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या मेरा डर लौटेगा

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06 May 2010
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तुम फिर भी गूगल करोगी

तुम कितना भी गूगल कर लेनातुम्हें मेरा प्रोफाइल नहीं मिलेगाई-मेल आईडी नहीं मिलेगाजिस दिन तुम खुश होगेदुखों की लंबी थकान के बादतुम्हें दुख का यह भी चिह्न नहीं मिलेगामुझे पत्र में लिखकर बताना चाहोगेयह जानते हुए भी कि मेरा पता तुम्हारे पास नहीं हैतुम पत्र
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लिव इन रिलेशन में नहीं थे राधा-कृष्ण

मथुरा। राधा और कृष्ण का अलौकिक प्रेम पहली बार बहस के केंद्र में आया है। लिव इन रिलेशन अदालती बहस के पहले से अस्तित्व में है। समय को कानून की दृष्टि से परिभाषित करने से समाज की अपनी धारा और बदलता वक्त बंधता भी नहीं है। सवाल यह नहीं है कि लिव इन रिलेशनशिप
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उसके चेहरे पर मेरी उंगलियां

एक शाम जब उसके चेहरे परहोती हैं मेरी उंगलियांसमंदर से उगने वाली रातचाहती है किसी तरह मुझसे छू जाए और शाम बनी रहे घर्षण होने तकएक शाम जब उसके सीने परसिर रखकर सुनना चाहता हूं मैं बदलते समय के मासूम सवालों का संगीतरात मेरी जेब में रखी डायरी मेंदर्ज होने की
Mar 01 2010 12:27 AM
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होली में जलना होता है

यह चिड़िया गाते-गाते चुप हो जाती है और मौन में अपनी दुनिया बसाती हैक्या सच सुनाने के लिए भी दुनिया को सुनना पड़ता हैयह चिड़िया उड़ते-उड़तेखड़ी हो जाती है और मुझे गोल-गोल घुमाती हैक्या दुनिया नापने के लिए अपने अंदर चलना होता हैयह चिड़िया चुगते-चुगतेमन के
Feb 26 2010 11:37 PM
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होली में...

मिलाएंगे गला उनसे सरे बाजार होली में ये है नहीं मुमकिन कि वह कर सकें हमें इंकार होली में
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होली में तुम्हारा स्मरण

पिचकारियों के मौसम में और स्मृतियों के धुंधलेपन में मन में कुछ घुलता सा सफेदी के डेले की तरह विस्फोट करता मन में कोई ढूंढता सा नामजद किंतु गुमशुदा दोस्तों को लाल खून से लिखे शिलालेखों पर कुछ उकेरता सा दिन की तरह बेचैनी लेकर और फिर कुछ डूबता सा झुंझला
Dec 29 2009 11:51 AM
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हमारे समय की तस्वीर

ऐसे समय की तस्वीर चाहते हैं हम लोग, जिसमें सभी कुछ हो सभ्य, शालीन और सुसंस्कृत तस्वीर में समय हंस रहा अठखेलियां कर रहा हो बच्चों के साथ बूढ़ों के साथ बैठा हो चारपाई पर समय चाहे हो घर से बाहर पर मुकम्मल तौर पर घऱ लौटता हो जैसे लौटता है गणतंत्र दिवस और
Dec 29 2009 11:51 AM
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आतंकवादी से खेलेंगे बच्चे

बच्चे पूछ रहे हैं आतंकवादी का घर बच्चे जा रहे हैं आतंकवादी के घर बच्चे मिलेंगे आतंकवादी से ऐसा कुछ नहीं करेंगे बच्चे जिससे आतंकवादी डर जायें या कि डर से भर जायें बच्चे चाहते हैं कि आतंकवादी सिहर जायें बच्चे मिलने चले हैं खाली हाथ बच्चे पूछेंगे- तुम म
Dec 29 2009 11:51 AM
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अकेलेपन को बांटता हुआ मिलूँगा

मंद मंद बह रही इस हवा का कोई अतीत तुम्हें याद है जिसके स्पर्श से छत पर अकेले बैठे एक आदमी ने गुनगुनाते हुए मीलों लंबा पत्र लिखा था दुनिया की सबसे पवित्र नदी में स्नान करने के बाद जिसने एक रंग मलना शुरू किया और रंग धुलने के लिए एक बारिश का इंतजार करता
Dec 29 2009 11:51 AM
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मंदी के भूत

धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी गरीबी पैसा कमाने के सपने तो होंगे पर जरूरत नहीं होगी जरूरत पूरी करने की चुभन तो होगी पर एहसास मर जाएगा न्यूज प्रिंटर की तरह धड़ाधड़ बाहर आएंगी जरूरतें चिल्लाएंगी हंगामा करेंगी पर अधूरी जरूरतें पूरी होने वाली जरूरतों का घोंट दे
Dec 29 2009 11:51 AM
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खो रहा हूं मैं

