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06 Apr 2010
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क्या ये देशद्रोह नहीं ?(सभी भारतियों से एक अपील )

मुंबई का वाशी इलाका ,शाम के सात का समय.कंधे पर गिटार लिए बड़े उदास मन से मैं घर को लौट रही थी ,ऑटो में बैठ कर घर कब पहुंची कुछ पता नहीं ,पुरे समय मेरा दिमाग सोचता रहा ,कभी सारी बातो के लिए मन में दुःख हो रहा था,कभी अपने आप पर गुस्सा आ रहा था
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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पात्र बदल गए हैं ,नाटक तो वहीँ हैं .

सुबह का समय,मैं बादल की किसी टुकड़े पर सवार पूरी दुनिया देख रही हूँ ,सुबह सुबह मेरे घर के चारो तरफ कोहरा छाया रहता हैं,इतना कोहरा की आसपास के घर भी ठीक से नज़र नहीं आते.लगता हैं मेरा घर किसी परी की  कहानी की तरह बादलो के बीच बना हुआ हैं.ठीक नानी की
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
टैग: रंग color
Mar 01 2010 08:20 AM
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1411 -"मिल जाये तो मिटटी हैं खो जाये तो सोना हैं"शाश्वत सत्य

 कितनी सुंदर सुबह थी वह . अजी नहीं !  मौसम बड़ा खुबसूरत नहीं था ,न तो ठंडी हवा चल रही थी, न रिमझिम बारिश हो रही थी.न वासंती फुल खिले थे ,न हल्की- हल्की धुप बादलो से झांककर मुस्कुरा रही थी . बड़ा ही खराब मौसम था ,चिलचिलाती धुप
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Feb 22 2010 12:06 PM
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सेल्फ हेल्प बुक्स का बढ़ता बाज़ार.....क्या हैं सच ?

सेल्फ हेल्प बुक्स !किताबो की किसी भी बड़ी दुकान में सबसे अधिक किताबे जिस विषय पर संग्रहीत की गई होंगी वह हैं सेल्फ हेल्प। कई लेखको की कई सेल्फ हेल्प से सम्बंधित कई विषयों पर किताबे ,कभी आत्मविश्वास पर ,कभी जीवन को जीने के तरीके पर ,कभी महिला शक्ति पर
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Dec 29 2009 11:47 AM
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लोग क्या कहेंगे ?

बेटी की शादी २८ की उम्र में भी नही करवाओगे ? लोग क्या कहेंगे ? इस बार भी स्कूल में छठा स्थान चीनू ! इस बार भी फर्स्ट नही ! दिनु की मामी , टीनू के पापा , मीनू की मम्मी क्या कहेंगी ? लोग क्या कहेंगे ? अच्छा खासा इंजीनियरिंग छोड़कर खेतो , फुल पौधों का क
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Dec 29 2009 11:47 AM
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सरस्वती

सर
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Sep 25 2009 01:43 AM
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टॉक इन इंग्लिश.....................................

  एक चार वर्षीय बच्चा ,बड़े से मॉल की लिफ्ट से निचे  उतर रहा था ,इस मॉल की लिफ्ट में चारो तरफ ग्लास लगे होने से मॉल के हर फ्लोर पर होने वाली गतिविधियाँ  लिफ्ट से दिखाई देती हैं .दुसरे  स्तर पर लिफ्ट आते ही ,बच्चा ख़ुशी से चीख पड़ा
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Sep 14 2009 04:57 PM
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५० % की छूट .जिंदगी पर ...................................

वह भागी जा रही हैं ,बस,ऑटो ट्रेन पकड़कर ....भाग रही हैं । उसे बस भागना हैं ,भाग कर पहुँचना हैं ,वहां जहाँ जिंदगी पर पुरे ५०% की छूट हैं । आज सुबह ही उसने अखबार में विज्ञापन पढ़ा शहर के सबसे बड़े मॉल में जिंदगी पर पुरे ५०% की छूट ,जिंदगी जो खुशियों से भरी
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
Sep 07 2009 04:53 PM
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क्यो आते हैं ये हर बार ?

