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वीणापाणी

http://vaniveenapani.blogspot.com/
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06 Apr 2010
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क्या ये देशद्रोह नहीं ?(सभी भारतियों से एक अपील )

मुंबई का वाशी इलाका ,शाम के सात का समय.कंधे पर गिटार लिए बड़े उदास मन से मैं घर को लौट रही थी ,ऑटो में बैठ कर घर कब पहुंची कुछ पता नहीं ,पुरे समय मेरा दिमाग सोचता रहा ,कभी सारी बातो के लिए मन में दुःख हो रहा था,कभी अपने आप पर गुस्सा आ रहा था
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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सुर न सधे ........................

सुर ना सधे क्या गाऊ मैं?सुर के बिना जीवन सुना ............सुर ना सधे ?कितना सुंदर गीत हैं न!और कितनी सुन्दरता से एक गायक की मनोवय्था का वर्णन हैं ।सुर की महिमा अपार हैं ,सम्पूर्ण जीव सृष्टि मैं सुर विद्यमान हैं ,उसी एक सुर को साधने में संगीत्घ्यो की
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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दौर - ऐ क्रश कोर्स

एक समय की बात हैं ,एक राजा था ,उसके दो राजकुमार थे ,एक का नाम राम दुसरे  का श्याम ,राम बिचारा सीधा सादा,जो काम करता बड़ी मेहनत और लगन से,राजा ने उसे धनुर्विद्या सिखाई ,बड़े धैर्य से सीखी ,राजा ने चित्रकला सिखाई ,तो चित्रों में ही खुदको डुबो
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
टैग: crash course
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जातियाँ .........शास्त्रीय संगीत में भी ??

जातियाँ ? और वह भी शास्त्रीय संगीत में ? उस पर इन जातियों को इतना मान , इतना सम्मान . इनका इतना महत्त्व ? जहाँ देश में जाती - पाती की भावना का त्याग करने की बात समझी जाने लगी हैं , वहां शास्त्रीय संगीत में आज भी जातियों को सम्मान दिया जा रहा हैं ! क्
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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क से कक्षा में बैठ कर स से संगीत नही सिखा जा सकता ..

सा रे गा मा पा ध नि सा ...............कुछ बेसुरे,कनसुरे ,छोटे ,बड़े स्वर मुझे शाम से सुनाई दे रहे थी,फ़िर सुनाई दिया भजन सदा शिव भज मना निस दिन ...........चार साल बाद आज भी वही स्वर सुनाई देते हैं ,उतने ही बेसुरे ,उतने ही कनसुरे फर्क सिर्फ़ इतना ही है
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Dec 29 2009 11:51 AM
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तानसेन और कानसेन

तानसेन के साथ कानसेनो का रिश्ता काफी पुराना हैं ,अगर कानसेन नही होते तो तानसेन भी नही होते ,कानसेन चाहे उस युग में रहे हो,जब स्वयं संगीत सम्राट तानसेन दीपक गाकर सम्राट अकबर के दरबार में अग्नि प्रज्वलित करते थे ,या इस युग में जब बड़ी बड़ी रोशनियों की चम
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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जी भर कर मारे ताने :ताने मारना अच्छा हैं !

जी आप लाख कहे की ताने नही मारने चाहिए ,मैं तो कहूँगी की ताने मारने ही चाहिए। ताने मारे बिना आनंद ही नही आता । कोई ताने मारे तभी तो लोग कहते हैं क्या बात हैं ,कम से कम मैं तो यही कहती हूँ ,अब आप कहेंगे की कोई पति अपनी पत्नी को किसी बात पर ताना मारे तो
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Dec 29 2009 11:51 AM
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सुस्वरा गान विदुषी आदरणीया किशोरी जी और उनकी गायकी :

गणपत विघन हरण गजानन ...सुनते सुनते मन हंसध्वनी के सुश्राव्य मधुर गायन में खो गया ,उनकी आवाज़ मानो कोयल की कुक सी मधुर ,निखल ,निरागस ,मानो माँ शारदा स्वयं कंठ में विराजमान होकर हंसध्वनी के स्वरों के रूप में श्रोता को दिव्य दर्शन दे रही हैं . मैं बात क
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Dec 29 2009 11:51 AM
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री न न न नोम ...त न न न न नोम...:श्रृंखला :शास्त्रीय संगीत में आ आ उ उ

शास्त्रीय संगीत में आ आ उ उ श्रंखला में आ जे हम जानेंगे ध्रुपद और उसकी आलाप चारी के बारे में . ध्रुपद के बारे में पहले भी लिख चुकी हूँ , किंतु फ़िर भी स्मरण के लिए पुनः ध्रुपद समृद्ध भारत की समृद्ध गायन शैली हैं , प्राय : देखा गया हैं की ख्याल गायकी स
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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रिश्ते यु भी बनते हैं