कुछ पाया मैंने और खो भी दिया जिया भोगा चखा-एक एहसास पाला उसे नाम दिया-प्रेम ऐसे ही कि जहां से आया हूं लौटना है उठा हूं डूबना है, सिमेटा है उसे-बिखेरना है उसे नाम दिया परमात्मा तब तुमसे अवांछित शिकायतें कैसी नियम-रीति मुंह फाड़े चिल्ला रहे हैं- पाये क
Dec 29 2009 11:51 AM
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मैं कौन सा दीप जलाऊं?

मैं कौन सा दीप जलाऊ? अब से ठीक बीस घंटे बाद दीपावली के दीप घर-घर, गली-चौराहे जलने शुरू होंगे, मगर मैं दुविधा में हूं कि मैं कौन सा दीप जलाऊं? जलते हुए दीप अपने हिस्से का अंधियारा दूर करेंगे, पर क्या मेरे जलाए दीप मेरे हिस्से का अंधियारा दूर कर सकेंगे
Dec 29 2009 11:51 AM
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सुशील प्रकरण : वेब पत्रकार संघर्ष समिति का गठन

सुशील प्रकरण : वेब पत्रकार संघर्ष समिति का गठन Written by B4M Reporter Friday, 24 October 2008 01:30 एचटी मीडिया में शीर्ष पदों पर बैठे कुछ मठाधीशों के इशारे पर वेब पत्रकार सुशील कुमार सिंह को फर्जी मुकदमें में फंसाने और पुलिस द्वारा परेशान किए जाने
Dec 29 2009 11:51 AM
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भीग रहा है वह

मंद मंद बह रही इस हवा का कोई अतीत तुम्हें याद है जिसके स्पर्श से छत पर अकेले बैठे एक आदमी ने गुनगुनाते हुए मीलों लंबा पत्र लिखा था दुनिया की सबसे पवित्र नदी में स्नान करने के बाद जिसने एक रंग मलना शुरू किया और रंग धुलने के लिए एक बारिश का इंतजार करता
Dec 29 2009 11:51 AM
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ईश्वर को समझने में

देवताओं ने पहले ईश्वर को ढूंढा या ईश्वर ने देवताओं को आदमी की समझ में यह कभी नहीं आया या दोनों ने मिलकर आदमी को ढूंढा आदमी यह भी पता नहीं लगा पाया और ईश्वर को ढूंढने में लगा रहा। देवताओं को आदमी की जरूरत ज्यादा है या ईश्वर को या फिर दोनों को आदमी के
Dec 29 2009 11:51 AM
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तुम्हारी उड़ान का पंख

मैं मिलूंगा भीड़ में फीके, रंग उड़े और रंग-बिरंगे चेहरों के बीच पहचान वाली पगडंडियों पर मैं जहां भी हूं, दूर तुमसे, दूर सबसे दूर अपने को छिपा रखने के कई रोगों से मैं जा रहा हूं पानी की शक्ल में बुलबुला होता हुआ हवा के आकार में बनता-बिगड़ता पर मिलूंगा
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बस चले तो पानी के दीये जला लें

यदि दीये पानी से जल सकते तो दीपावली पर इस बार लोग जरूर घी-तेल के दीये जलाने से परहेज कर सकते थे और अगर मिठाइयां शक्कर की जगह गुड़ से बनतीं तो वह निश्चित ही आज के अपने भावों से ज्यादा मंहगी मिलतीं। शेयर बाजार के डूबने से अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है त
Dec 29 2009 11:51 AM
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मैं हूं तुम हो और ये चांदनी....

सुहाग रात के तोहफे में आप अपनी पत्नी को क्या दे सकते हैं। कुछ भी। हर वो चीज जो पैसे से खरीदी जा सकती है, लेकिन मैंने एक ऐसा तोहफा अपनी पत्नी को दिया, जो पैसे से नहीं खरीदा जा सकता था। अभी रात के एक बजकर 47 मिनट हुए हैं। नेट पर काम करते-करते आंख दुखने
Dec 29 2009 11:51 AM
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आसमान में चमकेंगी टिप्पणियां

यह कविता मैंने रवीश कुमार जी के ब्लाग कस्बा पर पढ़ी, तो मुझे लगा कि यह मेरे जैसों के लिए लिखी गयी है, जो दिन भर पैदल चलने के बाद भी मोटू हो रहे हैं। वैसे इसके निहितार्थ मैंने दूसरे भी निकाले और झटपट इस पर कमेंट लिखने बैठ गया। लेकिन यह क्या हुआ, पूरे
Dec 29 2009 11:51 AM
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महगाई बढ़ाने वालों को पहचानो

