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चार पहर

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31 Dec 2009
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साध्वी का समर्पण !

राष्ट्रीय राजनीति में समान विचारधारा का हवाला देकर उमा भारती ने आडवाणी के समर्थन का ऐलान किया है. ये कुछ उसी तरह है कि दुश्मन से मुक़ाबले में हारने की सूरत में अहिंसा का दामन पकड़ लिया जाय. वरना क्या मुश्किल थी कि वो इस बार भी अपनी ताक़त पर मैदान में
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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द्रोणाचार्य का ये हाल!

ओलंपिक के दौरान हर सुबह अख़बारों में छपी पदक-तालिका को लोग बड़ी उत्सुकता से देखते हैं. लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है. तब और भी कोफ्त होती है जब युगांडा और इथोपिया जैसे देश हमसे काफी आगे नज़र आते हैं. इसके पीछे की वजह को दुहराने की ज़रूरत नहीं. ल
 
amit kumar
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देशभक्ति का ज्वार-भाटा...

युद्ध का उन्माद आजकल हरतरफ नज़र आ रहा है. पाकिस्तान ने अपनी पलटन सीमाओं की तरफ भेजनी शुरू की..तो भारत में हलचल मच गई. मीडिया ने इस ख़बर को सर आंखों पर उठा लिया. कहीं दोनों देशों की सैनिक ताक़त की तुलना की जाने लगी...तो कहीं ये बताया जाने लगा कि युद्ध
 
amit kumar
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नासमझ कौन है?

लगातार पांचवें हफ्ते महंगाई की दर गिरावट पर है. इस ख़बर ने मनमोहन सिंह को बड़ी राहत दी होगी. विधानसभा चुनाव के नतीजों की वजह से नींद ऐसे भी अच्छी आ रही थी,...अब और सुकून मिला होगा. .पीएम को पहले डर रहा होगा कि कहीं आम लोग बेलगाम क़ीमतों से प्रभावित ह
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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पत्रकारिता के दरबार में सिद्धांतों का चीर-हरण

महाभारत की कहानी सबको याद होगी. युद्धिष्ठिर को धर्मराज कहा जाता था. इसलिए क्योंकि वो सत्यवादी थे, न्यायप्रिय थे,...उनके चारों अनुज एक से बढ़कर एक थे. कोई महाबलशाली तो कोई धनुर्धर. बावजूद इसके इन पांचों की पत्नियां भरे दरबार में नंगी की जाती रही और वे
 
amit kumar
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ये ख़बर थी कुछ अलग...

ये ख़बर थी कुछ अलग,.. हर नज़र ठहर गई रात से सुबह हुई,....शाम यूं ही ढल गई फिर अल्लसुबह से रात तक .. कुछ नहीं बदल सका धुएं की धुंध बीच का मंज़र रहा दबा-दबा.. इस शहर की बानगी...अबके गांव तक पहुंच गई ये ख़बर थी कुछ अलग,.. हर नज़र ठहर गई यूं जो छोड़ के च
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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बिना ब्रेक के ख़बर.....

बहुत दिनों के बाद ये ख़बर बिना ब्रेक के थी. मुंबई पर हुआ आतंकी हमला ख़बरिया चैनलों को उनके सरोकारों की याद दिला गया....बहुत दिनों के बाद पत्रकारों को कुछ करने का संतोष मिला होगा. ये केवल एक आतंकी घटना को कवर करने की बात नहीं थी...ये एक मिशन था. मिशन
 
amit kumar
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ये देश का दर्द है....

राहुल के मुर्दा शरीर को पुलिस के जवान उठाकर लिए जा रहे थे...चुपचाप देख रहा था मैं. मन में उलझन बड़ी थी....लग रहा था नैतिकता के व्यामोह में फंसकर तटस्थ रहने का अपराध कर रहा हूं...अगले ही पल देशहित और एकता की बात याद आई. महाराष्ट्र को देश की गौरवभूमि क
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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ये वानर कौन है?

