीव रंजन प्रसाद

गाँधी की नये फ्रेम में तस्वीर सजायें,सठिया गया है देश चलो जश्न मनायें।।हमने भी गिरेबाँ के बटन खोल दिये हैंथी शर्म, कबाड़ी ने रद्दी में खरीदी हैबीड़ी जला रहे हैं अपने जिगर से यारोंये पूँछ खुदा ने जो सीधी ही नहीं दी हैहम अपनी जवानी में वो आग लगाते
 
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सीख [गणतंत्र दिवस पर विशेष लघुकथा] - आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

भारत माता ने अपने घर में जन-कल्याण का जानदार आँगन बनाया. उसमें सिक्षा की शीतल हवा, स्वास्थ्य का निर्मल नीर, निर्भरता की उर्वर मिट्टी, उन्नति का आकाश, दृढ़ता के पर्वत, आस्था की सलिला, उदारता का समुद्र तथा आत्मीयता की अग्नि का स्पर्श पाकर जीवन के पौधे में
 
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वो देस मेरा अँखियों में बसता (प्रवास में देस की मधुर स्मृतियाँ } [गणतंत्र दिवस पर विशेष] - शशि पाधा

मत पूछो क्यों तन मन हँसतापगध्वनि में क्यों साज सा बजताअंग-अंग में थिरकन उठतीअधरों पे मृदु गीत सा सजतामैं अपने देस थी गई सखिवो देस मेरा अँखियों में बसता ।रचनाकार परिचय:-हिंदी और संस्कृत में स्नातकोत्तर शशि पाधा १९६८ में जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय की
 
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जमीर एक आग [कविता] - मोहिन्दर कुमार

रचनाकार परिचय:-मोहिन्दर कुमार का जन्म 14 मार्च, 1956 को पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में हुआ। आप राजस्थान यूनिवर्सिटी से पब्लिक-एडमिन्सट्रेशन में स्नातकोत्तर हैं।आपकी रचनायें विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं साथ ही साथ आप अंतर्जाल पर भी सक्रिय
 
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"प्रवासिनी के बोल"- नारी मन की तड़प का संग्रहित रूप में प्रस्तुतकरण [पुस्तक समीक्षा] - देवी नागरानी

महिलाओं का तू चितवन है सुंदर और सलोना मधुबन है तेरी सोच व शीरीं बातें कितना उनमें अपनापन है तेरे स्नेह स्वरूप ये "बोल" मिले तेरे श्रम का ये दरपन है . डॉ॰ अंजना संधीर ने प्रवासी नारी के अस्तित्व को अनूप और अनोखा सकारात्मक रूप देकर अपने संपादित किये हुए
 
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किलोमीटर से नहीं चलूंगा [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी

------ रचनाकार परिचय:- अभिषेक तिवारी "कार्टूनिष्ट" ने चम्बल के एक स्वाभिमानी इलाके भिंड (मध्य प्रदेश्) में जन्म पाया। पिछले २३ सालों से कार्टूनिंग कर रहे हैं। ग्वालियर, इंदौर, लखनऊ के बाद पिछले एक दशक से जयपुर में राजस्थान पत्रिका से जुड़ कर आम आदमी के
 
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वास्तु पद्धति से भवन निर्माण [आलेख] -इं ० अम्बरीष श्रीवास्तव (आर्कीटेक्चरल इंजीनियर)

आदि काल में मानव का निवास स्थल वृक्षों की शाखाओं पर हुआ करता था | कालांतर में उसमें जैसे-जैसे बुद्धि का विकास होता गया वैसे-वैसे उसने परिस्थिति के अनुसार उपलब्ध सामग्री यथा बांस, खर पतवार, फूस, व मिट्टी आदि का उपयोग करके कुटियानुमा संरचना का अविष्कार
 
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चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा [भाग-9] - अनुवाद एवं प्रस्तुति: सूरज प्रकाश और के पी तिवारी

गतांक से आगे.. [पिछले भाग पढने के लिये यहाँ चटखा लगायें - चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा (पूर्वकथन), चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 1, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 2, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 3, चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा भाग - 4, चार्ल्स
 
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उम्मीदों की फसल फिर-फिर बो रही हैं मंज़िलें. [गीतिका] - आचार्य संजीव वर्मा

उम्मीदों की फसल फिर-फिर बो रही हैं मंज़िलें.साँझ को सोईं सुबह मुँह धो रही हैं मंज़िलें..रचनाकार परिचय:-आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा, बी.ई., एम.आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम.ए., एल.एल.बी., विशारद,
 
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दंगा [लघुकथा] - सूरज प्रकाश

रचनाकार परिचय:- सूरज प्रकाश का जन्म १४ मार्च १९५२ को देहरादून में हुआ। आपने विधिवत लेखन १९८७ से आरंभ किया। आपकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें हैं:- अधूरी तस्वीर (कहानी संग्रह) 1992, हादसों के बीच (उपन्यास, 1998), देस बिराना (उपन्यास, 2002), छूटे हुए घर (कहानी
 
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मदन गोपाल लढ़ा की राजस्थानी कविताएं [हिन्दी अनुवाद]

भाषाखेत के रास्तेमैंने सुनींग्वाले के बांसुरीबांसुरी से याद आईकान्हा की बांसुरीबांसुरी की भाषा कोमान्यता की नहीं जरूरतराग-रंग, हर्ष और दुख कीहोती सदैव एक ही भाषा.***** बच्चे भगवान होते हैं!बच्चा अनजान होता हैरीत-कायदाकब जाने!बच्चा नासमझ होता
 
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Jan 21 2010 12:11 PM
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हिमालय के ग्लेशियरों के 2035 तक पिघलने का सच् [विमर्श तथा"वायस ऑफ इण्डिया" न्यूज चैनल द्वारा राजीव रंजन प्रसाद से बातचीत का वीडियो

सारी दुनिया इस दहशत में जी रही थी कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते 2035 तक हिमालय के सारे ग्लेशियर पिघल जायेंगे। अब यह तथ्य सामने आ रहा है कि हिमालय के ग्लेशियर्स पिघलने की चेतावनी महज अनुमान पर आधारित थी। इस सत्य के सामने आने के बाद वैज्ञानिक अब चेतावनी से
 
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