क्या केंद्र सरकार जानबूझकर महंगाई बढ़ाने का काम कर रही है। आगरा में बीते दो दिनों से जो कुछ हो रहा है, वह स्वाभाविक ही है। केंद्रीय मंत्रियों के आने वाले बयानों के बाद जिंस से लेकर सोना-चांदी तक की कीमतें जिस तरह बढ़ जाती हैं, उसे अब आम आदमी भी समझने
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या मेरा डर लौटेगा

सारी दोस्तो, मैं बहुत दिनों से गायब था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। देश में जो कुछ हो रहा है, उससे बहुत दिनों तक अलग नहीं रहा जा सकता। पूरा देश एक भयंकर समस्या से कराह रहा है। और सरकार की पैदा की गयी समस्या है यह। ताज्जुब यह है कि विरोधी दल चादर तान कर स
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मेरे दोस्त को जनम दिन मुबारक

अभी जो तीन घंटे पहले आज का सबेरा हुआ है, वह कोई सामान्य सूर्योदय नहीं है। उसमें बड़ी चेतना है। बड़ी आशाएं हैं और ढेर सारा देने की लालसाएं भी हैं। क्योकि इस सूरज में आपके पुरखों का उजाला शामिल है। यह उजाला आपके जीवन में विस्तार पाना चाहता है। यह सूरज
Sep 20 2009 12:59 PM
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मेरे दोस्त को जनम दिन मुबारक

मुझे नहीं पता आप क्या थे, आज आप क्या हो, कितना अंतर है आज के औऱ कल के आप में, पता नहीं, वैसे भी मैं कौन होता हूं यह तय करने वाला, लेकिन इतना तय है कि आप हो, जहां भी हो, जैसे भी हो, टूटे-फूटे या कि पूरे या अधूरे, यदि न भी हो तो मैं कौन होता हूं, यह तय
Sep 20 2009 12:58 PM
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हवन से जाएगा स्वाइन फ्लू

सम प्रीकोशनरी मेजर्स अगेंस्ट स्वाइन फ्लू-यूज ए फेस मास्क व्हैनएवर आउट, यूज ए लॉट आफ एल्कोहल सेनीटाइजर्स डिटॉल हैव बौइल्ड वाटर, वाश योर हैंड्स, मैनी टाइम्स अवाइड ईटिंग आउट साइड फूड, हैव ए लॉट आफ टाइम लाइम, विटामिन सी, कीप योर वॉडी वार्म एंड अवाइड पब्लिक
Aug 14 2009 10:50 AM
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जूते से पहचान हो मेरी

मुझे लगता है, पी.चिदंबरम की प्रैस वार्ता में जो कुछ हुआ, उसमें न तो गृह मंत्री को उतनी सहानुभूति मिल सकी है और न ही बेचारा जरनैल सिंह उतना हीरो बन सका, जितना कि उसको बन जाना चाहिए था। अजी तो फिर चूक कहां हो गयी। मेरे ख्याल से सारा श्रेय वह नामुराद जू
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चल दिए हैं पूस के तानाशाह

अभी अभी जड़ था कबूतर वर्फ की पहाड़ सी परत में अभी अभी हुआ है चेतन सूर्य के पहले प्रकाश में रोंया रोंया शुष्क था मौसम मौत की पगडंडी पर अभी अभी पिघला है जीवन की ताल तलैया में घर घर सोया पड़ा था आदमी कुछ सुध कुछ बेसुध अभी अभी जागा है हौसला ताल ठोंक कर ग
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डरी हुई है धूप

कुछ अवसाद सा घुल रहा है मौसम में धूप के साथ-साथ धूप डरी हुई है कुछ दिनों से पहले धूप होती थी खिलंदड़ी चाहे जहां आकर बैठ जाती थी पक्की छत पर छत की मुंडेर पर कच्चे आंगन में, बरामदे में पूरा घर और घर के बाहर अपने आप उग आयी अयाचित घास पर पहले धूप मांगती
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विचलित हुआ नया खून

नव वर्ष की आत्मीय शुभकामनाओं के साथ-- अच्छा हुआ आ तो गया पूस धुन भी गयी जड़ कपास अच्छा हुआ फुटपाथियों को भी याद आयी रुई गर्म हो गयी कल्लू की दुकान अच्छा हुआ जम गयीं लाल रक्त कणिकाएं किसी के हिंसक आह्वान पर अच्छा हुआ सब एकमत तो हुए एक रजाई की वजह से अ