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जज़्बात-दिल से

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07 Feb 2010
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मुक्तक

दिल दिया जिसको मैंने, मेरा तो मनमीत वही है .गीत लिखे कितने ही मैंने, लेकिन प्यार का गीत वही है.सुने राग मल्हार, भैरवी रास न आया कोई आज,मैं तो प्यार की सरगम छेड़ूँ, मेरा तो संगीत वही है.
 
अखिलेश सोनी
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पाचनक्रिया

भ्रष्टाचारीकरोड़ों रूपयेखा रहे हैं.आश्चर्य है !बिना हाजमोला केपचा रहे हैं.
 
अखिलेश सोनी
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क्यों सताते हो...?

तुम्हारे सामने आते हीदिल कि बातजुबां तक आकररुक जाती है,तुम्हे देखने के लिएझुकी नज़रउठती है तोसारे राज़ कह जाती हैसब जानकर भी तुम,फिर अनजान सेबन जाते होकह दो न...आखिर,क्यों सताते हो...?
 
अखिलेश सोनी
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इक दिन तुमको आना ही है

इक दिन तुमको आना ही है आज नहीं तो कल फिर क्यों तडपाती हो तुम मुझको पल-पल जिंदगी से हूँ परेशाँ बहुत सताती तेरी सौत तुझे पुकारें मेरी बाहें अब तो आ जा प्यारी मौत
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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ग़ज़ल

हालत आज क्या हो गई इंसान की पैसे को दे दी जगह भगवान की चैन से बैठा नहीं जाता है मुझसे बात जब होती हैं हिन्दोस्तान की अपनी जेबें भरने से फुर्सत नहीं बात करते हैं यहाँ कल्याण की किस कदर माहौल बदला है यहाँ हो रही जयकार बेईमान की आपने सब-कुछ ख़रीदा हो मग
 
अखिलेश सोनी
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Dec 29 2009 11:56 AM
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मुक्तक

मुश्किल जब कोई आएँगी तेरे सामने हाथ कोई भी न आयेंगें तुझको थामने याद आएँगी तुझे वो सोहबतें मेरी रोओगी तुम मेरी तस्वीर रखकर सामने
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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शे'र ही पूरी करेंगे मेरी हर इक बात अब तो

इन रदीफों काफिया में बंध गए जज़्बात अब तो शे'र ही पूरी करेंगे मेरी हर एक बात अब तो हमने आज़ादी बड़ी मुश्किल से पाई है यहाँ बढ़ रहे हैं फिर गुलामी की तरफ़ हालात अब तो देखकर हालत वतन की दिल तड़प उठता है अब पर यकीं है जल्द ही बदलेंगे ये हालात अब तो खेत सूखे
 
अखिलेश सोनी
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ग़ज़ल

आप से ज़्यादा हसीं हैं ये अदाएं आपकी रोक देती हैं क़दम मेरे सदायें आपकी लम्हा लम्हा बढती जाती है मोहब्बत आपसे अब तो ये दिल हमारा मिलकियत है आपकी न किया इकरार अब तक आपने इस राज़ का दस्ताने दिल बताती हैं निगाहें आपकी यूँ तो सताना आपकी फितरत में शामिल ह
 
अखिलेश सोनी
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Dec 29 2009 11:56 AM
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चुनाव

नेताजी आजकल नींद में बडबडाने लगे हैं , चुनाव नज़दीक आने लगे हैं.
 
अखिलेश सोनी
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गुण

नेताजी का कुत्ता नेतागिरी के गुण लेने लगा है, अब भौंकने के बजाय "स्माइल" देने लगा है.
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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ग़ज़ल

हर अश्क कहता है कहानी देखिये बहते हुए अश्कों के मानी देखिये देखकर सूखी नदी , तालाब , कुएं आंखों में आता है पानी देखिये भूख के कारण चुराई एक रोटी उसके पिटने की कहानी देखिये तोडिये न दिल किसी भी महजबीं का ये है मोहब्बत की निशानी देखिये क्या कहूं मैं इश
 
अखिलेश सोनी
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ग़ज़ल

तमन्ना - ए - सरफरोशी का सैलाब चाहिए फिर ज़रूरत है वतन को इन्कलाब चाहिए आज खादी में छुपे हैं मुल्क के दुश्मन यहाँ अब ये सूरत हमें सब बेनकाब चाहिए हो गई गन्दी सियासत मुल्क की ये देखिये अब तो मुकम्मल शख्स का ही इन्तखाब चाहिए चंद गद्दारों के सबब तीरगी में
 
अखिलेश सोनी
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भ्रष्टाचार

फैल रहा है देश में कैसा भ्रष्टाचार देख रहे हैं सब खड़े बेबस और लाचार बेबस और लाचार अगर कोई न चेता खा जायेंगे बेच इसे आगे ये नेता कैसी त्रासदी देश हमारा झेल रहा है भ्रष्टाचार बन ज़हर रगों में फैल रहा है
 
अखिलेश सोनी
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जांच आयोग

बढ़ता भ्रष्टाचार प्रशासन है मौन , जांच आयोग आया पर जांच करे कौन
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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सुनहरा कल

आतंकवादी दिनों - दिन धमाकों का इतिहास गढ़ रहे हैं , फिर भी हम कहते हैं " सुनहरे कल की ओर " बढ़ रहे हैं
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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पाचनक्रिया

भ्रष्टाचारी करोड़ों रूपये खा रहे हैं , आश्चर्य है बिना हाजमोला के पचा रहे हैं
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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घनाक्षरी

विश्व के शिखर पे ये देश पहुंचाना है तो सभी के दिलों में राष्ट्रभक्ति होना चाहिए . राष्ट्रहित हेतु मेरे प्राण भी न्यौछावर यहाँ ऐसी भावना का संचार होना चाहिए . भूलते ही जा रहे हो भारतीय मूल्य तुम शास्त्रों के भी साथ शस्त्र हाथ होना चाहिए . एक पुत्र देश
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

ये समय नहीं हैं आँख बंद कर सोने का ये समय नहीं हैं वक्त को ऐसे खोने का चलो बदल दो देश की हालत आगे आओ ये समय नहीं हैं नेताओं को ढ़ोने का वरना तुम घनघोर निराशा देखोगे ?... कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?... कह विकास का सर्वनाश यह करते आए भारत माँ का मान सद
 
अखिलेश सोनी
Dec 29 2009 11:56 AM
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अरुणोदय 2010

नव वर्ष कि प्रथम भोर करती है अंतरमन विभोर हो जीवन में उत्कर्ष स्वागत है नव वर्ष धरा पर स्वागत है नव वर्ष । प्रथम रश्मियाँ अपने संग लाएँ आशा और उमंग भरें जीवन में हर हर्ष स्वागत है नव वर्ष धरा पर स्वागत है नव वर्ष । फैले मानवता का धर्म शिकार छू लें सब
 
अखिलेश सोनी
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दोहा

लट्ठमार होली सुनी , सुनी है जूताफाग । अपनी अपनी ढपली ये तो अपना अपना राग ॥
 
अखिलेश सोनी
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मुक्तक

मुझसे कोई दूर है, ना पास है, बस इक टूटी हुई सी आस है. चल पड़ा हूँ अजनबी रास्ते पर न जाने मुझे किसकी तलाश है.
 
अखिलेश सोनी