लोग कह रहे हैं आज विजय दशमी है....तिथियों की गणना इस बात की तस्दीक कर रही है....रावण-दहन की औपचारिकता भी हर साल की तरह है...पर इस बार पता नहीं क्यों....मन से उल्लास नदारद है. मैं बीते रात देखे गए सपने को अब तक नहीं भूल पाया हूं....इसलिए मुझे तो जलने
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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अब तो जागो देश मेरे...

दिल्ली में आतंकियों ने इस बार फूल बाज़ार में बम रखे...फिर हुआ धमाका...आगे की कहानी वही....जो हर बार की है. यही हालत है अपने देश की. आतंकियों के आगे बेबस सी दिखती है सरकार....सलीके से जीने को लेकर गृहमंत्री पर मज़े लेती मीडिया...खुफिया एजेंसियों की बा
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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इस बर्बादी के किरदार ?

हंसने-मुस्कुराने पर वक्त पाबंदी नहीं लगाता,..इसके मौक़े हर जगह हैं. पर कहीं-कहीं चाह कर भी आप हंस नहीं सकते,..विश्वास नहीं होता....तो कोसी के प्रलय से पीड़ित लोगों के पास पहुंचिए...चारों तरफ दर्द ही दर्द. दर्द बहुत गहरा है इसलिए चीख भी ऊंची है. पानी
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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ना ही मोरा गइंठी में एको रूपैया.....

हे जगदम्बा,..तू ही अवलम्बा,..तू ही मोरी भक्ति की सुधि लेवैया,...न ही कोई हित,..न ही परतीत,..न ही मोरा गइंठी में एको रूपैया....ये एक गीत है. नदियों को देवी समझ पूजने वाली बिहार की महिलाएं बाढ़ की इस विपदा में इसे गा रही हैं. अपनों की जान सलामत रखने के
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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ये कैसी राष्ट्रीय आपदा है ?

कभी-कभी ज़िंदगी से मौत बेहतर लगने लगती है. ये वो स्थिति है जब कुछ नहीं सूझता. कोई रास्ता नज़र नहीं आता. सब कुछ बर्बाद होते देखने के बाद जीने की इच्छा ख़त्म होने लगती है. उड़ीसा में साइक्लोन के बाद ज़िंदा बचे लोगों की कहानियां ऐसी ही थीं. तमिलनाडु में
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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आतंकियों का समर्थन करने वालों का क्या होगा ?

सिमी आतंकवादी संगठन नहीं है. ये कहना है देश के दो केंद्रीय मंत्रियों का,..एक हैं रेलमंत्री लालू प्रसाद और दूसरे हैं इस्पात और उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान. लालू राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और रामविलास लोजपा के सुप्रीमो. इनसे अलग एक और नेता हैं,...
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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एक लाइन और जोड़ लीजिए...

राजस्थान की राजधानी जयपुर से चालीस किलोमीटर दूर कालाडेरा गांव में इन दिनों हलचल है. हर विचारधारा के लोग यहां एकजुट दिख रहे हैं. आंदोलन है कोका-कोला के ख़िलाफ. ठंडा मतलब कोका-कोला,..यहां अब लोगों की समझ में नहीं आ रहा बल्कि लोग कह रहे हैं,...बर्बादी म
 
amit kumar
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ख़बर अभी अधूरी है

कोसी के आए उफान ने उत्तर बिहार का नक्शा बदल दिया है. बाढ़ का पानी उतरने दीजिए. तब पूरी हक़ीक़त सामने आएगी. हालात यहां तक कैसे पहुंचे. ये सब जानते हैं. पर तबाही कितनी हुई है...इसके बारे मुकम्मल तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. नदी के किनारों पर आबादी बसती
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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शिबू क्या चाहते हैं ?