फ़िर सुबह हुई ,फ़िर शाम आएगी ,फ़िर होगी रात,फ़िर सुबह .................न जाने कितने युगों से यह क्रम इसी तरह चल रहा हैं ,सुबह- शाम -रात ...युग बदले,लोग बदले,रहन सहन के तरीके बदले। न जाने कितने ही लोगो ने जन्म लिया और फ़िर इस दुनिया को अलविदा कहके चले गए
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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क्या संसार में कुछ अच्छा नही हो रहा ?

एक समय था जब रात के ९ बजे सारे काम धाम छोड़ कर हम टीवी के सामने बैठ जाया करते थे।अगर उस समय कोई दूसरा काम किया तो पिताजी कान पकड़ कर हमें टीवी देखने बिठाया करते थे। नही नही ....कोई धारावाहिक देखने नही ,समाचार देखने। अगर पापा को पता चला की आज हमने समाचार
 
डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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Proud to be a woman

यह हैं आज की भारतीय नारी । जिसे भारतीयता से भारतीय संस्कृति से भारतीय विचारो से प्रेम हैं , लगाव हैं , उ से भारतीय मूल्यों पर विश्वास हैं , साथ ही वह शिक्षित हैं , आत्मनिर्भर हैं । उसे अपने स्त्री होने पर गर्व हैं । आरोही ने अपने स्कूल की फेंसी ड्रेस
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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जीवन तेरे हज़ार रंग

सुबह ६:२० का समय,आकाश का गहरा नीला रंग कुछ हल्का हो रहा हैं,रास्ते पर अब भी१०-१५ लोग ही नज़र आ रहे हैं,पंछियों की क्या कहिये ? उनके नाम पर यहाँ सिर्फ़ कबूतर ही नज़र आते हैं . सैकडो की संख्या में एक ईमारत से उड़कर दूसरी ईमारत तक पहुचते हुए ये किसी महासे
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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वो जिंदगी से कभी जाती नही ....

ईश्वर के हर रूप ने हमें मोह से बचने का उपदेश दिया ,यह जग का पसारा मोह माया मिथ्या हैं ...लेकिन मानव मन की क्या कहिये ! उसे तो इस मोह माया में उलझे रहना ही परम श्रेष्ठ कर्म लगता हैं । यह मोह माया में फ़सा मानव मन कभी किसी इंसान से मोह कर बैठता हैं कभी
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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वासंती फूलों से झरता तुम्हारा मधुर हास्य

जब किसी से प्रेम होता हैं तो हर कहीं वही दिखाई देने लगता हैं , सृष्टि की हर सुंदर वस्तु में उसका ही रूप दीखता हैं , वह अगर साथ न भी हो फ़िर भी वह हमारे साथ हैं , ऐसा ही लगता हैं न ! प्रेम संसार की सबसे पवित्र भावना हैं और यह यही प्रेम जब प्रेममय , प्र
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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क्योकि जिंदगी इतनी भी छोटी नही

सिर्फ़ दो दिन पहले हमारे घर एक महिला आई ,हमें कल शाम के भोजन का आमंत्रण देने ,कल शाम पता चला वो नही रही ....... कितना छोटा अंतर हैं "वो नही हैं और नही रही "में । लेकिन यही अंतर संपूर्ण जीवन का परिदृश्य बदल देता हैं और शायद यही अंतर हमें जीना सिखाता ह
 
राधिका उमडे़कर बुधकर
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स्त्रिय: समस्ता :सकला जगत्सु । त्व्यैक्या पूरितमम्ब्यैतत ॥

वह किसी की माँ हैं , किसी की पुत्री भी , किसी की अर्धांगिनी हैं , किसी की बहन भी , किसी की सखी हैं तो किसी की गुरु भी और इन नातो - रिश्तो से हटकर कहे तो वह स्त्री हैं , नारी हैं । नारी जिसे हम अपने घर में माँ , बहन , बेटी , पत्नी की भूमिका में देखते
 