कभी सोचा भी नहीं था की दूर कहीं झारखंड में मेरा कोई अपना होगा ,वो  जिसे मैंने अब तक देखा ही नहीं ,जिसका नाम भी आज से दो साल पहले तक मैंने नहीं सुना था .एक दिन अचानक  जैसे ईश्वर ने ही खुश होकर मेरे लिए किसी को भेजा हो, ऐसा ही प्यारा सा रिश्त
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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हुआ पूरा एक साल (भेंटवार्ता अनूप शुक्ला जी से )

देखते ही देखते एक साल पूरा हो गया ,कुछ चुनिंदा पोस्ट्स, लेकिन ब्लॉग जगत में मिलने वाले  ढेर सारे अपनेपन  ,आर्शीवाद और प्रोत्साहन ने मेरा आत्मविश्वास द्विगुणित कर दिया,पहले लगता था is पॉप रॉक के ज़माने में यह संगीत सफ़र अकेले ही पूरा करना होगा
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Sep 23 2009 04:59 PM
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दुनिया जिसे कहतें हैं .................

दुनिया जिसे कते हैं जादू काa खिलौना हैं ,मिल जाए तो मिटटी हैं खो जाए तो सोना हैं ..................सच हैं न! इस जादू के खिलौने को समझ पाने के लिए पुरा पुरा जीवन लगा दिया लोगो ने । किसी ने शास्त्र लिखे,किसीने ग्रन्थ रचे . १०-२० पन्नो के आलेख में भी इंसान
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Sep 11 2009 12:18 PM
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वक़्त के संग चलते चलते .........

समय के साथ चलने के लिए कई बार इंसान को बदलना पड़ता ,पुराने विचारो के साथ नए विचारो का सामंजस्य कुछ इस तरह से बिठाना पड़ता हैं की पुराने संस्कारो का भी आदर हो और नए विचारो का भी स्वागत । बात सिर्फ़ इंसान के बदलने की ही नही हैं .समय के साथ स्वयं को बनाये
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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नाम ही काफी हैं ..

कहते हैं नाम में क्या रखा हैं ,पर अगर किसीका नाम ही उसकी पहचान के लिए काफी हो तो?नही मैं न तो किसी दैवीय अवतार की बात कर रही हूँ नही किसी महान कलाकार की । मैं जिसकी बात कर रही हूँ उसने बड़े ही कम समय में केलोकप्रियता के वह आयाम छु लिए हैं जिसे पाने के
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Jul 24 2009 05:49 PM
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शत शत नमन ..

किराना घराने की महान गायिका आदरणीय गंगुबाई हंगल जी का आज निधन हो गया । उन्हें शत शत नमन । उनके पुण्य स्मरण स्वरुप प्रस्तुत हैं उनके गायन की रीकोर्ड रिंग्स .... राग कलावती Get this widget | Track details | eSnips Social DNA रागा मियां मल्हार Get this
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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कभी सुना हैं इंटरनेटीय संगीत ?

सभी संगीतकार मानते हैं संगीत ईश्वर की तरह यत्र तत्र सर्वत्र हैं,झरने की झर झर में ,चिडियों की ची ची में,हवा की गति में ,बारिश की रिमझिम में,सृष्टि के कण कण में संगीत का वास हैं,संगीत उत्त्पत्ति काल से लेकर ,मंदिरों से निकल कर,दरबारों से निकल कर ,सर्व
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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जब मुझे विचित्र वीणा वादन हेतु मिला आदरणीय स्वर्गीय पंडित किशन महाराज जी से आशीर्वचन

शाम के यही कोई आठ बजे का समय था , बनारस में गंगा मैया झूम झूम कर बह रही थी और कई युवा संगीत कलाकारों को शब्द ,स्वर और लय की सरिता में खो जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी ,नगर के एक सभागार में 'आकाशवाणी संगीत प्रतियोगिता' के विजेताओ का संगीत प्रदर्शन
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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जीवन के रंग हज़ार ..

सुबह ६:२० का समय,आकाश का गहरा नीला रंग कुछ हल्का हो रहा हैं,रास्ते पर अब भी१०-१५ लोग ही नज़र आ रहे हैं,पंछियों की क्या कहिये ? उनके नाम पर यहाँ सिर्फ़ कबूतर ही नज़र आते हैं . सैकडो की संख्या में एक ईमारत से उड़कर दूसरी ईमारत तक पहुचते हुए ये किसी महासे
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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जब मिला तबले को वरदान

रात का समय ....जब पुरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी ...तब वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में तबले की थाप गूंज रही थी ,तबले के बोल मानो ईश्वरीय नाद की तरह सम्पूर्ण वातावरण में बहकर उसे दिव्य और भी दिव्य बना रहे थे,अचानक न जाने क्या हुआ और तबले की ध्वनी
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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मिलिए सुर और उसके करीबियों से