झारखंड की राजनीति शिबू सोरेन के बिना अधूरी है. वे प्रदेश के सबसे दिग्गज राजनेता हैं. कितने ही आरोप उन पर लगे...पर उनकी सौम्यता और आम लोगों से उनका सरोकार...सबको उनकी ओर खींचता है. आदिवासी समाज में उनका कद पहले जैसा नहीं...पर शिबू आम राजनेता नहीं बल्क
 
amit kumar
Dec 29 2009 11:54 AM
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आरएसएस ने बीजेपी को रामभरोसे छोड़ा!

बीजेपी में मचे बवंडर को लेकर सबकी निगाहें आरएसएस पर टिकी हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की बहुप्रतीक्षित प्रेसवार्ता पर सबकी नज़र है. लेकिन अगर संघ के अब तक के सफ़र को देखें तो कहीं से नहीं लगता कि मोहन भागवत कुछ भी ऐसा कहेंगे जिससे
 
amit kumar
Aug 28 2009 01:49 PM
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राजनीति में दोस्त कौन ?

सालों तक साथ-साथ चले मुलायम सिंह यादव और आज़म ख़ान के रास्ते अब अलग होते नज़र आ रहे हैं. मुलायम समाजवादी पार्टी के मुखिया हैं और आज़म इसके आला नेताओं में एक. इन आला नेताओं में अमर सिंह भी शामिल हैं. अमर और आज़म दोनों पार्टी के महासचिव हैं....लेकिन दो
 
amit kumar
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..तो क्या जनादेश बेमतलब है?

चुनावी नतीजे अभी नहीं आए हैं लेकिन सरकार बनाने की जोड़-तोड़ शुरू है. जनता किस दल के पक्ष में और किसके विरोध में अपने नतीजे सुनाएगी…ये भविष्य के गर्भ में है लेकिन नेताओं को क़रार नहीं. बड़बोलेपन पर लगाम लग चुकी है. सबकी आवाज़ मुलायम हो गई है ताकि आगे
 
amit kumar
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संघ की नई कमान

मोहनराव भागवत को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सरसंघचालक मनोनीत किया गया है. कुप्पाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन के दायित्व छोड़ने की घोषणा के साथ ही भागवत दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक संगठन के मुखिया बन गए हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बाक़ी संगठनों से एक मायन
 
amit kumar
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जुग जिए से खेले फिर होली...होली है...

होली आ चुकी है...पर हुड़दंग नदारद है. दिल्ली में बिन हुड़दंग के होली देख तो सकता हूं,...पर महसूस करना मुश्किल है. अपने कमरे और फ्लैट तक सिमटी दुनिया में एक दिन की छुट्टी की ख़ुशी..होली की मस्ती पर भारी पड़ती है. इससे ज़्यादा चाह किसी की नहीं. वरना हो
 
amit kumar
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रास्ते और भी हैं

मंदी ने निजी क्षेत्र को सबसे ज़्यादा चोट पहुंचाई है. इसकी मार की वजह से नौकरियों पर तलवार लटकनी स्वाभाविक है,...लेकिन मंदी के बहाने अधिकांश जगहों पर प्रबंधन अपनी गोटी लाल कर रहा है. श्रमशक्ति के इस्तेमाल के लिहाज से हर कंपनी की व्यवस्था सटीक नहीं होत
 
amit kumar
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इसमें शर्म की क्या बात है?

स्लमडॉग मिलेनियर को लेकर कई बातें हो रही हैं. ज्यादातर लोग यही कह रहे हैं कि ये भारत की गरीबी को दिखाने वाली फिल्म है. उनके मुताबिक हिन्दुस्तान के अंधेरे कोने पर ही फिल्मकार का कैमरा केंद्रित रहा है. ये कहना कुछ अजीब सा लगता है कि स्लमडॉग मिलेनियर इस
 
amit kumar
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मैं तो टल्ली हो गया!

वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को चौथी बार टाल दिया गया है. झारखंड को जब राष्ट्रीय खेलों की मेज़बानी मिली थी तो राज्य सरकार ने इसे अपनी उपलब्धि बताया था...लेकिन इस उपलब्धि का ‘बोझ‘ ढोने में वो नाकाम रही. राज्य में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिहाज से आ
 
amit kumar