राधिका बुधकर
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क्या कला सम्मान की मोहताज हैं ?(स्लमडॉग और ऑस्कर )

कुछ लोग खुशिया मना रहे हैं ,कुछ दुःख.....कुछ ..................कुछ भी नही कह रहे और मैं .......हैरान हूँ । रहमान साहब और गुलज़ार साहब को ऑस्कर मिला इस बात की बहुत खुशी हैं। हम सब जानते हैं की स्लमडॉग से कई- कई -कई -कई गुना बेहतर फिल्मे हमारे देश में ब
 
राधिका बुधकर
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प्यार को प्यार ही रहने दो ....

प्रेम .....यह शब्द मन मस्तिष्क में आते ही जो सबसे पहला नाम याद आता हैं वह उनका ही,उनके प्रेम की जयकारे सभी करते हैं ,युवक युवतियों से लेकर दादी नानी तक उनके प्रेम का यशोगान करती हैं ,प्रेमी प्रेमिका का वह आदर्श हैं । न........ नही, मैं न हीर राँझा के
 
राधिका बुधकर
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खुदा की उम्र यहीं होगी तक़रीबन .......................

वह रास्ते पर चलती जा रही थी ,राह में मिलते हर इंसान से बोलती बतियाती ,हँसती हसाती ,इठलाती बलखाती चली जा रही थी । हमारे आपके लिए वह सड़क होगी ,जहाँ शांति से चलना ,धीरे बोलना ही सभ्यता में आता हैं ,पर उसके लिए वह खुली हवा में साँस लेने का मौका था ,शाम क
 
राधिका बुधकर
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अहं ब्रह्मास्मि .......लॉटरी सिस्टम तय करता हैं आपके बच्चे का भविष्य .

सुबह से ही मेरे घर में उत्सव जैसा वातावरण था,पतिदेव जो कभी ८ बजे से पहले सोकर नही उठते ,उस दिन सुबह ५ बजे ही उठ गए . सुबह सुबह अख़बार पढ़ना चाहे सारे विश्व की आदत हो लेकिन मैं ऐसा भूल कर भी नही करती ,आख़िर अख़बार उठाते ही खून,हिंसा अत्याचार की खबरे प
 
राधिका बुधकर
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क्या शांभवी को मर जाना चाहिए ?

कभी कभी जिंदगी इतनी मायूस, उदास हो जाती हैं की जीने की जरा भी इच्छा नही रह जाती,लगता हैं जैसे संसार को हमारी कोई जरुरत ही नही ,हम जैसे इस दुनिया के लिए बने ही नही ,कोई साथ नही होता ,सहारा किसे कहे? इस दुनिया में कोई किसीका सहारा हो पाया हैं ? अथाह दु
 
राधिका बुधकर
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कैसे समझाए ?(व्यंग)

ये दुनिया भी कितनी अजीब हैं न ,तरह तरह के लोग रहते हैं यहाँ । कुछ सुखी ,कुछ दुखी ,कुछ स्वांत सुखी ,कुछ स्वांत दुखी ,कुछ चिंतनशील, गंभीर ,कुछ जिनको चिंतन,मनन आदि शब्द हमेशा ही कुनैन की गोली से कड़वे लगते हैं ,कुछ होते हैं जो जीवन को संग्राम समझते हैं उ
 
राधिका बुधकर
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की काश! चिडिया भी समझ पाती.......................

ये दुनिया भी कितनी अजीब हैं न ,तरह तरह के लोग रहते हैं यहाँ । कुछ सुखी ,कुछ दुखी ,कुछ स्वांत सुखी ,कुछ स्वांत दुखी ,कुछ चिंतनशील, गंभीर ,कुछ जिनको चिंतन,मनन आदि शब्द हमेशा ही कुनैन की गोली से कड़वे लगते हैं ,कुछ होते हैं जो जीवन को संग्राम समझते हैं उ
 
राधिका बुधकर
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अंतर! ..........................