सुरों की दुनिया एक अनोखी दुनिया। सुरों के जादू से कहाँ कोई बच पाया हैं,राजा हो या रंक,बालक हो या वृद्ध ,देव हो या दानव ,पशु हो या वनस्पति सब पर सुरों का जादू चला हैं ।सुर से संगीत हैं और संगीत से जीवन संग सुरीली संगती। सुर संगीत की उत्पत्ति का इतिहास
 
राधिकार उमडे़कर बुधकर
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बंसुरी के स्वर में डूबा नीला आसमां

मुरली से उनका प्रेम अब जग जाहिर होने लगा,भारत ही नही विदेशो में भी उनकी मुरली के सुर लोगो को आनंदित करने लगे । पंडित हरीप्रसाद चौरसिया जी की बांसुरी वादन की शिक्षा और कटक के मुंबई आकाशवाणी केन्द्र पर उनकी नियुक्ति के बारे में हमने आलेख के पिछले अंक म
 
राधिका बुधकर
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बाजे मुरलिया बाजे ..................................

संगीत की होरी बरसाती मुरली ,सुर,श्रुतिमय सुंदर रंग बिखेरती मुरली . मुरली ,बंसरी ,बाँसुरी ...... वंसी , वेणु , वंशिका कई सुंदर नामो से सुसज्जित हैं बाँसुरी का इतिहास , प्राचीनकाल में लोक संगीत का प्रमुख वाद्य था बाँसुरी । अधर धरे मोहन मुरली पर , होठ प
 
राधिका बुधकर
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ताकि गुम न हो आपकी आवाज़ ..

मेरी आवाज़ ही पहचान हैं .....सु ना तो होगा ही यह गीत ।आवाज़ ...हर व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति ,उसके व्यक्तित्व का आइना। दो लोगो के चेहरे कभी कभार एक जैसे हो भी लेकिन आवाज़ वह कभी एकदम एक जैसी नही होती । हर किसी की आवाज़ एकदम यूनिक ,अपने आप में मौलिक
 
राधिका बुधकर
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वह भी था देस अपना ही

एक ८-१० साल की लड़की ब्लेक एंड व्हाइट टीवी देख रही हैं,अभी कुछ ही दिनों पहले उसके घर टीवी आया हैं ,दूरदर्शन के राष्ट्रीय चेनल पर गाना आ रहा हैं बजे, बजे सरगम बजे हर तरफ़ से सरगम बजे .........वह साथ गुनगुना रही हैं । अचानक आवाज आती हैं राधिका ... मैं
 
राधिका बुधकर
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महानाटक ..........वीणा

नाटक शब्द से हम सभी परिचित हैं ,मराठी नाटक,हिन्दी नाटक ,गुजराती नाटक ,बंगाली नाटक,तमिल नाटक और नन्हे मुन्ने बच्चो का शरारत और मासूमियत से भरा नाटक । लेकिन क्या आपने महानाटक भी सुना हैं ,शयद आप सोचेंगे बहुत बडा नाटक यानि महानाटक ...जी नही मैं यहाँ जिस
 
राधिका बुधकर
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वीणापाणी टू चाइना......................

जी हाँ आज वीणापाणी आपको ले जा रहा हैं चीन,अभी तक चांदनी चौक टू चाइना रिलीज़ नही हुई ,पता नही मूवी कैसी हैं ? संगीत भी मैंने नही सुना । पर क्या आप में से किसी ने भी चीनी संगीत सुना हैं ?क्या आप जानते हैं भारतीय संगीत की तरह ही चीन का भी संगीत हैं ,चीन
 
राधिका बुधकर
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इंस्टेंट फ़ूड और इंस्टेंट म्यूजिक

मेरे यहाँ कुछ बच्चे आए मैंने पूछा बच्चो क्या खाओगे ?बोले इंस्टेंट फ़ूड ! इंस्टेंट फ़ूड?? अरे मतलब मैगी या पास्ता कुछ भी फटाफट ...ठीक हैं, बना दी मैगी ,कुछ देर बाद मुझसे बोले.आप वीणा बजाते हो मम्मी कह रही थी ,मैंने कहा हाँ .. तो कुछ बजाओ ..मैंने कहा ठीक
 
राधिका बुधकर
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सीखिए शास्त्रीय संगीत सिर्फ़ दो महीनो में ......

आज क्रॉस वर्ड गई ,सोचा कुछ अच्छी किताबे खरीद लू ,कुछ किताबे चुनी ही थी की एक किताब पर नज़र गई,लर्न सितार इन १० डेस ,पास ही एक और किताब रखी थी ,लर्न गिटार इन फिफ्टीन डेस,काफी लम्बी श्रृंखला थी ,वैसे तो कई बार किताबो की दुकानों में ,किताबो के ठेलो पर ,र
 
राधिका बुधकर