कल यूनिवर्सिटी जाने के लिए ऑटो चालक ने हमेशा से अलग रास्ता चुना । पुराने शहर के इलाके में आने वाली इस सड़क के दोनों तरफ़ गरीब परिवारों के घर हैं ,घर क्या हैं! छप्पर हैं ,कुछ पुरानी त्रिपाल से बनी हुई झुग्गिया ,उसमे रहने वाले गरीब लोग ,कहीं बर्तन मांजत
 
राधिका बुधकर
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ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो...........................

एक काफी पढ़ा लिखा लड़का,बड़ी कम्पनी का मालिक ,करोड़पति,उसकी एक मुलाकात के लिए सारे रिपोर्टर तरसते रहते हैं,उसके एक फोन से लोगो की जिंदगिया बदल जाती हैं ,वह किसी राजकुमार से कम नही,जब वह कही घुमने जाता हैं तो उसके आगे पीछे दसो गाडिया उसकी सेवा में निकल
 
राधिका बुधकर
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पूरनमासी की चाँदनी

वो ५०० ग्राम बादाम तोल रहा था ,तोल मशीन ने दिखाया ४९० ग्राम ,मैंने कहा भाई ,बादाम कम हैं.....उसने पौलिथिन में कुछ और बादाम डाले.अब मशीन ने दिखाया ५१० ग्राम ...उसने चार बादाम निकाले ,मशीन ने दिखाया ५०३ ग्राम उसने १ छोटा बादाम निकाला मशीन ने दिखाया ५०१
 
राधिका बुधकर
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हर काश पर खत्म होता एक आकाश !

वो हवा के घोडे पर बैठा जीवन के असीम आकश में सरपट भाग रहा हैं, कितनी बार चाहा की उसे रोक लू ,जैसे अल्लाउद्दीन के चिराग में जिन्न बंद रहता हैं ,वैसे ही किसी चिराग में उसे भी बंद कर लू ,वो मेरी मुठ्ठी में हो , मेरे बस में । पर वो किसी के रोकने से रुका ह
 
राधिका बुधकर
Jan 09 2009 02:49 PM
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क्या पति ,पत्नी का एक दुसरे की खुशी के लिए बदलना गलत हैं ?

पिछले दिनों रब ने बना दी जोड़ी फ़िल्म देखी,काफी तकनिकी और डायरेक्शन की गलतियों के बाद भी फ़िल्म चल गई ,लोगो ने इसकी कहानी की प्रशंसा भी की,पर फ़िल्म देखने के बाद मुझे इसकी कहानी ने सोचने पर दुखी होता रहना . । फ़िल्म में शाहरुख़ खान ने दो भूमिकाए निभाई
 
राधिका बुधकर
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उसे देखा हैं पहले भी कहीं ..............

लगता हैं ,जैसे उसे देखा हैं पहले भी कहीं । कहाँ? ये याद नही । शायद मेरे सपनो में , मेरी कल्पनाओ में , मेरी भावनाओ में । शायद...नीले बादलो में, टीमटिमाते तारो में, वासंती बहारो में , शायद... कभी कहीं किसी मोड़ पर , इस या उस जनम के छोर पर, रात को दिन ब
 
राधिका बुधकर
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जब मैं हारी ...............एक चिड़िया से !(और मन में कहा काश मैं एक पंछी होती . )

सुबह के यही कोई छ: बजे होंगे, उदित होते सूरज की सुनहली किरणों से आकाश स्वर्णिम आभा से शोभायमान हो रहा था ,रजनीगंधा के फूलो की महक अभी हवा से पुरी तरह विलुप्त नही हुई थी ,साथ ही पारिजात ,चम्पा ,चमेली ,गुलाब के फूलो की सुगंध मद्धिम हवा में आलिप्त हो वा
 
Radhika Budhkar